उपाय लाल किताब से (Redbook Remedy)

लाल किताब अपने अनूठे टोटकों के लिए विशेष रूप से जानी जाती है। 'लाल किताब' में राशियों के आधार पर विभिन्न टोटके दिये गये हैं। अतः राशि अनुसार लेख में दिये गये उपायों को अपनाकर सुखी जीवन बिताया जा सकता है।

 

मेष

 

किसी से कोई वस्तु मुफ्त में न लें।गज-दंत से निर्मित वस्तु जातक के लिए हानिकारक है।लाल रंग का रुमाल हमेशा प्रयोग करें।घर में सोने की जगह मृगचर्म का प्रयोग करें।दिन ढलने के पश्चात् गेहूं व गुड़ बच्चों में बांटें।बायें हाथ में चांदी का छल्ला धारण करें।साधु-संतों, मां व गुरु की सेवा करें।काले, काने एवं अपाहिज व्यक्तियों से दूर रहें।मीठी वस्तुओं का व्यापार न करें।आंगन में नीम का वृक्ष लगाएं।सदाचार का सदा पालन करें।रात्रि में सिरहाने एक गिलास पानी भरकर रखें।सुबह उस जल को किसी गमले में डाल दें।पुत्र-रत्न के जन्म दिन पर नमकीन वस्तु विशेष रूप से बांटें।वैदिक नियमों का पालन करें।बहन, बेटी व बुआ को उपहार में मिठाई दें।विधवाओं की सहायता करें और आशीर्वाद लें।मीठी रोटी गाय को खिलाएं।

 

वृष

 

परस्त्री का संग न करें।अति काम-वासना का परित्याग करें।मूंग की दाल दान करें।शनिवार को सरसों, अलसी या तिल का तेल दान करें। गौ-दान करें।अर्द्धांगिनी प्रतिदिन कुछ न कुछ दान करे।शुक्रवार का उपवास रखें।दूध, दही, घी व कपूर धर्म स्थानों पर चढ़ाएं।मुक्तक या वज्रमणि धारण करें।वस्त्रों में इत्रादि का प्रयोग करें।सलीकेदार कपड़े धारण करें।नया जूता-चप्पल जनवरी-फरवरी माह में न खरीदें।चांदी का छल्ला/प्लेटिनम धारण करें।चावल-चांदी हमेशा पास रखें।चांदी का टुकड़ा नीम के पेड़ के नीचे दबाएं।झूठी गवाही न दें।प्रतिदिन एक नेक काम करें।किसी से धोखाधड़ी न करें।घर में मनी प्लांट लगाएं।

 

मिथुन

 

तामसिक भोजन का परित्याग करें।मछलियों को कैदमुक्त करें।फिटकरी से दांत साफ करें।पशु-पक्षी न पालें।अक्षत और दुग्ध धर्मस्थान में चढ़ाएं।माता का पूजन करें। 12 वर्ष से छोटी कन्याओं का आशीर्वाद लें।मूंग भिगोकर कबूतरों को दें। दमे की दवा मुफ्त अस्पताल में दें।तोता, भेड़ या बकरी न पालें।सूर्य संबंधी उपचार करें।गुरु से संबंधित उपचार हर कार्य में सफल होंगे।घर में मनी प्लांट न लगाएं।हरे रंगों का इस्तेमाल न करें।बेल्ट का प्रयोग न करें।बायें हाथ में चांदी का छल्ला धारण करें।मिट्टी के बर्तन में दूध भरकर निर्जन स्थान में गाड़ें।हरे रंग की बोतल में गंगा जल भरकर सुनसान जगह में दबाएं।

 

कर्क

 

नदी पार करते समय उसमें तांबे का सिक्का प्रवाहित करें।माता से चांदी-चावल लेकर पास रखें।पलंग में तांबे का टुकड़ा लगाएं।24 वर्ष तक नौकरानी या गाय रखें।24 वर्ष से पहले गृह-निर्माण करें।चांदी के बर्तन में दूध-पानी पीएं।घर की नींव में चांदी की ईंट लगवाएं।चावल, चांदी व दूध, बेटी या संतान को दें।गेहूं, गुड़ और तांबा दान करें।दुर्गा पाठ करें।कन्यादान में सामान दें।सफेद वस्तुओं से निर्मित चीजों का व्यापार न करें।माता की सलाह का पालन करें।धार्मिक कृत्यों को हमेशा कार्यरूप दें।तीर्थ स्थानों की यात्रा करने से किसी को न रोकें।अपना रहस्य किसी को कभी न बताएं।घर में खरगोश न पालें।सार्वजनिक तौर से पानी पिलाएं।सदाचार का पालन करें।27 वर्ष से पूर्व विवाह न करें।पितरों के नाम का खाना चिड़ियों को खिलाएं।सूर्य से संबंधित चीजें धर्म स्थान में दें।धर्म स्थानों में नंगे पांव जाएं।यदि आप डॉक्टर हों तो रोगियों को मुफ्त दवा दें।

 

सिंह

 

घर के अंतिम हिस्से के बायीं ओर का कमरा अंधेरा रखें।घर में हैडपंप का प्रयोग करें।चावल, चांदी व दूध का दान दें।मुफ्त की कोई चीज न लें।अखरोट व नारियल-तेल धर्म स्थान में दें।माता व दादी से कृपा प्राप्त करें।सूरदास को भोजन कराएं। मद्य-मांसादि का सेवन न करें।तांबे का सिक्का खाकी धागे में डालकर धारण करें।सदा सत्य बोलें।किसी का अहित न करें।अपने वायदे को निभायें।वैदिक एवं सदाचार के नियमों का पालन करें।साला, दामाद एवं भांजे की सेवा करें।लाल बंदरों को गुड़-गेहूं का भोजन कराएं।चांदी हमेशा साथ रखें।

 

कन्या

 

बेटी को मां जैसा प्यार व स्नेह दें।पन्ना धारण करें।पुत्री को चांदी की नथ पहनायें।छत पर वर्षा का जल रखें।नवीन वस्त्र धारण करने से पहले उसे नदी के जल से धोयें।हरे रंग का रुमाल पास रखें।घर में हरे रंगों का प्रयोग न करें।घर में तुलसी या मनी प्लांट के पौधे न लगाएं।मद्यपान का निषेध करें।शनि से संबंधित उपचार करें।चौड़े पत्ते वाले पेड़ घर में न लगाएं।ढक्कन सहित घड़ा नदी में प्रवाहित करें।भूरे रंग का कुत्ता न पालें।दुर्गा सप्तमी का पाठ करें।छोटी कन्याओं से आशीर्वाद लें।किये गये वायदे को याद रखें और उनका पालन करें।अपशब्द न बोलें और नही क्रोध करें। बुधवार का उपवास रखें।हरी वस्तुएं नदी के जल में प्रवाहित करें।

 

तुला

 

अपने हिस्से का भोजन पशु-पक्षियों और गाय को खिलाएं।सास-ससुर से चांदी लेकर रखें।गौ-मूत्र का पान करें।पत्नी हमेशा टीका लगाए रखे।परम पिता पर पूर्ण आस्था रखें।चौपाये जानवर का व्यवसाय करें।मक्खन, आलू और दही दान करें।पत्नी से पुनः पाणिग्रहण करें।घर में संगीत, बाद्य व नृत्य का परित्याग करें।वैदिक नियमों का पालन करें।गौ-ग्रास रोज दें।माता-पिता की आज्ञा से ही विवाह करें।पति-पत्नी गुप्त स्थानों (गुप्तांग) को दूध से साफ करें।स्त्री का हमेशा सम्मान करें।परिवार की कोई भी स्त्री नंगे पांव न चले।सफेद गौ को छोड़कर अन्य को ग्रास दें।दहेज में कांसे के बर्तन अवश्य लें।परमात्मा के नाम पर कोई दान स्वीकार न करें।धर्म स्थानों पर जाकर नतमस्तक हों।घर की बुनियाद में चांदी और शहद डालें।मद्यपान निषेध रखें।तवा, चिमटा, चकला और बेलन धर्म स्थान में दें।घर में पश्चिम दिशा की दीवार कच्ची रखें।

 

वृश्चिक

 

तंदूर की मीठी रोटी बनाकर गरीबों को खिलाएं।पीपल व कीकर के वृक्ष न काटें।तंदूर की रोटी न खाएं।किसी से मुफ्त का माल न लें।भाभी की सेवा करें।बड़े भाई की अवहेलना न करें।लाल रुमाल का प्रयोग करें।मृग व हिरण पालें।दूध उबलकर जलने न पाये।अलग-अलग मिट्टी के बर्तनों में शहद और सिंदूर रखकर घर में स्थापित करें।प्रातःकाल शहद का सेवन करें।मंगलवार को उपवास रखें।हनुमान जी को सिंदूर और चोला चढ़ाएं।शहद, सिंदूर और मसूर की दाल नदी में प्रवाहित करें।बड़ों की सेवा करें।मृगचर्म पर रात्रि को शयन करें।शुद्ध चांदी के बर्तन में भोजन करें।घर में लाल रंग का प्रयोग अवश्य करें।गुड़, चीनी या खांड़ चीटिंयों को डालें।लाल गुलाव दरिया में प्रवाहित करें।धर्म स्थान में जाकर बूंदी या लड़डू का प्रसाद चढ़ाकर बांटें।

 

धनु

 

पीतांबरधारी संतों से दूर रहें।आभूषण निःसंदेह धारण करें।धर्म स्थानों में घी, दही, आलू और कपूर दान दें।भिखारी को निराश न लौटने दें।गंगाजल का सेवन व उससे स्नान करें।तीर्थ यात्रा करें। तीर्थ यात्रा के लिए दूसरों की मदद करें।सदा सत्य बोलें और धार्मिकता का पालन करें।कार्य शुरु करने से पहले नाक साफ करें।43 दिन बहते पानी में तांबे का सिक्का प्रवाहित करें।पीला रुमाल हमेशा साथ रखें।पिता के पलंग व कपड़ों का प्रयोग करें।झूठी गवाही न दें।पीपल की सेवा करें।किसी को न ठगें।गुरु, साधु तथा पीपल का पूजन करें।बृहस्पतिवार को व्रत रखें।हरिवंश पुराण का पाठ करें।चांदी के बर्तन में हल्दी लगाकर रखें।पीले फूल वाले पौधे लगाएं।गरुड़ पुराण का पाठ करें।ब्राह्मण, साधु एवं कुलगुरु की सेवा करें।

 

मकर

 

बंदरों की सेवा करें।गीली मिट्टी से तिलक करें।दूध में चीनी मिलाकर बरगद के वृक्ष में डालें।परायी स्त्री पर नजर न डालें।असत्य भाषण न करें।स्लेटी रंग की भैंस पालें।सर्प को दूध पिलाने के लिए सपेरे को पैसे दें या स्वयं दूध पिलाएं।मद्यपान का निषेध रखें।घर के किसी हिस्से को अंधेरा न रखें।पूर्व दिशा वाले मकान में निवास करें।केतु संबंधी उपाय कर सकते हैं।कुएं में दूध डालें।भैंसों, कौओं और मजदूरों को भोजन दें।नदी में शराब प्रवाहित करें।काला, नीला व फिरोजी कपड़ा न धारण करें।हमेशा अपने पास स्वर्ण या केसर रखें।अखरोट धर्म स्थान में चढ़ाएं और थोड़ा-बहुत घर में लाकर रखें।48 वर्ष से पहले घर न बनवाएं।चमड़े या लोहे की बनी नयी वस्तु न खरीदें।मिट्टी के बर्तन में शहद भरकर निर्जन स्थान में दबाएं।बांसुरी में चीनी भरकर सुनसान जगह में गाड़ें।

 

कुंभ

 

अपने पास चांदी का टुकड़ा रखें।सांपों को दूध पिलाने के लिए सपेरे को पैसे दें।मुखय द्वार पर थोड़ा-बहुत अंधेरा रखें।छत पर ईंधन आदि न रखें।बृहस्पति से संबंधित उपाय करें।48 वर्ष से पहले अपना मकान न बनवाएं।मांस का भक्षण न करें।दक्षिण दिशा वाले मकान का परित्याग करें।मकान में चांदी की ईंट रखें।घर के अंतिम हिस्से की दीवार पर खिड़की न लगवाएं।असत्य भाषण न करें।शनिवार को व्रत रखें।भैरव मंदिर में शराब चढ़ायें, लेकिन खुद न पिएं।तेल और शराब का दान करें।सरसों का तेल रोटी में लगाकर गाय को खिलवाएं।जेब में छोटी-छोटी चांदी की गोलियां रखें।दूध से स्नान करें। गेहूं, गुड़ तथा कांसा मंदिर में दान करें।चांदी का चौकोर टुकड़ा गर्दन में बांधें।केसर या हल्दी का तिलक करें।सोना धारण करें।

 

मीन

 

किसी से दान या मदद स्वीकार न करें।अपने भाग्य पर भरोसा करें।सड़क के सामने गड्ढा न रखें।केसर और हल्दी का तिलक करें।बुजुर्गों की सेवा करें व दुर्गा पाठ करें।किसी के सामने स्नान न करें।धर्म स्थान में जाकर पूजन करें।कुल पुरोहित का आशीर्वाद प्राप्त करें।पीपल के वृक्ष का पूजन करें।सिर पर शिखा रखें।संतों की सेवा करने के साथ-साथ धर्म स्थान की सफाई करें।बृहस्पति से संबंधित वस्तुओं का दान करें।स्त्री की सलाह से व्यापार करें।मंदिर में वस्त्र दान करें।घर में तुलसी व देव प्रतिमा न रखें।दीवारों पर चित्र लगा सकते हैं।सोने को पीले वस्त्र में लपेटकर रखें।


उपाय लाल किताब से (Redbook Remedy)

सूर्य को प्रसन्न करने लिए शिक्षित लोगों को आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए। माता-पिता की सेवा तथा सूर्य को अर्घ, जल में रोली तथा लाल पुष्प डालकर देना चाहिए। सोना-तांबा तथा चीनी-गुड़ का दान भी करें सूर्योदय से पूर्व उठें तथा रविवार का व्रत करें। नमक का परहेज करें बुजुर्गों का सम्मान करें तथा उनकी परंपरा को सम्मानपूर्वक निभाएं।

 

चंद्रमा को प्रसन्न करने के लिए भगवान चंद्रमोजिशिव का ''ऊँ नमः शिवाय'' मंत्र का जप करें। पानी वाला नारियल, सफेद चंदन तथा चांदी का चंद्रमा, विल्बपत्र, सफेद मिष्ठान का भगवान शंकर को भोग लगावें। सोमवार का व्रत करें तथा सफेद वस्त्र का दान करें, पहाड़ों की यात्रा करें तथा माता के चरणछूकर आशीर्वाद प्राप्त करें।

 

मंगल की प्रसन्नार्थ श्रीहनुमान भगवान को चमेली का तेल सिंदूर, शुद्ध घी में चोला चढ़ाएं तथा मंगल स्तोत्र का पाठ करें, इमरती, जलेवी बूंदी तथा चूरमे का प्रसाद अर्पण करें। भाइयों के समक्ष छवि ठीक रखें। मंगलवार का व्रत करें। पड़ोसियों, मित्रों तथा साथ में काम करने वालो से अच्छा व्यवहार रखें।

 

बुध ग्रह की प्रसन्नता के लिए भगवती दुर्गा की पूजार्चना करनी चाहिए। किन्नरों की सेवा करनी चाहिए। हरे मूंग भिगोकर पक्षियों को दाना डालें। पालक या हरा चारा गायों को खिलाएं। पक्षियों विशेष कर तोतों को पिजरों से स्वतंत्रता दिलावें। नौ वर्ष से छोटी कन्याओं के पद प्रक्षालन अर्थात पैर धोकर उनको प्रणाम करके आशीर्वाद प्राप्त करें। बुधवार का व्रत रखें, मां भगवती दुर्गा का पूजार्चन करें। मंत्रानुष्ठान ह्वन करके बुध की अनुकंपा प्राप्त करें। बृहस्पति देव गुरु की प्रसन्नता के लिए ब्राह्मणों का सम्मान करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। चने की दाल तथा केशर का मंदिर में दान करें, केशर का तिलक मस्तक पर लगाएं एवं ज्ञानवर्द्धक पुस्तकों का योग्य व्यक्तियों को दान करें। भगवान ब्रह्मा का केले से पूजन करें तथा कुल पुरोहित का सम्मान करके आशीर्वाद प्राप्त करें एवं यथा शक्ति स्वर्ण का दान करें।

 

शुक्र ग्रह की अनुकम्पा प्राप्त करने के लिए कनकधारा महालक्ष्मी का दैनिक पाठ करना चाहिए। वस्त्र स्वच्छ पहनने चाहिए तथा पत्नी का सम्मान करना चाहिए। गोमाता की सेवा तथा गोशाला में गुड़, चरी हराचारा, चने की दाल गायों को खिलाएं। विशेषरूप से श्रीविद्या का पूजन कराएं। एकाक्षी ब्राह्मण को कांशी के कटोरे में खीर खिलाकर दक्षिणा देकर आशीर्वाद प्राप्त करें। विशेष परिस्थिति में रोग हो तो मृत संजीवनी का मंत्र जप कराएं। संयम से रहें। व्यसनों से बचें।

 

शनि ग्रह की प्रसन्नतार्थ पीपल तथा भैरव का पूजन करें इमरती उड़द की दाल, दही बड़े, भैरव जी को चढ़ावें व बांटे। मजदूरों को तला हुआ सामान बांटे। शनिवार का व्रत करें। ताऊ, चाचा से अच्छे संबंध बनाये रखें। श्री हनुमान चालीसा तथा सुंदरकांड का नियमित पाठ करें। शनिवार को तिल के तेल का शनि पर अभिषेक करें, दक्षिणा दें।

 

राहू की प्रसन्नता के लिए माता सरस्वती का पाठ-पूजन करना चाहिए, रसोई में बने हुए भोजन का प्रातः जलपान करें। पूर्णतया शाकाहारी रहना चाहिए। किसी भी प्रकार का बिजली का सामान इकट्ठा न होने दें तथा बिजली का सामान मुफ्त में न लें, नानाजी से संबंध रखें, अश्लील पुस्तक बिल्कुल न पढ़ें।

 

केतु ग्रह की अनुकूलता के लिए भगवान श्रीगणेश जी का पूजार्चन करना चाहिए। बच्चों को केले तथा कुत्तों को तेल लगाकर रोटी खिलानी चाहिए। कुत्तों को चोट भी न मारें। मामाजी की सेवा करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। किसी भी धर्मस्थल पर ध्वजा (झंडा) चढ़ाएं। वर्षफल में मुंथा श्रेष्ठ नहीं हो तो उसी ग्रह का उपाय करना चाहिए जिस ग्रह की राशि में मुंथा स्थित है।

 

उक्त उपायों के करने से आपको अवश्य सफलता शांति तथा उत्साह मिलेगा इसमें कोई संशय नहीं समझना चाहिए।


उपाय लाल किताब से (Redbook Remedy)

ज्योतिष के 15 सच - 

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1. कभी भी उच्च के ग्रहों का दान नहीं करना चाहिए और नीच ग्रहों की कभी पूजा नहीं करनी चाहिए।

2 . कुंडली में गुरु दशम भाव में हो या चौथे भाव में हो तो मंदिर निर्माण के लिए धन नहीं देना चाहिए यह अशुभ होता है और जातक को कभी भी फांसी तक पहुंचा सकता है।

3. कुंडली के सप्तम भाव में गुरु हो तो कभी भी पीले वस्त्र दान नहीं करने चाहिए।

4 . बारहवें भाव में चन्द्र हो तो साधुओं का संग करना बहुत अशुभ होगा। इससे परिवार की वृद्धि रुक सकती है।

5 . सप्तम/अष्टम सूर्य हो तो ताम्बे का दान नहीं देना चाहिए, धन की हानि होने लगेगी।

6. मंत्रोच्चारण के लिए शिक्षा-दीक्षा लेनी चाहिए क्योंकि अशुद्ध उच्चारण सेलाभ की बजाय हानि अधिक होती है।

7. जब भी मंत्र का जाप करें उसे पूर्ण संख्या में करना जरूरी है।

8. मंत्र एक ही आसन पर, एक ही समय में सम संख्या में करना चाहिए।

9 . मंत्र जाप पूर्ण होने के बाद दशांश हवन अवश्य करना चाहिए तभी पूर्ण फल मिलता है।

10. कुछ लोग वार के अनुसार वस्त्र पहनते हैं, यह हर किसी के लिए सही नहीं होता है। कुंडली में जो ग्रह अच्छे हैं उनके वस्त्र पहनना शुभ है लेकिन जो ग्रह शुभ नहीं हैं उनके रंग के वस्त्र पहनना गलत हो सकता है।

11. कई बार किसी से सलाह लिए बिना कुछ लोग मोती पहन लेते हैं, यह गलत है अगरकुंडली में चन्द्रमा नीच का है तो मोती पहनने से व्यक्ति अवसाद में आ सकता है।

12. अक्सर देखा गया है कि किसी की शादी नहीं हो रही है तो ज्योतिषी बिना कुंडली देखे पुखराज पहनने की सलाह दे देते हैं इसका उल्टा प्रभाव होता है और शादी ही नहीं होती।

13. कुंडली में गुरु नीच का, अशुभ प्रभाव में, अशुभ भाव में हो तो पुखराज कभी भी नहीं पहनना चाहिए।

14. कई लोग घर में मनी प्लांट लगा लेते हैं यह सुनकर कि इससे घर में धन वृद्धि होगी लेकिन तथ्य तो यह है कि अगर बुध खराब हो तो घर में मनी प्लांट लगाने से घर की बहन-बेटी दुखी रहती हैं।

15. कैक्टस या कांटे वाले पौधे घर में लगाने से शनि प्रबल हो जाता है अतः जिनकी कुंडली में शनि खराब हो उन्हें ऐसे पौधे नहीं लगाने चाहिए।


उपाय लाल किताब से (Redbook Remedy)
रोग निवारण के उपाय
 
1. एक देसी पान,गुलाब का फूल और ग्यारह बताशे बीमार व्यक्ति के ऊपर से 31 बार उतार कर किसी चौराहे पर रख दें ध्यान रहे कोई टोके नहीं ....व्यक्ति को शीघ्रता से स्वास्थ्य लाभ मिलने लगेगा । 
 
2. यदि कोई व्यक्ति तमाम इलाज के बाद भी बीमार रहता है तो पुष्य नक्षत्र में सहदेवी की जड़ उसके पास रखिये .....रोग दूर लगेगा । 
 
3.पीपल के वृक्ष को प्रातः 12 बजे के पहले, जल में थोड़ा दूध मिला कर सींचें और शाम को तेल का दीपक और अगरबत्ती जलाएं। ऐसा किसी भी वार से शुरू करके 7 दिन तक करें। बीमार व्यक्ति को आराम मिलना प्रारम्भ हो जायेगा। 
 
4. किसी कब्र या दरगाह पर सूर्यास्त के पश्चात् तेल का दीपक जलाएं। अगरबत्ती जलाएं और बताशे रखें, फिर वापस मुड़ कर न देखें। बीमार व्यक्ति शीघ्र अच्छा हो जायेगा। 
 
5. धोबी के घर से तुरंत धुलकर आये वस्त्रों को मन ही मन रोगी के अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करते हुए रोगी के शरीर से स्पर्श करा देने से बहुत जल्दी आराम मिलता है । 
 
6. हर माह के प्रथम सोमवार को सुबह सवेरे अपने ईष्ट देव का नाम लेते हुए थोड़ी सी पीली सरसों अपने सर पर से 7 बार घुमाकर घर से बाहर फ़ेंक दें .....रोग आपके पास भी नहीं आयेंगे । 
 
7. यदि घर में आपकी माता जी को निरंतर कोई रोग सता रहा है तो सोमवार के दिन 121 किसी भी साइज़ के पेड़े लेकर बच्चो और गरीबों में बाँट दें ......निश्चय ही रोग में आराम मिलेगा । 
 
8. अशोक के ताजे तीन पत्ते सुबह सुबह रोजाना बिना कुछ खाए चबाये जाएँ तो व्यक्ति शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रहता है ....इसके सेवन से रोग और चिन्ताओं का भी नाश होता है। 
 
9. सदैव ध्यान दें भैया दूज (यम दीतिया) के दिन बहन के घर उसके हाथ से बना भोजन करने से, गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु के घर/मंदिर से प्रसाद लेकर खाने से, बसंत पंचमी के दिन पत्नी के हाथ से बने पीले चावल खाने से एवं मात्र नवमी के दिन माँ के हाथ से बना भोजन करने से व्यक्ति निरोगी रहता है उसकी आयु में निसंदेह वृद्धि होती है। 
 
10. स्वस्थ जीवन जीने के लिये रात्रि को अपने सिरहाने पानी किसी लोटे या गिलास में रख दें। सुबह उसे पी कर बर्तन को उल्टा रख दें तथा दिन में भी पानी पीने के बाद बर्तन को उल्टा रखने से व्यक्ति सदैव स्वस्थ बना रहता है। 
 
हर प्रकार की सहायता के लिए संपर्क करें।

जीवन में हमें अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कुछ परेशानियां स्वयं ही समाप्त हो जाती हैं जबकि कुछ समस्याओं के निदान के लिए विशेष प्रयास करने पड़ते हैं। तंत्र शास्त्र के माध्यम से जीवन की कई समस्याओं का निदान किया जा सकता है। गोमती चक्र एक ऐसा पत्थर है जिसका उपयोग तंत्र क्रियाओं में किया जाता है। यह बहुत ही साधारण सा दिखने वाला पत्थर है लेकिन इसका उपयोग बड़ा ही प्रभावोत्पादक है। इसके कुछ प्रयोग इस प्रकार हैं-
1- यदि बार-बार गर्भ गिर रहा हो तो दो गोमती चक्र लाल कपड़े में बांध् कर कमर में बांध दें तो गर्भ गिरना बंद हो जाता है।
2- यदि कोई कचहरी जाते समय घर के बाहर गोमती चक्र रखकर उस पर दाहिना पांव रखकर जाए तो उस दिन कोर्ट-कचहरी में सफलता प्राप्त होती है।
3- यदि शत्रु बढ़ गए हों तो जितने अक्षर का शत्रु का नाम है उतने गोमती चक्र लेकर उस पर शत्रु का नाम लिखकर उन्हें जमीन में गाड़ दें तो शत्रु परास्त हो जाएंगे।
4- यदि पति-पत्नी में मतभेद हो तो तीन गोमती चक्र लेकर घर के दक्षिण में हलूं बलजाद कहकर फेंक दें, मतभेद समाप्त हो जाएगा।
5- प्रमोशन नहीं हो रहा हो तो एक गोमती चक्र लेकर शिव मंदिर में शिवलिंग पर चढ़ा दें और सच्चे ह्रदय से प्रार्थना करें। निश्चय ही प्रमोशन के रास्ते खुल जाएंगे।
6- व्यापार वृद्धि के लिए दो गोमती चक्र लेकर उसे बांधकर ऊपर चैखट पर लटका दें और ग्राहक उसके नीचे से निकले तो निश्चय ही व्यापार में वृद्धि होती है।
7- यदि गोमती चक्र को लाल सिंदूर के डिब्बी में घर में रखें तो घर में सुख-शांति बनी रहती है।
8- गोमती चक्र को होली के दिन थोड़ा सिंदूर लगाकर शत्रु का नाम उच्चारण करते हुए जलती हुई होली में फेंक दें। आपका शत्रु भी मित्र बन जाएगा।
9- अगर कोई व्यक्ति होली के दिन 7 गोमती चक्र को सवा मीटर कपड़े में बांधकर अपने पूरे परिवार के ऊपर से ऊतारकर किसी बहते जल में फेंक दे तो यह एक तरह से परिवार की तांत्रिक रक्षा कवच का कार्य करेगा।
10- चार गोमती चक्र को अगर रोगी के बिस्तर के साथ बांध दें तो कुछ ही दिनों में रोगी स्वस्थ होने लगेगा। रोगी के पूर्ण स्वस्थ होने पर इन्हें सुबह के वक्त पीपल के पेड़ के नीचे गाड़ दें।
11- यदि 11 गोमती चक्र को पीले वस्त्र में लपेट कर तिजोरी में रखें तो वर्ष भर तिजोरी भरी रहेगी।
12- तीन गोमती चक्र को जेब में रखकर किसी मुकदमे या प्रतियोगिता के लिए जाएं तो निश्चित ही सफलता मिलेगी। रोग-मुक्ति के लिएः परिवार में यदि कोई असाध्य रोगी है, तो चार गोमती चक्र लाकर उन्हें जल से स्वच्छ करें। डंठल सहित दो पान के पत्ते लें। एक जोड़ा लौंग को घी में डुबोकर पान के पत्तों पर रखें और पान के पत्तों को इस प्रकार लपेट लें कि सारी सामग्री अंदर बंद हो जाए। चाहें तो काले धागे से बांध सकते हैं। अब दाएं हाथ में चार गोमती चक्र तथा बाएं हाथ में पान लेकर होलिका की 11 परिक्रमा करें। प्रत्येक परिक्रमा में रोगी के स्वस्थ होने के बारे में निवेदन करें। होलिका को प्रणाम करें और गोमती चक्र को घर ले आएं। वे चारों गोमती चक्र रोगी के पलंग के चारों पायों में बांध दें। रोगी की जो चिकित्सा चल रही है, उसे चलने दें। रोजाना सुबह उठते ही रोगी के स्वास्थ्य की कामना करें। लाभ मिलेगा। ग्यारह गोमती चक्र लेकर लाल सिंदूर की डिब्बी में भरकर अपने घर में रखने से दाम्पत्य प्रेम बढ़ता है। अगर पति -पत्नी में से किसी का मन भटक गया हो तो ये उपाय करने से वह वापस अपने घर के प्रेम के दायरे में आ जाता है और प्रेम दिन दूना रात चैगुना बढ़ता रहता है।
जीवन में हमें अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कुछ परेशानियां स्वयं ही समाप्त हो जाती हैं जबकि कुछ समस्याओं के निदान के लिए विशेष प्रयास करने पड़ते हैं। तंत्र शास्त्र के माध्यम से जीवन की कई समस्याओं का निदान किया जा सकता है। गोमती चक्र एक ऐसा पत्थर है जिसका उपयोग तंत्र क्रियाओं में किया जाता है। यह बहुत ही साधारण सा दिखने वाला पत्थर है लेकिन इसका उपयोग बड़ा ही प्रभावोत्पादक है। इसके कुछ प्रयोग इस प्रकार हैं-
1- यदि बार-बार गर्भ गिर रहा हो तो दो गोमती चक्र लाल कपड़े में बांध् कर कमर में बांध दें तो गर्भ गिरना बंद हो जाता है।
2- यदि कोई कचहरी जाते समय घर के बाहर गोमती चक्र रखकर उस पर दाहिना पांव रखकर जाए तो उस दिन कोर्ट-कचहरी में सफलता प्राप्त होती है।
3- यदि शत्रु बढ़ गए हों तो जितने अक्षर का शत्रु का नाम है उतने गोमती चक्र लेकर उस पर शत्रु का नाम लिखकर उन्हें जमीन में गाड़ दें तो शत्रु परास्त हो जाएंगे।
4- यदि पति-पत्नी में मतभेद हो तो तीन गोमती चक्र लेकर घर के दक्षिण में हलूं बलजाद कहकर फेंक दें, मतभेद समाप्त हो जाएगा।
5- प्रमोशन नहीं हो रहा हो तो एक गोमती चक्र लेकर शिव मंदिर में शिवलिंग पर चढ़ा दें और सच्चे ह्रदय से प्रार्थना करें। निश्चय ही प्रमोशन के रास्ते खुल जाएंगे।
6- व्यापार वृद्धि के लिए दो गोमती चक्र लेकर उसे बांधकर ऊपर चैखट पर लटका दें और ग्राहक उसके नीचे से निकले तो निश्चय ही व्यापार में वृद्धि होती है।
7- यदि गोमती चक्र को लाल सिंदूर के डिब्बी में घर में रखें तो घर में सुख-शांति बनी रहती है।
8- गोमती चक्र को होली के दिन थोड़ा सिंदूर लगाकर शत्रु का नाम उच्चारण करते हुए जलती हुई होली में फेंक दें। आपका शत्रु भी मित्र बन जाएगा।
9- अगर कोई व्यक्ति होली के दिन 7 गोमती चक्र को सवा मीटर कपड़े में बांधकर अपने पूरे परिवार के ऊपर से ऊतारकर किसी बहते जल में फेंक दे तो यह एक तरह से परिवार की तांत्रिक रक्षा कवच का कार्य करेगा।
10- चार गोमती चक्र को अगर रोगी के बिस्तर के साथ बांध दें तो कुछ ही दिनों में रोगी स्वस्थ होने लगेगा। रोगी के पूर्ण स्वस्थ होने पर इन्हें सुबह के वक्त पीपल के पेड़ के नीचे गाड़ दें।
11- यदि 11 गोमती चक्र को पीले वस्त्र में लपेट कर तिजोरी में रखें तो वर्ष भर तिजोरी भरी रहेगी।
12- तीन गोमती चक्र को जेब में रखकर किसी मुकदमे या प्रतियोगिता के लिए जाएं तो निश्चित ही सफलता मिलेगी। रोग-मुक्ति के लिएः परिवार में यदि कोई असाध्य रोगी है, तो चार गोमती चक्र लाकर उन्हें जल से स्वच्छ करें। डंठल सहित दो पान के पत्ते लें। एक जोड़ा लौंग को घी में डुबोकर पान के पत्तों पर रखें और पान के पत्तों को इस प्रकार लपेट लें कि सारी सामग्री अंदर बंद हो जाए। चाहें तो काले धागे से बांध सकते हैं। अब दाएं हाथ में चार गोमती चक्र तथा बाएं हाथ में पान लेकर होलिका की 11 परिक्रमा करें। प्रत्येक परिक्रमा में रोगी के स्वस्थ होने के बारे में निवेदन करें। होलिका को प्रणाम करें और गोमती चक्र को घर ले आएं। वे चारों गोमती चक्र रोगी के पलंग के चारों पायों में बांध दें। रोगी की जो चिकित्सा चल रही है, उसे चलने दें। रोजाना सुबह उठते ही रोगी के स्वास्थ्य की कामना करें। लाभ मिलेगा। ग्यारह गोमती चक्र लेकर लाल सिंदूर की डिब्बी में भरकर अपने घर में रखने से दाम्पत्य प्रेम बढ़ता है। अगर पति -पत्नी में से किसी का मन भटक गया हो तो ये उपाय करने से वह वापस अपने घर के प्रेम के दायरे में आ जाता है और प्रेम दिन दूना रात चैगुना बढ़ता रहता है।
 


उपाय लाल किताब से (Redbook Remedy)

धन प्राप्ति के अचूक उपाय
कुछ ऐसे दुर्लभ उपाय होते हैं, जिनकी जानकारी जनसामान्य को आम-तौर पर नहीं होती। परन्तु इनका उपयोग करने से निश्चित रूप से लाभान्वित हो सकते हैं और कठिन परिस्थितियों व आर्थिक अभाव की स्थिति में इनका आश्रय ग्रहण किया जा सकता है। इसी कारण इस लेख का नाम लक्ष्मी प्राप्ति के उपायों को चमत्कारी बताना तर्क संगत है, क्योंकि इसमें बताए गये लक्ष्मी प्राप्ति के उपाय विद्वत् समाज में सर्वमान्य है। इस लेख में लक्ष्मी प्राप्ति के उपाय़ जिनमें धन लक्ष्मी प्राप्ति के टोटके, लक्ष्मी प्राप्ति मन्त्र जप, श्री धन लक्ष्मी प्राप्ति यन्त्र / लक्ष्मी आकर्षण यन्त्र पूजन तथा जड़ी-बूटियों का उपयोग व लक्ष्मी प्राप्ति यज्ञ, अनुष्ठान विधि तथा उद्देश्यों का उल्लेख सम्मिलित है। लेख में संकलित लक्ष्मी प्राप्ति के उपाय दुर्लभ व गोपनीय हैं।
धन-समृद्धि प्राप्त करने के कुछ सरल और चमत्कारिक उपाय दिये जा रहे हैं, जिसे अपनाकर व्यक्ति दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदल सकता है।
1. अपने घर के ईशान कोण में श्री यंत्र ताम्रपत्र, रजत पत्र या भोजपत्र पर बनायें। प्राण प्रतिष्ठा करके नित्य पूजा करने से विविध ऐश्वर्य के साथ लक्ष्मी प्राप्त होती है।
2. अर्क (अकोड़ा), छाक (छिला), खैर, अपामार्ग, पीपल की जड़, गूलर की जड़ खेजड़े की जड़, दुर्वा एवं कुशा की जड़ को एक चांदी की डिब्बी में रखकर नित्य पूजा करें। जीवन में कभी असफलता नहीं आयेगी, नवग्रह शांत रहेंगे सुख सम्प की बढ़ोरी होगी। धन लक्ष्मी प्राप्ति के टोटकों में यह टोटका अनुभूत सिद्ध प्रयोग है।
3. सम्पूर्ण दीपावली की रात्रि ‘‘हत्था जोड़ी” को सामने रखकर ‘‘धनम् देहि” मंत्र का जाप करें निश्चित रूप से धन की प्राप्ति होगी। यह धन लक्ष्मी प्राप्ति का टोटका है
4. यदि दीपावली रविवार को हो तो ब को लाल रंग से रंग दें। यदि सोमवार को हो तो ब पर सफेद अबीर लगा दें। मंगल को हो तो लाल, बुधवार को हो तो हरा, बृहस्पतिवार को हो तो पीला रंग, शुक्रवार को हो तो सफेद अबीर, शनिवार को हो तो ब में काला अबीर लगायें। धन की वृद्धि होगी।
5. लक्ष्मी आकर्षण यंत्र या छसा यंत्र दीवाली की रात्रि को सफेद कोरे कागज पर लाल स्याही से या अष्टगंध से लिखकर 100 छोटी-छोटी गोलियां बना लें। उन गोलियों को सवा किलो आटे में घी, शक्कर (चीनी) का बूरा दूध मिला दें। गीले आटे में गोली डालकर छोटी-छोटी आटे की गोलियां बना लें। विभिन्न मंत्र बोलते हुए मछलियों को खिलाएं। धन सम्प की वर्ष भर कमी नहीं रहेगी। ‘‘ऊँ महाशक्ति वेगेन, आकर्षय आकर्षय मणिभद्र स्वाहा”
6. दीवाली पूजन के समय कौड़ियों को केसर या हल्दी से रंगकर पीले कपड़े में बांध लें और फिर इन कौड़ियों को धन रखने के स्थान पर रखें, धन की कमी नहीं रहेगी।
7. पांच गोमती चक्र दीपावली के दिन पूजा के समय थाली में रखें और निम्न मंत्र का उच्चारण 108 बार (एक माला) करें। ‘‘ऊँ वे आरोग्यानिकरी रोग नशेषा नमः’’ इसको धन के स्थान पर रखने से धन की कमी नहीं रहेगी। सब रोगों का नाश होगा। शरीर स्वस्थ रहेगा।
8. गोमती चक्र उपरोक्त मंत्र से या ऊँ लक्ष्मी नमः’’ से अभिमंत्रित करके लाल पोटली में बांध लें और दुकान में किसी स्थान पर रख दें। जब तक पोटली दुकान में रहेगी तो निश्चय ही व्यापार में उन्नति होगी या व्यापार रुक गया तो फिर तेजी से शुरु हो जायेगा।
9. दीपावली के दिन प्रातःकाल उठकर तुलसी के की माला बनाकर श्री महालक्ष्मी के चरणों में अर्पित करें। धन लाभ होगा।
10. दीपावली की प्रातःकाल सबसे पहले साबुत काले उड़द और चमकीला काला वस्त्र किसी को दान करें या शनि मंदिर में चुप-चाप रख दें, ग्रह दोष समाप्त हो जायेगा।
11. दीपावली के दिन काली मिर्च के दाने ‘ऊँ क्लीं’ बीज मंत्र का जप करते हुए परिवार के सदस्यों के सिर पर घुमाकर दक्षिण दिशा में घर से बाहर फेंक दें, शत्रु शांत हो जायेंगे।
12. दीपावली की रात को 11 हल्दी की गांठ लें, इनको पीले कपड़े में बांध लें फिर लक्ष्मी-गणेश की संयुक्त फोटो के सामने घी का दीपक जलायें और 11 माला निम्न मंत्र का उच्चारण करें। ‘‘ऊँ वक्र- तुण्डाय हं।’’ फिर हल्दी की गांठों वाली पोटली अपने हाथ में लेकर ‘श्रीं श्रीं’ का जाप करते हुए कैश बाक्स में रखें और प्रतिदिन धूप दें। लक्ष्मी स्थिर रहेगी।
13. दीपावली के दिन 11 ‘‘कौड़ियां,’’11 गोमती चक्र, 5 सुपारी एवं 5 काली हल्दी की गांठें लें। अब काली हल्दी की गांठ पर पीली पिसी हुई हल्दी की छींटे लगाते समय श्रीं श्रीं का उच्चारण करते रहें। दीपावली की सारी रात उस सामग्री को पड़े रहने दें, अगले दिन इन सारी वस्तुओं को पीले कपड़े मं बांधकर तिजोरी में रख दें, लक्ष्मी वर्ष भर प्रसन्न रहेंगी।
14. घर में कमलगट्टे की माला, लघु नारियल, दक्षिणावर्ती शंख, श्वेतार्क गणपति, श्री यंत्र, कुबेर यंत्र, धन लक्ष्मी यंत्र, महालक्ष्मी यंत्र व कमला यंत्र आदि स्थापित कर जो भी दीपावली की रात को नित्य इनकी पूजा करता है ‘उनके घर में लक्ष्मी पीढ़ियों तक वास करती हैं।’ स्मरण रहे इस लेख में दिये गये विभिन्न प्रकार के धन लक्ष्मी यंत्रों का विधिवत् पूजन विशेष फलदायी होता है।
15. दीपावली की रात्रि को लक्ष्मी जी की फोटो के सामने शुद्ध देशी घी के दीपक जलाकर कमलगट्टे की माला से इस मंत्र का उच्चारण करें ‘ऊँ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं दारिरय विनाशके जगत्मासूत्यै नमः’। इस मंत्र से लक्ष्मी देवी प्रसन्न होती हैं। यही क्रिया यदि रोज करें तो लक्ष्मी का वास स्थिर हो जायेगा।
16. दीपावली के दिन शनि की साढ़ेसाती, ढैया या अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए काले तिल और कपास की ब से सरसों के तेल का दीपक जलाएं और शमी के पौधे के सामने शनि मंत्र का उच्चारण करें। शनि का बुरा प्रभाव कम हो जायेगा, शुभ फल देगा।
17. शंख में, गोबर में, आंवले में और सफेद वस्तुओं में लक्ष्मी का वास होता है। इनका प्रयोग सदा करें। सदा आंवला घर में रखें। लक्ष्मी का वास सदा रहेगा।
18. दीपावली पूजन के बाद पूरे घर में गुग्गुल का धुआं दें। बुरी आत्माओं और आसुरी शक्तियों से रक्षा रहेगी।
19. यदि बिल्ली के जेर मिल जायें तो दीपावली की रात्रि को या किसी शुभ मुहूर्त में उस पर हल्दी लगाएं और बायें हाथ की मुठ्ठी में रखकर आखें बंद करके ‘‘मर्जबान उल किस्ता’’ यह मंत्र 54 बार पढ़ें और दूसरे दिन उसे धन रखने के स्थान पर रखें।
20. दीपावली की शाम को अशोक वृक्ष की जड़ अशोक वृक्ष से मांगकर लायें तथा अपने पास रखें, धन स्थिर रहेगा।
21. दीपावली को प्रातः काल महालक्ष्मी के चित्र के समक्ष घी का दीपक, 2 लौंग डालकर जलाएं। नैवेद्य में खीर या हलवा रखें। तुलसी के पौधे में जल अर्पित करें और ‘‘ऊँ नमो महालक्ष्म्यै नमः’’ मंत्र का जाप करें। लक्ष्मी प्रसन्न रहेगी और घर में वास रहेगा।
 


उपाय लाल किताब से (Redbook Remedy)

जीवन में हमें अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कुछ परेशानियां स्वयं ही समाप्त हो जाती हैं जबकि कुछ समस्याओं के निदान के लिए विशेष प्रयास करने पड़ते हैं। तंत्र शास्त्र के माध्यम से जीवन की कई समस्याओं का निदान किया जा सकता है। गोमती चक्र एक ऐसा पत्थर है जिसका उपयोग तंत्र क्रियाओं में किया जाता है। यह बहुत ही साधारण सा दिखने वाला पत्थर है लेकिन इसका उपयोग बड़ा ही प्रभावोत्पादक है। इसके कुछ प्रयोग इस प्रकार हैं-
1- यदि बार-बार गर्भ गिर रहा हो तो दो गोमती चक्र लाल कपड़े में बांध् कर कमर में बांध दें तो गर्भ गिरना बंद हो जाता है।
2- यदि कोई कचहरी जाते समय घर के बाहर गोमती चक्र रखकर उस पर दाहिना पांव रखकर जाए तो उस दिन कोर्ट-कचहरी में सफलता प्राप्त होती है।
3- यदि शत्रु बढ़ गए हों तो जितने अक्षर का शत्रु का नाम है उतने गोमती चक्र लेकर उस पर शत्रु का नाम लिखकर उन्हें जमीन में गाड़ दें तो शत्रु परास्त हो जाएंगे।
4- यदि पति-पत्नी में मतभेद हो तो तीन गोमती चक्र लेकर घर के दक्षिण में हलूं बलजाद कहकर फेंक दें, मतभेद समाप्त हो जाएगा।
5- प्रमोशन नहीं हो रहा हो तो एक गोमती चक्र लेकर शिव मंदिर में शिवलिंग पर चढ़ा दें और सच्चे ह्रदय से प्रार्थना करें। निश्चय ही प्रमोशन के रास्ते खुल जाएंगे।
6- व्यापार वृद्धि के लिए दो गोमती चक्र लेकर उसे बांधकर ऊपर चैखट पर लटका दें और ग्राहक उसके नीचे से निकले तो निश्चय ही व्यापार में वृद्धि होती है।
7- यदि गोमती चक्र को लाल सिंदूर के डिब्बी में घर में रखें तो घर में सुख-शांति बनी रहती है।
8- गोमती चक्र को होली के दिन थोड़ा सिंदूर लगाकर शत्रु का नाम उच्चारण करते हुए जलती हुई होली में फेंक दें। आपका शत्रु भी मित्र बन जाएगा।
9- अगर कोई व्यक्ति होली के दिन 7 गोमती चक्र को सवा मीटर कपड़े में बांधकर अपने पूरे परिवार के ऊपर से ऊतारकर किसी बहते जल में फेंक दे तो यह एक तरह से परिवार की तांत्रिक रक्षा कवच का कार्य करेगा।
10- चार गोमती चक्र को अगर रोगी के बिस्तर के साथ बांध दें तो कुछ ही दिनों में रोगी स्वस्थ होने लगेगा। रोगी के पूर्ण स्वस्थ होने पर इन्हें सुबह के वक्त पीपल के पेड़ के नीचे गाड़ दें।
11- यदि 11 गोमती चक्र को पीले वस्त्र में लपेट कर तिजोरी में रखें तो वर्ष भर तिजोरी भरी रहेगी।
12- तीन गोमती चक्र को जेब में रखकर किसी मुकदमे या प्रतियोगिता के लिए जाएं तो निश्चित ही सफलता मिलेगी। रोग-मुक्ति के लिएः परिवार में यदि कोई असाध्य रोगी है, तो चार गोमती चक्र लाकर उन्हें जल से स्वच्छ करें। डंठल सहित दो पान के पत्ते लें। एक जोड़ा लौंग को घी में डुबोकर पान के पत्तों पर रखें और पान के पत्तों को इस प्रकार लपेट लें कि सारी सामग्री अंदर बंद हो जाए। चाहें तो काले धागे से बांध सकते हैं। अब दाएं हाथ में चार गोमती चक्र तथा बाएं हाथ में पान लेकर होलिका की 11 परिक्रमा करें। प्रत्येक परिक्रमा में रोगी के स्वस्थ होने के बारे में निवेदन करें। होलिका को प्रणाम करें और गोमती चक्र को घर ले आएं। वे चारों गोमती चक्र रोगी के पलंग के चारों पायों में बांध दें। रोगी की जो चिकित्सा चल रही है, उसे चलने दें। रोजाना सुबह उठते ही रोगी के स्वास्थ्य की कामना करें। लाभ मिलेगा। ग्यारह गोमती चक्र लेकर लाल सिंदूर की डिब्बी में भरकर अपने घर में रखने से दाम्पत्य प्रेम बढ़ता है। अगर पति -पत्नी में से किसी का मन भटक गया हो तो ये उपाय करने से वह वापस अपने घर के प्रेम के दायरे में आ जाता है और प्रेम दिन दूना रात चैगुना बढ़ता रहता है।

 


उपाय लाल किताब से (Redbook Remedy)

Gomati Chakra
धन-दायक तांत्रिक सामग्री – गोमती चक्र
१॰ सात गोमती चक्रों को शुक्ल पक्ष के प्रथम अथवा दीपावली पर लाल वस्त्र में अभिमंत्रित कर पोटली बना कर धन स्थान पर रखें ।
२॰ यदि आपको अचानक आर्थिक हानि होती हो, तो किसी भी मास के प्रथम सोमवार को २१ अभिमन्त्रित गोमती चक्रों को पीले अथवा लाल रेशमी वस्त्र में बांधकर धन रखने के स्थान पर रखकर हल्दी से तिलक करें । फिर मां लक्ष्मी का स्मरण करते हुए उस पोटली को लेकर सारे घर में घूमते हुए घर के बाहर आकर किसी निकट के मन्दिर में रख दें ।
३॰ यदि आपके परिवार में खर्च अधिक होता है, भले ही वह किसी महत्त्वपूर्ण कार्य के लिए ही क्यों न हो, तो शुक्रवार को २१ अभिमन्त्रित गोमती चक्र लेकर पीले या लाल वस्त्र पर स्थान देकर धूप-दीप से पूजा करें । अगले दिन उनमें से चार गोमती चक्र उठाकर घर के चारों कोनों में एक-एक गाड़ दें । १३ चक्रों को लाल वस्त्र में बांधकर धन रखने के स्थान पर रख दें और शेष किसी मन्दिर में अपनी समस्या निवेदन के साथ प्रभु को अर्पित कर दें ।
४॰ यदि आप अधिक आर्थिक समृद्धि के इच्छुक हैं, तो अभिमंत्रित गोमती चक्र और काली हल्दी को पीले कपड़े में बांधकर धन रखने के स्थान पर रखें ।
५॰ यदि आपके गुप्त शत्रु अधिक हों अथवा किसी व्यक्ति की काली नज़र आपके व्यवसाय पर लग गई हो, तो २१ अभिमंत्रित गोमती चक्रों व तीन लघु नारियल को पूजा के बाद पीले वस्त्र में बांधकर मुख्य द्वारे पर लटका दें ।
६॰ यदि आपको नजर जल्दी लगती हो, तो पाँच गोमती चक्र लेकर किसी सुनसान स्थान पर जायें । फिर तीन चक्रों को अपने ऊपर से सात बार उसारकर अपने पीछे फेंक दें तथा पीछे देखे बिना वापस आ जायें । बाकी बचे दो चक्रों को तीव्र प्रवाह के जल में प्रवाहीत कर दें ।
७॰ यदि आप कितनी भी मेहनत क्यों न करें, परन्तु आर्थिक समृद्धि आपसे दूर रहती हो और आप आर्थिक स्थिति से संतुष्ट न होते हों, तो शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार को २१ अभिमंत्रित गोमती चक्र लेकर घर के पूजा स्थल में मां लक्ष्मी व श्री विष्णु की तस्वीर के समक्ष पीले रेशमी वस्त्र पर स्थान दें । फिर रोली से तिलक कर प्रभु से अपने निवास में स्थायी वास करने का निवेदन तथा समृद्धि के लिए प्रार्थना करके हल्दी की माला से “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र की तीन माला जप करें । इस प्रकार सवा महीने जप करने के बाद अन्तिम दिन किसी वृद्ध तथा ९ वर्ष से कम आयु की एक बच्ची को भोजन करवाकर दक्षिणा देकर विदा करें ।
८॰ यदि आपके बच्चे अथवा परिवार के किसी सदस्य को जल्दी-जल्दी नजर लगती हो, तो आप शुक्ल पक्ष की प्रथमा तिथि को ११ अभिमंत्रित गोमती चक्र को घर के पूजा स्थल में मां दुर्गा की तस्वीर के आगे लाल या हरे रेशमी वस्त्र पर स्थान दें । फिर रोली आदि से तिलक करके नियमित रुप से मां दुर्गा को ५ अगरबत्ती अर्पित करें । अब मां दुर्गा का कोई भी मंत्र जप करें । जप के बाद अगरबत्ती के भभूत से सभी गोमती चक्रों पर तिलक करें । नवमी को तीन चक्र पीड़ित पर से उसारकर दक्षिण दिशा में फेंक दें और एक चक्र को हरे वस्त्र में बांधकर ताबीज का रुप देकर मां दुर्गा की तस्वीर के चरणों से स्पर्श करवाकर पीड़ित के गले में डाल दें । बाकि बचे सभी चक्रों को पीड़ित के पुराने धुले हुए वस्त्र में बांधकर अलमारी में रख दें ।
९॰ यदि किसी का स्वास्थ्य अधिक खराब रहता हो अथवा जल्दी-जल्दी अस्वस्थ होता हो, तो चतुर्दशी को ११ अभिमंत्रित गोमती चक्रों को सफेद रेशमी वस्त्र पर रखकर सफेद चन्दन से तिलक करें । फिर भगवान् मृत्युंजय से अपने स्वास्थ्य रक्षा का निवेदन करें और यथा शक्ति महामृत्युंजय मंत्र का जप करें । पाठ के बाद छह चक्र उठाकर किसी निर्जन स्थान पर जाकर तीन चक्रों को अपने ऊपर से उसारकर अपने पीछे फेंक दें और पीछे देखे बिना वापस आ जायें । बाकि बचे तीन चक्रों को किसी शिव मन्दिर में भगवान् शिव का स्मरण करते हुए शिवलिंग पर अर्पित कर दें और प्रणाम करके घर आ जायें । घर आकर चार चक्रों को चांदी के तार में बांधकर अपने पंलग के चारों पायों पर बांध दें तथा शेष बचे एक को ताबीज का रुप देकर गले में धारण करें ।
१०॰ यदि आपका बच्चा अधिक डरता हो, तो शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार को हनुमान् जी के मन्दिर में जाकर एक अभिमंत्रित गोमती चक्र पर श्री हनुमानजी के दाएं कंधे के सिन्दूर से तिलक करके प्रभु के चरणों में रख दें और एक बार श्री हनुमान चालीसा का पाठ करें । फिर चक्र उठाकर लाल कपड़े में बांधकर बच्चे के गले में डाल दें ।
११॰ यदि व्यवसाय में किसी कारण से आपका व्यवसाय लाभदायक स्थिति में नहीं हो, तो शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार को ३ गोमती चक्त, ३ कौड़ी व ३ हल्दी की गांठ को अभिमंत्रित कर किसी पीले कपड़े में बांधकर धन-स्थान पर रखें ।
 


उपाय लाल किताब से (Redbook Remedy)

लघु नारियल का आकार सामान्य नारियल से थोड़ा छोटा होता है। लघु नारियल का प्रयोग अनेक उपायों में किया जाता है। लघु नारियल के कुछ साधारण उपाय इस प्रकार है –
१ – लघु नारियल माँ लक्ष्मी के चरणों में रखकर ॐ महालक्ष्म्यै च विदाहे विष्णुंपत्नी च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात मंत्र का जाप करें। २ माला जाप करने के बाद एक लाल कपड़े में उन लघु नारियलों को लपेट कर तिजोरी में रख दें व दीपावली के दूसरे दिन किसी नदी या तालाब में विसर्जित कर दें। ऐसा करने से धन लाभ के योग बनते है।
२ – धन ,वैभव व सम्रद्धि पाने के लिए ५ लघु नारियल स्थापित कर ,उस पर केसर से तिलक करें और हर नारियल पर तिलक करते समय २७ बार नीचे लिखें मंत्र का मन ही मन जाप करते रहें -मंत्र –
                   ऐं हीं श्रीं क्लीं
३ – अगर आप चाहते है कि आपको घर में कभी धन -धान्य की कमी न रहें और अन्न का भंडार भरा रहे तो ११ लघु नारियल एक पीले कपड़े में बांधकर रसोई घर के पूर्व कोने में बांध दें। इससे आपकी मनोकामना पूरी हो सकती है।
 


उपाय लाल किताब से (Redbook Remedy)

धन की कामना सभी को होती है लेकिन बहुत कम ही लोग होते हैं जिनकी यह कामना पूरी हो पाती है। तंत्र शास्त्र में कई ऐसी वस्तुओं के बारे में बताया गया है जिन्हें घर में रखने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और वह वस्तुएं धन को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। आज हम आपको कुछ ऐसी ही तंत्र वस्तुओं के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें घर में रखने से ही आपकी किस्मत चमक सकती है।
1- कुबेर प्रतिमा- भगवान कुबेर यक्ष व गंधर्वों के स्वामी हैं। यही समस्त संसार के धन की रक्षा करते हैं। इनकी प्रतिमा घर की उत्तर दिशा में रखनी चाहिए। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि जहां इनकी प्रतिमा रखी वहां की साफ-सफाई रोज की जाए। ऋतुमती होने पर महिलाएं कुबेरदेव की प्रतिमा को हाथ न लगाएं।
2- लघु नारियल- ये नारियल आम नारियल से थोड़ा छोटा होता है। तंत्र-मंत्र में इसका खास महत्व है। नारियल को श्रीफल भी कहते हैं यानी देवी लक्ष्मी का फल। इसकी विधि-विधान से पूजा कर लाल कपड़े में बांधकर ऐसे स्थान पर रखना चाहिए जहां किसी की नजर इस पर न पड़े। इस उपाय से मां लक्ष्मी अति प्रसन्न होती हैं।
3- पारद लक्ष्मी प्रतिमा- पारद से निर्मित देव प्रतिमाओं को बहुत ही विशेष माना गया है। घर में पारद से निर्मित लक्ष्मी प्रतिमा रखने से बहुत लाभ होता है। इस प्रतिमा की स्थापना घर के पूजन स्थान पर करनी चाहिए और प्रतिदिन इसकी पूजा करनी चाहिए।
4- कौड़ी- ये समुद्र से निकलती है। दिखने में यह बहुत साधारण होती है लेकिन इसका प्रभाव बहुत अधिक होता है। लक्ष्मीजी समुद्र से उत्पन्न हुई हैं और कौडिय़ां भी समुद्र से निकलती हैं इसलिए इसमें धन को अपनी ओर आकर्षित करने का प्राकृतिक गुण होता है। इसे धन स्थान पर रखना शुभ होता है।
5- मोती शंख- मोती शंख एक बहुत ही दुर्लभ प्रजाति का शंख माना जाता है। तंत्र शास्त्र के अनुसार यह शंख बहुत ही चमत्कारी होता है। यह दिखने में बहुत ही सुंदर होता है। इसे घर में रखने से धन-संपत्ति बढऩे लगती है और परिवार वालों के बीच सामंजस्य बना रहता है।
6- चांदी की लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति- चांदी से निर्मित लक्ष्मी गणेश की मूर्ति को घर के पूजा स्थल पर रखना चाहिए। प्रतिदिन इनकी पूजा करने से घर में कभी धन की कमी नहीं होती और घर में सुख-शांति भी बनी रहती है।
7- श्रीयंत्र- यंत्र शास्त्र में श्रीयंत्र की विशेष महिमा बताई गई है। इसे यंत्रराज की उपाधि दी गई है। इस यंत्र को धन वृद्धि, धन प्राप्ति, कर्ज से सम्बन्धित धन पाने के लिए, लोन इत्यादि प्राप्त होने के लिए तथा लाटरी, सट्टा आदि द्वारा धन पाने के लिए उपयोग में लाया जाता है। इसकी स्थापना घर के पूजन कक्ष में करनी चाहिए।
8- लक्ष्मी की चरण पादुकाएं- मां लक्ष्मी की चांदी से निर्मित चरण पादुकाएं धन स्थान पर इस प्रकार रखनी चाहिए कि इसकी दिशा धन स्थान की ओर जाती हुई रहे। इसका अर्थ है लक्ष्मी सदैव आपके धन स्थान में ही निवास करे।
9- कमल गट्टा- कमल गट्टा कमल से निकलने वाला एक प्रकार का बीज है। चूंकि मां लक्ष्मी कमल पर ही विराजमान होती हैं इसलिए इस बीज को बहुत ही चमत्कारी माना जाता है। इसे घर के पूजन स्थान पर रखना चाहिए। इससे भी मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।
10- दक्षिणावर्ती शंख- तंत्र-मंत्र में दक्षिणावर्ती शंख का विशेष महत्व है। इसे घर के पूजा स्थान या तिजोरी मेंं रखने से माता लक्ष्मी स्वत: ही इसकी ओर आकर्षित होती है और रंक को भी राजा बना देती हंै। ये बहुत ही चमत्कारी उपाय है।
11- एकाक्षी नारियल- यह भी नारियल का एक प्रकार है लेकिन इसका प्रयोग अधिकांश रूप से तंत्र प्रयोगों में किया जाता है। इसके ऊपर आंख के समान एक चिह्न होता है इसलिए इसे एकाक्षी (एक आंख वाला) नारियल कहा जाता है। इसे धन स्थान अथवा पूजन स्थान कहीं पर भी रख सकते हैं।
 


उपाय लाल किताब से (Redbook Remedy)

ज्योतिष की सुप्रसिद्ध पुस्तक लाल किताब में वर्णित उपाय जहा देखने में सरल और छोटे प्रतीत होते है। वह दूसरी और शीघ्र प्रभवि एव अत्यंत शक्तिशाली भी होती है। हमने दीर्घकालीन अनुभव के अनुसार पाया की लाल किताब के उपायो में से एकाधिक उपायो को श्रद्धा पूर्वक काम से काम ६० दिनों ( दो महीनो ) तक संपन्न किया जाए तो आश्चर्यजनक रूप से चमत्कारी एवम लाभकारी परिणामो की प्राप्ति हो सकती है।

लाल किताब के १० उपाय –

१. किसी भी महत्वपूर्ण कार्य को शुरू करने अथवा यात्रा पर निकलने से पूर्व थोड़ा गुड खाकर पानी पिए।
२. घर में गाय पाले और उसकी यथासंभव सेवा सुश्रुषा करे यदि गाय नही पाल सके तो गाय की प्रतिमा घर लाये और उसकी पूजा करे।
३. रात को सोते समय ५ कागजी बादाम को सिरहाने रखे और दूसरे दिन उन्हें ले जाकर देवमन्दिर में दान कर दे।
४. गर्मी के दिनों में रस्ते पर पथिकों के लिए ठंडा जल पिने की व्यवस्था करे।
५. चांदी की २ ठोस गोलियों को अपने पास सदैव रखे।
६. तंदूर में सिकी रोटी में गुड मिलाकर पालतू कुत्तो को खिलाये।
७. चांदी की बिना जोड़ वाली अंगूठी तर्जनी उंगली में पहन कर रहे।
८. घर में तोता , मैना आदि को पाले या बाहर के पक्षियों को भी बुलाकर उन्हें खिलाये पिलाये।
९. पन्ना या हीरा में से कोई एक रत्न अंगूठी में जड़वा कर धारण कर ले।
१०. घर के किसी कोने में चांदी का एक चौकोर टुकड़ा गाड़ दे।

 


उपाय लाल किताब से (Redbook Remedy)

1. पहला उपाय
१. शुक्रवार के दिन भगवान विष्णु का दक्षिणावर्ती शंख में जल भरकर अभिषेक करे। अगर यह उअभिषेक मन से किया जाए तो माँ लक्ष्मी प्रसन्न हो जाती है और आप को धन से मालामाल कर देती है।

२. शुक्रवार के दिन शाम को गाय के घी का दीपक घर के ईशान कोण में लगाये। और दीपक में रुई के जगह पर लाल रंग के धागे का उपयोग करे और दीपक में थोड़ा केसर भी डाले।
३. शुक्रवार के एक पिला कपड़ा ले उसमे पांच लक्ष्मी (पिली) कौड़ी और थोड़ा सा केसर – चंडी के सिक्के डाले और वह सब बाँध ले और धन के स्थान पर रख दे। और बस देखिये कुछ दिनों में आपको इसका प्रभाव दिखेगा।
४. शुक्रवार के दिन ३ कुवारी लड़की ओ को घर बुलाकर उन्हें खीर खिलाये तथा उन्हें वस्त्र और दक्षिणा दे। ऐसा करने से माँ लक्ष्मी प्रसन्न होती है और धन प्राप्ति होती है।
५. शुक्रवार के दिन अगर कोई भक्त गरीबो को दान करता है तो उसे धन के रूप में आशीर्वाद मिलताआ है। और गरीबो में सफ़ेद रंग की वास्तु या खाद्य पदार्थ दान करे तो बहुत शुभ रहता है।
६. शुक्रवार के दिन गाय के दूध से श्रीयंत्र का अभिषेक करे और जो भी अभिषेक का जल बचेगा उसे पुरे घर में छींटक दे और श्री यंत्र को धन के जगह पर रख दे उससे धन लाभ होगा।

 


उपाय लाल किताब से (Redbook Remedy)

वृश्चिक- मंगल की इस राशि के लोग हाथी दांत से बनी किसी भी वस्तु का लॉकेट गले में पहनें या अपने साथ रखें।

धनु- इस राशि का स्वामी गुरु है इसलिए आप हल्दी की गांठ को अपना लकी चार्म बनाएं।

मकर- फिरोजा रत्न लॉकेट में बना कर पहने तो वो आपके लकी चार्म का काम करेगा।

कुंभ- शनि देव की राशि के लोग अष्ट धातु की अंगुठी को अपना लकी चार्म बना कर पहनें।

मीन- इस राशि के लोग लकी चार्म के लिए गोल्ड से बनी कोई भी वस्तु अपने साथ रख सकते हैं।


1 रुपए की ये चीज तिजोरी में ऐसे रख दो, हमेशा पैसा भरा रहेगा...

तिजोरी जहां पैसा, ज्वेलरी और अन्य बेशकीमती वस्तुएं रखी जाती है। अत: यह जगह बहुत ही पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर होनी चाहिए। जिससे कि घर में बरकत बनी रह सके और पैसों की कभी कमी न आए। यदि तिजोरी के आसपास कोई नकारात्मक शक्तियां सक्रिय हैं तो उस घर में कभी भी पैसों कमी कभी पूरी नहीं हो सकेगी। ऐसे में शास्त्रों के अनुसार कुछ उपाय बताए गए हैं।

तिजोरी में हमेशा पैसा ही पैसा भरा रहे, धन की देवी महालक्ष्मी की कृपा सदैव आप पर बनी रहे, इसके लिए एक छोटा सा उपाय अपनाएं। शास्त्रों के अनुसार श्रीगणेश रिद्धि और सिद्ध के दाता है। कोई भी भक्त नित्य श्रीगणेश का ध्यान करता है तो उसे कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं सताती। श्रीगणेश को प्रसन्न करने के लिए कई उपाय हैं। प्रतिदिन गणेशजी की विधिवत पूजा करें और किसी भी शुभ मुहूर्त में विशेष पूजा करें। पूजन में गणेशजी के प्रतीक स्वरूप सुपारी रखी जाती है। बस यही सुपारी पूजा पूर्ण होने के बाद अपनी तिजोरी में रख दें।

पूजा में उपयोग की गई सुपारी में श्रीगणेश का वास होता है। अत: यह तिजोरी में रखने से तिजोरी के आसपास के क्षेत्र में सकारात्मक और पवित्र ऊर्जा सक्रिय रहेगी जो नकारात्मक शक्तियों को दूर रखेगी। पूजा में उपयोग की जाने वाली सुपारी बाजार में मात्र 1 रुपए में ही प्राप्त हो जाती है लेकिन विधिविधान से इसकी पूजा कर दी जाए तो यह चमत्कारी हो जाती है। जिस व्यक्ति के पास सिद्ध सुपारी होती है वह कभी भी पैसों की तंगी नहीं देखता, उसके पास हमेशा पर्याप्त पैसा रहता है।


इस लेख में विभिन्न प्रकार के धन लक्ष्मी यंत्र, धन लक्ष्मी प्राप्ति के टोटके, लक्ष्मी प्राप्ति मन्त्र, लक्ष्मी प्राप्ति साधना मुहूर्त आदि की चर्चा की गई है। लक्ष्मी प्राप्ति के उपायों को कारगर बनाने के लिए विद्वत्गणों ने मुहूर्त के महत्व को एकमत से स्वीकार किया है। दीपावली के शुभ अवसर को लक्ष्मी के प्राकट्य का दिन माना जाता है। इसलिए लक्ष्मी प्राप्ति के समस्त उपाय व टोटके इस दिन सिद्ध होते हैं। इस लेख में लक्ष्मी प्राप्ति के उपायों का वृहत संकलन है जिसमें कुल 51 उपाय दिये गये हैं। लक्ष्मी प्राप्ति के उद्देश्य से किये जाने वाले इनमें से अधिकतर उपाय दीपावली के शुभ अवसर पर ही किये जा सकते हैं।

आज के अर्थप्रधान युग में व्यक्ति को अथक परिश्रम करने के बाद भी धन का अभाव बना रहता है। हर व्यक्ति की चाहत होती है कि उसके जीवन में सुख-समृद्धि एवं ऐश्वर्य सदा बना रहे और लक्ष्मी की उसके पास कोई कमी न हो। इसलिए दीपावली पर यदि लक्ष्मी-गणेश पूजा के साथ इन सरल उपायों को आजमाएं, तो निश्चित ही लक्ष्मी की उसके पास कोई कमी नहीं रहेगी।

नीचे 51 उपाय वर्णित हैं। इनमें से कोई भी दो-तीन उपाय कर लेने से अभीष्ट लाभ की प्राप्ति हो सकती हैः

धनतेरस के दिन हल्दी और चावल पीसकर उसके घोल से घर के मुख्य द्वार पर ‘ऊँ’ बनाने से धन आयेगा।
नरक चतुर्दशी या छोटी दीपावाली को प्रातःकाल हाथी को गन्ना या मीठा खिलाने से अधिक तकलीफों से मुक्ति मिलती है।
दीपावली के दिन किसी भिखारी या गरीब को नौ किलो गेहूं का दान करें और अगले दिन मुख्य द्वार को रंगोली से सजाएं।
दीपावली पूजन के बाद शंख और डमरू बजाने से दरिद्रता जाती है और लक्ष्मी आती है।
लक्ष्मी पूजन करते समय हकीक की भी पूजा कर उसे धारण करने से धन की वृद्धि होती है। ऋद्धि-सिद्धि के स्वामी गणेश और धन की देवी लक्ष्मी हैं। इन दोनों का संयुक्त यंत्र महायंत्र कहलाता है। इस दिन इस यंत्र की स्थापना से घर में धन-सम्पत्ति की कमी नहीं रहती है।
दीपावली पर ‘श्री यंत्र’, कनकधारा ‘यंत्र’ और ‘कुबेर यंत्र’ की विधिवत स्थापना करने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
दीपावली की सुबह को गन्ने की जड़ को लाकर रात्रि को लक्ष्मी पूजन में इसकी भी पूजा करने से धन में लाभ मिलता है।
लक्ष्मी पूजा में 11 कौड़ियां लक्ष्मी पर चढ़ाएं। अगले दिन कौड़ियों को लाल रूमाल या लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखें, धन में वृद्धि होती है।
दीपावली के दिन पति-पत्नी सुबह विष्णु मंदिर में एक साथ जाएं और वहां लक्ष्मी को वस्त्र चढ़ाएं, धन की कमी नहीं रहेगी।
लक्ष्मी पूजन के समय लक्ष्मी को कमल अर्पित करें और कमल गट्टे की माला से जाप करें, लक्ष्मी अधिक प्रसन्न होती है।
दीपावली के दिन अशोक के वृक्ष की जड़ का पूजन करने से धन-सम्पत्ति में वृद्धि होती है।
दीपावली के दिन मां लक्ष्मी को पूए का भोग लगाकर उसे गरीबों में बांटने से चढ़ा हुआ कर्जा उतर जाता है।
दीपावली के दिन अपामार्ग की जड़ अपनी दाईं भुजा में बांधें, आर्थिक समस्याएं समाप्त होंगी।
दीपावली के दिन पानी का घड़ा लाकर रसोई घर में कपड़े से ढँककर रखने से घर में बरकत और खुशहाली रहेगी।
दीपावली के दिन इमली के पेड़ की टहनी काटकर अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान में रखें- धन में वृद्धि होगी।
दीपावली के दिन सायंकाल को बरगद की जटा में गांठ लगा दें, ऐसा करने से अचानक धन मिलता है, धन मिलने के बाद उस गांठ को खोल दें।
दीपावली वाले दिन काली हल्दी को सिंदूर और धूप से पूजा के बाद से चांदी के दो सिक्के के साथ लाल कपड़े में लपेटकर धन के स्थान पर रखें तो आर्थिक समस्याएं नहीं रहेंगी।
दीपावली वाले दिन दोपहर के समय पीपल के पेड़ की छाया में खड़े होकर चीनी, दूध और घी मिलाकर उसे उस वृक्ष की जड़ में डालें, अभूतपूर्व आर्थिक समृद्धि होगी।
यदि आप का पैसा कहीं फंस गया है तो दीपावली के दिन प्रातःकाल जल में लाल मिर्च के 21 बीज डालकर सूर्य को अर्पित करें। आप का फंसा हुआ पैसा निकल आयेगा।
दीपावली के अगले दिन गाय के गोबर का दीपक बनाकर उसमें पुराने गुड़ की एक डेली और मीठा तेल डालें और दीपक जलाकर घर के मुख्य द्वार के बीच में रख दें इससे सुख समृद्धि घर में सदा बनी रहेगी।
दीपावली के दिन श्यामा तुलसी के इर्द-गिर्द उगने वाली घास को पीले कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान में रखें आर्थिक समृद्धि होने लगेगी।
दीपावली के दिन सायंकाल पीपल के पेड़ के नीचे सात दीपक जलाएं और सात बार वृक्ष की परिक्रमा करें। इससे सभी आर्थिक समस्याओं का अंत हो जायेगा।
दीपावली के दिन श्मशान में स्थित शिव मंदिर में जाकर दूध और शहद मिलाकर अभिषेक करें। सट्टे और शेयर बाजार से धन मिलेगा।
यदि आपके जीवन में कोई आर्थिक संकट की स्थिति चल रही हो, तो दीपावली के दिन एक मिट्टी के बर्तन में शहद भर लें तथा उसे ढँककर किसी सुनसान स्थान में गाड़कर आ जायें आपका संकट टल जायेगा।
दीपावली के दिन काली हल्दी के नौ दाने लेकर उन्हें रेशमी धागे में पिरोकर उसकी माला बना लें और धूप दीप दिखाएं फिर गले में धारण कर लें। यदि किसी तंत्र बाधा के कारण आर्थिक स्थिति बिगड़ गई होगी तो ठीक हो जायेगी।
दीपावली से पूर्व मंगलवार के दिन लाल चंदन, लाल गुलाब के पुष्प और रोली आदि को लाल कपड़े में बांधकर दीपावली की रात्रि को धन के स्थान या तिजोरी में रख दें धन में वृद्धि होगी।
दीपावली के दिन प्रातःकाल उठकर तुलसी के पत्तों की माला बनाकर श्री महालक्ष्मी के चरणों में अर्पित करें, ऐसा करने से धन में वृद्धि होगी।
दीपावली के दिन काली मिर्च के दाने ‘क्लीं’ बीज मंत्र के जाप के साथ अपने तथा परिवार के सदस्यों के सिर पर घुमाकर दक्षिण दिशा में घर से बाहर फेंक दें, धन की वृद्धि होगी और शत्रु शांत हो जायेंगे।
दीपावली की रात्रि को हल्दी की 11 गांठ लें। इन्हें पीले कपड़े में बांधें। फिर लक्ष्मी-गणेश का संयुक्त फोटो अपने पूजा के स्थान पर रखें, घी का दीपक जलाएं। चंदन-पुष्प आदि चढ़ाएं इसके पश्चात् निम्न मंत्र का जाप 11 माला करें। मंत्र - ‘‘ऊँ वक्रतुंडाय हुँ’’।। फिर पीले कपड़े में बंधी हुई हल्दी की गांठों को निकालें और श्री-श्री का जाप करें और फिर धन के स्थान में रख दें। धन की कमी नहीं होगी।
दीपावली की शाम एक सुपारी व ताबें का एक सिक्का लेकर किसी पीपल के पेड़ के नीचे रख दें। रविवार को उसी पेड़ के पीपल का पत्ता लाकर कार्य स्थल पर गद्दी के नीचे या गद्दी के पास रख दें व्यापार में वृद्धि होगी।
दीपावली की रात्रि से शुरु कर लगातार 7 दिन महालक्ष्मी यंत्र के सम्मुख कमल गट्टे की माला से ‘ऊँ महालक्ष्म्यै’ नमः मंत्र का जाप 11 माला करें, अंतिम दिन किसी ब्राह्मण को भोजन करायें, आर्थिक उन्नति होगी।
दीपावली के दिन से लगातार 51 दिनों तक एक रुपया किसी भी मंदिर में मां लक्ष्मी के नाम से अर्पित करें तथा धन वृद्धि के लिए मां लक्ष्मी से प्रार्थना करें, धन की वृद्धि जरूर होगी।
दीपावली के अवसर पर यदि कोई हिजड़ा इनाम लेने आये, तो उसे श्रद्धानुसार 21, 35, 51 रूपये दें तथा एक सिक्का उससे लेकर या उससे स्पर्श करवाकर तिजोरी में रखें, धन की कमी वर्ष भर नहीं रहेगी।
दीपावली के दिन पीपल का एक पत्ता जो अख्ंाडित हो, प्रार्थना करके ले आयें, उसे पूजा स्थान में रखें। फिर प्रत्येक शनिवार को नया पत्ता लायें और पुराने पत्तों को पेड़ के नीचे रख आयें घर में लक्ष्मी का स्थाई वास रहेगा।
लक्ष्मी समुद्र की पुत्री हैं, समुद्र से उत्पन्न दक्षिणावर्ती शंख, मोती शंख एवं गोमती चक्र लक्ष्मी के भाई बंधु हैं। दीपावली की रात्रि से इन्हें घर में रखें और पूजन करें लक्ष्मी नहीं जायेंगी।
दीपावली के दिन झाड़ू खरीदकर लायें। पूजा से पहले उससे थोड़ी सी सफाई करें फिर उसे एक तरफ रख दें। अगले दिन से उस झाड़ू का प्रयोग करें। इससे दरिद्रता जायेगी और लक्ष्मी का आगमन होगा।
नरक चतुर्दशी को संध्या समय घर की पश्चिमी दिशा में खुले स्थान पर अथवा घर के पश्चिम में 14 दीपक पूर्वजों के नाम से जलाएं, उनके आशीर्वाद से समृद्धि होगी।
दीपावली के पांच पर्व होते हैं (धनतेरस, चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा, यम द्वितीया)। पांचों दिन दीपक (चार छोटे, एक बड़ा) जरूर जलाएं। दीपक रखने से पहले आसन बिछाएं फिर खील, चावल रखें तथा उस पर दीपक रखें। धन की वृद्धि सदा बनी रहेगी।
भाई दूज के दिन एक मुट्ठी अखंडित बासमती चावल को बहते जल में महालक्ष्मी को याद करते हुए छोड़ें, धन की वृद्धि बनी रहेगी।
दीपावली की रात्रि में काले तिल परिवार के सभी सदस्यों के सिर पर सात बार उतारें और घर की पश्चिम दिशा में फेंक दें, ऐसा करने से धन हानि बंद हो जायेगी।
रोज कार्यस्थल पर जाने से पहले निम्नलिखित मंत्र का एक माला जप करें ‘ऊँ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं क्रीं क्लीं श्रीं महालक्ष्मी मम गृह धनं पूरय पूरय चिन्तायै दूरय दूरय स्वाहा’’। इससे व्यवसाय में अद्भुत लाभ होगा।
एक चैकी पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर पारद लक्ष्मी जी को स्थापित करें, फिर 7 कौड़ियों को लक्ष्मी जी के ऊपर से उतारते हुए उनके चरणों में रखें। कौड़ियों को उतारते समय निम्न मंत्र का जाप करें। मंत्र: ‘‘ऊँ श्रीं ह्रीं महालक्ष्मी मम गृह आगच्छ स्थिर फट्’’।। इस उपाय से लक्ष्मी जी का स्थिर निवास रहेगा।
दीपावली के बाद पहली बार जब चंद्रमा दिखाई दे तो उस दिन से अगली पूर्णिमा तक हर रोज रात को केले के पŸो पर दही-भात (चावल) रखकर चंद्रमा को दिखाएं और फिर मंदिर में पुजारी को दे दें। इससे चंद्रमा अचानक धन देता है।
आंवले के फल में, गोबर में, शंख में, कमल में और सफेद वस्त्रों में लक्ष्मी का वास रहता है। इनका प्रयोग करें- आंवला सदा घर में या गल्ले में रखें।
दीपावली के दिन अपनी दुकान के गल्ले के नीचे काली गुंजा के दाने डालकर निम्न मंत्र का 5 माला जप करें और रोज महालक्ष्मी जी के सामने दीपक जलाएं। व्यवसाय में होने वाली हानि रुक जायेगी। ‘‘ऊँ ऐं ह्रीं विजय वर दाय देवी मम’’।
कमल के बीज के 108 दाने घी में डुबोकर एक-एक करके अग्नि में लक्ष्मी मंत्र का जाप करते हुए समर्पित करके आहुति दें। घर की दरिद्रता दूर हो जायेगी।
दीपावली की रात्रि एक चैकी पर लाल वस्त्र बिछाएं। गेहूं से उस पर स्वास्तिक बनायें, फिर उस पर एक थाली रखें फिर थाली में कुंकुम (कुमकुम) से ‘‘गं’’ लिखें उस पर श्वेतार्क गणपति श्रीफल व 7 कौड़ियां रखें। फिर चंदन की माला से निम्न मंत्र का जप करें। ‘‘ऊँ सर्व सिद्धि प्रदायेकित्व सिद्धि बुद्धि प्रदो भवः श्री’’। अगले दिन 5 कन्याओं को पीला भोजन कराएं। श्वेतार्क को घर में रखें शेष सामग्री जल में प्रवाहित कर दें।
दुकान के गल्ले में कमल के बीज के साथ श्री यंत्र रखें एवं रोज धूप दीप दिखाएं। धन की कमी नहीं रहेगी।
चैतीसा यंत्र सुख-समृद्धि का प्रतीक माना गया है, इसे दीपावली की रात या रवि पुष्य नक्षत्र के दिन केसर से अनार की कलम से भोज पत्र पर लिखें। यंत्र लिखते समय लक्ष्मी जी के किसी मंत्र का जाप करते रहें, फिर घर या दुकान में रखें। लक्ष्मी जी का वास स्थाई रूप से रहेगा।
व्यापार वृद्धि के लिए व्यापार वृद्धि यंत्र का उपयोग करना चाहिए। इसे दीपावली के दिन केसर से अनार की कलम से भोज पत्र पर बनाएं। इसमें एक वर्ग बनाकर 9 उपवर्ग बनाएं। पहली पक्ति में 8, 1, 6 दूसरी पंक्ति में 3, 6, 7 और तीसरी पंक्ति में 4, 9, 2 लिखें।
फिर इस यंत्र की रोज पूजा करें। इससे व्यापार में वृद्धि होगी, धन का आगमन होता रहेगा।

 

आइये जाने मनोकामना पूर्ति के अचूक गुप्त उपाय(टोने-टोटके)—-

हर मनुष्य की कुछ मनोकामनाएं होती है। कुछ लोग इन मनोकामनाओं को बता देते हैं तो कुछ नहीं बताते। चाहते सभी हैं कि किसी भी तरह उनकी मनोकामना पूरी हो जाए। लेकिन ऐसा हो नहीं पाता। यदि आप चाहते हैं कि आपकी सोची हर मुराद पूरी हो जाए तो नीचे लिखे प्रयोग करें। इन टोटकों को करने से आपकी हर मनोकामना पूरी हो जाएगी।

उपाय—-
– तुलसी के पौधे को प्रतिदिन जल चढ़ाएं तथा गाय के घी का दीपक लगाएं।

– रविवार को पुष्य नक्षत्र में श्वेत आक की जड़ लाकर उससे श्रीगणेश की प्रतिमा बनाएं फिर उन्हें खीर का भोग लगाएं। लाल कनेर के फूल तथा चंदन आदि के उनकी पूजा करें। तत्पश्चात गणेशजी के बीज मंत्र (ऊँ गं) के अंत में नम: शब्द जोड़कर 108 बार जप करें।

– सुबह गौरी-शंकर रुद्राक्ष शिवजी के मंदिर में चढ़ाएं।

– सुबह बेल पत्र (बिल्ब) पर सफेद चंदन की बिंदी लगाकर मनोरथ बोलकर शिवलिंग पर अर्पित करें।

– बड़ के पत्ते पर मनोकामना लिखकर बहते जल में प्रवाहित करने से भी मनोरथ पूर्ति होती है। मनोकामना किसी भी भाषा में लिख सकते हैं।

– नए सूती लाल कपड़े में जटावाला नारियल बांधकर बहते जल में प्रवाहित करने से भी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

इन प्रयोगों को करने से आपकी सभी मनोकामनाएं शीघ्र ही पूरी हो जाएंगी।

इन उपायों से आएगी जीवन में खुशहाली —
सभी चाहते हैं कि उसके जीवन में खुशहाली रहे और सुख-शांति बनी रहे पर हर व्यक्ति के साथ ऐसा नहीं होता। जीवन में सुख और शांति का बना रहना काफी मुश्किल होता है। ऐसे समय में उसे अपना जीवन नरक लगने लगता है। यदि आपके साथ भी यही समस्या है तो आप नीचे लिखे साधारण उपायों को अपनाकर अपने जीवन को खुशहाल बना सकते हैं। यह उपाय इस प्रकार हैं-

– सुबह घर से काम के लिए निकलने से पहले नियमित रूप से गाय को रोटी दें।

– एक पात्र में जल लेकर उसमें कुंकुम डालकर बरगद के वृक्ष पर नियमित रूप से चढ़ाएं।

– सुबह घर से निकलने से पहले घर के सभी सदस्य अपने माथे पर चन्दन तिलक लगाएं।

– मछलियों की आटे की गोली बनाकर खिलाएं।

– चींटियों को खोपरे व शकर का बूरा मिलाकर खिलाएं।

– शुद्ध कस्तूरी को चमकीले पीले कपड़े में लपेटकर अपनी तिजोरी में रखें।

इन उपायों को पूर्ण श्रद्धा के साथ करने से जीवन में समृद्धी व खुशहाली आने लगती है।

अपने पति को खिलाएं खीर, बढ़ेगा प्रेम—
अगर आपके दाम्पत्य जीवन में पहले जैसी मधुरता नहीं रही या फिर रोज किसी न किसी बात पर पति-पत्नी के बीच झगड़े होते हों तो समझ लीजिए कि आपके दाम्पत्य जीवन में प्रेम का अभाव हो गया है। इस प्रेम को बढ़ाने के लिए एक छोटा मगर असरदार उपाय इस प्रकार है-

उपाय—
शुक्ल पक्ष में पडऩे वाले किसी शुक्रवार के दिन पत्नी अपने हाथों से प्रेम पूर्वक साबूदाने की खीर बनाएं लेकिन उसमें शक्कर के स्थान पर मिश्री डालें। इस खीर को सबसे पहले भगवान को अर्पित करें और इसके बाद पति-पत्नी थोड़ी-थोड़ी एक-दूसरे को खिलाएं। भगवान से सुखमय दाम्पत्य की कामना करें। इस दिन किसी लक्ष्मी मंदिर में जाकर इत्र का दान करें। अपने शयनकक्ष में इत्र कदापि न रखें। कुछ दिनों तक यह प्रयोग करते रहें । कुछ ही दिनों में दाम्पत्य जीवन सुखी हो जाएगा।

इस उपाय से आप अपने दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदल सकते हें —
हर इंसान अपने दुर्भाग्य से पीछा छुड़ाना चाहता है। लेकिन दुर्भाग्य से पीछा छुड़ाना इतना आसान नहीं होता क्योंकि जब समय बुरा होता है तो साया भी साथ छोड़ देता है। अगर आप चाहते हैं कि आपका दुर्भाग्य, सौभाग्य में बदल जाए तो नीचे लिखे उपाय करें। यह उपाय आपके दुर्भाग्य कौ सौभाग्य में बदल देंगे।

उपाय—-

1- बरगद(बड़) के पत्ते को गुरु पुष्य या रवि पुष्य योग में लाकर उस पर हल्दी से स्वस्तिक बनाकर घर में रखें।

2- घर के मुख्य द्वार के ऊपर भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा अथवा चित्र इस प्रकार लगाएं कि उनका मुख घर के अंदर की ओर रहे। उस पर सुबह दूर्वा अवश्य अर्पित करें।

3- धन संबंधी कार्य सोमवार एवं बुधवार को करें।

4- नए कार्य, व्यवसाय, नौकरी, रोजगार आदि शुभ कार्यों के लिए जाते समय घर की कोई महिला एक मुठ्ठी काले उड़द उस व्यक्ति के ऊपर से उतार कर भूमि पर छोड़ दे तो हर कार्य में सफलता मिलेगी।

5- गरीब, असहाय, रोगी व किन्नरों की सहायता दान स्वरूप अवश्य करें। यदि संभव हो तो किन्नरों को दिए पैसे में से एक सिक्का वापस लेकर अपने कैश बॉक्स या लॉकर में रखें। इससे बहुत लाभ होगा।

6- काली हल्दी की एक गांठ शुभ मुहूर्त में प्राप्त कर अपने घर में, व्यवसायी अपने कैश बॉक्स में तथा व्यापारी अपने गल्ले में रखें।

7- रवि पुष्य नक्षत्र के शुभ मुहूर्त में बहेड़े की जड़ या एक पत्ता तथा शंखपुष्पी की जड़ लाकर घर में रखें। चांदी की डिब्बी में रखें तो और भी शुभ रहेगा।
जानिए क्या अंतर है ‘टोने’ व ‘टोटके’ में?
टोने-टोटके, यह शब्द हम कई बार सुनते हैं। सुनने में यह शब्द थोड़े अजीब जरुर लगते हैं लेकिन यह तंत्र शास्त्र के एक सिक्के के दो पहलू हैं बस इनकी क्रियाओं में थोड़ा अंतर है। साधारण भाषा में कहें तो दैनिक जीवन में किए जाने वाले छोटे-छोटे उपाय टोटका कहलाते हंै जबकि टोने विशेषत: समय पडऩे पर ही प्रयोग में लाए जाते हैं। वह किसी विशेष कार्य सिद्धि के लिए किए जाते हैं। जानते हैं इनके बीच क्या अंतर है-

टोटका—–

जब हम किसी यात्रा पर जा रहे हो और अचानक कोई छींक दे तो हम थोड़ी देर रुक जाते हैं। ऐसे ही जब बिल्ली रास्ता काट जाती है तो हम थोड़ी देर रुक कर चलते हैं या रास्ता बदल लेते हैं। यात्रा पर किसी विशेष कार्य पर जाने से पहले पानी पीना या दही का सेवन करना, यह सब टोटका कहलाता है। टोटके साधारण प्रभावशाली होते हैं व इनके निराकरण भी साधारण ही होते हैं।

टोना—–

विशेष कार्य सिद्धि के लिए हनुमान चालीसा, गायत्री मंत्र या किसी अन्य मंत्र का जप विधि-विधान से जप करना टोना कहलाता है। किसी यंत्र अथवा वस्तु को अभिमंत्रित करके अपने पास रखना भी टोना का ही एक रूप है। टोना टोटके का ही जटिल रूप है जो किसी विशेष कार्य की सफलता के लिए पूरे विधि-विधान से किया जाता है। टोना के लिए समय, मुहूर्त, स्थान आदि सब कुछ नियत होता है।

जब टोटके करें तो इन बातों का भी ध्यान रखें—
तंत्र शास्त्र में कई प्रकार के टोटके किए जाते हैं। सभी का उद्देश्य अलग-अलग होता है। उद्देश्य के अनुसार ही उन टोटकों को करने के लिए शुभ तिथि व महीना निश्चित है। यदि इस दौरान वह टोटके किए जाए तो कई गुना अधिक फल देते हैं। नीचे टोटकों से संबंधित कुछ साधारण दिशा-निर्देश दिए गए हैं। टोटके करते समय इनका ध्यान रखें-

दिशा-निर्देश—-

– सम्मोहन सिद्धि, देव कृपा प्राप्ति अथवा अन्य शुभ एवं सात्विक कार्यों की सिद्धि के लिए पूर्व दिशा की ओर मुख करके टोटके किए जाते हैं।

– मान-सम्मान, प्रतिष्ठा व लक्ष्मी प्राप्ति के लिए किए जाने वाले टोटकों के लिए पश्चिम दिशा की ओर मुख करके बैठना शुभ होता है।

– उत्तर दिशा की ओर मुख करके उन टोटकों को किया जाता है जिनका उद्देश्य रोगों की चिकित्सा, मानसिक शांति एवं आरोग्य प्राप्ति होता है।

– रोग मुक्ति के लिए किए जाने वाले टोटकों के लिए मंगलवार एवं श्रावण मास उत्तम समय है।

– मां सरस्वती की प्रसन्नता व शिक्षा में सफलता के लिए बुधवार एवं गुरुवार तथा माघ, फाल्गुन और चैत्र मास में टोटका करना चाहिए।

– संतान और वैभव पाने के लिए गुरुवार तथा आश्विन, कार्तिक एवं मार्गशीर्ष मास में टोटकों का प्रयोग करना चाहिए।
ये उपाय बचाते हें टोने-टोटकों के अशुभ प्रभाव से —-
क्या आपको लगता है कि किसी ने आपके घर पर टोना-टोटका किया है जिसके कारण आपके परिवार पर इसका अशुभ प्रभाव पड़ रहा है तो घबराईए बिल्कुल मत क्योंकि यहां हम आपको बता रहे हैं टोने-टोटको से बचने के साधारण व अचूक उपाय। इन उपायों को करने से आपके घर व परिवार पर किसी टोने-टोटके का प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह उपाय इस प्रकार हैं-

उपाय—-

– अपने घर के मुख्य दरवाजे पर भगवान श्रीगणेश की मूर्ति स्थापित करें और सुबह उठकर उन्हें प्रणाम करें। इसके बाद अपने द्वार, देहली व सीढ़ी आदि पर पानी का छिड़काव करें। ऐसा करने से टोने-टोटके का प्रभाव नहीं पड़ता।

– नीम, बबूल या आम में से किसी पेड़ की टहनी पत्तियों सहित मुख्य दरवाजे पर लटकाएं।

– शनिवार के दिन सात हरी मिर्च के बीच एक नींबू काले धागे में पिरोकर मुख्य द्वार पर लटकाएं। इससे भी बुरी नजर नहीं लगेगी।

– सप्ताह के किसी एक दिन घर की साफ-सफाई करने के बाद एक बाल्टी पानी में थोड़ी शक्कर और दूध डालकर कुश से उसका छिड़काव पूरे घर में करें। आखिर में शेष पानी को दरवाजे के दोनों और थोड़ा-थोड़ा डाल दें।

– अमावस के दिन एक ब्राह्मण को भोजन अवश्य कराएं। इससे आपके पितर प्रसन्न होंगे और आपके घर व परिवार को टोने-टोटको के अशुभ प्रभाव से बचाएंगे।

इस टोटके से आने लगेगा आपके घर में पैसा—-
कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनके घर में पैसों का आगमन बिल्कुल कम होता है। उस घर के सदस्य कमाते तो बहुत हैं लेकिन घर में पैसा नहीं आ पाता। दूसरे कामों में ही खर्च हो जाता है। अगर ऐसा हो तो नीचे लिखा टोटका करने से घर में पैसों का आगमन होने लगेगा और सुख-शांति भी बनी रहेगी।

टोटका—-
शुक्ल पक्ष के बुधवार की शाम को किसी केले के पौधे के समीप जाएं। उस पर जल चढ़ाएं। हल्दी से तिलक करें और गुरु बृहस्पति का ध्यान कर पौधे से अगले दिन (गुरुवार को) थोड़ी सी जड़ ले जाने की आज्ञा मांगें। दूसरे दिन सूर्य निकलने पर स्नान कर केले के पेड़ की पूजा करें और लकड़ी के एक टुकड़े से पौधे की जड़ खोदकर निकल लें और घर ले आएं। इस जड़ को गंगाजल से धोकर केसर के जल में डाल दें।

घी का दीपक जलाकर ऊँ बृं बृहस्पते नम: मंत्र की एक माला का जप करें और उस जड़ को जल से निकालकर पीले कपड़े में लपेटकर अपनी तिजोरी में रखें। इसके बाद प्रति गुरुवार को उस जड़ को केसर घुले गंगाजल में स्नान कराकर पुन: उस पीले कपड़े में बांध कर इस मंत्र का जप करें और पुन: तिजोरी में रखें। जब भी यह टोटका करें जरुरतमंदों को दान दें व बच्चों को मिठाई अवश्य खिलाएं। इस तरह आपके घर में धन का आगमन होने लगेगा।
यदि हें नोकरी/जॉब के लिए परेशान …तो यह उपाय करें—
वर्तमान समय में बेरोजगारी एक बहुत बड़ी समस्या है। नौकरी न होने के कारण न तो समाज में मान-सम्मान मिलता है और न ही घर-परिवार में। यदि आप भी बेरोजगार हैं और बहुत प्रयत्न करने पर भी रोजगार नहीं मिल रहा है तो निराश होने की कोई जरुरत नहीं है। कुछ साधारण तांत्रिक उपाय कर आप रोजगार पा सकते हैं।

– शनिवार को हनुमानजी के मंदिर में जाकर सवा किलो मोतीचूर के लड्डुओं का भोग लगाएं। घी का दीपक जलाएं और मंदिर में ही बैठकर लाल चंदन की या मूंगा की माला से 108 बार नीचे लिखे मंत्र का जप करें-

कवन सो काज कठिन जग माही।

जो नहीं होय तात तुम पाहिं।।

इसके बाद 40 दिनों तक रोज अपने घर के मंदिर में इस मंत्र का जप 108 बार करें। 40 दिनों के अंदर ही आपको रोजगार मिलेगा।

– शनैश्चरी अमावस्या के दिन एक कागजी नींबू लें और शाम के समय उसके चार टुकड़े करके किसी चौराहे पर चारों दिशाओं में फेंक दें। इसके प्रभाव से भी जल्दी ने बेरोजगारी की समस्या दूर हो जाएगी।

– मंगलवार से प्रारंभ करते हुए 40 दिनों तक रोज सुबह के समय नंगे पैर हनुमानजी के मंदिर में जाएं और उन्हें लाल गुलाब के फूल चढ़ाएं। ऐसा करने से भी शीघ्र ही रोजगार मिलता है।

– इंटरव्यू में जाने से पहले लाल चंदन की माला से नीचे लिखे मंत्र का 11 बार जप करें-

ऊँ वक्रतुण्डाय हुं

जप से पूर्व भगवान गणेश की पूजा करें और गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करते हुए दूध से अभिषेक करें।

—-
इस टोटके से हर बाधा हो जाएगी दूर —–

जीवन में कई ऐसे अवसर आते हैं जब हर काम में बाधा आने लगती है। काम बनते-बनते बिगड़ जाते हैं। जहां से हमें उम्मीद होती है वहीं से निराशा हाथ लगती है। ऐसे समय में अगर यह टोटका किया जाए तो हर काम बनने लगते हैं और बाधाएं स्वत: ही दूर हो जाती हैं।

टोटका—-

सुबह उठकर नहाकर साफ पीले कपड़े पहनें। इसके बाद आसन बिछाकर पूर्व दिशा की ओर मुंह करके बैठ जाएं और 7 हल्दी की साबूत गांठे, 7 जनेऊ, 7 पूजा की छोटी सुपारी, 7 पीले फूल व 7 छोटी गुड़ की ढेली एक पीले रंग के कपड़े में बांध लें। अब भगवान सूर्य का स्मरण करें और अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए प्रार्थना करें। यह पोटली घर में कहीं ऐसी जगह रख दें जहां कोई और उसे हाथ न लगाए। जब आपका कार्य हो जाए तो यह पोटली किसी नदी या तालाब में प्रवाहित कर दें।

जल्दी होगी आपकी शादी यदि धनतेरस पर करें यह उपाय—
मत होईए। क्योंकि इस बार धनतेरस का पर्व सोमवार को होने के कारण आपकी समस्या का समाधान निश्चित रूप से हो जाएगा। धनतेरस का पर्व 24 अक्टूबर, सोमवार को है। यह दिन भगवान शंकर को विशेष प्रिय है। इस दिन नीचे लिखा उपाय करने से आपके विवाह में आ रही बाधाएं नष्ट हो जाएंगी।

उपाय—

इस दिन सुबह जल्दी उठकर नित्य कर्मों से निवृत्त होकर भगवान शंकर के मंदिर जाएं और शिवलिंग पर जलाभिषेक करें तथा शिवलिंग पर 108 आंकड़े के फूल चढ़ाएं हुए ऊँ नम: शिवाय: मंत्र का जप करते रहें। इसके बाद 21 बिल्व पत्र चढ़ाएं और भगवान शंकर से शीघ्र विवाह के लिए प्रार्थना करें। धनतेरस के शुभ मुहूर्त में किया गया यह उपाय जल्दी ही आपकी समस्या का निदान करेगा।
इस उपाय से मिलेगी कर्ज से मुक्ति—
क्या आप कर्ज से परेशान है। बहुत कोशिश करने के बाद भी लोन नहीं चुका पा रहे हैं तो आज यानी शनिवार को यह बहुत ही सरल व अचूक उपाय करें। इस उपाय से निश्चित ही आपको कर्ज से मुक्ति मिल जाएगी।

उपाय—-

शनिवार के दिन सुबह नित्य कर्म व स्नान आदि करने से बाद अपनी लंबाई के अनुसार काल धागा लें और इसे एक नारियल नारियल पर लपेट लें। इसका पूजन करें और इस नारियल को बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। साथ ही यह भगवान से ऋण मुक्ति के लिए प्रार्थना भी करें। इस छोटे से उपाय से शीघ्र ही आप कर्ज की टेंशन से छुटकारा पा लेंगे।

यह उपाय करवाएगा मनचाहे स्थान पर तबादला —
नौकरी के लिए कई बार इंसान को अपना घर-परिवार सब छोडऩा पड़ता है। ऐसे में वह अपने कार्य के प्रति पूरी ईमानदारी नहीं बरत पाता। उसका मन अपने घर पर ही लगा रहता है। उसे लगता है कि काश मेरा तबादला वहां हो जाएं जहां मैं चाहता हूं। अगर आपके साथ भी यही समस्या है तो नीचे लिखे उपाय से आपकी इस समस्या का समाधान हो सकता है।

उपाय—-

शुक्रवार के दिन ब्रह्म मुहूर्त में चंद्रमा दिखाई देने पर सफेद बर्फी या थोड़ा सा दही अपने ऊपर सात बार उतारें और अपने मन में श्रद्धा व विश्वास के साथ चंद्रदेव से प्रार्थना करें- हे चंद्रदेव। मेरा तबादला अमुक(स्थान का नाम बोलें) स्थान पर करवाने की कृपा करें। सात बार यह क्रिया करते हुए मंत्र पढ़कर बर्फी या दही को सूर्योदय से पहले किसी चौराहे पर जाकर रख आएं। जिस दिशा में चंद्रमा आसमान में हो अपना मुख उस ओर रखना चाहिए तथा यह क्रिया छत पर बाहर खुले में करें लेकिन कोई देख न पाएं। अपना कार्य पूर्ण होने पर चंद्रमा को अध्र्य दें, पूजा करें व सफेद बर्फी या खीर को भोग लगाएं।
यदि पूर्णिमा पर करें यह उपाय तो जल्दी होगी शादी—
कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनकी शादी में काफी मुश्किलें आती हैं। कई बार तो यह लोग काफी निराश हो जाते हैं। लेकिन उन्हें निराश होने की कोई जरुरत नहीं है , पूर्णिमा के अवसर पर यदि वे नीचे लिखे उपाय विधि-विधान से करेंगे तो न सिर्फ उनका विवाह जल्दी होगा बल्कि उन्हें मनचाहा जीवन साथी भी मिलेगा।

उपाय—-

– गरीबों को अपने सामथ्र्य के अनुसार पीले फल जैसे- आम, केला आदि का दान करें।

– इस दिन नया पीला रुमाल अपने साथ में रखें।

– भगवान विष्णु के मंदिर में जाकर बेसन के लड्डू चढ़ाएं। लड्डू के साथ सेहरे की कलगी भी चढ़ाएं। यह शीघ्र विवाह का अचूक उपाय है।

– केल (केले के पेड़) की पूजा करें।

– इस दिन भोजन में केसर का उपयोग करें व केसर का तिलक लगाएं।

– जरुरतमंदों को पीले वस्त्रों का दान करें।

– गुरु बृहस्पति के मंदिर में जाएं। उन्हें पीली मिठाई, फल, फूल व वस्त्र अर्पण करें।

– एक किलो चने की दाल के साथ सोने का कोई आभूषण दान करें। यदि लड़के की शादी नहीं हो रही है तो ब्राह्मण को दान करें और यदि लड़की की शादी नहीं हो रही है तो किसी कन्या को दान करें।
 


उपाय लाल किताब से (Redbook Remedy)

तिजोरी में जरूर रखना चाहिए पूजा की सुपारी क्योंकि....
कहते हैं पूजा से मन को शांति व एकाग्रता मिलती है। इसीलिए लोग अपने घर में अक्सर किसी त्यौहार या विशेष उपलक्ष्य पर पूजन का आयोजन करते हैं। पूजन के समय सर्वप्रथम श्री गणेश का पूजन किया जाता है। गणेशजी की मुर्ति की स्थापना के साथ ही पूजा की सुपारी में भी गणेश जी का आवाह्न किया जाता है क्योंकि पूजन के समय सबसे पहले गौरी व गणेश की स्थापना जरूरी मानी जाती है।
गणेशजी का आवाह्न पूजा की सुपारी में किया जाता है क्योंकि शास्त्रों के अनुसार पूजा की सुपारी को पूर्ण फल माना जाता है। पूजा की सुपारी पूर्ण व अखंडित होती है। इसीलिए इसको पूजा के समय गौरी-गणेश का रूप मानकर उस पर जनेऊ चढ़ाई जाती है।
बाद में उस पूजा की सुपारी का क्या करें अधिकतर लोगों के मन में यही दुविधा रहती है? कहा जाता है कि पूजा सुपारी को पूजन के बाद तिजोरी में रखना चाहिए क्योंकि शास्त्रों के अनुसार यह मान्यता है कि जहां गणेशजी यानी बुद्धि के स्वामी का निवास होता है वहीं लक्ष्मी का निवास होता है। इसीलिए पूजा सुपारी को पूजन के बाद तिजोरी में रखना चाहिए क्योंकि इससे घर में सुख-समृद्धि बढऩे के साथ ही घर में लक्ष्मी का स्थाई निवास होता है।
 


उपाय लाल किताब से (Redbook Remedy)

व्यापार, विवाह या किसी भी कार्य में बार-बार विफलता मिलने पर-व्यापार, विवाह या किसी भी कार्य में बार-बार विफलता मिलने पर-
सरसों के तेल में सिके गेहूँ के आटे व पुराने गुड़ से तैयार सात पूये, सात मदार (आक) के पुष्प, सिंदूर, आटे से तैयार सरसों के तैल का रूई की बत्ती से जलता दीपक, पत्तल या अरण्डी के पत्ते पर रखकर शनिवार की रात्रि में किसी चौराहे पर रखें और कहें -“हे मेरे दुर्भाग्य तुझे यहीं छोड़े जा रहा हूँ कृपा करके मेरा पीछा ना करना।´´ सामान रखकर पीछे मुड़कर न देखें।
दुर्भाग्य दूर करने के लिए-
आटे का दिया, 1 नीबू, 7 लाल मिर्च, 7 लड्डू,2 बत्ती, 2 लोंग, 2 बड़ी इलायची बङ या केले के पत्ते पर ये सारी चीजें रख दें |रात्रि 12 बजे सुनसान चौराहे पर जाकर पत्ते को रख दें व प्रार्थना करें, जब घर से निकले तब यह प्रार्थना करें - हे दुर्भाग्य, संकट, विपत्ती आप मेरे साथ चलें और पत्ते को रख दें | फिर प्रार्थना करें -मैं विदा हो रहा हूँ | आप मेरे साथ न आयें, चारों रास्ते खुले हैं आप कहीं भी जायें | एक बार करने के बाद एक दो महीने देखें, उपाय लाभकारी है| श्रद्धा से करें |

सौभाग्‍य में वृद्धि के लिए-
दुर्भाग्य कभी-कभी न चाहते हुए भी जीवन में बहुत संघर्ष करना पड़ता है। भाग्य बिल्कुल भी साथ नहीं देता साथ ही दुर्भाग्य निरन्तर पीछा करता रहता है। दुर्भाग्य से बचने के लिए या दुर्भाग्य नाश के लिए यहां हम आपको एक अनुभूत टोटका बता रहे हैं। इसे पूर्ण आस्था के साथ करने से दुर्भाग्य का नाश होकर सौभाग्य में वृद्धि होती है। टोटका सूर्योदय के बाद और सूर्यास्त से पहले इस टोटके को करना है। एक रोटी लें। इस रोटी को अपने ऊपर से 31 बार ऊवार लें। प्रत्येक बार वारते समय इस मन्त्र का उच्चारण भी करें। ऊँ दुभाग्यनाशिनी दुं दुर्गाय नम: बाद में यह रोटी कुत्ते को खिला दें अथवा बहते पानी में बहा दें। यह अद्भुत प्रयोग है। इसके बाद आप देखेंगे कि किस्मत के दरवाजे आपके लिए खुल गए हैं। पूर्ण आस्था से यह टोटका करने पर शीघ्र लाभ होता है।
शनि दृष्टि दोष दूर करने के लिए-
उड़द की दाल के 4 बड़े शनिवार को प्रात: सिर से 3 बार एंटी क्लाकवाइज (उलटा) घुमाकर कौओं को खिलाएं। (सात शनिवार करो)। शनि कृपा पाने के लिये शनिवार के दिन आठ नंबर का जूता (लैदर का) शनि का दान मांगने वाले को ‘ऊँ सूर्य पुत्राय नम:’ आठ बार कहकर दें। शनि कृपा प्राप्त करन के लिए 27 किलो गुलाब जामुन पर एक लौंग फूल वाली चो भोकर शनिवार को जमुना नदी में प्रवाहित करें। 
सरसों के तेल में सिके गेहूँ के आटे व पुराने गुड़ से तैयार सात पूये, सात मदार (आक) के पुष्प, सिंदूर, आटे से तैयार सरसों के तैल का रूई की बत्ती से जलता दीपक, पत्तल या अरण्डी के पत्ते पर रखकर शनिवार की रात्रि में किसी चौराहे पर रखें और कहें -“हे मेरे दुर्भाग्य तुझे यहीं छोड़े जा रहा हूँ कृपा करके मेरा पीछा ना करना।´´ सामान रखकर पीछे मुड़कर न देखें।
दुर्भाग्य दूर करने के लिए-
आटे का दिया, 1 नीबू, 7 लाल मिर्च, 7 लड्डू,2 बत्ती, 2 लोंग, 2 बड़ी इलायची बङ या केले के पत्ते पर ये सारी चीजें रख दें |रात्रि 12 बजे सुनसान चौराहे पर जाकर पत्ते को रख दें व प्रार्थना करें, जब घर से निकले तब यह प्रार्थना करें - हे दुर्भाग्य, संकट, विपत्ती आप मेरे साथ चलें और पत्ते को रख दें | फिर प्रार्थना करें -मैं विदा हो रहा हूँ | आप मेरे साथ न आयें, चारों रास्ते खुले हैं आप कहीं भी जायें | एक बार करने के बाद एक दो महीने देखें, उपाय लाभकारी है| श्रद्धा से करें |

सौभाग्‍य में वृद्धि के लिए-
दुर्भाग्य कभी-कभी न चाहते हुए भी जीवन में बहुत संघर्ष करना पड़ता है। भाग्य बिल्कुल भी साथ नहीं देता साथ ही दुर्भाग्य निरन्तर पीछा करता रहता है। दुर्भाग्य से बचने के लिए या दुर्भाग्य नाश के लिए यहां हम आपको एक अनुभूत टोटका बता रहे हैं। इसे पूर्ण आस्था के साथ करने से दुर्भाग्य का नाश होकर सौभाग्य में वृद्धि होती है। टोटका सूर्योदय के बाद और सूर्यास्त से पहले इस टोटके को करना है। एक रोटी लें। इस रोटी को अपने ऊपर से 31 बार ऊवार लें। प्रत्येक बार वारते समय इस मन्त्र का उच्चारण भी करें। ऊँ दुभाग्यनाशिनी दुं दुर्गाय नम: बाद में यह रोटी कुत्ते को खिला दें अथवा बहते पानी में बहा दें। यह अद्भुत प्रयोग है। इसके बाद आप देखेंगे कि किस्मत के दरवाजे आपके लिए खुल गए हैं। पूर्ण आस्था से यह टोटका करने पर शीघ्र लाभ होता है।
शनि दृष्टि दोष दूर करने के लिए-
उड़द की दाल के 4 बड़े शनिवार को प्रात: सिर से 3 बार एंटी क्लाकवाइज (उलटा) घुमाकर कौओं को खिलाएं। (सात शनिवार करो)। शनि कृपा पाने के लिये शनिवार के दिन आठ नंबर का जूता (लैदर का) शनि का दान मांगने वाले को ‘ऊँ सूर्य पुत्राय नम:’ आठ बार कहकर दें। शनि कृपा प्राप्त करन के लिए 27 किलो गुलाब जामुन पर एक लौंग फूल वाली चो भोकर शनिवार को जमुना नदी में प्रवाहित करें। 


उपाय लाल किताब से (Redbook Remedy)

बाधा मुक्ति के लिए :-------
किसी भी प्रकार की बाधा से मुक्ति के लिए
मत्स्य यंत्र से युक्त बाधामुक्ति यंत्र की स्थापना
कर उसका नियमित रूप से पूजन-दर्शन करें।
अकारण परेशान करने वाले व्यक्ति से शीघ्र
छुटकारा पाने के लिए : यदि कोई व्यक्ति बगैर
किसी कारण के परेशान कर रहा हो, तो शौच
क्रिया काल में शौचालय में बैठे-
बैठे वहीं के पानी से उस व्यक्ति का नाम लिखें और
बाहर निकलने से पूर्व जहां पानी से नाम लिखा
था, उस स्थान पर अपने बाएं पैर से तीन बार ठोकर
मारें। ध्यान रहे, यह
प्रयोग स्वार्थवश न करें, अन्यथा हानि हो सकती
है।
रुद्राक्ष या स्फटिक की माला के प्रयोगों से
प्रतिकूल परिस्थितियों का शमन होता है। इसके
अतिरिक्त स्फटिक की माला पहनने से तनाव दूर
होता है।
ऊपरी हवा पहचान और निदान
प्रायः सभी धर्मग्रंथों में ऊपरी हवाओं, नजर दोषों
आदि का उल्लेख है। कुछ ग्रंथों में इन्हें बुरी आत्मा
कहा गया है तो कुछ अन्य में भूत-प्रेत और जिन्न।
यहां ज्योतिष के आधार पर नजर दोष का विश्लेषण
प्रस्तुत है।
ज्योतिष सिद्धांत के अनुसार गुरु पितृदोष, शनि
यमदोष, चंद्र व शुक्र जल देवी दोष, राहु सर्प व प्रेत
दोष, मंगल शाकिनी दोष, सूर्य देव दोष एवं बुध कुल
देवता दोष का कारक होता है। राहु, शनि व केतु
ऊपरी हवाओं के कारक ग्रह हैं। जब किसी व्यक्ति
के लग्न (शरीर), गुरु (ज्ञान), त्रिकोण (धर्म भाव)
तथा द्विस्वभाव राशियों पर पाप ग्रहों का
प्रभाव होता है, तो उस पर ऊपरी हवा की
संभावना होती है।
लक्षण
नजर दोष से पीड़ित व्यक्ति का शरीर कंपकंपाता
रहता है। वह अक्सर ज्वर, मिरगी आदि से ग्रस्त
रहता है।
कब और किन स्थितियों में डालती हैं ऊपरी हवाएं
किसी व्यक्ति पर अपना प्रभाव?
जब कोई व्यक्ति दूध पीकर या कोई सफेद मिठाई
खाकर किसी चौराहे पर जाता है, तब ऊपरी हवाएं
उस पर अपना प्रभाव डालती हैं। गंदी जगहों पर इन
हवाओं का वास होता है, इसीलिए ऐसी जगहों पर
जाने वाले लोगों को ये हवाएं अपने प्रभाव में ले
लेती हैं। इन हवाओं का प्रभाव रजस्वला स्त्रियों पर
भी पड़ता है। कुएं, बावड़ी आदि पर भी इनका वास
होता है। विवाह व अन्य मांगलिक कार्यों के अवसर
पर ये हवाएं सक्रिय होती हैं। इसके अतिरिक्त रात
और दिन के १२ बजे दरवाजे की चौखट पर इनका
प्रभाव होता है।
दूध व सफेद मिठाई चंद्र के द्योतक हैं। चौराहा राहु
का द्योतक है। चंद्र राहु का शत्रु है। अतः जब कोई
व्यक्ति उक्त चीजों का सेवन कर चौराहे पर जाता
है, तो उस पर ऊपरी हवाओं के प्रभाव की संभावना
रहती है।
कोई स्त्री जब रजस्वला होती है, तब उसका चंद्र व
मंगल दोनों दुर्बल हो जाते हैं। ये दोनों राहु व शनि
के शत्रु हैं। रजस्वलावस्था में स्त्री अशुद्ध होती है
और अशुद्धता राहु की द्योतक है। ऐसे में उस स्त्री पर
ऊपरी हवाओं के प्रकोप की संभावना रहती है।
कुएं एवं बावड़ी का अर्थ होता है जल स्थान और
चंद्र जल स्थान का कारक है। चंद्र राहु का शत्रु है,
इसीलिए ऐसे स्थानों पर ऊपरी हवाओं का प्रभाव
होता है।
जब किसी व्यक्ति की कुंडली के किसी भाव
विशेष पर सूर्य, गुरु, चंद्र व मंगल का प्रभाव होता है,
तब उसके घर विवाह व मांगलिक कार्य के अवसर आते
हैं। ये सभी ग्रह शनि व राहु के शत्रु हैं, अतः
मांगलिक अवसरों पर ऊपरी हवाएं व्यक्ति को
परेशान कर सकती हैं।
दिन व रात के १२ बजे सूर्य व चंद्र अपने पूर्ण बल की
अवस्था में होते हैं। शनि व राहु इनके शत्रु हैं, अतः
इन्हें प्रभावित करते हैं। दरवाजे की चौखट राहु की
द्योतक है। अतः जब राहु क्षेत्र में चंद्र या सूर्य को
बल मिलता है, तो ऊपरी हवा सक्रिय होने की
संभावना प्रबल होती है।
मनुष्य की दायीं आंख पर सूर्य का और बायीं पर चंद्र
का नियंत्रण होता है। इसलिए ऊपरी हवाओं का
प्रभाव सबसे पहले आंखों पर ही पड़ता है।
यहां ऊपरी हवाओं से संबद्ध ग्रहों, भावों आदि का
विश्लेषण प्रस्तुत है।
राहु-केतु : जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है,
शनिवत राहु ऊपरी हवाओं का कारक है। यह प्रेत
बाधा का सबसे प्रमुख कारक है। इस ग्रह का प्रभाव
जब भी मन, शरीर, ज्ञान, धर्म, आत्मा आदि के
भावों पर होता है, तो ऊपरी हवाएं सक्रिय होती
हैं।
शनि : इसे भी राहु के समान माना गया है। यह भी
उक्त भावों से संबंध बनाकर भूत-प्रेत पीड़ा देता है।
चंद्र : मन पर जब पाप ग्रहों राहु और शनि का दूषित
प्रभाव होता है और अशुभ भाव स्थित चंद्र बलहीन
होता है, तब व्यक्ति भूत-प्रेत पीड़ा से ग्रस्त होता
है।
गुरु : गुरु सात्विक ग्रह है। शनि, राहु या केतु से संबंध
होने पर यह दुर्बल हो जाता है। इसकी दुर्बल स्थिति
में ऊपरी हवाएं जातक पर अपना प्रभाव डालती हैं।
लग्न : यह जातक के शरीर का प्रतिनिधित्व करता
है। इसका संबंध ऊपरी हवाओं के कारक राहु, शनि
या केतु से हो या इस पर मंगल का पाप प्रभाव प्रबल
हो, तो व्यक्ति के ऊपरी हवाओं से ग्रस्त होने की
संभावना बनती है।
पंचम : पंचम भाव से पूर्व जन्म के संचित कर्मों का
विचार किया जाता है। इस भाव पर जब ऊपरी
हवाओं के कारक पाप ग्रहों का प्रभाव पड़ता है,
तो इसका अर्थ यह है कि व्यक्ति के पूर्व जन्म के
अच्छे कर्मों में कमी है। अच्छे कर्म अल्प हों, तो प्रेत
बाधा योग बनता है।
अष्टम : इस भाव को गूढ़ विद्याओं व आयु तथा मृत्यु
का भाव भी कहते हैं। इसमें चंद्र और पापग्रह या
ऊपरी हवाओं के कारक ग्रह का संबंध प्रेत बाधा को
जन्म देता है।
नवम : यह धर्म भाव है। पूर्व जन्म में पुण्य कर्मों में
कमी रही हो, तो यह भाव दुर्बल होता है।
राशियां : जन्म कुंडली में द्विस्वभाव राशियों
मिथुन, कन्या और मीन पर वायु तत्व ग्रहों का
प्रभाव हो, तो प्रे्रत बाधा होती है।
वार : शनिवार, मंगलवार, रविवार को प्रेत बाधा
की संभावनाएं प्रबल होती हैं।
तिथि : रिक्ता तिथि एवं अमावस्या प्रेत बाधा
को जन्म देती है।
नक्षत्र : वायु संज्ञक नक्षत्र प्रेत बाधा के कारक
होते हैं।
योग : विष्कुंभ, व्याघात, ऐंद्र, व्यतिपात, शूल आदि
योग प्रेत बाधा को जन्म देते हैं।
करण : विष्टि, किस्तुन और नाग करणों के कारण
व्यक्ति प्रेत बाधा से ग्रस्त होता है।
दशाएं : मुख्यतः शनि, राहु, अष्टमेश व राहु तथा केतु
से पूर्णतः प्रभावित ग्रहों की दशांतर्दशा में
व्यक्ति के भूत-प्रेत बाधाओं से ग्रस्त होने की
संभावना रहती है।
युति
किसी स्त्री के सप्तम भाव में शनि, मंगल और राहु
या केतु की युति हो, तो उसके पिशाच पीड़ा से
ग्रस्त होने की संभावना रहती है।
गुरु नीच राशि अथवा नीच राशि के नवांश में हो,
या राहु से युत हो और उस पर पाप ग्रहों की दृष्टि
हो, तो जातक की चांडाल प्रवृत्ति होती है।
पंचम भाव में शनि का संबंध बने तो व्यक्ति प्रेत एवं
क्षुद्र देवियों की भक्ति करता है।
ऊपरी हवाओं के कुछ अन्य मुख्य ज्योतिषीय योग
यदि लग्न, पंचम, षष्ठ, अष्टम या नवम भाव पर राहु,
केतु, शनि, मंगल, क्षीण चंद्र आदि का प्रभाव हो,
तो जातक के ऊपरी हवाओं से ग्रस्त होने की
संभावना रहती है। यदि उक्त
ग्रहों का परस्पर संबंध हो, तो जातक प्रेत आदि से
पीड़ित हो सकता है।
यदि पंचम भाव में सूर्य और शनि की युति हो, सप्तम
में क्षीण चंद्र हो तथा द्वादश में गुरु हो, तो इस
स्थिति में भी व्यक्ति प्रेत बाधा का शिकार
होता है।
यदि लग्न पर क्रूर ग्रहों की दृष्टि हो, लग्न निर्बल
हो, लग्नेश पाप स्थान में हो अथवा राहु या केतु से
युत हो, तो जातक जादू-टोने से पीड़ित होता है।
लग्न में राहु के साथ चंद्र हो तथा त्रिकोण में मंगल,
शनि अथवा कोई अन्य क्रूर ग्रह हो, तो जातक भूत-
प्रेत आदि से पीड़ित होता है।
यदि षष्ठेश लग्न में हो, लग्न निर्बल हो और उस पर
मंगल की दृष्टि हो, तो जातक जादू-टोने से पीड़ित
होता है। यदि लग्न पर किसी अन्य शुभ ग्रह की
दृष्टि न हो, तो जादू-टोने से पीड़ित होने की
संभावना प्रबल होती है। षष्ठेश के सप्तम या दशम में
स्थित होने पर भी जातक जादू-टोने से पीड़ित हो
सकता है।
यदि लग्न में राहु, पंचम में शनि तथा अष्टम में गुरु हो,
तो जातक प्रेत शाप से पीड़ित होता है।
ऊपरी हवाओं के प्रभाव से मुक्ति के सरल उपाय
ऊपरी हवाओं से मुक्ति हेतु शास्त्रों में अनेक उपाय
बताए गए हैं। अथर्ववेद में इस हेतु कई मंत्रों व स्तुतियों
का उल्लेख है। आयुर्वेद में भी इन हवाओं से मुक्ति के
उपायों का विस्तार से वर्णन किया गया है। यहां
कुछ प्रमुख सरल एवं प्रभावशाली उपायों का
विवरण प्रस्तुत है।
ऊपरी हवाओं से मुक्ति हेतु हनुमान चालीसा का
पाठ और गायत्री का जप तथा हवन करना चाहिए।
इसके अतिरिक्त अग्नि तथा लाल मिर्ची जलानी
चाहिए।
रोज सूर्यास्त के समय एक साफ-सुथरे बर्तन में गाय
का आधा किलो कच्चा दूध लेकर उसमें शुद्ध शहद की
नौ बूंदें मिला लें। फिर स्नान करके, शुद्ध वस्त्र
पहनकर मकान
की छत से नीचे तक प्रत्येक कमरे, जीने, गैलरी आदि
में उस दूध के छींटे देते हुए द्वार तक आएं और बचे हुए दूध
को मुख्य द्वार के बाहर गिरा दें। क्रिया के दौरान
इष्टदेव का स्मरण करते रहें। यह क्रिया इक्कीस दिन
तक नियमित रूप से करें, घर पर प्रभावी ऊपरी हवाएं
दूर हो जाएंगी।
रविवार को बांह पर काले धतूरे की जड़ बांधें, ऊपरी
हवाओं से मुक्ति मिलेगी।
लहसुन के रस में हींग घोलकर आंख में डालने या सुंघाने
से पीड़ित व्यक्ति को ऊपरी हवाओं से मुक्ति मिल
जाती है।
ऊपरी बाधाओं से मुक्ति हेतु निम्नोक्त मंत्र का
यथासंभव जप करना चाहिए।
" ओम नमो भगवते रुद्राय नमः कोशेश्वस्य नमो
ज्योति पंतगाय नमो रुद्राय नमः सिद्धि स्वाहा।''
घर के मुख्य द्वार के समीप श्वेतार्क का पौधा
लगाएं, घर ऊपरी हवाओं से मुक्त रहेगा।
उपले या लकड़ी के कोयले जलाकर उसमें धूनी की
विशिष्ट वस्तुएं डालें और उससे उत्पन्न होने वाला
धुआं पीड़ित व्यक्त्ि को सुंघाएं। यह क्रिया किसी
ऐसे व्यक्ति से करवाएं जो अनुभवी हो और जिसमें
पर्याप्त आत्मबल हो।
प्रातः काल बीज मंत्र ÷क्लीं' का उच्चारण करते
हुए काली मिर्च के नौ दाने सिर पर से घुमाकर
दक्षिण दिशा की ओर फेंक दें, ऊपरी बला दूर हो
जाएगी।
रविवार को स्नानादि से निवृत्त होकर काले कपड़े
की छोटी थैली में तुलसी के आठ पत्ते, आठ काली
मिर्च और सहदेई की जड़ बांधकर गले में धारण करें,
नजर दोष बाधा से मुक्ति मिलेगी।
निम्नोक्त मंत्र का १०८ बार जप करके सरसों का
तेल अभिमंत्रित कर लें और उससे पीड़ित व्यक्ति के
शरीर पर मालिश करें, व्यकित पीड़ामुक्त हो
जाएगा।
मंत्र : ओम नमो काली कपाला देहि देहि स्वाहा।
ऊपरी हवाओं के शक्तिषाली होने की स्थिति में
शाबर मंत्रों का जप एवं प्रयोग किया जा सकता
है। प्रयोग करने के पूर्व इन मंत्रों का दीपावली की
रात को अथवा होलिका दहन की रात को जलती
हुई होली के सामने या फिर श्मषान में १०८ बार जप
कर इन्हें सिद्ध कर लेना चाहिए। यहां यह उल्लेख कर
देना आवष्यक है कि इन्हें सिद्ध करने के इच्छुक
साधकों में पर्याप्त आत्मबल होना चाहिए, अन्यथा
हानि हो सकती है।
निम्न मंत्र से थोड़ा-सा जीरा ७ बार अभिमंत्रित
कर रोगी के शरीर से स्पर्श कराएं और उसे अग्नि में
डाल दें। रोगी को इस स्थिति में बैठाना चाहिए
कि उसका धूंआ उसके मुख के सामने आये। इस प्रयोग
से भूत-प्रेत बाधा की निवृत्ति होती है।
मंत्र : जीरा जीरा महाजीरा जिरिया चलाय।
जिरिया की शक्ति से फलानी चलि जाय॥ जीये
तो रमटले मोहे तो मशान टले। हमरे जीरा मंत्र से
अमुख अंग भूत चले॥ जाय हुक्म पाडुआ पीर की
दोहाई॥
एक मुट्ठी धूल को निम्नोक्त मंत्र से ३ बार
अभिमंत्रित करें और नजर दोष से ग्रस्त व्यक्ति पर
फेंकें, व्यक्ति को दोष से मुक्ति मिलेगी।
मंत्र : तह कुठठ इलाही का बान। कूडूम की पत्ती
चिरावन। भाग भाग अमुक अंक से भूत। मारुं धुलावन
कृष्ण वरपूत। आज्ञा कामरु कामाख्या। हारि
दासीचण्डदोहाई।
थोड़ी सी हल्दी को ३ बार निम्नलिखित मंत्र से
अभिमंत्रित करके अग्नि में इस तरह छोड़ें कि उसका
धुआं रोगी के मुख की ओर जाए। इसे हल्दी बाण मंत्र
कहते हैं।
हल्दी गीरी बाण बाण को लिया हाथ उठाय।
हल्दी बाण से नीलगिरी पहाड़ थहराय॥ यह सब देख
बोलत बीर हनुमान। डाइन योगिनी भूत प्रेत मुंड
काटौ तान॥ आज्ञा कामरु कामाक्षा माई।
आज्ञा हाड़ि की चंडी की दोहाई॥
जौ, तिल, सफेद सरसों, गेहूं, चावल, मूंग, चना, कुष,
शमी, आम्र, डुंबरक पत्ते और अषोक, धतूरे, दूर्वा, आक
व ओगां की जड़ को मिला लें और उसमें दूध, घी, मधु
और गोमूत्र मिलाकर मिश्रण तैयार कर लें। फिर
संध्या काल में हवन करें और निम्न मंत्रों का १०८
बार जप कर इस मिश्रण से १०८ आहुतियां दें।
मंत्र : ओम नमः भवे भास्कराय आस्माक अमुक सर्व
ग्रहणं पीड़ा नाशनं कुरु-कुरु स्वाहा।
नजर दोष निवारक मंत्र व यंत्र
वायुमंडल में व्याप्त अदृश्य शक्तियों के दुष्प्रभाव से
ग्रस्त लोगों का जीवन दूभर हो जाता है। प्रत्यक्ष
रूप से दिखाई न देने के फलस्वरूप किसी
चिकित्सकीय उपाय से इनसे मुक्ति संभव नहीं
होती। ऐसे में भारतीय ज्योतिष तथा अन्य धर्म
ग्रंथों में वर्णित मंत्रों एवं यंत्रों के प्रयोग सहायक
सिद्ध हो सकते हैं। यहां कुछ ऐसे ही प्रमुख एवं अति
प्रभावशाली मंत्रों तथा यंत्रों के प्रयोगों के फल
और विधि का विवरण प्रस्तुत है। ये प्रयोग सहज और
सरल हैं, जिन्हें अपना कर सामान्य जन भी उन अदृश्य
शक्तियों से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं।
गायत्री मंत्र : गायत्री मंत्र वेदोक्त महामंत्र है,
जिसके निष्ठापूर्वक जप और प्रयोग से प्रेत तथा
ऊपरी बाधाओं, नजर दोषों आदि से मुक्ति प्राप्त
की जा सकती है। नियमित रूप से गायत्री मंत्र का
जप करने वालों को ये शक्तियां कभी नहीं
सताती। उन्हें कभी डरावने सपने भी नहीं आते।
गायत्री मंत्र से अभिमंत्रित जल से अभिषेक करने से
अथवा गायत्री मंत्र से किए गए हवन की भस्म धारण
करने से पीड़ित व्यक्ति को प्रेत बाधाओं, ऊपरी
हवाओं, नजर दोषों आदि से मुक्ति मिल जाती है।
इस महामंत्र का अखंड प्रयोग कभी निष्फल नहीं
होता।
मंत्र : ओम भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गोदेवस्य
धीमहि धियो योनः प्रचोदयात्।
प्रयोग विधि
गायत्री मंत्र का सवा लाख जप कर पीपल, पाकर,
गूलर या वट की लकड़ी से उसका दशांश हवन करें,
ऊपरी हवाओं से मुक्ति मिलेगी।
सोने, चांदी या तांबे के कलश को सूत्र से वेष्टित करें
और रेतयुक्त स्थान पर रखकर उसे गायत्री मंत्र पढ़ते हुए
जल से पूरित करें। फिर उसमें मंत्रों का जप करते हुए
सभी तीर्थों का आवाहन करके इलायची, चंदन,
कपूर, जायफल, गुलाब, मालती के पुष्प, बिल्वपत्र,
विष्णुकांता, सहदेवी, वनौषधियां, धान, जौ, तिल,
सरसों तथा पीपल, गूलर, पाकर व वट आदि वृक्षों के
पल्लव और २७ कुश डाल दें। इसके बाद उस कलश में भरे
हुए जल को गायत्री मंत्र से एक हजार बार
अभिमंत्रित करें। इस अभिमंत्रित जल को भूता
बाधा, नजर दोष आदि से पीड़ित व्यक्ति के ऊपर
छिड़कर उसे खिलाएं, वह शीघ्र स्वस्थ हो जाएगा।
इस प्रयोग से पैशाचिक उपद्रव भी शांत हो जाते हैं।
जो घर ऊपरी बाधाओं और नजर दोषों से प्रभावित
हो, उसमें गायत्री मंत्र का सवा लाख जप करके
तिल, घृत आदि से उसका दशांश हवन करें। फिर उस
हवन स्थल पर एक चतुष्कोणी मंडल बनाएं और एक
त्रिशूल को गायत्री मंत्र से एक हजार बार
अभिमंत्रित करके उपद्रवों और उपद्रवकारी
शक्तियों के शमन की कामना करते हुए उसके बीच
गाड़ दें।
किसी शुभ मुहूर्त में अनार की कलम और अष्टगंध की
स्याही से भोजपत्र पर नीचे चित्रांकित यंत्र की
रचना करें।
फिर इसे गायत्री मंत्र से अभिमंत्रित कर गुग्गुल की
धूप दें और विधिवत पूजन कर ऊपरी बाधा या
नजरदोष से पीड़ित व्यक्ति के गले में बांध दें, वह
दोषमुक्त हो जाएगा।
अमोघ हनुमत-मंत्र : ऊपरी बाधाओं और नजर दोष के
शमन के लिए निम्नोक्त हनुमान मंत्र का जप करना
चाहिए।
ओम ऐं ह्रीं श्रीं ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रीं ओम नमो
भगवतेमहाबल पराक्रमाय भूत-प्रेत-पिशाच-शाकिनी
डाकिनी- यक्षिणी-पूतना मारी महामारी यक्ष-
राक्षस भैरव-वेताल ग्रह राक्षसादिकम क्षणेन हन हन
भंजय मारय मारय शिक्षय शिक्षय महामारेश्वर
रुद्रावतार हुं फट स्वाहा।
इस मंत्र को दीपावली की रात्रि, नवरात्र अथवा
किसी अन्य शुभ मुहूर्त में या ग्रहण के समय हनुमान
जी के किसी पुराने सिद्ध मंदिर में ब्रह्मचर्य पूर्वक
रुद्राक्ष की माला पर दस हजार बार जप कर उसका
दशांश हवन करके सिद्ध कर लेना चाहिए ताकि
कभी भी अवसर पड़ने पर इसका प्रयोग किया जा
सके।
सिद्ध मंत्र से अभिमंत्रित जल प्रेत बाधा या नजर
दोष से ग्रस्त व्यक्ति को पिलाने तथा इससे
अभिमंत्रित भस्म उसके मस्तक पर लगाने से वह इन
दोषों से मुक्त हो जाता है।
उक्त सिद्ध मंत्र से एक कील को १००८ बार
अभिमंत्रित कर उसे भूत-प्रेतों के प्रकोप तथा नजर
दोषों से पीड़ित मकान में गाड़ देने से वह मकान
कीलित हो जाता है तथा वहां फिर कभी किसी
प्रकार का पैशाचिक अथवा नजर दोषजन्य उपद्रव
नहीं होता।
भूत-प्रेता बाधा नाशक यंत्र इस यंत्र को सिद्ध करने
हेतु इसे सूर्य ग्रहण, चंद्र ग्रहण अथवा दीपावली की
रात्रि में अनार की कलम तथा अष्टगंध से भोजपत्र
पर ३४ बार लिखकर और धूप-दीप देकर किसी नदी में
प्रवाहित करें। तत्पश्चात इस यंत्र को पुनः लिखकर
विधिवत पूजन कर अपने पास रखें, हर प्रकार की प्रेत
बाधा से बचाव होगीl
ऊपरी हवाओं से बचाव के कुछ अनुभूत प्रयोग
लहसुन के तेल में हींग मिलाकर दो बूंद नाक में डालने,
नीम के पत्ते, हींग, सरसों, बच व सांप की केंचुली की
धूनी देने तथा रविवार को काले धतूरे की जड़ हाथ
में बांधने से ऊपरी बाधा दूर होती है। इसके
अतिरिक्त गंगाजल में तुलसी के पत्ते व काली मिर्च
पीसकर घर में छिड़कने, गायत्री मंत्र के (सुबह की
अपेक्षा संध्या समय किया गया गायत्री मंत्र का
जप अधिक लाभकारी होता है) जप, हनुमान जी
की नियमित रूप से उपासना, राम रक्षा कवच या
रामवचन कवच के पाठ से नजर दोष से शीघ्र मुक्ति
मिलती है। साथ ही, पेरीडॉट, संग सुलेमानी,
क्राइसो लाइट, कार्नेलियन जेट, साइट्रीन,
क्राइसो प्रेज जैसे रत्न धारण करने से भी लाभ
मिलता है।
उतारा : उतारा शब्द का तात्पर्य व्यक्ति विशेष पर
हावी बुरी हवा अथवा बुरी आत्मा, नजर आदि के
प्रभाव को उतारने से है। उतारे आमतौर पर
मिठाइयों द्वारा किए जाते हैं, क्योंकि
मिठाइयों की ओर ये श्ीाघ्र आकर्षित होते हैं।
उतारा करने की विधि :
उतारे की वस्तु सीधे हाथ में लेकर नजर दोष से
पीड़ित व्यक्ति के सिर से पैर की ओर सात अथवा
ग्यारह बार घुमाई जाती है। इससे वह बुरी आत्मा
उस वस्तु में आ जाती है। उतारा की क्रिया करने के
बाद वह वस्तु किसी चौराहे, निर्जन स्थान या
पीपल के नीचे रख दी जाती है और व्यक्ति ठीक
हो जाता है।
किस दिन किस मिठाई से उतारा करना चाहिए,
इसका विवरण यहां प्रस्तुत है।
रविवार को तबक अथवा सूखे फलयुक्त बर्फी से
उतारा करना चाहिए। सोमवार को बर्फी से
उतारा करके बर्फी गाय को खिला दें। मंगलवार को
मोती चूर के लड्डू से उतार कर लड्डू कुत्ते को खिला
दें। बुधवार को इमरती से उतारा करें व
उसे कुत्ते को खिला दें। गुरुवार को सायं काल एक
दोने में अथवा कागज पर पांच मिठाइयां रखकर
उतारा करें। उतारे के बाद उसमें छोटी इलायची रखें
व धूपबत्ती जलाकर किसी पीपल के वृक्ष के नीचे
पश्चिम दिशा में रखकर घर वापस जाएं। ध्यान रहे,
वापस जाते समय पीछे मुड़कर न देखें और घर आकर
हाथ और पैर धोकर व कुल्ला करके ही अन्य कार्य
करें।शुक्रवार को मोती चूर के लड्डू से उतारा कर
लड्डू कुत्ते को खिला दें या किसी चौराहे पर रख
दें। शनिवार को उतारा करना हो तो इमरती या
बूंदी का लड्डू प्रयोग में लाएं व उतारे के बाद उसे
कुत्ते को खिला दें।
इसके अतिरिक्त रविवार को सहदेई की जड़, तुलसी
के आठ पत्ते और आठ काली मिर्च किसी कपड़े में
बांधकर काले धागे से गले में बांधने से ऊपरी हवाएं
सताना बंद कर देती हैं।
नजर उतारने अथवा उतारा आदि करने के लिए कपूर,
बूंदी का लड्डू, इमरती, बर्फी, कड़वे तेल की रूई की
बाती, जायफल, उबले चावल, बूरा, राई, नमक,
काली सरसों, पीली सरसों मेहंदी, काले तिल,
सिंदूर, रोली, हनुमान जी को चढ़ाए जाने वाले
सिंदूर, नींबू, उबले अंडे, गुग्गुल, शराब, दही, फल, फूल,
मिठाइयों, लाल मिर्च, झाडू, मोर छाल, लौंग,
नीम के पत्तों की धूनी आदि का प्रयोग किया
जाता है।
स्थायी व दीर्घकालीन लाभ के लिए संध्या के
समय गायत्री मंत्र का जप और जप के दशांश का
हवन करना चाहिए। हनुमान जी की नियमित रूप से
उपासना, भगवान शिव की उपासना व उनके मूल
मंत्र का जप, महामृत्युंजय मंत्र का जप, मां दुर्गा और
मां काली की उपासना करें। स्नान के पश्चात् तांबे
के लोटे से सूर्य को जल का अर्य दें। पूर्णमासी को
सत्यनारायण की कथा स्वयं करें अथवा किसी
कर्मकांडी ब्राह्मण से सुनें। संध्या के समय घर में
दीपक जलाएं, प्रतिदिन गंगाजल छिड़कें और
नियमित रूप से गुग्गुल की धूनी दें। प्रतिदिन शुद्ध
आसन पर बैठकर सुंदर कांड का पाठ करें। किसी के
द्वारा दिया गया सेव व केला न खाएं। रात्रि
बारह से चार बजे के बीच कभी स्नान न करें।
बीमारी से मुक्ति के लिए नीबू से उतारा करके उसमें
एक सुई आर-पार चुभो कर पूजा स्थल पर रख दें और
सूखने पर फेंक दें। यदि रोग फिर भी दूर न हो, तो
रोगी की चारपाई से एक बाण निकालकर रोगी के
सिर से पैर तक छुआते हुए उसे सरसों के तेल में अच्छी
तरह भिगोकर बराबर कर लें व लटकाकर जला दें और
फिर राख पानी में बहा दें।
उतारा आदि करने के पश्चात भलीभांति कुल्ला
अवश्य करें।
इस तरह, किसी व्यक्ति पर पड़ने वाली किसी अन्य
व्यक्ति की नजर उसके जीवन को तबाह कर सकती
है। नजर दोष का उक्त लक्षण दिखते ही ऊपर वर्णित
सरल व सहज उपायों का प्रयोग कर उसे दोषमुक्त
किया जा सकता है।

क्या करें, क्या न करें:-
1. किसी निर्जन एकांत या जंगल आदि में मलमूत्र
त्याग करने से पूर्व उस स्थान को भलीभांति देख
लेना चाहिए कि वहां कोई ऐसा वृक्ष तो नहीं है
जिस पर प्रेत आदि निवास करते हैं अथवा उस स्थान
पर कोई मजार या कब्रिस्तान तो नहीं है।
2. किसी नदी तालाब कुआं या जलीय स्थान में
थूकना या मल-मूत्र त्याग करना किसी अपराध से
कम नहीं है क्योंकि जल ही जीवन है। जल को
प्रदूषित करने स जल के देवता वरुण रूष्ट हो सकते हैं।
3. घर के आसपास पीपल का वृक्ष नहीं होना
चाहिए क्योंकि पीपल पर प्रेतों का वास होता है।
4. सूर्य की ओर मुख करके मल-मूत्र का त्याग नहीं
करना चाहिए।
5. गूलर मौलसरी, शीशम, मेहंदी आदि के वृक्षों पर
भी प्रेतों का वास होता है। रात के अंधेरे में इन
वृक्षों के नीचे नहीं जाना चाहिए और न ही
खुशबुदार पौधों के पास जाना चाहिए।
6. सेब एकमात्र ऐसा फल है जिस पर प्रेतक्रिया
आसानी से की जा सकती है। इसलिए किसी
अनजाने का दिया सेब नहीं खाना चाहिए।
7. कहीं भी झरना, तालाब, नदी अथवा तीर्थों में
पूर्णतया निर्वस्त्र होकर या नग्न होकर नहीं
नहाना चाहिए।
8. अगर प्रेतबाधा की आशंका हो तो.घर में
प्राणप्रतिष्ठा की बजरंगबलि हनुमान की
सुसज्जित प्रतिमा और हनुमान चालीसा रखनी
चाहिए।
9. प्रतिदिन प्रातःकाल घर में गंगाजल का
छिड़काव करना चाहिए।
10. प्रत्येक पूर्णमासी को घर में सत्यनारायण की
कथा करवाएं।
11. सूर्यदेव को प्रतिदिन जल का अघ्र्य देना
प्रेतवाधा से मुक्ति देता है।
12. घर में ऊंट की सूखी लीद की धूनी देकर भी प्रेत
बाधा दूर हो जाती है।
13. घर में गुग्गल धूप की धूनी देने से प्रेतबाधा नहीं
होती

 


उपाय लाल किताब से (Redbook Remedy)

हनुमान जी के सिंदूर का प्रयोग कर गुस्से और जिद पर काबू पायें
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हर माता – पिता की यही प्रयास करते हैं कि वो अपने बच्चों को अच्छी परवरिश तथा अच्छा जीवन दें. जिसके लिए वो अपने बच्चों की हर इच्छा को पूर्ण कर देते हैं. लेकिन कभी – कभी बच्चों के द्वारा कुछ ऐसी वस्तुओं की मांग की जाती हैं. जिनको पूरा कर पाना उनके माता – पिता के लिए असंभव हो जाता हैं. ऐसी स्थिति में कुछ बच्चे अपने माता – पिता से गुस्सा हो जाते हैं और अपनी मांग की पूर्ति हेतु जिद्द करते हैं. अगर इसके बाद लगातार बच्चों की बातों को माता – पिता नजरअंदाज करने लगते हैं तो गुस्सा और जिद्द उनके व्यवहार में निहित हो जाता हैं. जिसके बुरे परिणाम का भी कई बार बच्चों के साथ – साथ उनके माता – पिता को सामना करना पड़ता हैं. यदि आपका बच्चा भी जिद्दी हैं और उसे जल्द ही गुस्सा आ जाता हैं. तो नीचे दिए गये उपायों का प्रयोग जरूर करें.

हनुमान चालीसा एक चमत्कारी रामबाण उपाय
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1.कभी – कभी बच्चे अपनी छोटी – छोटी बातों को मनवाने के लिए जिद्द करने लग जाते हैं. जिससे जिद्द करना उनकी आदत बन जाती हैं. अपने बच्चे की जिद्द करने की प्रवृति को कम करवाने के लिए आप पहले तो बच्चों को आराम से प्यार से समझाएं. अगर वो इसके बाद भी न माने तो नीचे अगला प्रयोग आजमायें।

गुस्से और जिद्द पर काबू कैसे पायें
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2.शास्त्रों के अनुसार यदि कोई बच्चा बहुत ज्यादा जिद्दी हो, छोटी – छोटी बातों पर गुस्सा हो जाता हो, माता – पिता की बात बिल्कुल न सुनता हो, जिद्द के कारण ही जमीन पर लेट जाता हो, चिडचिडापन उसके व्यवहार की मुख्य प्रवृति बन गई हो. तो इसके लिए किसी प्रतिष्ठित हनुमान जी के मंदिर में शनिवार और मंगलवार को जाएँ और उनके बायें पैर का सिंदूर लेकर उसके माथे पर लागायें. हर मंगलवार और शनिवार के दिन इस प्रयोग को करने से आपका बच्चा जिद्द करना और गुस्सा करना बिल्कुल छोड़ देगा.

हनुमान जी के सिंदूर का महत्व
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हनुमान जी के दोनों पैरों पर लगा सिंदूर बहुत ही प्रभावशाली होता हैं. ऐसा माना जाता हैं कि इस सिंदूर का तिलक जब कोई भी व्यक्ति अपने मस्तिष्क पर लगता हैं. तो हनुमान जी उस व्यक्ति को सद्बुद्धि प्रदान करते हैं. इसीलिए हनुमान जी को बल और बुद्धि का दाता भी माना जाता हैं तथा इसीलिए जो व्यक्ति या बच्चे ज्यादा जिद्दी या गुस्सैल होते हैं. उनके लिए यह सिंदूर बहुत ही उपयोगी सिद्ध होता हैं. हनुमान जी के सिंदूर को लगाने के बाद व्यक्ति का गुस्सा जैसे – एक दम से ही गायब हो जाता हैं और जिद्द धीरे – धीरे ख़त्म हो जाती हैं. हनुमान जी के सिंदूर को लगाने से व्यक्ति को इन दोनों ही चीजों से मुक्ति तो मिलती ही हैं. इसके साथ ही उन्हें पुण्य लाभ भी प्राप्त होता।

 


आर्थिक तंगी व ग्रह दोष होंगे शांत

सभी देवों में सर्वप्रथम श्रीगणेश जी की पूजा की जाती है। बुधवार के दिन गणेश पूजा का विधान है। इस दिन भगवान गणेश की सच्चे मन से पूजा करने से संपूर्ण मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसके साथ ही ग्रह दोष भी शांत होते हैं। बुधवार के दिन कुछ सरल उपाय करने से व्यक्ति की बाधा, संकट, रोग, दरिद्रता का नाश होता है। जानिए, भगवान गणेश जी को प्रसन्न करने के उपाय-
 बुधवार के दिन सुबह उठकर स्नानादि कार्यों से निवृत होकर गणेश जी के मंदिर में जाकर दूर्वा की 11 या 21 गांठ अर्पित करें। इससे शीघ्र शुभ फल की प्राप्ति होगी।
 अथक प्रयास के बाद भी कार्यों में असफलता मिल रही हो तो बुधवार के दिन श्रीगणेश के इस मंत्र का विधि-विधान से जाप करें। ऐसा करने से व्यक्ति को संपूर्ण कष्टों से मुक्ति मिलेगी।
यदि अधिक मेहनत करने के बाद भी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़े तो बुधवार के दिन श्री गणेश की विधिवत पूजा करने के बाद गुड़ घी का भोग लगाएं। थोड़ी देर के बाद ये भोग गाय को खिला दें। इससे व्यक्ति को विशेष फल की प्राप्ति होगी।
बुधवार के दिन घर में श्रीगणेश की सफेद रंग की प्रतिमा स्थापित करें। इससे घर की सारी नकारात्मक ऊर्जा का नाश होगा। घर में कभी भी ऊपरी शक्तियों का साया नहीं रहेगा।
घर में सदैव कलह होने से परिवार में सुख-शांति नहीं रहती। इसके लिए बुधवार को दूर्वा से निर्मित प्रतिकात्मक प्रतिमा बनवाकर उसे घर के पूजा स्थल में स्थापित करें। उसके बाद प्रतिदिन उनका विधि-विधान से पूजन करें।
बुधवार के दिन गाय को हरी घास खिलाएं। ऐसा करने से सभी देवी-देवता की कृपा सदैव बनी रहती है।
हनुमानजी के साथ श्रीगणेश जी का सिंदूर से श्रृंगार किया जाता है। श्रीगणेश जी को सिंदूर अर्पित करने से सभी परेशानियों से मुक्ति मिलती है।
बुधवार को किसी गरीब या मंदिर में जाकर हरे मूंग दान करें। इससे बुध ग्रह शांत हो जाएगा।
बुधवार के दिन गणेश जी को शमी के पत्ते अर्पित करें। ऐसा करने से तीक्ष्ण बुद्धि होती है। इसके साथ ही कलह का नाश होता है मानसिक शांति मिलती है। शमी के पत्ते अर्पित करते समय इस मंत्र का जाप करें। इससे गणेश जी शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

 


उपाय लाल किताब से (Redbook Remedy)

आजकल के समय में जमीन जायदाद में पैसा लगना फायदे का सौदा है और यह लाभ भी देता है कभी कभी जब समय पर मकान या जमीन उचित कीमत पर नहीं बिक पाती तब यह सौदा घाटे का लगने लगता है समय पर मकान के ना बिकने से उस समय धन की बड़ी समस्या हो जाती है इसिलए इसको बेचना बड़ा ही जरूरी हो जाता है हम यहाँ रावण संहिता के उपाय बता रहे हैं जिससे मकान या और कोई जमीन जायदाद जल्दी और उचित कीमत पर बिक जाती है
इस उपाय को सोमवार से शुरू किया जाना चाहिए
सुबह एक २५० ग्राम चाय की पत्ती लेकर अपनी जमीन या मकान पर जाकर वहां रख दें थोड़ी देर बाद उसे उठाकर किसी जमादार को दे दें यह कार्य २१ दिन लगातार करें
और शिवजी को गन्ने का रस चढ़ाएं २१ दिन बाद अपनी मनोकामना बोलते हुए एक जोड़ा पक्षी खरीदकर आजाद करवा दें चमत्कार जरूर दिखेगा

 


उपाय लाल किताब से (Redbook Remedy)

यदि घर में वास्तु दोष हो तो उसके कारण परिवार के सभी सदस्यों पर कोई न कोई बुरा प्रभाव जरूर पड़ता है। यह दुष्प्रभाव किसी भी रूप में हो सकता है। यदि परिवार में किसी का विवाह नहीं हो रहा हो अथवा होने में देरी हो रही है,तो इसका कारण भी वास्तु दोष हो सकता है। यदि आप भी अपनी संतान के विवाह में हो रही देरी से परेशान हैं,तो एक बार घर के वास्तु दोषों पर जरूर विचार करें और आगे बताए गए उपाय करें
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विवाह योग्य युवक-युवती जिस पलंग पर सोते हैं, उसके नीचे बेकार सामान नहीं रखना चाहिए इससे विवाह योग में बाधा होती है ।
विवाह योग्य युवक-युवतियों को उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थित कमरे में रहना चाहिए ।इससे उनके विवाह के प्रस्ताव आने लगते हैं ।
कमरे एवं दरवाजे का रंग गुलाबी, हल्का पीला या सफेद (चमकीला) हो तो विवाह में आ रही परेशानियाँ दूर हो जाती हैं ।
मंगल दोष हो तो दरवाजे का रंग लाल अथवा गुलाबी रखने से मंगल दोष का प्रभाव कम होता है व विवाह के प्रस्ताव आने लगते हैं ।
घर आए अतिथियों को इस प्रकार बैठाएं कि उनका मुख घर में अंदर की ओर हो । इससे विवाह के योग बनने की संभावना बढ़ जाती है ।
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🌹हर तरह के संकट दूर करने के लिए🌹
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आपके जीवन में मनमुटाव के साथ-साथ कलह और अशांति का वातावरण बना रहता है, या लगातार समस्याएं बनी रहती हैं तो हम बता रहे हैं कुछ ऐसे उपाय जो आपके मन में शांति बनाएँ रखने के साथ ही समस्या को हल करने में मददगार साबित होंगे। जानिए यह सरल और छोटे उपाय...
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🌹नौकरी पाने के लिए🌹
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शनिवार व मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें ।सुबह तीन इलायची दाएं हाथ में लेकर लक्ष्मी बीज मंत्र " ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः || का ११ बार जप करें और इलायची खाने के बाद जाॅब इंटरव्यू के लिए जाएँ ।
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🌹संकट से मुक्ति के लिए🌹
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शनिवार व मंगलवार को एक नारियल अपने ऊपर से उतारकर किसी देव स्थान की अग्निकुंड में डाल दें ।ऐसा पाँच बार करें ।हर तरह के संकट व बीमारी दूर होने लगेंगी ।
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🌹कर्ज से मुक्ति का उपाय🌹
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शनिवार को हनुमानजी के मंदिर में ऋणमोचक मंगल स्त्रोत का पाठ करें साथ ही, अपनी लंबाई के बराबर एक काला धागा लेकर उसे नारियल में लपेटें और बहती नदी में प्रवाहित कर दें ।
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🌹प्लॉट, मकान, दुकान या भूमि बेचने हेतु🌹
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गुरुवार के दिन पाँच कौड़ियों को काले धागे में बाँधकर उसे बबूल की जड़ में बाँध दें ।फिर इसमें आप अपने प्लाट, भूमि, मकान या दुकान की थोड़ी मिट्टी लाकर डाल दें । इसके बाद ५० ग्राम तेल उन पर चढ़ाना हैं ।यह ५० ग्राम तेल आपको प्रतिदिन अगले गुरुवार तक चढ़ाना है ।
    


उपाय लाल किताब से (Redbook Remedy)

शीघ्र विवाह के सरल एवं आसान उपाय l

1. जन्मकुंडली में कई ऐसे योग होते हैं जिनकी वजह से कोई भी पुरुष या स्त्री विवाह की खुशी से वंचित रह सकते हैं….कई बार ये रूकावट बाहरी बाधाओं की वजह से भी आती हैं. उम्र लगातार बढती जाती है और लाख प्रयास के बाद भी रिश्ते बन नहीं पाते हैं या मनचाहे रिश्तों का तो जैसे आकाल ही पड़ जाता है इस प्रकार की स्थिति होने पर शीघ्र विवाह के उपाय करने में समझदारी रहती है. इन उपाय को करने से शीघ्र विवाह के मार्ग बनते है, तथा विवाह मार्ग की समस्त बाधाएं दूर होती है| यहाँ पर हम कुछ बहुत ही आसान किन्तु अचूक उपाय बता रहे है जिनको सच्चे मन से करने से वर एवं कन्या दोनों को ही निश्चित रूप से मनवांछित लाभ प्राप्त होगा।

2. शीघ्र विवाह के लिए सोमवार को १२०० ग्राम चने की दाल व सवा लीटर कच्चे दूध का दान करें| यह प्रयोग तब तक करते रहना है जब तक कि विवाह न हो जाय|

3. कन्या जब किसी कन्या के विवाह में जाये और यदि वहाँ पर दुल्हन को मेहँदी लग रही हो तो अविवाहित कन्या कुछ मेहँदी उस दुल्हन के हाथ से लगवा ले इससे विवाह का मार्ग शीघ्र प्रशस्त होता है|

4. विवाह वार्ता के लिए घर आए अतिथियों को इस प्रकार बैठाएं कि उनका मुख घर में अंदर की ओर हो, उन्हें द्वार दिखाई न दे।

5.विवाह योग्य युवक-युवती जिस पलंग पर सोते हों उसके नीचे लोहे की वस्तुएं या कबाड़ का सामान कभी भी नहीं रखना चाहिए।

6. यदि विवाह के पूर्व लड़का-लड़की मिलना चाहें तो वह इस प्रकार बैठे कि उनका मुख दक्षिण दिशा की ओर न हो।

7. कन्या सफेद खरगोश को पाले तथा अपने हाथ से उसे भोजन के रूप में कुछ दे|

8. कन्या के विवाह की चर्चा करने उसके घर के लोग जब भी किसी के यहाँ जायें तो कन्या खुले बालों से,लाल वस्त्र धारण कर हँसते हुए उन्हें कोई मिष्ठान खिला कर विदा करे| विवाह की चर्चा सफल होगी|

9. पूर्णिमा को वट वृक्ष की १०८ परिक्रमा देने से भी विवाह बाधा दूर होती है|

10. गुरूवार को वट वृक्ष, पीपल, केले के वृक्ष पर जल अर्पित करने से विवाह बाधा दूर होती है|

मन्त्र---

गौरी आवे ,शिव जो ब्यावे.अमुक का विवाह तुरंत सिद्ध करेँ, देर ना करेँ, जो देर होए , तो शिव को त्रिशूल पड़े, गुरु गोरखनाथ की दुहाई फिरै ।।

अमुक के स्थान पर जिस लड़की का विवाह न हो रहा हो उसका नाम लिख सकते है ! 


उपाय लाल किताब से (Redbook Remedy)

कैसे मिले कचेहरी में विजय
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कैसे मिले कचेहरी में विजय
जब भी आप अदालत में जाएँ तो किसी भी हनुमान मंदिर में धूप अगरबत्ती जलाकर, लड्डू या गुड चने का भोग लगाकर एक बार हनुमान चालीसा और बजरंग बान का पाठ करके संकटमोचन बजरंग बलि से अपने मुकदमे में सफलता की प्रार्थना करें आपको निसंदेह सफलता प्राप्त होगी ।
आप जब भी अदालत जाएँ तो गहरे रंग के कपड़े ही पहन कर जाएँ ।
अपने अधिवक्ता को उसके काम की कोई भी वास्तु जैसे कलम उपहार में अवश्य ही प्रदान करें ।
अपने कोर्ट के केस की फाइलें घर में बने मंदिर धार्मिक स्थान में रखकर ईश्वर से अपनी सफलता, अपनी रक्षा के लिए प्रार्थना करें ।
यदि ग्यारह हकीक पत्थर लेकर किसी मंदिर में चदा दें और कहें की मैं अमुक कार्य में विजय होना चाहता हूँ तो निश्चय ही उस कार्य में विजय प्राप्त होती है ।
यदि आप पर कोई मुसीबत आन पड़ी हो कोई रास्ता न सूझ रहा हो या आप कोर्ट कचहरी के मामलों में फँस गए हों, आपका धैर्य जबाब देने लगा हो, जीवन केवल संघर्ष ही रह गया हो, अक्सर हर जगह अपमानित ही महसूस करते हों, तो आपको सात मुखी, पंचमुखी अथवा ग्यारह मुखी रुद्राक्ष धारण करने चाहियें ।
मुकदमे में विजय हेतु कोर्ट कचहरी में जाने से पहले ५ गोमती चक्र को अपनी जेब में रखकर , जो स्वर चल रहा हो वह पाँव पहले कोर्ट में रखे अगर स्वर ना समझ आ रहा हो तो दाहिना पैर पहले रखे , मुकदमे में निर्णय आपके पक्ष में होने की संभावना प्रबल होगी ।
जब आप पहली बार मुकदमें से वापिस आ रहे तो रास्ते में किसी भी मजार में गुलाब का पुष्प अर्पित करते हुए ही अपने निवास पर आएँ ।
मुकदमें अथवा किसी भी प्रकार के वाद विवाद में सफलता हेतु लाल ध् सिंदूरी मूँगा त्रिकोण की आक्रति का सोने या तांबे मिश्रित अंगूठी में बनवाकर उसे दाहिने हाथ के अनामिका उंगली में धारण करें , इससे सफलता की संभावना और अधिक हो जाती है ।
मुकदमें में विजय प्राप्ति हेतु घर के पूजा स्थल में सिद्धि विनायक पिरामिड स्थापित करके प्रत्येक बुधवार को गन गणपतए नमो नमः मंत्र का जाप करें । जब भी अदालत जाएँ इस पिरामिड को लाल कपड़े में लपेटकर अपने साथ ले जाएँ ,आपको शीघ्र ही सफलता प्राप्त होगी ।
यदि आपका किसी के साथ मुकदमा चल रहा हो और आप उसमें विजय पाना चाहते हैं तो थोडे से चावल लेकर कोर्ट / कचहरी में जांय और उन चावलों को कचहरी में कहीं पर फेंक दें ! जिस कमरे में आपका मुकदमा चल रहा हो उसके बाहर फेंकें तो ज्यादा अच्छा है ! परंतु याद रहे आपको चावल ले जाते या कोर्ट में फेंकते समय कोई देखे नहीं वरना लाभ नहीं होगा ! यह उपाय आपको बिना किसी को पता लगे करना होगा ।
अगर आपको किसी दिन कोर्ट कचहरी या किसी भी महत्वपूर्ण काम के लिए जाना हो , तो आप एक कागजी नींबू लेकर उसके चारों कोनो में एक साबुत लौंग गाड़ दें और ईश्वर से अपने कार्यों के सफलता के लिए प्रार्थना करते हुए उसे अपनी जेब में रखकर ही कहीं जाएँ ,उस दिन आपको सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होगी ।
भोज पत्र पर लाल चन्दन से अपने शत्रु का लिखकर शुद्द शहद में डुबोने से शत्रु के मन में आपके प्रति प्रेम और सहानुभूति के भाव जाग्रत हो जाते है।
सूर्योदय से पूर्व काले चावल के 11 दाने क्रीं बीज मन्त्र का 21 बार उच्चारण करते हुए दक्षिण दिशा में डाल दें शत्रु का व्यवहार आपके प्रति बदलना शुरू हो जायेगा ।
यदि आपको लगता है की आप सही है आपको गलत फंसाया गया है तो आप जब भी अदालत जाएँ लाल कनेर का फूल भिगो कर उसे पीस कर उसका तिलक लगा कर अदालत में जाएँ परिस्थितियाँ आपके अनुकूल होने लगेगी ।
एक मुट्ठी तिल में शक्कर मिलाकर किसी सुनसान जगह में ईश्वर से अपने शत्रु पर विजय की प्रार्थना करते हुए डाल दें फिर वापस आ जाएँ पीछे मुड़ कर न देखे शत्रु पक्ष धीरे धीरे शांत हो जायेगा ।
जिस दिन न्यायालय जाना हो उस दिन तीन साबुत काली मिर्च के दाने थोड़ी सी शक्कर के साथ मुँह में डालकर चबाते हुए जाएँ, न्यायालय में अनुकूलता रहेगी ।
यदि पके वकील में ही आपके केस में विजय के प्रति संदेह हो, गवाह के मुकरने या आपके विरुद्ध होने का खतरा हो, जज आपके विपरीत हो तो विधि पूर्वक हत्था जोड़ी को अपने साथ ले जाएँ , आप चमत्कारी परिवर्तन महसूस करेंगे । 


उपाय लाल किताब से (Redbook Remedy)
ग्रह दोष निवारण के सरल/आसन उपाय
– घर की पूर्व दिशा में लगे हुए किसी भी वट वृक्ष की जड़ को शुभ मुहूर्त में निकालकर पास रखने से राहु ग्रह की पीड़ा शांत होती है.
 
– यदि राहु ग्रह के अशुभ प्रभाव को दूर करना हो तो जल में २ वट पत्र को डालकर उस जल से स्नान करना चाहिए. यह राहु के दुष्प्रभाव को मिटाने का सरल और प्रभावी तरीका है.
 
– चतुर्दशी के दिन वट वृक्ष की जड़ में दूध चढ़ाने से देव बाधा दूर होती है.
 
– गिरी के गोले में छेद करके उसमें मेवा और शक्कर भर दें तथा उसे जमीन में दबा दें. इससे केतु ग्रह का प्रभाव शांत होता है.
 
– महालक्ष्मी पूजन के समय सीताफल को शामिल करने से दरिद्रता योग का नाश होता है. दीपावली पर इसे पूजन में रखना शुभ होता है.
 
– चन्द्र ग्रह की पीड़ा शांत करने हेतु चमेली के पुष्प से चन्द्र पूजन करना चाहिए.
 
– शिवजी को नित्य चमेली का फूल अर्पित करने से भूत बाधा दूर होती है.
 
– जिस व्यक्ति को नजर लगी हो तो उसके ऊपर लोहे की कील ११ बार उतारकर गूलर वृक्ष के तने में ठोंक दें नजर उतर जाती है. दुकान,व्यापार की नजर उतारने के लिए भी यह प्रयोग किया जा सकता है.
 
– किसी भी प्रकार के प्रमेह को दूर करने के लिए गूलर की लकड़ी का शहद और गन्ने के रस के साथ हवन करना चाहिए. इससे डायबिटीज़ का शमन होता है.
 
– मेष राशि के सूर्य के समय एक मसूर तथा दो नीम की पत्तियों को खाने से एक साल तक सर्प भय नहीं रहता.
 
– अनिंद्रा की स्थिति में मेहँदी के फूल सिरहाने रखने चाहिए. नींद आती है.
 
– बिल्ब, देवदारु और प्रियंगु की जड़ों को एक साथ कूटकर चूर्ण बना लें. इस चूर्ण की धूनी देने से भूत प्रेत भाग जाते हैं.
 
– भविष्य पुराण के अनुसार जो व्यक्ति पलाश का पुष्प शिवजी पर अर्पित करता है उसे भूत बाधा और पितर दोष नहीं सताते हैं.
 
– व्याधियों के शमन के लिए पलाश के पत्तों की पत्तल में कुछ दिन निरंतर भोजन करना चाहिए।पं रामनिवास गुरु


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