यंत्र मंत्र तंत्र (Exorcism Mechanism)



कर्ज मुक्ति🕉
प्रिय दोस्तो बहुत से लोगो के फोन आते है की कर्ज से छूटकारे के लिए कोइ उपाय या कोइ टोटका बतांइए,दोस्तो आज हम कर्ज मुक्ति के टोटको पर ही बात करेंगे निराश ओर परेसान व्ययक्ति इन्हे आजमाकर अपने जिवन मे खुशिया लाइए........
व्यक्ति को ऋण मुक्त कराने में यह टोटका अवश्य सहायता करेगा : मंगलवार को शिव मन्दिर में जा कर शिवलिंग पर मसूर की दाल “ॐ ऋण मुक्तेश्वर महादेवाय नम:´´ मंत्र बोलते हुए चढ़ाएं।  निरन्तर कर्ज घेरे रहते हैं
.......
सोमवार के दिन एक रूमाल, 5 गुलाब के फूल, 1 चांदी का पत्ता, थोड़े से चावल तथा थोड़ा सा गुड़ लें। फिर किसी विष्णुण्लक्ष्मी जी के मिन्दर में जा कर मूर्त्ति के सामने रूमाल रख कर शेष वस्तुओं को हाथ में लेकर 21 बार गायत्री मंत्र का पाठ करते हुए बारी-बारी इन वस्तुओं को उसमें डालते रहें। फिर इनको इकट्ठा कर के कहें की `मेरी परेशानियां दूर हो जाएं तथा मेरा कर्जा उतर जाए´। यह क्रिया आगामी 7 सोमवार और करें। कर्जा जल्दी उतर जाएगा तथा परेशानियां भी दूर हो जाएंगी।    जल में प्रवाहित करे........
 
पांच ऐसे लाल गुलाब लें, जो पूरी तरह से खिले हुए हों। अब डेढ़ मीटर सफेद कपड़ा लेकर उसमें इन पांचों गुलाबों को गायत्री मंत्र पढ़ते हुए बांध दें। इसे जाकर बहते जल में प्रवाहित कर दें।    ऋण मुक्ति के लिये....
 
आप अपने कारोबार में कर्जे से डूबे जा रहे है रात-दिन मेहनत करने के उपरांत भी कर्जा उतरने का नाम ही नहीं ले रहा है तो यह प्रयोग आपके लिये बहुत ही अनुकूल व फायदेमंद रहेगा। किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के प्रथमा के दिन नित्यक्रम से निवृत्त होकर स्नानोपंरात स्वच्छ वस्त्र धारण करें और अपने पूजा स्थान में यह पूजा प्रारंभ करें। 6 इंच लम्बी गूलर की पेड़ की जड़ ले उसके ऊपर 108 बार काले रंग का धागा ॐ गं गणपतये नम:मंत्र का जाप करते हुये लपेटे। भगवान गणेश जी से ऋण मुक्ति की प्रार्थना करें। 108 चक्र होने के बाद इस लकड़ी को स्वच्छ थाली में पीला वस्त्र बिछाकर रख दें। तत्पश्चात श्रद्धानुसार धूप,दीप, नैवद्य, पुष्प अर्पित करें। घी का दीपक प्रज्जवलित कर उसमें एक इलायची डाल दें। शुद्ध आसन बिछाकर अपने सामने हल्दी से रंगे हुये अक्षत रख लें। अपने हाथ में थोड़े से अक्षत लें ॐ गं गणपतये ऋण हरताये नम:मंत्र का जाप करके अक्षत गूलर की लकड़ी के ऊपर छोड़ दे। ऐसा 108 बार करें। अगले दिन यह प्रक्रिया पुन:दोहरायें। ऐसा नवमी तक पूजन करें। नवमी के दिन रात में सवा ग्यारह बजे पुन:एक बार पूजन करें। ऋण हरता गणपति की 11 माला जाप करें। तत्पश्चात इस लकड़ी को अपने ऊपर से 11 बार उसार कर के अपने घर के किसी कोने में गड्डा खेंद कर दबा दे। उसके ऊपर कोई भारी वस्तु रख दें। ऐसा करने से कर्ज से छुटकारा मिल जायेगा।          ऋण मुक्ति के लिये
 
आप अपने कारोबार में कर्जे से डूबे जा रहे है रात-दिन मेहनत करने के उपरांत भी कर्जा उतरने का नाम ही नहीं ले रहा है तो यह प्रयोग आपके लिये बहुत ही अनुकूल व फायदेमंद रहेगा। किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के प्रथमा के दिन नित्यक्रम से निवृत्त होकर स्नानोपंरात स्वच्छ वस्त्र धारण करें और अपने पूजा स्थान में यह पूजा प्रारंभ करें। 6 इंच लम्बी गूलर की पेड़ की जड़ ले उसके ऊपर 108 बार काले रंग का धागा ॐ गं गणपतये नम:मंत्र का जाप करते हुये लपेटे। भगवान गणेश जी से ऋण मुक्ति की प्रार्थना करें। 108 चक्र होने के बाद इस लकड़ी को स्वच्छ थाली में पीला वस्त्र बिछाकर रख दें। तत्पश्चात श्रद्धानुसार धूप,दीप, नैवद्य, पुष्प अर्पित करें। घी का दीपक प्रज्जवलित कर उसमें एक इलायची डाल दें। शुद्ध आसन बिछाकर अपने सामने हल्दी से रंगे हुये अक्षत रख लें। अपने हाथ में थोड़े से अक्षत लें ॐ गं गणपतये ऋण हरताये नम:मंत्र का जाप करके अक्षत गूलर की लकड़ी के ऊपर छोड़ दे। ऐसा 108 बार करें। अगले दिन यह प्रक्रिया पुन:दोहरायें। ऐसा नवमी तक पूजन करें। नवमी के दिन रात में सवा ग्यारह बजे पुन:एक बार पूजन करें। ऋण हरता गणपति की 11 माला जाप करें। तत्पश्चात इस लकड़ी को अपने ऊपर से 11 बार उसार कर के अपने घर के किसी कोने में गड्डा खेंद कर दबा दे। उसके ऊपर कोई भारी वस्तु रख दें। ऐसा करने से कर्ज से छुटकारा मिल जायेगा।ऋण मुक्ति के लिये
 
आप अपने कारोबार में कर्जे से डूबे जा रहे है रात-दिन मेहनत करने के उपरांत भी कर्जा उतरने का नाम ही नहीं ले रहा है तो यह प्रयोग आपके लिये बहुत ही अनुकूल व फायदेमंद रहेगा। किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के प्रथमा के दिन नित्यक्रम से निवृत्त होकर स्नानोपंरात स्वच्छ वस्त्र धारण करें और अपने पूजा स्थान में यह पूजा प्रारंभ करें। 6 इंच लम्बी गूलर की पेड़ की जड़ ले उसके ऊपर 108 बार काले रंग का धागा ॐ गं गणपतये नम:मंत्र का जाप करते हुये लपेटे। भगवान गणेश जी से ऋण मुक्ति की प्रार्थना करें। 108 चक्र होने के बाद इस लकड़ी को स्वच्छ थाली में पीला वस्त्र बिछाकर रख दें। तत्पश्चात श्रद्धानुसार धूप,दीप, नैवद्य, पुष्प अर्पित करें। घी का दीपक प्रज्जवलित कर उसमें एक इलायची डाल दें। शुद्ध आसन बिछाकर अपने सामने हल्दी से रंगे हुये अक्षत रख लें। अपने हाथ में थोड़े से अक्षत लें ॐ गं गणपतये ऋण हरताये नम:मंत्र का जाप करके अक्षत गूलर की लकड़ी के ऊपर छोड़ दे। ऐसा 108 बार करें। अगले दिन यह प्रक्रिया पुन:दोहरायें। ऐसा नवमी तक पूजन करें। नवमी के दिन रात में सवा ग्यारह बजे पुन:एक बार पूजन करें। ऋण हरता गणपति की 11 माला जाप करें। तत्पश्चात इस लकड़ी को अपने ऊपर से 11 बार उसार कर के अपने घर के किसी कोने में गड्डा खेंद कर दबा दे। उसके ऊपर कोई भारी वस्तु रख दें। ऐसा करने से कर्ज से छुटकारा मिल जायेगा।

यंत्र मंत्र तंत्र (Exorcism Mechanism)

धनप्राप्ति के नौ सुगम मंत्र
1. ओं लक्ष्मी वं, श्री कमला धरं स्वाहा।
इस मंत्र की सिद्धि एक लाख बीस हजार मंत्र जप से होती है। इसका शुभारम्भ वैशास मास में स्वाति नक्षत्र में करें तो उत्तम रहेगा। जप के बाद हवन भी करें।
2. ओं सचि्चदा एकी ब्रrा ह्नीं सचि्चदीक्रीं ब्रrा।
इस मंत्र के एक लाख जप से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
3. ओं ह्रीं ह्रीं ह्रीं श्रीं श्रीं श्रीं क्रीं क्री क्रीं स्थिरां स्थिरां ओं।
इसकी सिद्धि 110 मंत्र नित्य जपन से 41 दिनों में संपन्न होती है। माला मोती की और आसन काले मृग का होना चाहिए। साधना कांचनी वृक्ष के नीचे करनी चाहिए।
4. ओम नमो ह्नीं श्रीं क्रीं श्रीं क्लीं क्लीं श्रीं लक्ष्मी ममगृहे धनं चिंता दूरं करोति स्वाहा।
प्रात: स्नानादि से निवृत्त होकर एक माला (108 मंत्र) का नित्य जप करें तो लक्ष्मी की सिद्धि होती है। 5. ओम नमो पद्मावती पद्यनतने लक्ष्मीदायिनी वांछ भूत प्रेत विन्ध्यवासिनी सर्व शत्रुसंहारिणीदुर्जन मोहिनी ऋद्धि सिद्धि वृद्धि कुरू-कुरू स्वाहा। ओम नम: क्लीं श्रीं पद्मावत्यै नम:।


इस मंत्र को सिद्ध करने के लिए साधना के समय लाल वस्त्रों को प्रयोग करना चाहिए और पूजा में प्रयुक्त होने वाली सभी पूजन-सामग्री को रक्त वर्ण का बनाना होता है। इसकी साधना अर्द्धरात्रि के समय करनी पडती है। इसका शुभारम्भ शनिवार या रविवार से उपयुक्त रहता है। 108 बार नित्यप्रति जप करें। छारछबीला, गोरोचन, कपूर, गुग्गुल और कचरी को मिलाकर मटर के बराबर छोटी-छोटी गोलियां बना लें। जप के बाद नित्यप्रति इन गोलियों से 108 आहुतियां देकर हवन करना चाहिए। इस साधना को 22 दिन तक निरन्तर करना चाहिए। तभी लक्ष्मीजी की कृपा प्राप्त होती है।
6. ओम नमो पद्मावती पद्मनेत्र बज्र बज्रांकुश प्रत्यक्ष भवति।
इस मंत्र की सिद्धि के लिए लगातार 21 दिन तक साधना करनी होती है। इस साधना को आधी रात के समय करना आवश्यक है। साधना के समय मिट्टी का दीपक बनाकर जलाएं। जप के लिए मिट्टी के मनकों की माला बनाएं और नित्यप्रति एक माला अर्थात् 108 मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप किया जाए तो लक्ष्मी देवी प्रसन्न होकर आशीर्वाद देती है।
7. ओम नम: भगवते पद्मद्मात्य ओम पूर्वाय दक्षिणाय पश्चिमाय उत्तराय अन्नपूर्ण स्थ सर्व जन वश्यं करोति स्वाहा।
प्रात: काल स्नानादि सभी कार्यो से निवृत्त होकर 108 मंत्र का जप करें और अपनी दुकान अथवा कारखाने में चारों कोनों में 10-10 बार मंत्र का उच्चारण करने हुए फंूक मारें। इससे व्यापार की परिस्थितियां अनुकूल हो जाएंगी और हानि के स्थान पर लाभ की दृष्टि होने लगेगी।
8. ओम नम: काली कंकाली महाकाली मुख सुन्दर जिये व्याली चार बीर भैरों चौरासी बात तो पूजूं मानए मिठाई अब बोली कामी की दुहाई।
इस मंत्र को सिद्ध करने के बाद प्रात: काल स्नान, पूजन, अर्जन आदि से निवृत्त होकर पूर्व की ओर मुख करके बैठें और सुविधा अनुसार 7, 14, 21, 28, 35, 42 अथवा 49 मंत्रों का जप करें। इस प्रक्रिया से थोडे दिनों नौकरी अथवा व्यापार के शुभारम्भ की व्यवस्था हो जाएगी।
9. ओम नम: भगवती पद्मावती सर्वजन मोहिनी सर्वकार्य वरदायिनी मम विकट संकटहारिणीय मम मनोरथ पूरणी मम शोक विनाशिनी नम: पद्मावत्यै नम:।
इस मंत्र की सिद्धि करने के बाद मंत्र का प्रयोग किया जाए तो नौकरी अथवा व्यापार की व्यवस्था हो जाएगी। उसमें आने वाले विघA दूर हो जाएंगे। धूप-दीप आदि से पूजन करके प्रात: दोपहर और सायंकाल तीनों संख्याओं मे एक-एक माला का मंत्र जप करें।
धन प्राप्ति के लिए शाबर टोटका
दीपावली के दिन प्रात: व्यक्ति बिना स्नान किए, बिना दातुन किए, एक नारियल को पत्थर से बांधकर नदी या तालाब के जल में डुबो दे और डुबोते समय प्रार्थना करे कि शाम को मैं आपको लक्ष्मी के साथ लेने आऊंगा। सूर्यास्त के बाद उस नारियल को जल से निकालकर ले आवें और लक्ष्मीपूजन के साथ उसकी भी पूजा कर भण्डारगृह या संदूक में रख दें तो पूरे वर्ष असाधारण रूप से धन प्राप्त होता रहता है।
तीन मास में ही धनप्राप्ति के लिए कुबेर मंत्र मंत्र- यक्षाम कुबेराय वैश्रवणाय, धन-धान्याधिपतये धन-धान्य समृद्धि में देहि दापय स्वाहा।
विधि- इस मंत्र को 108 बार जपने से तीन मास में ही लाभ होता है। अक्षय भंडार हेतु महालक्ष्मी मंत्र ओम श्रीं ह्रीं क्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम:। विधि-शुभ तिथि व शुभ दिन प्रात: जप करना प्रारम्भ कर दें। कम से कम 1100 जप तो अवश्य ही करें।
महालक्ष्मी सिद्ध मंत्र मंत्र-
श्री शुक्ले महाशुक्ले कमल दल निवासे श्री महालक्ष्मी नमो नम:। लक्ष्मी माई सबकी सवाई आवो चेतो करो भलाई न करो तो सात समुद्रो की दुहाई, ऋद्धि-सिद्धि न करे तो नौ नाथ चौरासी सिखों की दुहाई।000 विधि- दुकानदार दुकानें खोले तब महादेव का थडा अर्थात् दुकान की गद्दी पर बैठकर इस मंत्र को प्रथम माला जप लें। धूप-दीप के पश्चात् फिर लेन-देन करें और न्याय-नीति से कारोबार करे। दशांश दान-पुण्य में लगाएं तो सभी प्रकार के सुख-शांति की प्राप्ति हेाती है। यदि पहले इस मंत्र का 41 दिन में सवा लाख जप दीप-धूप-पुष्प-फल-नैवेद्यादि विधान से करके फिर एक माला का नित्य जप करे तो लक्षाधिपति बनकर वैभवपूर्ण जीवन का अक्षय सुख प्राप्त करता है।
सिद्ध करने का तरीका रविवार के दिन एक किलो काले उडद अपने सामने रखकर सूर्योदय से सूर्यास्त तक इस मंत्र का नियमित रूप से जप करने पर यह मंत्र सिद्ध हो जाता है। जब यह मंत्र सिद्ध हो जाए तब उन काले उडदों को लेकर 21 दिन मंत्र पढकर दुकान में बिखेर देवें, इस प्रकार तीन रविवार तक करने पर दुकान की बिक्री दुगुनी-तिगुनी हो जाती है। यह निश्चित है। जैसा कि बताया गया है, शाबर मंत्र सरल भाषा में होते है और आज के अनास्था तथा वैज्ञानिक युग में विश्वास नहीं होता कि ये मंत्र इतने शक्तिशाली है और इन मंत्रों से कार्य सिद्ध किए जा सकते है। परंतु साधकों ने इन मंत्रों को सिद्ध किया है और पूरी तरह से लाभ उठाया है। आप भी चाहें तो इन सत्य को परख सकते है।
धन प्राप्ति हेतु तांत्रिक मंत्र
यह मंत्र महत्वपूर्ण है, इस मंत्र का जप अर्द्धरात्रि को किया जाता है। यह साधना 22 दिन की है और नित्य एक माला जप होना चाहिए। यदि शनिवार या रविवार में इस प्रयोग को प्रारम्भ किया जाए तो ज्यादा उचित रहता है। इसमें व्यक्ति को लाल वस्त्र पहनने चाहिए और पूजा में प्रयुक्त सभी समान को रंग लेना चाहिए।
दीपावली के दिन भी इस मंत्र का प्रयोग किया जा सकता है और कहते हैं कि यदि दीपावली की रात्रि को इस मंत्र को 21 माला फेरें तो उसके व्यापार में उन्नति एवं आर्थिक सफलता प्राप्त होती है।
मंत्र- ओम नमो पदमावती एद्मालये लक्ष्मीदायिनी वांछाभूत प्रेत बिन्ध्यवासिनी सर्व शत्रु संहारिणी दुर्जन मोहिनी ऋद्धि-सिद्ध वृद्धि कुरू कुरू स्वाहा। ओम क्लीं श्रीं पद्मावत्यै नम:।
जब अनुष्ठान पूरा हो जाए तो साधक को चाहिए कि वह नित्य इसकी एक माला फेरे। ऎसा करने पर उसके आगे के जीवन में निरन्तर उन्नति होती रहती है।
धन प्राप्ति का शाबर मंत्र नित्य प्रात: काल दन्त धावन करने के बाद इस मंत्र का 108 बार पाठ करने से व्यापार या किसी अनुकूल तरीके से धन प्राप्ति होती है।
मंत्र- ओम ह्रीं श्रीं क्रीं क्लीं श्रीं लक्ष्मी मामगृहे धन पूरय चिन्ताम्तूरय स्वाहा।
चिपकाने हेतु मंत्र
नीचे प्रदर्शित चार यंत्रों में से किसी भी एक मंत्र को कागज अथवा भोजपत्र पर अष्टगंध अथवा केसर के घोल से लिखकर प्राण-प्रतिष्ठा और पूजा करने के बाद रूपए-पैसे रखने की तिजोरी अथवा जेवरों के डिब्बे में रखें। लक्ष्मी की कृपा आप पर बनी रहेगी। व्यापारी और उद्योगपति दीवाली पूजन के बाद दुकान या कार्यालय की दीवार पर सिन्दूर से और बही खातों के प्रथम पृष्ठ पर स्याही से कोई भी एक यंत्र बनाएं और फिर देखें इसका प्रताप।

धन सम्पत्तिवर्द्धक यंत्र रवि पुष्य अथवा गुरू पुष्य के दिन भोजपत्र पर केसर की स्याही और अनार की कलम से निम्नांकित यंत्र लिखकर स्वर्ण के तावीज में रखें और गंगाजल आदि से पवित्र करके दाहिनी बाजू पर बांध लें। इसके प्रभाव से शारीरिक तथा आर्थिक क्षीणता समाप्त होकर, धन और स्वास्थ्य दोनों की वृद्धि होती है। इस तावीज को गले में धारण किया जा सकता है।

धन सम्पदा प्रदायक दूसरा तावीज इस तांत्रिक यंत्र को अनार की कलम द्वारा अष्टगंध स्याही से भोजपत्र पर लिखें और चंदन, पुष्प, धूप-दीप से इसकी पूजा करें। पूजनोपरांत एक हजार बार मंत्र का जप करें। हवन-सामग्री में घी, चीनी, शहद, खीर और बेलपत्र आवश्यक हैं। यह प्रक्रिया किसी शुभ मुहूत्तü की शुक्ल द्वितीय को की जानी चाहिए। हवन आदि करने से यंत्र की शक्ति बढती है। तत्पश्चात् यंत्र को स्वर्ण या चांदी के तावीज में भरकर, लाल या काले धागे की सहायता से दाहिने बाजू या गले में धारण करें। इस तावीज का प्रभाव अचूक और चिरस्थायी होता है।

धन प्रदायक लक्ष्मी बीसा तावीज

उपर्युक्त यंत्र तावीज को रवि पुष्य नक्षत्र में अनार की कलम के द्वारा भोजपत्र पर अष्टगंध से लिखें। पीला वस्त्र, पीला आसान एवं पीली माला का प्रयोग करें। पूरब की ओर मुंह रखें। धूप, दीप, फल-फूल और नैवेद्य से यंत्र की नित्य पूजा करें और निम्न मंत्र की एक माला जप करें। ओम श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्मै नम:। यह क्रम सवा दो महीने तक चालू रखें। फिर तिरसठवें दिन चांदी के एक पत्र पर यंत्र को बनाकर, उन बासठ यंत्रों को चांदी के पत्र वाले यंत्र के नीचे रखकर पूजा करें। अब बासठ यंत्रों में से एक यंत्र अपने पास रखें बाकी यंत्रों को आटे की गोलियों में रखकर नदी में बहा दें। जिस यंत्र को पास में रखा था, उसे सोने या चांदी के तावीज में डालकर गले में डालें
 


यंत्र मंत्र तंत्र (Exorcism Mechanism)

 ॐ नमः काय सर्वजन प्रियाय सर्वजन सम्मोहनाय ज्वल ज्वल प्रज्वालय प्रज्वालय सर्व जनस्य ह्रदयम मम वशं कुरु कुरु स्वाहा।।
🌺🌺
गुरु पुष्य योग ,ग्रहण काल, होली, दीपावली में उपयुक्त मन्त्र को 10,000 हजार संख्या में जप कर सिद्ध कर ले।
जप के उपरांत 1008 दशांश गुग्गुल से हवन करे ।हवन का दशांश तर्पण ,मार्जन करे ,फिर एक कर्मकांडी ब्राह्मण को भोजन कराये ।
इस प्रकार मन्त्र सिद्धि के पश्चात अपने अभीष्ट कार्य की सिद्धि हेतु जिस व्यक्ति को वशीभूत करना हो उसके सन्मुख इस मन्त्र को 108 बार जपे ।
 


यंत्र मंत्र तंत्र (Exorcism Mechanism)

 शीघ्र विवाह कारक मन्त्र कन्याओ हेतु।।🌹🌹
तब जनक पाई वशिष्ठ आयसु ब्याह लाज संवारि कै।
मांडवी,श्रुतकीर्ति, उर्मिला कुँअरि लई हँकारि कै।।
जिस कन्या के विवाह में विलम्ब हो रहा हो ,वह कन्या हल्दी की सात गांठे पीले कपड़े में लपेट कर धारण करे, एवम् उपयुक् मन्त्र का रोज 108 बार जप करे।
जल्द ही विवाह के योग बनेगे।🌺🌺
 


यंत्र मंत्र तंत्र (Exorcism Mechanism)

अब हम विद्यार्थियों के लिए कुछ उपाय लिख रहे हैं, आशा है विद्यार्थी लोग बताए गए किसी भी एक उपाय को यदि करते हैं तो निश्चित रूप से सफलता मिलेगी | परन्तु उपाय तभी सार्थक होता है जब वे मेहनत के साथ विद्याध्ययन करें |

01- जो विद्यार्थी उच्च शिक्षा ग्रहण कर घर-परिवार व संसार को कुछ कर दिखलाना चाहते हैं, उन्हें नित्यप्रति निम्नलिखित मन्त्र का जाप अपने गृह मन्दिर में, प्रात: स्नानोपरान्त "21" जाप करना चाहिए......
मन्त्र :---
ॐ मा निषाद् प्रतिष्ठाम् त्वम् गम: शाश्वती: शमा: यत् | कौन्जमिथुनादेकमवधि: कामनोहितम् ||

02- प्रात:काल स्नान करके देवी सरस्वती के चित्र पर श्वेत पुष्प अर्पित कर निम्नलिखित मन्त्रों में से किसी एक मन्त्र का जाप नित्य "108" बार करने पर उत्तम शिक्षा प्राप्त होगी तथा शिक्षा की बाधाएं दूर हो जाएंगीं|
मन्त्र :---
*01- अध्यात्ममधिदैवच्च देवानाम् सम्यगीश्वरी |*
प्रत्यगास्ते वदंती या सा मां पातु स्वरस्वती ||
02- यां विदित्वाखिलं बन्धम् निर्मश्याखिलर्वलना |
योगी याति परं स्थानम् सा मां पातु सरस्वती ||

03- विद्यार्थियों के लिए निम्नलिखित मन्त्र बड़ी ही उपयोगी है| यदि किसी विद्यार्थी को पाठ शीघ्र न होता हो तो या याद करने के बाद शीघ्र भूल जाता हो, तो उस स्थिति में विद्यार्थी को निम्नलिखित मन्त्र को एकाग्रचित् होकर मां स्वरस्वती का ध्यान करते हुए *21" बार मन ही मन जपना चाहिए | ध्यान् व विश्वास से मन्त्र के जपने से वह याद किया हुआ कभी नहीं भूलेगा |
मन्त्र :---
ओम् श्रीं ह्रीं स्वरस्वत्यै स्वाहा |
सुमिरत करत श्राप सब दाहा ||
तुम प्रसन्न हो निकट पधारी |
वरदे कियो मुनहि सुखारी ||

04- जीवन में अाजीविका सम्बन्धी कार्य हो, प्रतियोगिता अथवा परीक्षा में सफलता, नवदुर्गा की उपासना सर्व फलदाई होती है | रजत अथवा ताम्रपत्र पर यन्त्र बनवाकर विधिवत् प्राणप्रतिष्ठा करें | तत्पश्चात् घी का दीपक जलाकर निम्नलिखित नवार्णमन्त्र का जाप 21 दिन में एक लाख कर के दशांश हवन करें | जप नियत संख्या में निश्चित समय पर प्रतिदिन करना चाहिए | नवार्ण मन्त्र की साधना विद्यार्थियों को सदा फलीभूत होती है |-----
मन्त्र :---
*ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे*|

05 :--- स्मरणशक्ति की कमी के कारण जो विद्यार्थी पाठ्यक्रम में पिछड़ रहा है, उसे निम्नलिखित ऋचा का नित्य पाठ करना चाहिए | पांच बार जप कर लेना ही प्रयाप्त होगा | :---
मन्त्र :---
सदसस्पतिमभ्दूतम् प्रिमिंद्रस्य काभ्यम् | सनि मेधामयासिवम् ||

06:-- विद्यार्थियों को ज्ञान प्राप्त करने के लिए "मंगलवार व शनिवार" को "सुन्दरकाण्ड" का पाठ करना लाभकारी होता है | प्रत्येक रविवार को सूर्यनारायण का पूजन व विना नमक का भोजन करने से स्वरस्वती की विशेष कृपा तथा ज्ञान की प्राप्ति होती है ||

07:--- अभिमन्त्रित स्वरस्वती यन्त्र को स्थापित करके निम्नलिखित मन्त्र की एक माला *108 बार जप करने से विद्या की प्राप्ति होती है |
मन्त्र :---
ओम् महिषासुरनिर्णाशि भक्तानाम् सुखदे नम: |
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ||
08 :-- किसी शुभ तिथि में प्रात: उठकर एवं नहा-धोकर निम्नलिखित मन्त्र का सवा लाख जप करने से स्वरस्वती देवी आकर्षित होकर विद्या का दान देती हैं | ( यदि यह जाप एक दिन में सम्भव न हो तो इसे एक सप्ताह में अवश्य ही पूरा कर लेना चाहिए व इस समय पूर्ण सात्विकता से रहना चाहिए व बाहरी भोजन का भी त्याग करना चाहिए |
मन्त्र :---
ॐ वाग्वादिनी एवा मिन्सहरा ||

09 :--- मंदबुद्धि विद्यार्थियों को निम्नलिखित मन्त्र को नित्य नहा-धोकर एवं पवित्र आसन पर बैठकर, धूप-दीप जलाकर भक्तिपूर्वक "21" बार जपना चाहिए | एक माह तक नियमित जप करने से स्वरस्वती देवी प्रसन्न होकर विद्या प्रदान करती हैं |......
मन्त्र :---
*ॐ ह्रीं श्रीं ऐं वद् वद् वाग्वादिनी | स्वरस्वती तुष्टि पुष्टि तुभ्यम् नम:*||

10 :--- यदि किसी प्रकार के वाणी विकार के कारण बालक स्कूल जाने में हिचकिचाता है तो सामान्य बजाने वाले शंख में जल भरकर पूजा स्थल में रख दें और दूसरे दिन प्रात: खाली पेट शंख का जल बालक को पिला दें | यह क्रिया नित्य तब तक करते रहें जब तक वाणी दोष समाप्त नहीं हो जाता | और वाणी दोष जल्द ही समाप्त हो जाएगा |
 


यंत्र मंत्र तंत्र (Exorcism Mechanism)

आप सभी को हमारा नमस्कार ।

हम आज आपको यहाँ एक बहुत पुरानी वैदिक परंपरा के बार में बताने जा रहे है । हवन जिसे हम अग्निहोत्र भी कह सकते है ।पहले के जमाने में हर घर में हर रोज हवन होते थे जिससे हमारे वातावरण की शुद्धि के साथ साथ हमारा आध्यात्मिक और वैदिक शुद्धिकरण भी होता था । हवन से निकली हुई धुंआ आसमान में जाकर बादलों के साथ मिल जाती थी जो आगे जाकर वर्षा में सहायक होती थी । हवन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि जहाँ भी हवन का आयोजन होता है वह पर किसी भी प्रकार का वास्तुदोष नहीं होता और उस परिवार के लोगों पर किसी भी प्रकार का तांत्रिक अभिकर्म नहीं किया जा सकता क्योंकि हवन में हम समस्त देवी देवताओं का आह्वान करते ही जो कि हमारी हर प्रकार से रक्षा करते है । इसलिए गायत्री परिवार वाले  अग्निहोत्र को ज्यादा बढ़ावा देते है ।आज के इस महंगाई के दौर में जब पूजा पाठ भी इतने महंगे हो गए है तो लोग हवन का खर्च भी उठाने में असहज महसूस करते है । इसलिए हम आज आपको दैनिक हवन की सबसे आसान,सस्ती लघु और असरकारक विधि बताने जा रहे है । आप सभी से निवेदन है कि कृपया आज से ही हर का कोई भी एक सदस्य हर रोज घर में दैनिक हवन करे जिससे इस हवन का प्रभाव उस घर के प्रत्येक  सदस्य को मिल सके । इस दैनिक हवन में आपको ज्यादा खर्च करने की भी आवस्यकता नहीं है ।

 

 दैनिक हवन मे सबसे पहले अग्नि प्रज्वलित करे । किसी लकड़ी( लकड़ी पीपल की या आम की बरगद के ले तो उत्तम रहेगा) पर या गाय के कंडे पर अग्नि प्रज्वलित करे । किसी छोटे से पात्र मे भी  गाय के कंडे पर या लकडी पर अग्नि प्रज्वलित कर सकते है ।पात्र तांबे का या पीतल का या मिट्टी का होना चाहिए । लोहे के पात्र का उपयोग हवन के लिए नही करना है । नीचे लिखी आहूतिया केवल घी से देनी है । आहूति देने के बाद आहूति देने के चम्मच मे बचा हुआ घी इदं न मम के उच्चारण के साथ पास मे रखे पानी के पात्र मे टपकाते जाऐ ।

 

 

चार घी की आहुतियाँ

इस मन्त्र से वेदी के उत्तर भाग में जलती हुई समिधा पर आहुति देवें।

1) ओम् प्रजापतये स्वाहा | इदं प्रजापतये - इदं न मम।।

मन्त्रार्थ- सर्वरक्षक प्रजा अर्थात सब जगत के पालक, स्वामी, परमात्मा के लिए मैं त्यागभाव से यह आहुति देता हूँ।अथवा, प्रजापति सूर्य के लिए यह आहुति प्रदान करता हूँ

 

2)ओम् इन्द्राय स्वाहा | इदं इन्द्राय - इदं न मम।।

मन्त्रार्थ- सर्वरक्षक परमऐश्वर्य-सम्पन्न तथा उसके दाता परमेश्वर के लिए मैं यह आहुति प्रदान करता हूँ।अथवा ऐश्वयर्शाली, शक्तिशाली वायु व विद्युत के लिए यह आहुति प्रदान करता हूँ।

 

3)ओम् अग्नये स्वाहा | इदमग्नये - इदं न मम।।

मन्त्रार्थ- सर्वरक्षक प्रकाशस्वरूप दोषनाशक परमात्मा के लिए मैं त्यागभावना से धृत की हवि देता हूँ।यह आहुति अग्निस्वरूप परमात्मा के लिए है, यह मेरी नहीं है।अथवा, यज्ञाग्नि के लिए यह आहुति प्रदान करता हूँ।

 

4)ओम् सोमाय स्वाहा | इदं सोमाय - इदं न मम।।

मन्त्रार्थ- सर्वरक्षक, शांति -सुख-स्वरूप और इनके दाता परमात्मा के लिए त्यागभावना से धृत की आहुति देता हूँ ।अथवा, आनन्दप्रद चन्द्रमा के लिए यह आहुति प्रदान करता हूँ।

 

5) ॐ गं गणपतये स्वाहा । इदं गणपतये इदं न मम ।

 

इसके बाद आप जो भी और जितनी भी चाहे आहूति दे सकते है । जैसे गणपति जी की या गायत्री जी की या अपने ईषट की ।

 

उसके बाद अंतिम आहूतिया इस प्रकार देनी है ।

7) ॐ भूः स्वाहा । इदं अगनेय इदं न मम ।

8) ॐ भुवः स्वाहा: । इदं वायवे इदं न मम ।

9) ॐ स्वः स्वाहा । इदं सूर्याय इदं न मम ।

10) ॐ भूर्भुवः स्वाहा। इदं न मम ।

11) ॐ प्रजापतये स्वाहा । इदं प्रजापतये इदं न मम ।

 

इस प्रकार आप घर मे दैनिक लघू हवन का आयोजन कर सकते हो । आज के समय मे प्रत्येक हिन्दू के घर मे दैनिक लघू हवन का आयोजन होना चाहिए ।आप सभी से निवेदन है कि आप इस सन्देश को अधिक से अधिक हिंदुओं तक पहुचाये ।

अग्निहोत्र के बारे में अधिक जानकारी के लिए संपर्क कर सकते है ।

धन्यवाद 


यंत्र मंत्र तंत्र (Exorcism Mechanism)

 पहला वशीकरण मंत्र हिन्दी मे-
अगर आप मन ही मन किसी को पसंद करते है या अपने दिल की बात किसी को बता नही सकते है तो आप नीचे दिए हुए मंतर को एक बार ज़रूर इस्तेमाल करे.
“”ॐ कलीम कृष्णाय नमः””
इस मंत्र को हर रोज 551 बार जप करें , और इस मंत्र को केवल शुक्रवार वाले दिन ही शुरू करें .
वशीकरण विधि अपने प्यार को पाने के लिए-
(a) इसके लिए 7 पान के पते चाहिए ||
(b) थोड़ा सा सिन्दूर चाहिए ||
(c) थोड़ा सा पानी चाहिए ||
(d) लगातार इस मंत्र को 7 दिन तक इन सातों पान के पतों के ऊपर पढ़े ||
(e) अगले शुक्रवार को थोड़े से सिन्दूर को थोड़े से पानी में मिला ले ||
(f) फिर उस सिन्दूर से उस इंसान का नाम एक पान के पत्ते ( जिस को आपने वश में करना है ) लिखें ||
(g) और उस पान के पते को अपने सिर के ऊपर से घड़ी की दिशा में 21 बार घुमा के कहीं दूर फैंक दे ||
(h) लगातार 7 दिन तक यह प्रयोग करें ||

(i) और आठवे दिन उस इंसान के सामने जाएँ जिसको आपने वश में करना है आपको मन माँफिक रिजल्ट मिलेगा ||
 


यंत्र मंत्र तंत्र (Exorcism Mechanism)

जिन-जिन्नातो से कार्यसिद्धि:-

शाबर मंत्र विद्या में जिन्न प्रकट करने का बड़ा अद्धभुत तरीका दिया गया है। बहुत ही सरल मंत्र जिसका अनुष्ठान कोई भी कर सके। इन मंत्र अनुष्ठान से हम जिन्न को अपना गुलाम भी बना सकते है और मित्र भी। तब आप उनको चाहे कैसा भी कार्य बोलोगे वो करेंगे, नॉन स्टॉप करेंगे। पलक झपकते ही। जिन्न क्या क्या कर सकते है।

1. कैसा भी वशीकरण करना हो, पलक झपकते ही वशीकरण पक्का, और उसके लिए जिन्न को नाम और फोटो दिखा दो उसकी, इतना ही बहुत है।

2. कोई दुश्मन अगर परेशान कर रहा हो तो बस आपके इशारे की देर है। दुश्मन दुश्मनी छोड़ देगा।

3. धन के लिए कहाँ पैसा लगाए या अच्छा जॉब नहीं मिल रहा है या बिज़नेस नहीं चल रहा है तो बस जैसा हुकुम दोगे वैसा ही होगा।

इसके अलावा सभी जगह पर जहां भी आवश्यकता हो सभी जगह पर जिन्न आपकी जितनी सहायता कर सकता है उतनी कोई और नहीं -


मंत्र:-

।। काली काली महाकाली। इन्द्र कि बेटी ब्रह्मा कि साली। बालक कि रखवाली। काले कि जै काली। भैरों कपाली। जटा रातों खेले। चंद हाथ कैडी मठा। मसानिया वीर। चौहटे लड़ाक। समानिया वीर। बज्रकाया। जिह करन नरसिंह धाया। नरसिंह फोड़ कपाल चलाया। खोल लोहे का कुंडा। मेरा तेरा बाण फटक। भूगोल बैढन। काल भैरो बाबा नाहर सिंह। अपनी चौकी बठान। शब्द साँचा। पिंड कांचा। फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा ।।


विधि: २१ शनिवार और रविवार को ये करना है। रात १० बजे के बाद २१ माला जपनी है। जिन्नात प्रकट होगा तब उसको वचनो में बांध लेना है। फिर जैसा कहोगे वैसा वो करेगा।
 


यंत्र मंत्र तंत्र (Exorcism Mechanism)

*शीघ्र विवाह होने के उपाय :-* 🎎

 

*💥इन उपाय को करने से शीघ्र विवाह के मार्ग बनते है, तथा विवाह मार्ग की समस्त बाधाएं दूर होती है।*

*💥शीघ्र विवाह के लिए सोमवार को 1200 ग्राम चने की दाल व सवा लीटर कच्चे दूध का दान करें । यह प्रयोग तब तक करते रहना है जब तक कि विवाह न हो जाय |*

*💥जिन लड़कों का विवाह नहीं हो रहा हो या प्रेम विवाह में विलंब हो रहा हो , उन्हें शीघ्र मनपसंद विवाह के लिए श्रीकृष्ण के इस मंत्र का रोजाना 108 बार जप करना चाहिए।*

*💥शीघ्र विवाह के लिए भगवान श्री कृष्ण का मन्त्र💥*

*🌹"क्लीं कृष्णाय गोविंदाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा।"🌹*

*💥कन्या जब किसी कन्या के विवाह में जाये और यदि वहाँ पर दुल्हन को मेहँदी लग रही हो तो अविवाहित कन्या कुछ मेहँदी उस दुल्हन के हाथ से लगवा ले इससे विवाह का मार्ग शीघ्र प्रशस्त होता है ।*

*💥विवाह वार्ता के लिए घर आए अतिथियों को इस प्रकार बैठाएं कि उनका मुख घर में अंदर की ओर हो , उन्हें द्वार दिखाई न दे।*

*💥विवाह योग्य युवक-युवती जिस पलंग पर सोते हों उसके नीचे लोहे की वस्तुएं या कबाड़ का सामान कभी भी नहीं रखना चाहिए ।*

*💥यदि विवाह के पूर्व लड़का-लड़की मिलना चाहें तो वह इस प्रकार बैठे कि उनका मुख दक्षिण दिशा की ओर न हो ।*

*💥कन्या सफेद खरगोश को पाले तथा अपने हाथ से उसे भोजन के रूप में कुछ दे |*

*💥कन्या के विवाह की चर्चा करने उसके घर के लोग जब भी किसी के यहाँ जायें तो कन्या खुले बालों से , लाल वस्त्र धारण कर हँसते हुए उन्हें कोई मिष्ठान खिला कर विदा करे | विवाह की चर्चा सफल होगी |*

*💥पूर्णिमा को वट वृक्ष की 108 परिक्रमा देने से भी विवाह बाधा दूर होती है*

*💥गुरूवार को वट वृक्ष, पीपल, केले के वृक्ष पर जल अर्पित करने से विवाह बाधा दूर होती है |*

*💥जिन व्यक्तियों को शीघ्र विवाह की कामना हों उन्हें गुरुवारको गाय को दो मावे के पेडे पर थोड़ा हल्दी लगाकर खिलाना चाहिए । तथा इसके साथ ही थोड़ा सा गुड व चने की पीली दाल का भोग गाय को लगाना शुभ होता है |*

*💥किसी भी शुभ दिवस पर मिटटी का एक नया कुल्हड़ लाएँ तथा उसमे एक लाल वस्त्र , सात काली मिर्च एवं सात ही नमक की साबुत कंकड़ी रख दें , हांडी का मुख लाल कपडे से बंद कर दें एवँ कुल्हड़ के बाहर कुमकुम की सात बिंदियाँ लगा दे फिर उसे अपने ऊपर से सात बार ऊतारकर हांडी को चौराहे पर रखवा देँ | यह बहुत ही असरदायक प्रयोग है।*

*💥यदि कन्या की शादी' में कोई रूकावट आ रही हो तो 5 नारियल लें! भगवान शिव की मूर्ती या फोटो के आगे रख कर "'''ऊं श्रीं वर प्रदाय श्री नामः मंत्र का पांच माला जाप करें फिर वो पांचों नारियल शिव जी के मंदिर में चढा दें! विवाह की बाधायें अपने आप दूर होती जांयगी!*

*💥प्रत्येक सोमवार को कन्या सुबह नहा-धोकर शिवलिंग पर "ऊं सोमेश्वराय नमः" का जाप करते हुए दूध मिले जल को चढाये और वहीं मंदिर में बैठ कर रूद्राक्ष की माला से इसी मंत्र का एक माला जप करे ! विवाह की सम्भावना शीघ्र बनती नज़र आयेगी |*

*💥शिव-पार्वती का पूजन करने से भी विवाह की मनोकामना पूर्ण हो जाती हैं । इसके लिए प्रतिदिन शिवलिंग पर कच्चा दूध, बिल्व पत्र, अक्षत, कुमकुम आदि चढ़ाकर विधिवत पूजन करें।*

*💥विवाह योग्य लोगों को शीघ्र विवाह के लिये प्रत्येक गुरुवार को नहाने वाले पानी में एक चुटकी हल्दी डालकर स्नान करना चाहिए । भोजन में केसर का सेवन करने से विवाह शीघ्र होने की संभावनाएं बनती है |*

*💥विवाह योग्य व्यक्ति को सदैव शरीर पर कोई भी एक पीला वस्त्र धारण करके रखना चाहिए |*

*💥गुरुवार की शाम को पांच प्रकार की मिठाई, हरी ईलायची का जोडा तथा शुद्ध घी के दीपक के साथ जल अर्पित करना चाहिये | यह प्रयोग लगातार तीन गुरुवार को करना चाहिए, इससे शीघ्र विवाह के योग निस्संदेह बनते है।*

*💥गुरुवार केले के को वृ्क्ष पर जल अर्पित करके शुद्ध घी का दीपक जलाकर गुरु के 108 नामों का उच्चारण करने से जल्दी ही जीवनसाथी की तलाश पूर्ण हो जाती है ।*

*💥बृहस्पति को देवताओं का गुरु माना जाता है इनकी पूजा से विवाह के मार्ग में आ रही सभी अड़चनें स्वत : ही समाप्त हो जाती हैं। इनकी पूजा के लिए गुरुवार का विशेष महत्व है।*

*💥गुरुवार को बृहस्पति देव को प्रसन्न करने के लिए पीले रंग की वस्तुएं चढ़ानी चाहिए । पीले रंग की वस्तुएं जैसे हल्दी, पीला फल, पीले रंग का वस्त्र, पीले फूल, केला, चने की दाल आदि इसी तरह की वस्तुएं गुरु ग्रह को चढ़ानी चाहिए। साथ ही शीघ्र विवाह की इच्छा रखने वाले युवाओं को गुरुवार के दिन व्रत रखना चाहिए।*

*💥इस व्रत में खाने में पीले रंग का खाना ही खाएं, जैसे चने की दाल, पीले फल, केले खाने चाहिए। इस दिन व्रत करने वाले को पीले रंग के वस्त्र ही पहनने चाहिए। ॐ ग्रां ग्रीं ग्रों स: गुरूवे नम:। मंत्र का पांच माला प्रति गुरुवार जप करें।*

*💥अगर किसी का विवाह कुण्डली के मांगलिक योग के कारण नहीं हो पा रहा है , तो ऎसे व्यक्ति को मंगल वार के दिन चण्डिका स्तोत्र का पाठ तथा शनिवार के दिन सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए । इससे भी विवाह के मार्ग की बाधाओं में कमी होती है।*

*💥शिव-पार्वती का पूजन करने से भी विवाह की मनोकामना पूर्ण हो जाती हैं । इसके लिए प्रतिदिन शिवलिंग पर कच्चा दूध, बिल्व पत्र, अक्षत,कुमकुम आदि चढ़ाकर विधिवत पूजन करें।*

*💥शुक्रवार की रात्रि में आठ छुआरे जल में उबाल कर जल के साथ ही अपने सोने वाले स्थान पर सिरहाने रख कर सोयें तथा शनिवार को प्रात: स्नान करने के बाद किसी भी बहते जल में इन्हें प्रवाहित कर दें |*

*💥यदि आपको प्रेम विवाह में अडचने आ रही हैं तो : - शुक्ल पक्ष के 'गुरूवार' से शुरू करके विष्णु और लक्ष्मी मां की मूर्ती या फोटो के आगे "ऊं लक्ष्मी नारायणाय नमः" मंत्र का रोज़ तीन माला जाप स्फटिक माला पर करें !*

*💥इसे शुक्ल पक्ष के गुरूवार से ही शुरू करें! तीन महीने तक हर गुरूवार को मंदिर में प्रशाद चढांए और विवाह की सफलता के लिए प्रार्थना करें!*

*💥शुक्ल पक्ष के पहले 'गुरुवार को सात केले, सात गौ ग्राम गुड़ और एक नारियल लेकर किसी नदी या सरोवर पर जाएं । अब कन्या को वस्त्र सहित नदी के जल में स्नान कराकर उसके ऊपर से जटा वाला नारियल ऊसारकर नदी में प्रवाहित कर दें। इसके बाद थोड़ा गुड़ व एक केला चंद्रदेव के नाम पर व इतनी ही सामग्री सूर्यदेव के नाम पर नदी के किनारे रखकर उन्हें प्रणाम कर लें। थोड़े से गुड़ को प्रसाद के रूप में कन्या स्वयं खाएं और शेष सामग्री को गाय को खिला दें। इस टोटके से कन्या का विवाह शीघ्र ही हो जाएगा।*

*🌹विवाह के सम्बन्ध मे ध्यान रखने योग्य बाते 🌹*

*💥बृहस्पति, शुक्र, बुद्ध और सोम इन वारों में विवाह करने से कन्या सौभाग्यवती होती है । विवाह में चतुर्दशी, नवमी इन तिथियों को त्याग देना चाहिए।*

. *💥विवाह के पश्चात एक वर्ष तक पिण्डदान, मृक्ति का स्नान, तिलतर्पण, तीर्थयात्रा, मुण्डन, प्रेतानुगमन आदि नहीं करना चाहिये।*

*💥यदि किसी कन्या का विवाह नहीं हो पा रहा है तो वह कन्या आज विवाह की कामना से भगवान श्रीगणेश को मालपुए का भोग लगाए तो शीघ्र ही उसका विवाह जाता है*

*💥यदि किसी युवक के विवाह में परेशानियां आ रही हैं तो वह भगवान श्रीगणेश को पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं तो उसका विवाह भी जल्दी जाता है ।*
 


यंत्र मंत्र तंत्र (Exorcism Mechanism)

कर्ज और ज्योतिष

कर्ज एक ऐसा दलदल है, जिसमें एक बार फंसने पर व्यक्ति उसमें धंसता ही चला जाता है। ज्योतिष शास्त्र में षष्ठम, अष्टम, द्वादश भाव एवं मंगल को कर्ज का कारक ग्रह माना जाता है।
मंगल के कमजोर होने पर या पाप ग्रह से संबंधित होने पर या अष्टम, द्वादश, षष्ठम भाव में पर नीच स्थिति में होने पर व्यक्ति सदैव ऋणी बना रहता है। ऐसे में यदि मंगल पर शुभ ग्रहों की दृष्टि पड़े तो कर्ज होता है, लेकिन मुश्किल से उतरता है।
शास्त्रों में मंगलवार और बुधवार को कर्ज के लेन-देन के लिए वर्जित किया गया है। मंगलवार को कर्ज लेने वाला व्यक्ति आसानी से कर्ज चुका नहीं पाता है तथा उस व्यक्ति की संतान भी इस वजह से परेशानियां उठाती है।
कर्ज निवारण से मुक्ति के लिए उपाय.
1. शनिवार को ऋणमुक्तेश्वर महादेव का पूजन करें।
2. मंगल की पूजा, दान, और मंगल के मंत्रों का जप करें।
3. मंगल एवं बुधवार को कर्ज का लेन-देन न करें।
4. लाल, सफेद वस्त्रों का अधिकतम प्रयोग करें।
5. श्रीगणेश को प्रतिदिन दूर्वा और मोदक का भोग लगाएं।
6. श्रीगणेश के अथर्वशीर्ष का पाठ प्रति बुधवार करें।
7. शिवलिंग पर प्रतिदिन कच्चा दूध चढ़ाएं।
कर्ज या ऋ़ण का होना जिंदगी को मुश्किल में डाल देता है। कर्ज मुक्त जीवन ही सबसे खुशहाल जीवन होता है। कई बार कर्ज लेने के बाद उसे लौटाना व्यक्ति को भारी पड़ता है और उसकी पूरी जिंदगी कर्ज चुकाते-चुकाते खत्म हो जाती है। कर्ज मुक्ति हेतु आइए जानें कुछ सरल और कुछ कठिन, लेकिन अचूक उपाय।
नोट : चर लग्न जैसे- मेष, कर्क, तुला व मकर में कर्ज लेने पर शीघ्र उतर जाता है। लेकिन, चर लग्न में कर्जा दें नहीं। चर लग्न में पांचवें व नौवें स्थान में शुभ ग्रह व आठवें स्थान में कोई भी ग्रह नहीं हो, वरना ऋण पर ऋण चढ़ता चला जाएगा।
ऋ‍ण उतारने के लिए : एक नारियल पर चमेली का तेल मिले सिन्दूर से स्वस्तिक का चिह्न बनाएं। कुछ भोग (लड्डू अथवा गुड़-चना) के साथ हनुमानजी के मंदिर में जाकर उनके चरणों में अर्पित करके ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ करें। तत्काल लाभ प्राप्त होगा।
दूसरा उपाय शनिवार के दिन सुबह नित्य कर्म व स्नान आदि करने के बाद अपनी लंबाई के अनुसार काला धागा लें और इसे एक नारियल पर लपेट लें। इसका पूजन करें और उसको नदी के बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। साथ ही भगवान से ऋण मुक्ति के लिए प्रार्थना करें ।
भौम प्रदोष करें : हर महीने की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। अलग-अलग दिन पड़ने वाले प्रदोष की महिमा अलग-अलग होती है। सोमवार का प्रदोष, मंगलवार को आने वाला प्रदोष और अन्य वार को आने वाला प्रदोष सभी का महत्व और लाभ अलग अलग है।

मंगलवार को आने वाले इस प्रदोष को भौम प्रदोष कहते हैं। इस दिन स्वास्थ्य सबंधी तरह की समस्याओं से मुक्ति पाई जा सकती है। इस दिन प्रदोष व्रत विधिपूर्वक रखने से कर्ज से छुटकारा मिल जाता है।
मंगल एवं बुध का उपाय : मंगल की भातपूजा, दान, होम और जप करना चाहिए। मंगल एवं बुधवार को कर्ज का लेन-देन न करें। प्रतिदिन हनुमानअष्टक का पाठ सात बार करें। अगर प्रतिदिन करना संभव न हो तो मंगलवार को जरूर करें।
* ऋण की किश्तों को मंगलवार के दिन ही अदा करें। ऐसा करने से कर्ज शीघ्र ही समाप्त हो जाता है।
* किसी भी महीने की कृष्णपक्ष की 1 तिथि, शुक्लपक्ष की 2, 3, 4, 6, 7, 8, 10, 11, 12, 13 पूर्णिमा व मंगलवार के दिन उधार दें और बुधवार को कर्ज लें।
* बुधवार को सवा पाव मूंग उबालकर घी-शक्कर मिलाकर गाय को खिलाने से शीघ्र कर्ज से मुक्ति मिलती है।
* वास्तुदोष नाशक हरे रंग के गणपति मुख्य द्वार पर आगे-पीछे लगाएं।
* कहा जाता है कि भोजन में गुड़ का प्रयोग भी इस दृष्टि से अति उत्तम है।
* प्रतिदिन लाल मसूर की दाल का दान करें l
ऋणमोचक मंगल या गजेन्द्र-मोक्ष स्तोत्र का पाठ करें: यदि आप कर्ज घेरे रहते हैं, उन्हें प्रतिदिन 'ऋणमोचक मंगल स्तोत्र' का पाठ करना चाहिए। यह पाठ शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार से शुरू करना चाहिए। यदि प्रतिदिन किसी कारण न कर सकें, तो प्रत्येक मंगलवार को अवश्य करना चाहिए।
इसके अलावा कर्ज-मुक्ति के लिए आप 'गजेन्द्र-मोक्ष' स्तोत्र का प्रतिदिन सूर्योदय से पूर्व पाठ भी कर सकते हैं। दोनों में से किसी एक का ही पाठ करें। दोनों ही कर्ज मुक्ति के लिए अमोघ उपाय हैं।

गुलाब का उपाय: सर्वप्रथम 5 लाल गुलाब के पूर्ण खिले हुए फूल लें। इसके पश्चात् डेढ़ मीटर सफेद कपड़ा लेकर अपने सामने बिछा लें।
अब इन पांचों गुलाब के फुलों को उसमें रखकर 21 बार गायत्री मंत्र पढ़ते हुए उसे बांध दें। अब स्वयं जाकर इन्हें जल में प्रवाहित कर दें। इस उपाय से जल्द ही कर्ज से मुक्ति मिल जाती है।
श्मशान का पानी : यदि आप निरंतर कर्ज में डूबते जा रहे हैं तो श्मशान के कुएं का जल लाकर किसी पीपल के वृक्ष पर चढ़ाना चाहिए। यदि यह उपाय कम से कम छह 6 शनिवार किया जाए तो आश्चर्यजनक परिणाम प्राप्त होते हैं।
विष्णु-लक्ष्मी मंदिर : सोमवार के दिन एक रूमाल, 5 गुलाब के फूल, 1 चांदी का पत्ता, थोड़े से चावल तथा थोड़ा सा गुड़ लें। फिर किसी विष्णु लक्ष्मीजी के मंदिर में जाकर मूर्त्ति के सामने रूमाल रखकर शेष वस्तुओं को हाथ में लेकर 21 बार गायत्री मंत्र का पाठ करते हुए बारी बारी से उक्त वस्तुओं को उसमें डालते रहें। फिर इनको इकट्ठा करके कहें कि 'मेरी परेशानियां दूर हो जाएं तथा मेरा कर्जा उतर जाए।' यह क्रिया आगामी 7 सोमवार तक करें।
सियार सिंगी : यदि आप कर्ज से परेशान हैं, तो सियार सिंगी लेकर उसे एक डिब्बी में रख लें और उसे प्रत्येक पुष्य नक्षत्र में सिंदूर चढ़ाते रहें। ऐसा करने से शीघ्र ही शुभ फल मिलेगा। इसके अलवा तिजोरी में सिंदूर युक्त हत्था जोड़ी रखने से भी आर्थिक लाभ होगा।
तांत्रिक उपाय : दोनों मुट्ठियों में काली राई लें। चौराहे पर पूर्व दिशा की ओर मुंह रखें तथा दाहिने हाथ की राई को बाईं ओर तथा बाएं हाथ की राई को दाहिनी दिशा में फेंक दें। राई फेंकने के पश्चात चौराहे पर सरसों का तेल डालकर दोमुखी दीपक जला देना चाहिए। दीया मिट्टी का रखना चाहिए।
यह प्रयोग शुक्ल पक्ष के प्रथम शनिवार को संध्या के समय करें। श्रद्धा द्वारा किया गया यह उपाय अवश्य कर्ज से मुक्ति दिलाता है। एक बार सफलता न प्राप्त हो तो दोबारा फिर कर लेना चाहिए। यह उपाय शनिश्‍चरी अमावस्या को भी कर सकते हैं।
 


यंत्र मंत्र तंत्र (Exorcism Mechanism)

हत्था जोड़ी
हत्था जोड़ी में अद्भुत प्रभाव निहित रहता है, यह साक्षात चामुंडा देवी का प्रतिरूप है. यह जिसके पास भी होगा वह अद्भुत रुप से प्रभावशाली होगा. सम्मोहन, वशीकरण, अनुकूलन, सुरक्षा में अत्यंत गुणकारी होता है, हत्था जोड़ी। हत्था जोड़ी जो की एक महातंत्र में उपयोग में लायी जाती है और इसके प्रभाव से शत्रु दमन तथा मुकदमो में विजय हासिल होती है !
मेहनत और लगन से काम करके धनोपार्जन करते हैं फिर भी आपको आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तो आपको अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए उपाय करना चाहिए। इसके लिए किसी भी शनिवार अथवा मंगलवार के दिन हत्था जोड़ी घर लाएं। इसे लाल रंग के कपड़े में बांधकर घर में किसी सुरक्षित स्थान में अथवा तिजोरी में रख दें। इससे आय में वृद्घि होगी एवं धन का व्यय कम होगा।
तिजोरी में सिन्दूर युक्त हत्था जोड़ी रखने से आर्थिक लाभ में वृद्धि होने लगती है। हाथा जोड़ी एक जड़ है। गायत्री मंत्र से पूजने के बाद इलायची तथा तुलसी के पत्तों के साथ एक चांदी की डिब्बी में रख दें। इससे धन लाभ होता है।हाथा जोड़ी को इस मंत्र से सिद्ध करें-

ऊँ किलि किलि स्वाहा।
 


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मोहिनी मंत्र:-

ॐ नमो आदेश गुरु का । मोहिनी मोहिनी कहा चली । बाहर खुदाई काम कन चली । फलानी फलाने को देखै,जरै मरै । मेरे को देखकर पायन पडै । छु मंत्र काया ,आदेश ,गुरु की शक्ती ,मेरी भक्ति ,फूरो मंत्र ईश्वरो वाचा ॥
किसी भी शुभ मुहूर्त मे इस मंत्र का आसन पर बिना हिले-डुले रुद्राक्ष माला से ११ माला मंत्र जाप कीजिये और मंत्र जाप के बाद १०८ बार मंत्र बोलते हुये सरसो के तेल से हवन मे आहुती दीजिये,हवन मे पूर्ण आहुती के बाद नींबू का बलि मंत्र बोलकर देना है और थोडासा उसी नींबू का रस नींबू को निचौड कर डाल दीजिये,यहा मंत्र सिद्धि पूर्ण होता है,दिशा-पच्छिम वस्त्र लाल रंग के उचित है॰
मंत्र सिद्धि के बाद ५ प्रकार के जड़ी-बूटी का पाउडर बनाना है और उसीपे १०८ बार मंत्र बोलकर ३ फूँक मारे फिर जिसको भी खाने मे देगे वह आपके अनुकूल होगा,यह क्रिया आप अपने लिए भी कर सकते है और किसी और व्यक्ति के लिये भी कर सकते हो,यह ५ प्रकार के जड़ी-बूटी पंसारी के दुकान मे मिलता है परंतु इसमे “पायजोड़ी” नामक जड़ी-बूटी मिलना शायद मुश्किल हो परंतु धुंडीये मिल जायेगा किसी-ना-किसी दुकान मे,आप एक बार यह ५ प्रकार का जड़ी-बूटी कही से प्राप्त कर लेते है तो आपको इसमे बहोत सारे कार्य बन जायेगे क्यूके इसमे येसा नहीं “एक बार पाउडर बनाओ तो एक ही बार काम मे आये,जब तक पाउडर समाप्त ना हो तब तक काम मे आयेगा”,इस ५ प्रकार के जड़ी-बूटी के नाम है -
1)हाथजोडि,2)पायजोडि,3)इंद्रजाल,4)मोहिनीजाल,5)मायाजाल.
 


यंत्र मंत्र तंत्र (Exorcism Mechanism)

गर्भपात रोकने का उपाय --
     मन्त्र : -- ॐ नमो आदेश गुरु को जल बाँधूँ थल बाँधूँ डाकिनी शाकिनी भूत-प्रेत-पिशाच बांध,गिरता गर्भ बांधूं, दोष बांधूं,बन्ध्या दोष बांधूं,गुरु की शक्ति मेरी भक्ति फुरो मन्त्र ईश्वरी वाचा।Forwarded as received.
  मन्त्र को याद करो।होलिका दहन के दिन प्रातकल पूजन स्थल पर स्नान करने के बाद पूर्वाभि मुख बैठ कर चौकी या पाटे पर सफेद कपड़ा बिछा 9 गोमती चक्र ,9 हकीक के दाने 9 सुपारी तथा एक हत्थाजोडी(मार्किट में पूजन भण्डार में उपलब्ध है) रख 9 गुलाब के फूल चढ़ा धूप-दीप कर हकीक या स्फटिक की माला से 11 माला उपरोक्त मन्त्र का जप करे। सारी सामग्री वहीँ रक्खी रहने दे।रात्रि में होली की आग में इसी मन्त्र से श्वेत तिल से यथाशक्ति हवन करे।भभूत मस्तक में लगा घर आ जावे ।सामग्री को कपड़े में बाँध पोटली बना पूजन स्थल पर रख दे ।सन्तान प्राप्ति के बाद पोटली को कृष्ण के मन्दिर में रख आवे।।इति सिद्धम्।।ॐ शांति ॐ ।।
 


यंत्र मंत्र तंत्र (Exorcism Mechanism)

जादू-टोना, किया -कराया वापस करने का प्रयोग : --
  मन्त्र : -- ॐ नमो गुरु का आदेश विकट वेश लम्बे केश प्रह्लाद राखे पातळ राखे जो कोई किये कराये चिन्ते चिंताए तो इसको छोड़ कर अवर को ध्यावेध्यावे मेरा कहना न माने तो नरसिंह वीर खावें।।
 प्रथम उपरोक्त मन्त्र को याद करें।
होलिका दहन के दिन प्रात: पूजन स्थल पर शुद्ध हो पाटे पर स्वेत वस्त्र बिछाकर भोजपत्र पर उपरोक्त मन्त्र लाल चन्दन की स्याही से चढ़ाचढ़ा कनेर की कलम से लिख कर रक्खे।उसीपर 11 कौड़ी 11 सुपारी एक लघु नारियल रख 11 सिक्के तथा 11 गुलाब के फूल रख पंचोपचार पूजन कर स्फटिक की माला से 11 माला जप करे।मन्त्र वाले भोजपत्र पर ही पीड़ित व्यक्ति का नाम लिखदे। पूजन से उठ आवे ।रात्रि में होलिका दहन के समय उसी मन्त्र से हवन भी करे।कुछ राख घर लेता आवे।पूजन की हुयी सामग्री को पोटली बना तिजोरी या पूजन स्थल पर ही सुरक्षित रख दे।यही मन्त्र अन्य भोजपत्र पर लिख ताबीज के रूप में सपरिवार धारण करे.baadha शांति हो जावेगी।ॐ शांति ॐ।
 


यंत्र मंत्र तंत्र (Exorcism Mechanism)

  पितृ-दोष निवारण हेतु
उपाय : --
मन्त्र : -- ॐ श्रीं सर्व पितृ दोष निवारणाय क्लेश हन हन सुख शांति देहि देहि फट् स्वाहा । Forwarded as received.
होलिका दहन के दिन सबेरे स्नानादि से निवृत्त होकर उत्तराभिमुख हो अपने पूजन स्थल पर बैठ पाटे पर श्वेत वस्त्र बिछा उसपर 2 लघु नारियल 5 गोमती चक्र रख पुष्प चन्दन चावल से पूजन कर हकीक या स्फटिक की माला से उपरोक्त मन्त्र कर् 11 माला जप कर दूध प्रसाद का भोग लगाएं।उसके पश्चात सारी सामग्री पाटे पर की कपड़े में बांध पोटली बना रसोईं घर में कील में टांग दे।प्रसाद परिवार में बाँट दे।रात्रि में होली की अग्नि में हवन करे।थोड़ी भभूत घर लेकर पानी के लोटे में डाल जल सरे घर में छिड़क देवे ।भोजपत्र पर मन्त्र लिख सभी लोग ताबीज के रूप में धारण भी कर सकते हैं
ॐ शांति ॐ
 


पुत्र प्राप्ति हेतु : ---
मन्त्र---देवकीसुत गोविन्दम् वासुदेव जगतपते।देहि में तनयं कृष्णत्वां महं शरणागते।
 प्रयोग --
 मन्त्र याद करो।होलिका दहन की रात्रि में पश्चिम दिशा की ओर मुख करके,पीला आसन बिछा कर पीला ही वस्त्र पहन कर बैठे सामने बजोट या लकड़ी के पाटे पर पीला ही वस्त्र बिछाकर,माथे में केशर का तिलक लगा कर बैठ जाए।पाटे पर तीन कौडियां 3 सुपारी स्थापित कर उसमे भी केशर का तिलक लगाय ,पूजन कर स्फटिक की माला से 11।माला जप कर ले और कृष्ण का ध्यान करे ।मनोकामना पूरा होंने पर सारी पूजा सामग्री एवं बची रक्खी पूजा सामग्री को किसी बहते जल में प्रवाहित कर दे।स्फटिक की माला स्वयं पहने।पत्नी के मासिक धर्म होने तक दोनों ब्रह्मचर्य रहे ।सिर धुलने के बाद ही शारीरिक संबन्ध बनाएं।आपका कार्य अवश्य पूर्ण होगा ।।ॐ शांति ॐ ।।
 


यंत्र मंत्र तंत्र (Exorcism Mechanism)

गोमतीचक्र का प्रयोग :---
1--पांच गोमती चक्र को होली के दिन थोडा सिन्दूर लगा कर शत्रु का नाम उच्चारण करते हुए जलती हुई होली में फेंक दें ।शत्रु शत्रुता भूल सही व्योहार करने लगेगा।
2 --चार गोमती चक्र को अगर होली के दिन रोगी के बिस्तर के साथ बाँध दिया जाय तो रोगी स्वस्थ्य होने लगेगा।पूर्ण स्वस्थ्य होने पर गोमती चक्र को प्रात:काल पीपल के पेंड के निचे गाड़ देना चाहिए।
 3 -- होली के दिन 7 गोमती चक्र को सवा मीटर कपड़े में बाँध कर स्वयं सहित अपने पूरे परिवार के ऊपर से सात बार उवार कर बहते पानी में फेंक दे तो वह परिवार की रक्षाकवच का कार्य करेगा।
4 -- यदि 11 गोमती चक्र को पीले वस्त्र में लपेट कर होली जलने के समय तिजोरी में रक्खे तो वर्ष पर्यन्त तिजोरी भरी रहेगी।
 5 -- होली के दिन कुछ गोमती चक्र में चन्दन लगा कर डिब्बे में पूजन स्थल पर रख दे।कभी भी प्रतियोगिता या मुकदमें में जाये तो तीन गोमती चक्र जेब में रख कर जाये सफलता मिलेगी ।

व्यापार वृद्धि प्रयोग : --
श्री हनुमत वीर ,करो ये काम,वैंपार बढ़े,तंतर हो दूर टूणा टूट ग्राहक बढ़े,कारज सिद्ध होय,वरना अंजनी की है दुहाई।
  (उपरोक्त मन्त्र को याद कर होली जलते समय हवन सामग्री से होलिका में ही हवन कर ले।
  रात्रि में पूजन स्थल पर पाटे पर एक हाथ लम्बा सूती लाल कपड़ा बिछा कर उसपर एक मुट्ठी काला तिल की ढेरी करे।उसपर तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करे फिर दीपक में सात गोमती चक्र डाल दे जो तेल में डूबा रहे।अब दीपक के सामने 7 इलायची, 7 लवंग, सात लालमिर्च डंठल सहित रख दे।उपरोक्त मन्त्र का 108 बार जप करे।फिर प्रार्थना करे--हे भगवान मेरे व्यापार को किसी ने बाँधा हो या व्यापार कार्य में कोई बाधा हो जाय और दिन दूनी रात चौगना फैले।फिर सात बार मन्त्र पढ़ दीपक को हाथ से हिला कर या कपड़े से बुझा दे।अब उस लाल कपड़े को सब चीजों सहित उठा पोटली बना चौराहे पर रख आवे।घर आकर अपने हाथ पाँव धो ले।आशातीत सफलता मिलेगी।ॐ शन्ति ॐ
 आजीविका प्राप्त करने हेतु : --
      होलिका दहन के दिन प्रात:स्नान से निवृत्त हो पूर्वाभिमुख हो पूजन स्थल पर बैठ कर सामने चौकी या पाटा पर लाल कपड़ा बिछाए और उसपर सबूत चावल की ढेरी बनाये।उस ढेरी पर तीन लघु नारियल रक्खे।अब घी का दीपक जला कर रक्खे तथा मूंगे की माला से निम्नलिखित मन्त्र का ग्यारह माला जाप करे।
 मन्त्र : --
  ऐं श्रीं ह्रीं क्लीं यक्षिणी प्रियन्तान मम् ।।
 अब होलिका दहन के समय नारियल सहित लालवस्त्र की पोटली बनाकर बाँध दे।दीपक भी बंधेगा ।होलिका दहन के समय उस पोटली को होलिकाग्नि में डाल दे।मूंगे की माला अग्नि में नहीं डाली जावेगी।उसे दुसरे दिन(रंग खेलने के दिन)स्वयं अपने गले में डाल कर पहन लेना होगा।शीघ्र ही आजीविका का साधन प्राप्त होगा।।ॐ शांति ॐ
 विवाह बाधा निवारण : --
  मंगली दोष हो या विवाह में तांत्रिक बाधा डाली गयी होवे ,होलिका दहन के दिन शाम को पते पर लाल वस्त्र बिछा मंगल यन्त्र को(बाजार में पूजन भण्डार में आसानी से मिल जाता है) दूध से धोकर स्थापित करे एवं गुलाब,अक्षत,कुमकुम से पूजन करे।धुप दीप कर मूंगे की माला से ॐ क्रां क्रीं क्रू स: भौमाय नम: मंगल मन्त्र का 108 माला जप करे।फिर प्रतिदिन प्रात:काल उस लड़की या लड़के को यन्त्र का धूप दीप कर एक माला जाप 21 दिनों तक करना होगा।जाप पूर्ण होने पर शीघ्र ही मनोवांछित वर मिलेगा।
  पति-पत्नी का मनमुटाव निवारण : --
 होलिका दहन से एक दिन पूर्वपूर्व ही पत्नी तीन गोमती चक्र,तीन लघु नारियल,एक मोती शंख (पूजनभण्डार में मिल जाता है) पति के सोते समय ऊवार कर कपड़े की पोटलीपोटली बना रख ले।होलिका दहन के दिन जलती हुयी होली में पोटली डाल कर भस्म कर दे।होलिका से हाथ जोड़ प्रार्थना करे -- हमारे मन मुटाव भी होलिका की तरह भस्म हो जावें।हमारा प्रेम चिरस्थायी रक्खें,अब बिना पीछे देखे घर आ जावें।13 दिन के भीतर ही कलेश से मुक्ति मिलेगी।। ॐ शांति ॐ
 


यंत्र मंत्र तंत्र (Exorcism Mechanism)

शूकर दन्त के टोटके

अभिमंत्रित शूकर दंत से लाभ
1. जिस घर में शूकर दंत स्थापित हो वहाँ भूत-प्रेत तथा ऊपरी बाधा का भय नहीं रहता|
2. सुनवाई के समय जेब में अभिमंत्रित शूकर दंत रखने से अदालती मामलों में जीत होती है|
3. रोगी को शूकर दंत का ताबीज पहना देने से पुरानी बीमारी से निजात मिलती है चाहे वह कैसी भी हो।
4. साक्षतकार हेतु जाते समय जेब में अभिमंत्रित शूकर दंत रख लें| इससे बेरोजगारों को नौकरी मिल जाती है तथा जो नौकरी में उन्हें पदोन्नति प्राप्त होती है।
5. इसका ताबीज धारण करने से अविवाहितों को मनोवांछित विवाह प्रस्ताव प्राप्त होता है। यदि प्रेम संबंध टूट गया हो तो फिर से जुड़ जाती है|
6. यदि गलत गवाही के कारण जेल हो गई हो तो उससे भी मुक्ति मिल जाती है अथवा सरलता से उसे बेल मिल सकती है।
7. यदि चारो ओर से शत्रुओं से घिर गए हो तो शूकर दंत की ताबीज धारण करें, इससे शत्रुओं का नाश होता है।
8. मात्र घर में स्थापित कर देने से आर्थिक लाभ होता है, पुराने कर्जों से मुक्ति मिल जाती हैं|
9. परिवार में सुख शांति रहती है। पति पत्नी में अनबन दूर हो जाते हैं।
10. यदि परिवार को कोई सदस्य खो गया हो तो वह मिल जाता है।
“ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं वाराह-दन्ताय भैरवाय नमः।”

विधि- ‘शूकर-दन्त’ को अपने सामने रखकर उक्त मन्त्र का होली, दीपावली, दशहरा आदि में १०८ बार जप करे। फिर इसका ताबीज बनाकर गले में पहन लें। ताबीज धारण करने वाले पर जादू-टोना, भूत-प्रेत का प्रभाव नहीं होगा। लोगों का वशीकरण होगा। मुकदमें में विजय प्राप्ति होगी। रोगी ठीक होने लगेगा। चिन्ताएँ दूर होंगी और शत्रु परास्त होंगे। व्यापार में वृद्धि होगी।


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