आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)
एक महिला जो 20 वर्षों से डायबिटीज झेल रहीं
 
 65 वर्षीय महिला जो दिन में दो बार इन्सुलिन लेने को विवश थीं, आज इस रोग से पूर्णतः मुक्त होकर सामान्य सम्पूर्ण आहार ले रही हैं और मिठाई भी ।।
 
--डाक्टरों ने उस महिला को इन्सुलिन और अन्य ब्लड शुगर कंट्रोल करने वाली दवाइयां भी बंद करने की सलाह दी है ।
और एक ख़ास बात । चूंकि केवल दो सप्ताह चलने वाला यह उपचार पूर्णतः प्राकृतिक तत्वों से घर में ही निर्मित होगा, अतः इसके कोई दुष्प्रभाव होने की रत्ती भर भी संभावना नहीं है ।
 
--मुम्बई के किडनी विशेषज्ञ डा. टोनी अलमैदा ने दृढ़ता और धैर्य के साथ इस औषधि के व्यापक प्रयोग किये हैं तथा इसे आश्चर्यजनक माना है ।
 
अतः आग्रह है कि इस उपयोगी उपचार को अधिक से अधिक प्रचारित करें, जिससे अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सकें |
देखिये कितना आसान है इस औषधि को घर में ही निर्मित करना |
आवश्यक वस्तुएं–
 
> 1 – गेंहू 100 gm.
> 2 – वृक्ष से निकली गोंद 100 gm.
> 3 - जौ 100 gm.
> 4 - कलुन्जी 100 gm.
 
--( निर्माण विधि )
 
उपरोक्त सभी सामग्री को 5 कप पानी में रखें । आग पर इन्हें 10 मिनट उबालें । इसे स्वयं ठंडा होने दें । ठंडा होने पर इसे छानकर पानी को किसी बोतल या जग में सुरक्षित रख दें ।
 
--( उपयोग विधि )
 
सात दिन तक एक छोटा कप पानी प्रतिदिन सुबह खाली पेट लेना ।
अगले सप्ताह एक दिन छोड़कर इसी प्रकार सुबह खाली पेट पानी लेना । मात्र दो सप्ताह के इस प्रयोग के बाद आश्चर्यजनक रूप से आप पायेंगे कि आप सामान्य हो चुके हैं ।
 
बिना किसी समस्या के अपना नियमित सामान्य भोजन ले सकते हैं ।
जिस किसी के पेरेंट्स को प्रॉब्लम हो उपयोग करे ।

  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

अदरक या होमयोपैथी दवा 'सल्फर200' और 'सल्फर1000' के द्वारा 

अदरक के छोटे छोटे टुकड़ोँ मेँ नीबू निचोड़ लेँ और काला नमक मिला लेँ और धूप मेँ अच्छी तरह सुखा के रख लेँ । तलब उठने पर एक टुकड़ा मुँह मेँ डालकर चूसना शुरू करेँ ।

सामान्य रूप से नशा करने वालोँ के लिये :

तीन दिन लगातार सुबह खाली पेट सल्फर200  की एक बूँद अपनी जीभ पर डालो बस । तीन ही दिन मेँ नशा छूट जाएगा ।

बहुत नशा करने वाले लोगोँ के लिये : लगातार 2या 3महीने तक सल्फर 1000की एक बूँद जीभ पर रखो हर पाँच सात दिन के बाद ।

इसके साथ एक प्राणायाम अवश्य करेँ जिसमेँ सुबह शौचादि के बाद ताजी हवा मेँ आँख बंद करके शाँति से सुखासन मेँ बैठ जाएँ और दाहिनी नाक को बंद करके केवल बाईँ नाक से साँस भरे और छोड़ेँ ।

केवल दाईँ नाक से साँस भरेँ और छोड़ेँ ।

कम से कम 10 मिनट तक अवश्य करेँ ।

कैंसर बहुत तेज़ी से बड़ रहा है इस देश में । हर साल बीस लाख लोग कैंसर से मर रहे है और हर साल नए Cases आ रहे है । और सभी डॉक्टर्स हात-पैर डाल चुके है ।

राजीव भाई की एक छोटी सी विनती है याद रखना के … " कैंसर के patient को कैंसर से death नही होती है, जो treatment दिया जाता है उससे death होती है " । माने कैंसर से जादा खतरनाक कैंसर का treatment है । Treatment कैसा है आप सभी जानते है .. Chemotherapy दे दिया, Radiotherapy दे दिया, Cobalt-therapy दे दिया ।

 

इसमें क्या होता है के शारीर का जो प्रतिरक्षक शक्ति है Resistance वो बिलकुल ख़तम हो जाते है । जब Chemotherapy दिए जाते है ये बोल कर के हम कैंसर के सेल को मारना चाहते है तो अछे सेल भी उसी के साथ मर जाते है । राजीव भाई के पास कोई भी रोगी जो आया Chemotherapy लेने के बाद वे उनको बचा नही पाए । लेकिन इसका उल्टा भी रिकॉर्ड है .. राजीव भाई के पास बिना Chemotherapy लिए हुए कोई भी रोगी आया Second & third Stage तक वो एक भी नही मर पाया अभी तक ।

 

मतलब क्या है Treatment लेने के बाद जो खर्च आपने कर दिया वो तो गया ही और रोगी भी आपके हात से गया । डॉक्टर आपको भूल भुलैया में रखता है अभी 6महीने में ठीक हो जायेगा 8महीने में ठीक हो जायेगा लेकिन अंत में वो जाता ही है , कभी हुआ नही है के Chemotherapy लेने के बाद कोई बच पाया हो । आपके घर परिवार में अगर किसीको कैंसर हो जाये तो जादा खर्चा मत करिए कियों की जो खर्च आप करेंगे उससे मरीज का तो भला नही होगा उसको इतना कष्ट होता है की आप कल्पना नही कर सकते ।

 

उसको जो injections दिए जाते है, जो Tablets खिलाई जाती है, उसको जो Chemotherapy दी जाती है उससे सारे बाल उड़ जाते है, भ्रू के बाल उड़ जाते है, चेहरा इतना डरावना लगता है के पहचान में नही आता ये अपना ही आदमी है। इतना कष्ट कियों दे रहे हो उसको ? सिर्फ इसलिए के आपको एक अहंकार है के आपके पास बहुत पैसा है तो Treatment कराके ही मानुगा ! होता ही नही है वो, और आप अपनी आस पड़ोस की बाते जादा मत सुनिए क्योंकि आजकल हमारे Relatives बहुत Emotionally Exploit करते है । घर में किसीको गंभीर बीमारी हो गयी तो जो रिश्तेदार है वो पहले आके कहते है ' अरे All India नही ले जा रहे हो? PGI नही ले जा रहे हो ? Tata Institute बम्बई नही ले जा रहे हो ? आप कहोगे नही ले जा रहा हूँ मेरे घर में ही चिकित्सा .... अरे तुम बड़े कंजूस आदमी हो बाप के लिए इतना भी नही कर सकते माँ के लिए इतना नही कर सकते " । ये बहुत खतरनाक लोग होते है !! हो सकता है कई बार वो Innocently कहते हो, उनका intention ख़राब नही होता हो लेकिन उनको Knowledge कुछ भी नही है, बिना Knowledge के वो suggestions पे suggestions देते जाते है और कई बार अच्छा खासा पड़ा लिखा आदमी फंसता है उसी में .. रोगी को भी गवाता है पैसा भी जाता है ।

 

कैंसर के लिए क्या करे ? हमारे घर में कैंसर के लिए एक बहुत अछि दावा है ..अब डॉक्टर ने मान लिया है पहले तो वे मानते भी नही थे; एक ही दुनिया में दावा है Anti-Cancerous उसका नाम है " हल्दी " । हल्दी कैंसर ठीक करने की ताकत रखता है । हल्दी में एक केमिकल है उसका नाम है कर्कुमिन (Carcumin) और ये ही कैंसर cells को मार सकता है बाकि कोई केमिकल बना नही दुनिया में और ये भी आदमी ने नही भगवान ने बनाया है । हल्दी जैसा ही कर्कुमिन और एक चीस में है वो है देशी गाय के मूत्र में । गोमूत्र माने देशी गाय के शारीर से निकला हुआ सीधा सीधा मूत्र जिसे सूती के आट परत की कपड़ो से छान कर लिया गया हो । तो देशी गाय का मूत्र अगर आपको मिल जाये और हल्दी आपके पास हो तो आप कैंसर का इलाज आसानी से कर पायेंगे । अब देशी गाय का मूत्र आधा कप और आधा चम्मच हल्दी दोनों मिलाके गरम करना जिससे उबाल आ जाये फिर उसको ठंडा कर लेना । Room Temperature में आने के बाद रोगी को चाय की तरहा पिलाना है .. चुस्किया ले ले के सिप कर कर । एक और आयुर्वेदिक दावा है पुनर्नवा जिसको अगर आधा चम्मच इसमें मिलायेंगे तो और अच्छा result आयेगा । ये Complementary है जो आयुर्वेद के दुकान में पाउडर या छोटे छोटे पीसेस में मिलती है ।

 

इस दावा में सिर्फ देशी गाय का मूत्र ही काम में आता है जेर्सी का मूत्र कुछ काम नही आता । और जो देशी गाय काले रंग का हो उसका मूत्र सबसे अच्छा परिणाम देता है इन सब में । इस दवा को (देशी गाय की मूत्र, हल्दी, पुनर्नवा ) सही अनुपात में मिलाके उबालके ठंडा करके कांच की पात्र में स्टोर करके रखिये पर बोतल को कभी फ्रिज में मत रखिये, धुप में मत रखिये । ये दावा कैंसर के सेकंड स्टेज में और कभी कभी थर्ड स्टेज में भी बहुत अछे परिणाम देते है । जब स्टेज थर्ड क्रोस करके फोर्थ में पोहुंच गया तब रिजल्ट में प्रॉब्लम आती है । और अगर अपने किसी रोगी को Chemotherapy बैगेरा दे दिया तो फिर इसका कोई असर नही आता ! कितना भी पिलादो कोई रिजल्ट नही आता, रोगी मरता ही है । आप अगर किसी रोगी को ये दावा दे रहे है तो उसे पूछ लीजिये जान लीजिये कहीं Chemotherapy सुरु तो नही हो गयी ? अगर सुरु हो गयी है तो आप उसमे हात मत डालिए, जैसा डॉक्टर करता है करने दीजिये, आप भगवान से प्रार्थना कीजिये उसके लिए .. इतना ही करे । और अगर Chemotherapy स्टार्ट नही हुई है और उसने कोई अलोप्यथी treatment सुरु नही किया तो आप देखेंगे इसके Miraculous रिजल्ट आते है । ये सारी दवाई काम करती है बॉडी के resistance पर, हमारी जो vitality है उसको improve करता है, हल्दी को छोड़ कर गोमूत्र और पुनर्नवा शारीर के vitality को improve करती है और vitality improve होने के बाद कैंसर cells को control करते है ।

 

तो कैंसर के लिए आप अपने जीवन में इस तरह से काम कर सकते है; इसके इलावा भी बहुत सारी मेडिसिन्स है जो थोड़ी complicated है वो कोई बहुत अच्छा डॉक्टर या वैद्य उसको हंडल करे तभी होगा आपसे अपने घर में नही होगा । इसमें एक सावधानी रखनी है के गाय के मूत्र लेते समय वो गर्वबती नही होनी चाहिए। गाय की जो बछड़ी है जो माँ नही बनी है उसका मूत्र आप कभी भी use कर सकते है।

 

ये तो बात हुई कैंसर के चिकित्सा की, पर जिन्दगी में कैंसर हो ही न ये और भी अच्छा है जानना । तो जिन्दगी में आपको कभी कैंसर न हो उसके लिए एक चीज याद रखिये के, हमेसा जो खाना खाए उसमे डालडा तो नही है ? उसमे refined oil तो नही है ? ये देख लीजिये, दूसरा जो भी खाना खा रहे है उसमे रसेदार हिस्सा जादा होना चाहिए जैसे छिल्केवाली डाले, छिल्केवाली सब्जिया खा रहे है , चावल भी छिल्केवाली खा रहे है तो बिलकुल निश्चिन्त रहिये कैंसर होने का कोई चान्स नही है ।

 

और कैंसर के सबसे बड़े कारणों में से दो तिन कारन है, एक तो कारन है तम्बाकू, दूसरा है बीड़ी और सिगरेट और गुटका ये चार चीजो को तो कभी भी हात मत लगाइए क्योंकि कैंसर के maximum cases इन्ही के कारन है पुरे देश में ।


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

नींबू

नींबू गुणों की खान ।

नींबू को विटामिन ''सी'' का सबसे अच्छा स्त्रोत व स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक माना जाता है। विशेषकर पेट से संबंधित समस्याओं के लिए नींबू का प्रयोग अनेक तरीकों से किया जाता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं नींबू के ऐसे ही कुछ प्रयोगों के बारे में जिनसे आप कई छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्याओं से निजात पा सकते हैं।

√ नींबू की शिकंजी, चीनी के बजाय सेंधा नमक डालकर पिएं कब्ज दूर हो जाएगी। स्कर्वी रोग में नींबू कारगर है एक भाग नींबू का रस और आठ भाग पानी मिलाकर रोजाना दिन में एक बार लें। नींबू के रस में थोड़ी शकर मिलाकर इसे गर्म कर सिरप जैसा बना लें। फिर इसमें थोड़ा पानी मिलाकर पीएं पित्त के लिए यह अचूक औषधि है ।

√ आधे नींबू का रस और दो चम्मच शहद मिलाकर चाटने से तेज खांसी व जुकाम में लाभ होता है।

√ नींबू से हृदय की असामान्य धड़कन सामान्य हो जाती है।

√ उच्च रक्तचाप के रोगियों की रक्तवाहिनियों को यह शक्ति देता है। 

√ एक नींबू के रस में तीन चम्मच शकर, दो चम्मच पानी घोलकर बालों की जड़ों में लगाकर एक घंटे बाद अच्छे से सिर धोने से रूसी दूर हो जाती है और बाल गिरना बंद हो जाते हैं। बालों में रूसी है तो बालों की जड़ों में नींबू का रस थोड़ी देर के लिए लगाकर छोड़ दें। फिर कुछ देर बाद सिर धो लें। रूसी से छुटकारा मिल जाएगा। शैम्पू करने के बाद थोड़े-से पानी में नींबू का रस मिलाकर बालों पर लगाएं। बाल चमकदार व मुलायम हो जाएंगे।

√ मोटापे से परेशान हैं तो सुबह हल्के गर्म पानी में नींबू का रस डालकर पीएं। निरंतर प्रयोग से वजन कम हो जाएगा। 

√ मलेरिया और हैजा जैसी बीमारियों में भी नींबू पानी बहुत ही फायदेमंद है। नींबू में पिसी काली मिर्च छिड़क कर जरा सा गर्म करके चूसने से मलेरिया ज्वर में आराम मिलता है।

√ काली कोहनियों को साफ करने के लिए नींबू को दो भागों में काटें और उस पर खाने वाला सोडा डालकर कोहनियों पर रगड़ें। मैल साफ हो जाएगा, कोहनियां मुलायम हो जाएंगी।

√ नींबू के सेवन से सूखा रोग दूर होता है। 

√ नींबू का छिलका पीसकर उसका लेप माथे पर लगाने से माइग्रेन ठीक होता है।

√ नींबू के बीज को पीसकर लगाने से गंजापन दूर होता है।

√ बहरापन हो तो नींबू के रस में दालचीनी का तेल मिलाकर कान में डालें।

√ आधा कप गाजर के रस में नींबू का रस मिलाकर पीएं,खून की कमी दूर होगी। 
 


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)


शहद कभी खराब नहीं होता . यह पका पकाया भोजन है और तुरंत ऊर्जा देने वाला है , पर इसे लेते समय कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए |

√ अमरुद , गाना , अंगूर और खट्टे फलों के साथ शहद अमृत के सामान है |

√ चाय कॉफ़ी के साथ शहद ज़हर के सामान है |

√ शहद को आग पर कभी ना तपाये |

√ मांस -मछली के साथ शहद का सेवन ज़हर के सामान है |

√ शहद में पानी या दूध बराबर मात्रा में हानि कारक है |

√ चीनी के साथ शहद मिलाना अमृत मेंज़हर मिलाने के सामान है |

√ एक साथ अधिक मात्रा में शहद लेनासेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है .दिन में २ या ३ बार एक चम्मच शहद लें |

√ घी , तेल , मक्खन में शहद ज़हर के सामान है |

√ शहद खाने से कोई परेशानी महसूस हो तो निम्बू का सेवन करें |

√ समान मात्रा में घी और शहद ज़हर होता है |

√ अलग अलग वृक्षों पर लगे छत्तों में प्राप्त शहद के अलग अलग औषधीय गुण होंगे . जैसे नीम पर लगा शहद आँखों के लिए, जामुन का डायबिटीज़ और सहजन का ह्रदय, वात और रक्तचाप के लिए अच्छा होता है |

√ शीतकाल या बसंतऋतु में विकसित वनस्पति के रस में से बना हुआ शहद उत्तम होता है और गरमी या बरसात में एकत्रित किया हुआ शहद इतना अच्छा नही होता है। गांव या नगर में मुहल्लों में बने हुए शहद के छत्तों की तुलना में वनों में बनें हुए छत्तों का शहद अधिक उत्तम माना जाता है।

√ शहद पैदा करनें वाली मधुमक्खियों के भेद के अनुसार वनस्पतियों की विविधता केकारण शहद के गुण, स्वाद और रंग मेंअंतर पड़ता है।

√ शहद सेवन करने के बाद गरम पानी भी नहीं पीना चाहिए।

√ मोटापा दूर करने के लिए गुनगुने पानी में और दुबलापन दूर करने के लिए गुनगुने दूध के साथ ले |

√ अधिक धुप में शहद ना दे, गरमी से पीड़ित व्यक्ति को गरम ऋतु में दिया हुआ शहद जहर की तरह कार्य करता है।

√ शहद को जिस चीज के साथ लिया जाये उसी तरह के असर शहद में दिखाई देते है। जैसे गर्म चीज के साथ लें तो- गर्म प्रभाव और ठंडी चीज के साथ लेने से ठंडा असर दिखाई देता है। इसलिए मौसम के अनुसार वस्तुएं शहद के साथ ले |

√ ज्यादा मात्रा में शहद का सेवन करने से ज्यादा हानि होती है। इससे पेट में आमातिसार रोग पैदा हो जाता है और ज्यादा कष्ट देता है। इसका इलाज ज्यादा कठिन है। फिर भी यदि शहद के सेवन से कोई कठिनाई हो तो 1 ग्राम धनिया का चूर्ण सेवन करके ऊपर से बीस ग्राम अनार का सिरका पी लेना चाहिए।

√ बच्चे बीस से पच्चीस ग्राम और बड़े चालीस से पचास ग्राम से अधिक शहद एक बार में न सेवन करें। लम्बे समय तक अधिक मात्रा में शहद का सेवन न करें।

√ चढ़ते हुए बुखार में दूध, घी, शहद का सेवन जहर के तरह है।

√ यदि किसी व्यक्ति ने जहर या विषाक्त पदार्थ का सेवन कर लिया हो उसे शहद खिलाने से जहर का प्रकोप एक-दम बढ़कर मौत तक हो सकती है।
 


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

1.जहाँ कहीं भी आपको,काँटा कोइ लग जाय। दूधी पीस लगाइये, काँटा बाहर आय।।

2.मिश्री कत्था तनिक सा,चूसें मुँह में डाल। मुँह में छाले हों अगर,दूर होंय तत्काल।।

3.पौदीना औ इलायची, लीजै दो-दो ग्राम।
खायें उसे उबाल कर, उल्टी से आराम।।

4.छिलका लेंय इलायची,दो या तीन गिराम। सिर दर्द मुँह सूजना, लगा होय आराम।।

5.अण्डी पत्ता वृंत पर, चुना तनिक मिलाय। बार-बार तिल पर घिसे,तिल बाहर आ जाय।।

6.गाजर का रस पीजिये,आवश्कतानुसार।
सभी जगह उपलब्ध यह,दूर करे अतिसार।।

7.खट्टा दामिड़ रस, दही,गाजर शाक पकाय। दूर करेगा अर्श को,जो भी इसको खाय।।

8.रस अनार की कली का,नाक बूँद दो डाल। खून बहे जो नाक से, बंद होय तत्काल।।

9.भून मुनक्का शुद्ध घी,सैंधा नमक मिलाय। चक्कर आना बंद हों,जो भी इसको खाय।।

10.मूली की शाखों का रस,ले निकाल सौ ग्राम। तीन बार दिन में पियें, पथरी से आराम।।

11.दो चम्मच रस प्याज की,मिश्री सँग पी जाय। पथरी केवल बीस दिन,में गल बाहर जाय।।

12.आधा कप अंगूर रस, केसर जरा मिलाय। पथरी से आराम हो, रोगी प्रतिदिन खाय।।

13.सदा करेला रस पिये,सुबहा हो औ शाम। दो चम्मच की मात्रा, पथरी से आराम।।

14.एक डेढ़ अनुपात कप, पालक रस चौलाइ। चीनी सँग लें बीस दिन,पथरी दे न दिखाइ।।

15.खीरे का रस लीजिये,कुछ दिन तीस ग्राम। लगातार सेवन करें, पथरी से आराम।।

16.बैगन भुर्ता बीज बिन,पन्द्रह दिन गर खाय। गल-गल करके आपकी,पथरी बाहर आय।।

17.लेकर कुलथी दाल को,पतली मगर बनाय। इसको नियमित खाय तो,पथरी बाहर आय।।

18.दामिड़(अनार)छिलका सुखाकर,पीसे चूर बनाय। सुबह-शाम जल डाल कम, पी मुँह बदबू जाय।।

19. चूना घी और शहद को, ले सम भाग मिलाय। बिच्छू को विष दूर हो, इसको यदि लगाय।।

20. गरम नीर को कीजिये, उसमें शहद मिलाय। तीन बार दिन लीजिये, तो जुकाम मिट जाय।।

21. अदरक रस मधु(शहद) भाग सम, करें अगर उपयोग। दूर आपसे होयगा, कफ औ खाँसी रोग।।

22. ताजे तुलसी-पत्र का, पीजे रस दस ग्राम। पेट दर्द से पायँगे, कुछ पल का आराम।।

23.बहुत सहज उपचार है, यदि आग जल जाय। मींगी पीस कपास की, फौरन जले लगाय।।

24.रुई जलाकर भस्म कर, वहाँ करें भुरकाव। जल्दी ही आराम हो, होय जहाँ पर घाव।।

25.नीम-पत्र के चूर्ण मैं, अजवायन इक ग्राम। गुण संग पीजै पेट के, कीड़ों से आराम।।

26.दो-दो चम्मच शहद और रस ले नीम का पात। रोग पीलिया दूर हो, उठे पिये जो प्रात।।

27.मिश्री के संग पीजिये, रस ये पत्ते नीम। पेंचिश के ये रोग में, काम न कोई हकीम।।

28.हरड बहेडा आँवला चौथी नीम गिलोय,
पंचम जीरा डालकर सुमिरन काया होय॥


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

हमारी संस्कृति में तांबे, पीतल और कांसे के बर्तनों का इस्तेमाल करने के पीछे अनेक स्वास्थ्य संबंधी कारण छिपे हुए हैं।

1. भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद के अनुसार तो नियमित रूप से तांबे के बर्तन में रखा हुआ पानी पीने से हमारा शरीर चुस्त-दुरूस्त रहता है तथा कब्ज एसिडिटी, अफारा, विविध चर्म-रोग, जोड़ों का दर्द इत्यादि शिकायतों से मुक्ति मिलती है। सवेरे उठकर बिना ब्रश किए हुए एक लीटर पानी पीना स्वास्थ के लिए हितकर होता है। आयुर्वेद की मानें तो ताम्र-धातु से निर्मित ‘जल-पात्र’ सर्वश्रेष्ठ माना गया है। तांबे के अभाव में मिट्टी का ‘जल-पात्र’ भी हितकर बतलाया गया है।

2. तांबा खाद्य- पदार्थों को जहरीला बनाने वाले विषाणुओं को मारने की क्षमता तो रखता ही है, साथ ही कोशिकाओं की झिल्ली और एंजाइम में हस्तक्षेप करता है, जिससे रोगाणुओं के लिए जीवित रह पाना संभव नहीं हो पाता है. तांबे के बर्तन में ई-कोली जैसे खतरनाक जीवाणु नहीं पनप सकते। परीक्षणों से यह
भी साबित हुआ है कि सामान्य तापमान में तांबा सिर्फ चार घंटे में ई-कोली जैसे हानिकारक जीवाणुओं को मार डालता है। इसके विपरीत स्टेनलैस- स्टील के धरातल पर जीवाणु एक महीने से भी ज्यादा समय तक जिंदा रह सकते है

3. तांबे से शरीर को मिलने वाले लाभ- त्वचा में निखार आता है, कील-मुंहासों की शिकायतें भी दूर होती हैं। पेट में रहनेवाली कृमियों का विनाश होता है और भूख लगने में मदद मिलती है। बढ़ती हुई आयु की वजह से होने वाली रक्तचाप की बीमारी और रक्त के विकार नष्ट होने में सहायता मिलती है, मुंह फूलना, घमौरियां आना, आंखों की जलन जैसे उष्णता संबंधित विकार कम होते हैं। एसिडिटी से होने वाला सिरदर्द, चक्कर आना और पेट में जलन जैसी तकलीफें कम होती हैं। बवासीर तथा एनीमिया जैसी बीमारी में लाभदायक । इसके कफनाशक गुण का अनुभव बहुत से लोगों ने लिया है। पीतल के बर्तन में करीब आठ से दस घंटे पानी रखने से शरीर को तांबे और जस्ते, दोनों धातुओं के लाभ मिलेंगे। जस्ते से शरीर में प्रोटीन की वृद्घि तो होती ही है साथ ही यह बालों से संबंधित बीमारियों को दूर करने में भी लाभदायक होता है.

4. बर्मिघम में हुआ शोध शोधकर्ताओं ने अस्पताल में पारंपरिक टॉयलेट की सीट, दरवाजे के पुश प्लेट, नल के हैंडिलस को बदल कर कॉपर की ऎसेसरीज लगा दीं। जब उन्होंने दूसरे पारम्परिक टॉयलेट में उपस्थित जीवाणुओं के घनत्व की तुलना उससे की तो पाया कि कॉपर की सतह पर 90 से 100
फीयदी जीवाणु कम थे। यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल बर्मिघम में हुए इस शोध में अध्ययन दल के प्रमुख प्रोफेसर टॉम एलिएट ने बताया कि बर्मिघम एवं दक्षिण अफ्रीका में परीक्षणों से पता चला है कि तांबे के इस्तेमाल से अस्पताल के भूतल को काफी हद तक हानिकारक जीवाणुओं से मुक्त रखा जा सकता है। कॉपर बायोसाइड से जुड़े शोधों से भी पता चलता है कि तांबा संक्रमण से दूर रखता है। यही तथ्य ताम्रपात्रों पा भी लागू होते हैं

5. आयुर्वेद में रसरत्नसमुच्चय ग्रंथ के पांचवें अध्याय के श्लोक 46 में कहा गया है कि अंदर तथा बाहर से अच्छी तरह से साफ किए हुए तांबे या पीतल (यह मिश्र धातु 70 प्रतिशत तांबा और 30 प्रतिशत जस्ते का संयुग है) के बर्तनों में करीब आठ से दस घंटे तक रखे पानी में तांबे और जस्ते के गुण संक्रमित होते हैं और यह पानी (ताम्रजल) संपूर्ण शरीर के लिए लाभदायक होता है

6. पानी की अपनी स्मरण-शक्ति होने के कारण हम इस बात पर ध्यान देते हैं कि उसको कैसे बर्तन
में रखें। अगर आप पानी को रात भर या कम-से- कम चार घंटे तक तांबे के बर्तन में रखें तो यह तांबे के कुछ गुण अपने में समा लेता है। यह पानी खास तौर पर आपके लीवर के लिए और आम तौर पर आपकी सेहत और शक्ति- स्फूर्ति के लिए उत्तम होता है। अगर पानी बड़ी तेजी के साथ पंप हो कर अनगिनत
मोड़ों के चक्कर लगाकर सीसे या प्लास्टिक की पाइप के सहारे आपके घर तक पहुंचता है तो इन सब मोड़ों से रगड़ाते-टकराते गुजरने के कारण उसमें काफी नकारात्मकता समा जाती है। लेकिन पानी में याददाश्त के साथ-साथ अपने मूल रूप में वापस पहुंच पाने की शक्ति भी है। अगर आप नल के इस पानी को एक घंटे तक बिना हिलाये-डुलाये रख देते हैं तो नकारात्मकता अपने-आप खत्म हो जाती है

7. तांबे और चांदी के बैक्टीरिया-नाशक गुण और भी अधिक हो जाते हैं, जब यह धातुएं ’नैनो’ रूप में हों, क्योंकि इस रूप में धातु की सतह को लाखों गुना बढ़ाया जा सकता है। इस वजह से धातु की बहुत कम मात्रा से काम चलाया जा सकता है। ’नैनो-तांबा’ और ’नैनो-चांदी’ पर हुई शोध से यह परिणाम पिछले 10-15 सालों में ही सामने आए हैं और इन्हें वाटर-फिल्टर और एयर-फिल्टर टेक्नालजी में अपनाया जा चुका है। लेकिन विडम्बना यह है कि लोग महंगे-महंगे वाटर-फिल्टर लगवा कर उसका पानी पीना पसंद करते हैं, न कि तांबे के बरतन में रखा पानी। अपने को पढ़ा-लिखा और आधुनिक कहने वाली यह पीढ़ी पुराने तौर-तरीकों को दकियानूसी करार देने में शेखी समझती है, और जब इस पर पश्चिम की मुहर लग जाती है तो उसे सहर्ष गले लगा लेती है।

फ्रीज, प्लास्टिक बॉटल में जल रखने से या आधुनिक तकनीक वाले वॉटर प्यूरीफायर से उसकी Life Force energy शुन्य हो जाती है. प्यूरीफायर से निकला जल निःसंदेह बैक्टीरिया मुक्त होता है परंतु life force energy शुन्य हो जाती है.

मनुष्य शरीर पांच तत्वों से बना है. जल ऊन में से एक तत्व है. आजकल पुराने भारतीय तरीके का त्याग कारण है की हमारे शरीर में जल तत्व की कमी हो रही है, जिससे की किडनी और urinary tract संबंधित बीमारियां बढ़ रही है.

समाज में पानी की life force energy शुन्य होने से नपुंसकता भी बढ़ रही है.. कई बार पानी की बोतल कार में रखी रह जाती है. पानी धुप में गर्म होता है.प्लास्टिक की बोतलों में पानी बहुत देर से रखा हो और तापमान अधिक हो जाए तो गर्मी से प्लास्टिक में से डाइऑक्सिन नामक रसायन निकल कर पानी में मिल जाता है. यह कैंसर पैदा करता है.वॉटर प्यूरीफायर भी प्लास्टिक से ही बनते हैं. इसी तरह प्लास्टिक रैप में या प्लास्टिक के बर्तनों में माइक्रोवेव में खाना गर्म करने से भी यह ज़हरीला रसायन बनता है. विशेषकर तब जब खाने में घी या तेल हो. इसी तरह स्टाइरीन फोम के बने ग्लास और दोनेभी रसायन छोड़ते है ।


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

इस फल के सेवन से कोई भी बीमारी नही बच सकती, चाहे वो एड्स हो या कैंसर

बेशक नोनी (मोरिंडा सिट्रोफोलिया) नामक यह फल किसी बीमारी का इलाज़ तो नहीं मगर इसके सेवन से कोई भी बीमारी नही बच सकती, चाहे वो एड्स हो या कैंसर।

आज नोनी फल आम लोगों के लिए जितना गुमनाम है, सेहत के लिए उतना ही फायदेमंद। इसके रूप में वैज्ञानिकों को एक ऐसी संजीवनी हाथ लगी है जो स्वास्थ्य के लिए अमृत समान है।

अस्थमा, गठिया, मधुमेह, दिल की बीमारी, नपुंसकता, स्त्रियों की बीमारिया एवम् बांझपन सहित कई बीमारियों के इलाज में रामबाण साबित हो रहा है।

मात्र यही नही बल्कि पान-मसाला, गुटखा, तंबाकू की जिसे आदत है वे अगर नोनी खायेंगे या उसका जूस पिएंगे तो उनकी इस तरह की तरह आदतें छूट जाएँगी और कैंसर भी नही होगा। इस फल से प्रतिरोधक क्षमता इतनी अद्भुत  तरीके से बढ़ती है की फिर एड्स क्यों न हो उसको भी यह क्योर करने का दम रखता है।


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

राजीव भाई की एक छोटी सी विनती है याद रखना के … " कैंसर के patient को कैंसर से death नही होती है, जो treatment दिया जाता है उससे death होती है " । माने कैंसर से जादा खतरनाक कैंसर का treatment है । Treatment कैसा है आप सभी जानते है .. Chemotherapy दे दिया, Radiotherapy दे दिया, Cobalt-therapy दे दिया ।

 

इसमें क्या होता है के शारीर का जो प्रतिरक्षक शक्ति है Resistance वो बिलकुल ख़तम हो जाते है । जब Chemotherapy दिए जाते है ये बोल कर के हम कैंसर के सेल को मारना चाहते है तो अछे सेल भी उसी के साथ मर जाते है । राजीव भाई के पास कोई भी रोगी जो आया Chemotherapy लेने के बाद वे उनको बचा नही पाए । लेकिन इसका उल्टा भी रिकॉर्ड है .. राजीव भाई के पास बिना Chemotherapy लिए हुए कोई भी रोगी आया Second & third Stage तक वो एक भी नही मर पाया अभी तक ।

 

मतलब क्या है Treatment लेने के बाद जो खर्च आपने कर दिया वो तो गया ही और रोगी भी आपके हात से गया । डॉक्टर आपको भूल भुलैया में रखता है अभी 6महीने में ठीक हो जायेगा 8महीने में ठीक हो जायेगा लेकिन अंत में वो जाता ही है , कभी हुआ नही है के Chemotherapy लेने के बाद कोई बच पाया हो । आपके घर परिवार में अगर किसीको कैंसर हो जाये तो जादा खर्चा मत करिए कियों की जो खर्च आप करेंगे उससे मरीज का तो भला नही होगा उसको इतना कष्ट होता है की आप कल्पना नही कर सकते ।

 

उसको जो injections दिए जाते है, जो Tablets खिलाई जाती है, उसको जो Chemotherapy दी जाती है उससे सारे बाल उड़ जाते है, भ्रू के बाल उड़ जाते है, चेहरा इतना डरावना लगता है के पहचान में नही आता ये अपना ही आदमी है। इतना कष्ट कियों दे रहे हो उसको ? सिर्फ इसलिए के आपको एक अहंकार है के आपके पास बहुत पैसा है तो Treatment कराके ही मानुगा ! होता ही नही है वो, और आप अपनी आस पड़ोस की बाते जादा मत सुनिए क्योंकि आजकल हमारे Relatives बहुत Emotionally Exploit करते है । घर में किसीको गंभीर बीमारी हो गयी तो जो रिश्तेदार है वो पहले आके कहते है ' अरे All India नही ले जा रहे हो? PGI नही ले जा रहे हो ? Tata Institute बम्बई नही ले जा रहे हो ? आप कहोगे नही ले जा रहा हूँ मेरे घर में ही चिकित्सा .... अरे तुम बड़े कंजूस आदमी हो बाप के लिए इतना भी नही कर सकते माँ के लिए इतना नही कर सकते " । ये बहुत खतरनाक लोग होते है !! हो सकता है कई बार वो Innocently कहते हो, उनका intention ख़राब नही होता हो लेकिन उनको Knowledge कुछ भी नही है, बिना Knowledge के वो suggestions पे suggestions देते जाते है और कई बार अच्छा खासा पड़ा लिखा आदमी फंसता है उसी में .. रोगी को भी गवाता है पैसा भी जाता है ।

 

कैंसर के लिए क्या करे ? हमारे घर में कैंसर के लिए एक बहुत अछि दावा है ..अब डॉक्टर ने मान लिया है पहले तो वे मानते भी नही थे; एक ही दुनिया में दावा है Anti-Cancerous उसका नाम है " हल्दी " । हल्दी कैंसर ठीक करने की ताकत रखता है । हल्दी में एक केमिकल है उसका नाम है कर्कुमिन (Carcumin) और ये ही कैंसर cells को मार सकता है बाकि कोई केमिकल बना नही दुनिया में और ये भी आदमी ने नही भगवान ने बनाया है । हल्दी जैसा ही कर्कुमिन और एक चीस में है वो है देशी गाय के मूत्र में । गोमूत्र माने देशी गाय के शारीर से निकला हुआ सीधा सीधा मूत्र जिसे सूती के आट परत की कपड़ो से छान कर लिया गया हो । तो देशी गाय का मूत्र अगर आपको मिल जाये और हल्दी आपके पास हो तो आप कैंसर का इलाज आसानी से कर पायेंगे । अब देशी गाय का मूत्र आधा कप और आधा चम्मच हल्दी दोनों मिलाके गरम करना जिससे उबाल आ जाये फिर उसको ठंडा कर लेना । Room Temperature में आने के बाद रोगी को चाय की तरहा पिलाना है .. चुस्किया ले ले के सिप कर कर । एक और आयुर्वेदिक दावा है पुनर्नवा जिसको अगर आधा चम्मच इसमें मिलायेंगे तो और अच्छा result आयेगा । ये Complementary है जो आयुर्वेद के दुकान में पाउडर या छोटे छोटे पीसेस में मिलती है ।

 

इस दावा में सिर्फ देशी गाय का मूत्र ही काम में आता है जेर्सी का मूत्र कुछ काम नही आता । और जो देशी गाय काले रंग का हो उसका मूत्र सबसे अच्छा परिणाम देता है इन सब में । इस दवा को (देशी गाय की मूत्र, हल्दी, पुनर्नवा ) सही अनुपात में मिलाके उबालके ठंडा करके कांच की पात्र में स्टोर करके रखिये पर बोतल को कभी फ्रिज में मत रखिये, धुप में मत रखिये । ये दावा कैंसर के सेकंड स्टेज में और कभी कभी थर्ड स्टेज में भी बहुत अछे परिणाम देते है । जब स्टेज थर्ड क्रोस करके फोर्थ में पोहुंच गया तब रिजल्ट में प्रॉब्लम आती है । और अगर अपने किसी रोगी को Chemotherapy बैगेरा दे दिया तो फिर इसका कोई असर नही आता ! कितना भी पिलादो कोई रिजल्ट नही आता, रोगी मरता ही है । आप अगर किसी रोगी को ये दावा दे रहे है तो उसे पूछ लीजिये जान लीजिये कहीं Chemotherapy सुरु तो नही हो गयी ? अगर सुरु हो गयी है तो आप उसमे हात मत डालिए, जैसा डॉक्टर करता है करने दीजिये, आप भगवान से प्रार्थना कीजिये उसके लिए .. इतना ही करे । और अगर Chemotherapy स्टार्ट नही हुई है और उसने कोई अलोप्यथी treatment सुरु नही किया तो आप देखेंगे इसके Miraculous रिजल्ट आते है । ये सारी दवाई काम करती है बॉडी के resistance पर, हमारी जो vitality है उसको improve करता है, हल्दी को छोड़ कर गोमूत्र और पुनर्नवा शारीर के vitality को improve करती है और vitality improve होने के बाद कैंसर cells को control करते है ।

 

तो कैंसर के लिए आप अपने जीवन में इस तरह से काम कर सकते है; इसके इलावा भी बहुत सारी मेडिसिन्स है जो थोड़ी complicated है वो कोई बहुत अच्छा डॉक्टर या वैद्य उसको हंडल करे तभी होगा आपसे अपने घर में नही होगा । इसमें एक सावधानी रखनी है के गाय के मूत्र लेते समय वो गर्वबती नही होनी चाहिए। गाय की जो बछड़ी है जो माँ नही बनी है उसका मूत्र आप कभी भी use कर सकते है।

 

ये तो बात हुई कैंसर के चिकित्सा की, पर जिन्दगी में कैंसर हो ही न ये और भी अच्छा है जानना । तो जिन्दगी में आपको कभी कैंसर न हो उसके लिए एक चीज याद रखिये के, हमेसा जो खाना खाए उसमे डालडा तो नही है ? उसमे refined oil तो नही है ? ये देख लीजिये, दूसरा जो भी खाना खा रहे है उसमे रसेदार हिस्सा जादा होना चाहिए जैसे छिल्केवाली डाले, छिल्केवाली सब्जिया खा रहे है , चावल भी छिल्केवाली खा रहे है तो बिलकुल निश्चिन्त रहिये कैंसर होने का कोई चान्स नही है ।

 

और कैंसर के सबसे बड़े कारणों में से दो तिन कारन है, एक तो कारन है तम्बाकू, दूसरा है बीड़ी और सिगरेट और गुटका ये चार चीजो को तो कभी भी हात मत लगाइए क्योंकि कैंसर के maximum cases इन्ही के कारन है पुरे देश में ।

कैंसर के बारे में सारी दुनिया एक ही बात कहती है चाहे वो डॉक्टर हो, experts हो, Scientist हो के इससे बचाओ ही इसका उपाय है ।

 

महिलाओं को आजकल बहुत कैंसर है uterus में गर्वशय में, स्तनों में और ये काफी तेजी से बड़ रहा है .. Tumour होता है फिर कैंसर में convert हो जाता है । तो माताओं को बहनों को क्या करना चाहिए जिससे जिन्दगी में कभी Tumour न आये ? आपके लिए सबसे अच्छा prevention है की जैसे ही आपको आपके शारीर के किसी भी हिस्से में unwanted growth (रसोली, गांठ) का पता चले तो जल्द ही आप सावधान हो जाइये । हलाकि सभी गांठ और सभी रसोली कैंसर नही होती है 2-3% ही कैंसर में convert होती है लेकिन आपको सावधान होना तो पड़ेगा । माताओं को अगर कहीं भी गांठ या रसोली हो गयी जो non-cancerous है तो जल्दी से जल्दी इसे गलाना और घोल देने का दुनिया में सबसे अछि दावा है " चुना " । चुन वोही जो पान में खाया जाता है, जो पोताई में इस्तेमाल होता है ; पानवाले की दुकान से चुना ले आइये उस चुने को कनक के दाने के बराबर रोज खाइये; इसको खाने का तरीका है पानी में घोल के पानी पी लीजिये, दही में घोल के दही पी लीजिये, लस्सी में घोल के लस्सी पी लीजिये, डाल में मिलाके दाल खा लीजिये, सब्जी में डाल के सब्जी खा लीजिये । पर ध्यान रहे पथरी के रोगी के लिए चुना बर्जित है ।


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

बालों को झडऩे से रोकने के लिए नुस्खे ।
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बालों का झडऩा ऐसी समस्या है, जो किसी को भी तनाव में डाल सकती है। आज हर दूसरेव्यक्ति को बालों की समस्या से जूझना पड़ता है। अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं तो नीचे दिए आयुर्वेदिक नुस्खे एक बार जरूर अपनाएं।

√ नारियल के तेल में कपूर मिलाएं और यह तेल अच्छी तरह बालों में तथा सिर पर लगाएं। कुछ ही दिनों डेंड्रफ की समस्या से राहत मिलेगी।

√ सामान्यत: सभी के यहां शहद आसानी से मिल जाता है। शहद के औषधीय गुण सभी जानते हैं। शहद की तासीर ठंडी होती है और यह कई बीमारियों को दूर करने में सक्षम है। शहद से बालों का झडऩा भी रोका जा सकता है।

√ बाल झड़ते हैं तो गरम जैतून के तेल में एक चम्मच शहद और एक चम्मच दालचीनीपाउडर का पेस्ट बनाएं। नहाने से पहले इस पेस्ट को सिर पर लगा लें। 15 मिनट बाद बाल गरम पानी से सिर को धोएं। ऐसा करने पर कुछ ही दिनों बालों के झडऩे की समस्या दूर हो जाएगी।

√ दालचीनी और शहद के मिश्रण काफी कारगर रहता है। आयुर्वेद के अनुसार इनके मिश्रण से कई बीमारियों का इलाज किया जा सकता है। त्वचा और शरीर को चमकदार और स्वस्थ बनाए रखने के लिए इनका उपयोग करना चाहिए।

√ नियमित रूप से नारियल पानी पीएं। अमरबेल को नारियल तेल में उबालकर बालों में लगाएं।

√ अमरबेल डालकर नहाने के लिए पानी उबाले और उसे उबालकर एक चौथाई करके सिर में डालें।

√ अगर आप नशीले पदार्थों का सेवन या धुम्रपान करते हैं तो बंद कर दें। बाल झडऩा जल्द ही कम हो जाएंगे।

√ अधिक से अधिक पानी पीएं और चाय व कॉफी का सेवन कम कर दें।

√ आयुर्वेद में बालों की मालिश को आवश्यक माना गया है। ऐसे में नारियल तेल या बादाम के तेल से सिर की अच्छी तरह से मालिश करनी चाहिए।

√ सरसो के तेल में मेहंदी की पत्तियां डालकर गर्म करें। ठंडा कर के बालों में लगाएं, इससे बालों का झडऩा रूक जाएगा।
 


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

गाय के घी का महत्त्व

आज खाने में घी ना लेना एक फेशन बन गया है । बच्चे के जन्म के बाद डॉक्टर्स भी घी खाने से मना करते है । दिल के मरीजों को भी घी से दूर रहने की सलाह दी जाती है ।ये गौमाता के खिलाफ एक खतरनाक साज़िश है । रोजाना कम से कम २ चम्मच गाय का घी तो खाना ही चाहिए।

√ यह वात और पित्त दोषों को शांत करता है ।

√ चरक संहिता में कहा गया है की जठराग्नि को जब घी डाल कर प्रदीप्त कर दिया जाए तो कितना ही भारी भोजन क्यों ना खाया जाए , ये बुझती नहीं ।

√ बच्चे के जन्म के बाद वात बढ़ जाता है जो घी के सेवन से निकल जाता है । अगर ये नहीं निकला तो मोटापा बढ़ जाता है ।

√ हार्ट की नालियों में जब ब्लोकेज हो तो घी एक ल्यूब्रिकेंट का काम करता है ।

√ कब्ज को हटाने के लिए भी घी मददगार है ।

√गर्मियों में जब पित्त बढ़ जाता है तो घी उसे शांत करता है ।

√ घी सप्तधातुओं को पुष्ट करता है ।

√ दाल में घी डाल कर खाने से गेस नहीं बनती ।

√ घी खाने से मोटापा कम होता है ।

√ घी एंटी ओक्सिदेंट्स की मदद करता है जो फ्री रेडिकल्स को नुक्सान पहुंचाने से रोकता है ।

√ वनस्पति घी कभी न खाए । ये पित्त बढाता है और शरीर में जम के बैठता है ।

√ घी को कभी भी मलाई गर्म कर के ना बनाए । इसे दही जमा कर मथने से इसमें प्राण शक्ति आकर्षित होता है । फिर इसको गर्म करने से घी मिलता है
 


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

भगवान न करे कि आपको कभी जिंदगी मे Heart Attack आए !लेकिन अगर आ गया तो आप जाएँगे डाक्टर के पास !

और आपको मालूम ही है एक angioplasty आपरेशन आपका होता है ! angiop lasty आपरेशन मे डाक्टर दिल की नली मे एक spring डालते हैं ! उसको stent कहते हैं ! और ये stent अमेरिका से आता है और इसका cost of production सिर्फ 3 डालर का है ! और यहाँ लाकर लाखो रुपए मे बेचते है आपको !
आप इसका आयुर्वेदिक इलाज करे बहुत बहुत ही सरल है ! पहले आप एक बात जान ली जिये ! angioplasty आपरेशन कभी किसी का सफल नहीं होता !! क्यूंकि डाक्टर जो spring दिल की नली मे डालता है !! वो spring बिलकुल pen के spring की तरह होता है ! और कुछ दिन बाद उस spring की दोनों side आगे और पीछे फिर blockage जमा होनी शुरू हो जाएगी ! और फिर दूसरा attack आता है ! और डाक्टर आपको फिर कहता है ! angioplasty आपरेशन करवाओ ! और इस तरह आपके लाखो रूपये लुट जाते है और आपकी ज़िंदगी इसी मे निकाल जाती है ! ! !
अब पढ़िये इसका आयुर्वेदिक इलाज !!

हमारे देश भारत मे 3000 साल एक बहुत बड़े ऋषि हुये थे उनका नाम था महाऋषि वागवट जी !!
उन्होने एक पुस्तक लिखी थी जिसका नाम है अष्टांग हृदयम!! और इस पुस्तक मे उन्होने ने बीमारियो को ठीक करने के लिए 7000 सूत्र लिखे थे ! ये उनमे से ही एक सूत्र है !!

वागवट जी लिखते है कि कभी भी हरद्य को घात हो रहा है ! मतलब दिल की नलियो मे blockage होना शुरू हो रहा है ! तो इसका मतलब है कि रकत (blood) मे acidity(अमलता ) बढ़ी हुई है !

अमलता आप समझते है ! जिसको अँग्रेजी मे कहते है acidity !!

अमलता दो तरह की होती है !
एक होती है पेट कि अमलता ! और एक होती है रक्त (blood) की अमलता !!
आपके पेट मे अमलता जब बढ़ती है ! तो आप कहेंगे पेट मे जलन सी हो रही है !! खट्टी खट्टी डकार आ रही है ! मुंह से पानी निकाल रहा है ! और अगर ये अमलता (acidity)और बढ़ जाये ! तो hyper-acidity होगी ! और यही पेट की अमलता बढ़ते-बढ़ते जब रक्त मे आती है तो रक्त अमलता(blood acidity) होती !!

और जब blood मे acidity बढ़ती है तो ये अमलीय रकत (blood) दिल की नलियो मे से निकल नहीं पाता ! और नलिया मे blockage कर देता है ! तभी heart attack होता है !! इसके बिना heart attack नहीं होता !! और ये आयुर्वेद का सबसे बढ़ा सच है जिसको कोई डाक्टर आपको बताता नहीं ! क्यूंकि इसका इलाज सबसे सरल है !!

इलाज क्या है ??
वागबट जी लिखते है कि जब रकत (blood) मे अमलता (acidty) बढ़ गई है ! तो आप ऐसी चीजों का उपयोग करो जो छारीय है !

आप जानते है दो तरह की चीजे होती है !

अमलीय और छारीय !!
(acid and alkaline )

अब अमल और छार को मिला दो तो क्या होता है ! ?????
((acid and alkaline को मिला दो तो क्या होता है )?????

neutral होता है सब जानते है !!
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तो वागबट जी लिखते है ! कि रक्त कि अमलता बढ़ी हुई है तो छारीय(alkaline) चीजे खाओ ! तो रकत की अमलता (acidity) neutral हो जाएगी !!! और फिर heart attack की जिंदगी मे कभी संभावना ही नहीं !! ये है सारी कहानी !!
अब आप पूछोगे जी ऐसे कौन सी चीजे है जो छारीय है और हम खाये ?????

आपके रसोई घर मे सुबह से शाम तक ऐसी बहुत सी चीजे है जो छारीय है ! जिनहे आप खाये तो कभी heart attack न आए ! 

सबसे ज्यादा आपके घर मे छारीय चीज है वह है लोकी !! english मे इसे कहते है bottle gourd !!! जिसे आप सब्जी के रूप मे खाते है ! इससे ज्यादा कोई छारीय चीज ही नहीं है ! तो आप रोज लोकी का रस निकाल-निकाल कर पियो !! या कच्ची लोकी खायो !!

स्वामी रामदेव जी को आपने कई बार कहते सुना होगा लोकी का जूस पीयों- लोकी का जूस पीयों !
3 लाख से ज्यादा लोगो को उन्होने ठीक कर दिया लोकी का जूस पिला पिला कर !! और उसमे हजारो डाक्टर है ! जिनको खुद heart attack होने वाला था !! वो वहाँ जाते है लोकी का रस पी पी कर आते है !! 3 महीने 4 महीने लोकी का रस पीकर वापिस आते है आकर फिर clinic पर बैठ जाते है !

वो बताते नहीं हम कहाँ गए थे ! वो कहते है हम न्योर्क गए थे हम जर्मनी गए थे आपरेशन करवाने ! वो राम देव जी के यहाँ गए थे ! और 3 महीने लोकी का रस पीकर आए है ! आकर फिर clinic मे आपरेशन करने लग गए है ! और वो आपको नहीं बताते कि आप भी लोकी का रस पियो !!

तो मित्रो जो ये रामदेव जी बताते है वे भी वागवट जी के आधार पर ही बताते है !! वागवतट जी कहते है रकत की अमलता कम करने की सबे ज्यादा ताकत लोकी मे ही है ! तो आप लोकी के रस का सेवन करे !!

कितना करे ?????????
रोज 200 से 300 मिलीग्राम पियो !!

कब पिये ??

सुबह खाली पेट (toilet जाने के बाद ) पी सकते है !!
या नाश्ते के आधे घंटे के बाद पी सकते है !!
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इस लोकी के रस को आप और ज्यादा छारीय बना सकते है ! इसमे 7 से 10 पत्ते के तुलसी के डाल लो
तुलसी बहुत छारीय है !! इसके साथ आप पुदीने से 7 से 10 पत्ते मिला सकते है ! पुदीना बहुत छारीय है ! इसके साथ आप काला नमक या सेंधा नमक जरूर डाले ! ये भी बहुत छारीय है !!
लेकिन याद रखे नमक काला या सेंधा ही डाले ! वो दूसरा आयोडीन युक्त नमक कभी न डाले !! ये आओडीन युक्त नमक अम्लीय है !!!!

तो मित्रो आप इस लोकी के जूस का सेवन जरूर करे !! 2 से 3 महीने आपकी सारी heart की blockage ठीक कर देगा !! 21 वे दिन ही आपको बहुत ज्यादा असर दिखना शुरू हो जाएगा !!!

कोई आपरेशन की आपको जरूरत नहीं पड़ेगी !! घर मे ही हमारे भारत के आयुर्वेद से इसका इलाज हो जाएगा !! और आपका अनमोल शरीर और लाखो रुपए आपरेशन के बच जाएँगे !!
 


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

घरेलू नुस्खों से दूर करें दर्द -

जिस तरह का जीवन हम जी रहे हैं, उसमें सिरदर्द होना एक आम बात है। लेकिन यह दर्द हमारी दिनचर्या में शामिल हो जाए तो हमारे लिए बहुत कष्टदायी हो जाता है। दर्द से छुटकारा पाने के लिए हम पेन किलर घरेलू उपाय अपनाकर इसे दूर कर सकते हैं। इन घरेलू उपायों के कोई साईड इफेक्ट भी नहीं होते।

1. अदरक: अदरक एक दर्द निवारक दवा के रूप में भी काम करती है। यदि सिरदर्द हो रहा हो तो सूखी अदरक को पानी के साथ पीसकर उसका पेस्ट बना लें और इसे अपने माथे पर लगाएं। इसे लगाने पर हल्की जलन जरूर होगी लेकीन यह सिरदर्द दूर करने में मददगार होती है।

2. सोडा: पेट में दर्द होने पर कप पानी में एक चुटकी खाने वाला सोडा डालकर पीने से पेट दर्द में राहत मिलती है। सि्त्रयो के मासिक धर्म के समय पेट के नीचे होने वाले दर्द को दूर करने मे खाने वाला सोडा पानी में मिलाकर पीने से दर्द दूर होता है। एसिडिटी होने पर एक चुटकी सोडा, आधा चम्मच भुना और पिसा हुआ जीरा, 8 बूंदे नींबू का रस और स्वादानुसार नमक पानी में मिलाकर पीने से एसिडिटी में राहत मिलती है।

3. अजवायन: सिरदर्द होने पर एक चम्मच अजवायन को भूनकर साफ सूती कपडे में बांधकर नाक के पास लगाकर गहरी सांस लेने से सिरदर्द में राहत मिलती है। ये प्रक्रिया तब तक दोहराएं जब तक आपका सिरदर्द ठीक नहीं हो जाता। पेट दर्द को दूर करने में भी अजवायन सहायक होती है। पेट दर्द होने पर आधा चम्मच अजवायन को पानी के साथ फांखने से पेट दर्द में राहत मिलती है।

4. बर्फ : सिरदर्द में बर्फ की सिंकाई करना बहुत फायदेमंद होता है। इसके अलावा स्पॉन्डिलाइटिस में भी बर्फ की सिंकाई लाभदायक होती है। गर्दन में दर्द होने पर भी बर्फ की सिंकाई लाभदायक होती है।

5. हल्दी: हल्दी कीटाणुनाशक होती है। इसमें एंटीसेप्टिक, एंटीबायोटिक और दर्द निवारक तत्व पाए गए हैं। ये तत्व चोट के दर्द और सूजन को कम करने में सहायक होते हैं। घाव पर हल्दी का लेप लगाने से वह ठीक हो जाता है। चोट लगने पर दूध में हल्दी डालकर पीने से दर्द में राहत मिलती है। एक चम्मच हल्दी में आधा चम्मच काला गर्म पानी के साथ फांखने से पेट दर्द व गैस में राहत मिलती है।

6. तुलसी के पत्ते: तुलसी में बहुत सारे औषधीय तत्व पाए जाते हैं। तुलसी की पत्तियों को पीसकर चंदन पाउडर में मिलाकर पेस्ट बना लें। दर्द होने पर प्रभावित जगह पर उस लेप को लगाने से दर्द में राहत मिलेगी। एक चम्मच तुलसी के पत्तों का रस शहद में मिलाकर हल्का गुनगुना करके खाने से गले की खराश और दर्द दूर हो जाता है। खांसी में भी तुलसी का रस काफी फायदेमंद होता है।

7. मेथी: एक चम्मच मेथी दाना में चुटकी भर पिसी हुई हींग मिलाकर पानी के साथ फांखने से पेटदर्द में आराम मिलता है। मेथी डायबिटीज में भी लाभदायक होती है। मेथी के लड्डू खाने से जोडों के दर्द में लाभ मिलता है।

8. हींग: हींग दर्द निवारक और पित्तवर्द्धक होती है। छाती और पेटदर्द में हींग का सेवन लाभकारी होता है। छोटे बच्चों के पेट में दर्द होने पर हींग को पानी में घोलकर पकाने और उसे बच्चो की नाभि के चारो ओर उसका लेप करने से दर्द में राहत मिलती है।

9. सेब: सुबह खाली पेट प्रतिदिन एक सेब खाने से सिरदर्द की समस्या से छुटकारा मिलता है। चिकित्सकों का मानना है कि सेब का नियमित सेवन करने से रोग नहीं घेरते।

10. करेला: करेले का रस पीने से पित्त में लाभ होता है। जोडों के दर्द में करेले का रस लगाने से काफी राहत मिलती है ।

 


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

गठिया या संधिबात का सबसे अछि दावा है मेथी, हल्दी और सुखा हुआ अदरक माने सोंठ , इन तीनो को बराबर मात्रा में पिस कर, इनका पावडर बनाके एक चम्मच लेना गरम पानी के साथ सुभाह खाली पेट तो इससे घुटनों का दर्द ठीक होता है, कमर का दर्द ठीक होता है, देड़ दो महिना ले सकता है । 

और एक अछि दावा है , एक पेड़ होता है उसे हिंदी में हरसिंगार कहते है, संस्कृत पे पारिजात कहते है, बंगला में शिउली कहते है , उस पेड़ पर छोटे छोटे सफ़ेद फूल आते है, और फुल की डंडी नारंगी रंग की होती है, और उसमे खुसबू बहुत आती है, रात को फूल खिलते है और सुबह जमीन में गिर जाते है । इस पेड़ के पांच पत्ते तोड़ के पत्थर में पिस के चटनी बनाइये और एक ग्लास पानी में इतना गरम करो के पानी आधा हो जाये फिर इसको ठंडा करके रोज सुबह खाली पेट पियो तो बीस बीस साल पुराना गठिया का दर्द इससे ठीक हो जाता है । और येही पत्ते को पिस के गरम पानी में डाल के पियो तो बुखार ठीक कर देता है और जो बुखार किसी दावा से ठीक नही होता वो इससे ठीक होता है ; जैसे चिकनगुनिया का बुखार, डेंगू फीवर, Encephalitis , ब्रेन मलेरिया, ये सभी ठीक होते है । 

बुखार की और एक अछि दावा है अपने घर में तुलसी पत्ता ; दस पन्दरा तुलसी पत्ता तोड़ो, तिन चार काली मिर्च ले लो पत्थर में पिस के एक ग्लास गरम पानी में मिलके पी लो .. इससे भी बुखार ठीक होता है । 

बुखार की एक और दावा है नीम की गिलोय, अमृता भी कहते है, उडूनची भी कहते है, इसको थोडासा चाकू से काट लो , पत्थर में कुचल के पानी में उबाल लो फिर वो पानी पी लेना तो ख़राब से ख़राब बुखार ठीक हो जाता है तिन दिन में । कभी कभी बुखार जब बहुत जादा हो जाते है तब खून में सेत रक्त कनिकाएं , प्लेटलेट्स बहुत कम हो जाते है तब उसमे सबसे जादा काम आती है ये गिलोय ।
 


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

99 प्रतिशत ब्लॉकेज को भी रिमूव कर देता है पीपल का पत्ता...

पीपल के 15 पत्ते लें जो कोमल गुलाबी कोंपलें न हों, बल्कि पत्ते हरे, कोमल व भली प्रकार विकसित हों। प्रत्येक का ऊपर व नीचे का कुछ भाग कैंची से काटकर अलग कर दें। पत्ते का बीच का भाग पानी से साफ कर लें। इन्हें एक गिलास पानी में धीमी आँच पर पकने दें। जब पानी उबलकर एक तिहाई रह जाए तब ठंडा होने पर साफ कपड़े से छान लें और उसे ठंडे स्थान पर रख दें, दवा तैयार। इस काढ़े की तीन खुराकें बनाकर प्रत्येक तीन घंटे बाद प्रातः लें। हार्ट अटैक के बाद कुछ समय हो जाने के पश्चात लगातार पंद्रह दिन तक इसे लेने से हृदय पुनः स्वस्थ हो जाता है और फिर दिल का दौरा पड़ने की संभावना नहीं रहती। दिल के रोगी इस नुस्खे का एक बार प्रयोग अवश्य करें।

* पीपल के पत्ते में दिल को बल और शांति देने की अद्भुत क्षमता है।

* इस पीपल के काढ़े की तीन खुराकें सवेरे 8 बजे, 11 बजे व 2 बजे ली जा सकती हैं।

* खुराक लेने से पहले पेट एक दम खाली नहीं होना चाहिए, बल्कि सुपाच्य व हल्का नाश्ता करने के बाद ही लें।

* प्रयोगकाल में तली चीजें, चावल आदि न लें। मांस, मछली, अंडे, शराब, धूम्रपान का प्रयोग बंद कर दें। नमक, चिकनाई का प्रयोग बंद कर दें।

* अनार, पपीता, आंवला, बथुआ, लहसुन, मैथी दाना, सेब का मुरब्बा, मौसंबी, रात में भिगोए काले चने, किशमिश, गुग्गुल, दही, छाछ आदि लें।

...... तो अब समझ आया, भगवान ने पीपल के पत्तों को हार्टशेप क्यों बनाया... 
 


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

अनानास (Pineapple) के लाभ --
इन सब लाभों के लिए अनानास ताजा होना आवश्यक है। टीन के डिब्बों में मिलने वाला अनानास का रस स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
अनानास के गूदे की अपेक्षा रस ज्यादा लाभदायी होता है और इसके छोटे-छोटे टुकड़े करके कपड़े से निकाले गये रस में पौष्टिक तत्त्व विशेष पाये जाते हैं। जूसर द्वारा निकाले गये रस में इन तत्त्वों की कमी पायी जाती है, साथ ही यह पचने में भारी हो जाता है। फल काटने के बाद या इसका रस निकाल के तुरंत उपयोग कर लेना चाहिए। इसमें पेप्सिन के सदृश एक ब्रोमेलिन नामक तत्त्व पाया जाता है जो औषधीय गुणों से सम्पन्न है।
सभी प्रयोगों में अनानास के रस की मात्रा 100 से 150 मि.ली.। उम्र-अनुसार रस की मात्रा कम ज्यादा करें।
- अनानास पाचक तत्त्वों से भरपूर, शरीर को शीघ्र ही ताजगी देने वाला, हृदय व मस्तिष्क को शक्ति देने वाला, कृमिनाशक, स्फूर्तिदायी फल है।
- यह वर्ण में निखार लाता है।
- गर्मी में इसके उपयोग से ताजगी व ठंडक मिलती है।
- अनानास के रस में प्रोटीनयुक्त पदार्थों को पचाने की क्षमता है। - यह आँतों को सशक्त बनाता है।
- अनानास शरीर में बनने वाले अनावश्यक तथा विषैले पदार्थों को बाहर निकालकर शारीरिक शक्ति में वृद्धि करता है।
- हृदय शक्ति बढ़ाने के लिएः अनानास का रस पीना लाभदायक है। यह हृदय और जिगर (लीवर) की गर्मी को दूर करने उन्हें शक्ति व ठंडक देता है।
- छाती में दर्द, भोजन के बाद पेटदर्द होता हो तो भोजन के पहले अनानास के 25-50 मि.ली. रस में अदरक का रस एक चौथाई चम्मच तथा एक चुटकी पिसा हुआ अजवायन डालकर पीने से 7 दिनों में लाभ होता है।
- अजीर्णः अनानास की फाँक में काला नमक व काली मिर्च डालकर खाने से अजीर्ण दूर होता है।
- पाचन में वृद्धिः भोजन से पूर्व या भोजन के साथ अनानास के पके हुए फल पर काला नमक, पिसा जीरा और काली मिर्च लगाकर सेवन करने अथवा एक गिलास ताजे रस में एक-एक चुटकी इन चूर्णों को डालकर चुसकी लेकर पीने से उदर-रोग, वायु विकार, अजीर्ण, पेटदर्द आदि तकलीफों में लाभ होता है। इससे गरिष्ठ पदार्थों का पाचन आसानी से हो जाता है।
- अनानास व सेवफल के 50-50 मि.ली. रस में एक चम्मच शहद व चौथाई चम्मच अदरक का रस मिलाकर पीने से आँतों से पाचक रस स्रावित होने लगता है। उच्च रक्तचाप, अजीर्ण व मासिक धर्म की अनियमितता दूर होती है।
- मलावरोधः पेट साफ न होना, पेट में वायु होना, भूख कम लगना इन समस्याओं में रोज भोजन के साथ काला नमक मिलाकर अनानास खाने से लाभ होता है।
- बवासीरः मस्सों पर अनानास पीसकर लगाने से लाभ होता है।
- फुंसियाँ- अनानास का गूदा फुंसियों पर लगाने से तथा इसका रस पीने से लाभ होता है।
- पथरीः अनानास का रस 15-20 दिन पीना पथरी में लाभदायी होता है, इससे पेशाब भी खुलकर आता है।
- नेत्ररोग में- अनानास के टुकड़े काटकर दो-तीन दिन शहद में रखकर कुछ दिनों तक थोड़ा-थोड़ा खाने से नेत्ररोगों में लाभ होता है। यह प्रयोग जठराग्नि को प्रदीप्त कर भूख को बढ़ाता है तथा अरूचि को भी दूर करता है।
- पेशाब में जलन होना, पेशाब कम होना, दुर्गन्ध आना, पेशाब में दर्द तथा मूत्रकृच्छ (रूक-रूककर पेशाब आना) में 1 गिलास अनानास का रस, एक चम्मच मिश्री डालकर भोजन से पूर्व लेने से पेशाब खुलकर आता है और पेशाब संबंधी अन्य समस्याएँ दूर होती हैं।
- पेशाब अधिक आता हो तो अनानास के रस में जीरा, जायफल, पीपल इनका चूर्ण बनाकर सभी एक-एक चुटकी और थोड़ा काला नमक डालकर पीने से पेशाब ठीक होता है।
- धूम्रपान के नुकसान में- धूम्रपान के अत्यधिक सेवन से हुए दुष्प्रभावों को दूर करने के लिए धूम्रपान छोड़कर अनानास के टुकड़े शहद के साथ खाने से लाभ होता है।
- अनानास में प्रचुर मात्रा में मैग्नीशियम पाया जाता है। यह शरीर की हड्डियों को मजबूत बनाने और शरीर को ऊर्जा प्रदान करने का काम करता है। एक कप अनानास का जूस पीने से दिनभर के लिए जरूरी मैग्नीशियम के 73 प्रतिशत की पूर्ति होती है।
- अनानास में पाया जाने वाला ब्रोमिलेन सर्दी और खांसी, सूजन, गले में खराश और गठिया में फायदेमंद होता है।
- अनानास में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और साधारण ठंड से भी सुरक्षा मिलती है। इससे सर्दी समेत कई अन्य संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।

सावधानियाँ- अनानास कफ को बढ़ाता है। अतः पुराना जुकाम, सर्दी, खाँसी, दमा, बुखार, जोड़ों का दर्द आदि कफजन्य विकारों से पीड़ित व्यक्ति व गर्भवती महिलाएँ इसका सेवन न करें।
अनानास के ताजे, पके और मीठे फल के रस का ही सेवन करना चाहिए। कच्चे या अति पके व खट्टे अनानास का उपयोग नहीं करना चाहिए।
अम्लपित्त या सतत सर्दी रहने वालों को अनानास नहीं खाना चाहिए।
अनानास के स्वादवाले आइस्क्रीम और मिल्कशेक ये दूध में बनाये पदार्थ कभी नहीं खाने चाहिए। क्योंकि ये विरुद्ध आहार है और ये स्वास्थ्य के लिए अत्यन्त हानिकारक है।
भोजन के बीच में तथा भोजन के कम से कम आधे घंटे बाद रस का उपयोग करना चाहिए।
भूख और पित्त प्रकृति में अनानास खाना हितकर नहीं है। इससे पेटदर्द होता है।
छोटे बच्चों को अनानास नहीं देना चाहिए। इससे आमाशय और आँतों का क्षोभ होता है।
सूर्यास्त के बाद फल एवं फलों के रस का सेवन नहीं करना चाहिए।


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

कलौंजी ---
- कलौंजी एक बेहद उपयोगी मसाला है। इसका प्रयोग विभिन्न व्यंजनों जैसे दालों, सब्जियों, नान, ब्रेड, केक और आचार आदि में किया जाता है। कलौंजी की सब्जी भी बनाई जाती है।
- कलौंजी में एंटी-आक्सीडेंट भी मौजूद होता है जो कैंसर जैसी बीमारी से बचाता है।
- आयुर्वेद कहता है कि इसके बीजों की ताकत सात साल तक नष्ट नहीं होती.
- अपच या पेट दर्द में आप कलौंजी का काढा बनाइये फिर उसमे काला नमक मिलाकर सुबह शाम पीजिये.दो दिन में ही आराम देखिये.
- कैंसर के उपचार में कलौजी के तेल की आधी बड़ी चम्मच को एक ग्लास अंगूर के रस में मिलाकर दिन में तीन बार लें। लहसुन भी खुब खाएं।
- हृदय रोग, ब्लड प्रेशर और हृदय की धमनियों का अवरोध के लिए जब भी कोई गर्म पेय लें, उसमें एक छोटी चम्मच कलौंजी का तेल मिला कर लें.
- सफेद दाग और लेप्रोसीः- 15 दिन तक रोज पहले सेब का सिरका मलें, फिर कलौंजी का तेल मलें।
- एक चाय की प्याली में एक बड़ी चम्मच कलौंजी का तेल डाल कर लेने से मन शांत हो जाता है और तनाव के सारे लक्षण ठीक हो जाते हैं।
- कलौंजी के तेल को हल्का गर्म करके जहां दर्द हो वहां मालिश करें और एक बड़ी चम्मच तेल दिन में तीन बार लें। 15 दिन में बहुत आराम मिलेगा।
- एक बड़ी चम्मच कलौंजी के तेल को एक बड़ी चम्मच शहद के साथ रोज सुबह लें, आप तंदुरूस्त रहेंगे और कभी बीमार नहीं होंगे; स्वस्थ और निरोग रहेंगे .
- याददाश्त बढाने के लिए और मानसिक चेतना के लिए एक छोटी चम्मच कलौंजी का तेल 100 ग्राम उबले हुए पुदीने के साथ सेवन करें।
- पथरी हो तो कलौंजी को पीस कर पानी में मिलाइए फिर उसमे शहद मिलाकर पीजिये ,१०-११ दिन प्रयोग करके टेस्ट करा लीजिये.कम न हुई हो तो फिर १०-११ दिन पीजिये.
- कलौंजी की राख को तेल में मिलाकर गंजे अपने सर पर मालिश करें कुछ दिनों में नए बाल पैदा होने लगेंगे.इस प्रयोग में धैर्य महत्वपूर्ण है.
- किसी को बार-बार हिचकी आ रही हो तो कलौंजी के चुटकी भर पावडर को ज़रा से शहद में मिलकर चटा दीजिये.
- गैस/पेट फूलने की समस्या --50 ग्राम जीरा, 25 ग्राम अजवायन, 15 ग्राम कलौंजी अलग-अलग भून कर पीस लें और उन्हें एक साथ मिला दें। अब 1 से 2 चम्मच मीठा सोडा, 1 चम्मच सेंधा नमक तथा 2 ग्राम हींग शुद्ध घी में पका कर पीस लें। सबका मिश्रण तैयार कर लें। गुनगुने पानी की सहायता से 1 या आधा चम्मच खाएं।


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

 

 

सौंफ --


सौंफ त्रिदोषनाशक है. इस की तासीर ठंडी है , पर यह जठराग्नि को मंद नहीं करती.


- आंखों की रोशनी सौंफ का सेवन करके बढ़ाया जा सकता है। सौंफ और मिश्री समान भाग लेकर पीस लें। इसकी एक चम्मच मात्रा सुबह-शाम पानी के साथ दो माह तक लीजिए। इससे आंखों की रोशनी बढती है।
- सौंफ खाने से पेट और कब्ज की शिकायत नहीं होती। सौंफ को मिश्री या चीनी के साथ पीसकर चूर्ण बना लीजिए, रात को सोते वक्त लगभग 5 ग्राम चूर्ण को हल्केस गुनगने पानी के साथ सेवन कीजिए। पेट की समस्या नहीं होगी व गैस व कब्ज दूर होगा।
- डायरिया होने पर सौंफ खाना चाहिए। सौंफ को बेल के गूदे के साथ सुबह-शाम चबाने से अजीर्ण समाप्त होता है और अतिसार में फायदा होता है।
- खाने के बाद सौंफ का सेवन करने से खाना अच्छे से पचता है। सौंफ, जीरा व काला नमक मिलाकर चूर्ण बना लीजिए। खाने के बाद हल्के गुनगुने पानी के साथ इस चूर्ण को लीजिए, यह उत्तम पाचक चूर्ण है।
- अगर आप चाहते हैं कि आपका कोलेस्ट्रॉल स्तर न बढ़े तो खाने के लगभग 30 मिनट बाद एक चम्मच सौंफ खा लें।
- आधी कच्ची सौंफ का चूर्ण और आधी भुनी सौंफ के चूर्ण में हींग और काला नमक मिलाकर 2 से 6 ग्राम मात्रा में दिन में तीन-चार बार प्रयोग कराएं इससे गैस और अपच दूर हो जाती है।
- भूनी हुई सौंफ और मिश्री समान मात्रा में पीसकर हर दो घंटे बाद ठंडे पानी के साथ फँकी लेने से मरोड़दार दस्त, आँव और पेचिश में लाभ होता है। यह कब्ज को दूर करती है। के स्वास्थ्य लाभ होते हैं।
- बादाम, सौंफ और मिश्री तीनों बराबर भागों में लेकर पीसकर भर दें और रोज दोनों टाइम भोजन के बाद 1 टी स्पून लें। इससे स्मरणशक्ति बढ़ती है।
- दो कप पानी में उबली हुई एक चम्मच सौंफ को दो या तीन बार लेने से कफ की समस्या समाप्त होती है। अस्थमा और खांसी में सौंफ सहायक है। कफ और खांसी के इलाज के लिए सौंफ खाना फायदेमंद है।
- गुड़ के साथ सौंफ खाने से मासिक धर्म नियमित होता है।
- सौंफ को अंजीर के साथ खाएँ और खाँसी व ब्रोन्काइटिस को दूर भगाएँ।
- गर्मियों में सौंफ को गला कर सेवन करने से ठंडक मिलती है। सौंफ के पावडर को शकर के साथ बराबर मिलाकर लेने से हाथों और पैरों की जलन दूर होती है।
- यह शिशुओं के पेट और उनके पेट के अफारे को दूर करने में बहुत उपयोगी है।एक चम्मच सौंफ को एक कप पानी में उबलने दें और 20 मिनट तक इसे ठंडा होने दें। इससे शिशु के कॉलिक का उपचार होने में मदद मिलती है। शिशु को एक या दो चम्मच से ज्यादा यह घोल नहीं देना चाहिए।
- जो लोग कब्ज से परेशान हैं, उनको आधा ग्राम गुलकन्द और सौंफ मिलाकर दूध के साथ रात में सोते समय लेना चाहिए। कब्ज दूर हो जाएगा।
- इसे खाने से लीवर ठीक रहता है। इससे पाचन क्रिया ठीक रहती है।
- रोजाना सुबह-शाम खाली सौंफ खाने से खून साफ होता है जो कि त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होता है, इससे त्वचा में चमक आती है।
- रोजाना दाल और सब्जी के तडके में सौंफ भी डाले.
- यदि बारबार मुंह में छाले हों तो एक गिलास पानी में चालीस ग्राम सौंफ पानी आधा रहने तक उबालें। इसमें जरा सी भुनी फिटकरी मिलाकर दिन में दो तीन बार गरारे करें।


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

आयुर्वेद के कुछ घरेलू नुस्खों को अपनाकर आप काफी हद तक इस बीमारी से बच सकते हैं।

-प्याज का रस और शुद्ध शहद बराबर मात्रा में मिलाकर रोज करीब दस ग्राम की मात्रा में लें।

- तरबूज के बीज की गिरि और खसखस दोनों को बराबर मात्रा में मिलाकर पीस लें रोज सुबह-शाम एक चम्मच खाली पेट पानी के साथ लें। यह प्रयोग करीब एक महीने तक नियमित करें।

- मेथीदाने के चूर्ण को रोज एक चम्मच सुबह खाली पेट लेने से हाई ब्लडप्रेशर से बचा जा सकता है।

- खाना खाने के बाद दो कच्चे लहसुन की कलियां लेकर मुनक्का के साथ चबाएं, ऐसा करने से हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत नहीं होती।

- 21 तुलसी के पत्ते तथा सिलबट्टे पर पीसकर एक गिलास दही में मिलाकर सेवन करने से हाई ब्लडप्रेशर में लाभ होता है।


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

नवरात्र मे नौ दिन का व्रत प्राय: सभी लोग रखते हैं| मगर कुछ लोग ही सही डायट को फॉलो कर पाते हैं | नतीजा दो तीन दिन बाद ही तबियत खराब होने लगती है | Dehyration, बदहज़मी, सर दर्द आदि की समस्या होने लगती है | अब आप ही भला सोचिये, अस्वस्थ मन से माँ की आपकी पूजा बिना किसी बाधा के पूर्ण हो, तो व्रत के दौरान खानपान पर भी विशेष ध्यान दें | व्रत के दौरान कमजोरी या अन्य परेशानियों से बचने के लिए हल्का फुल्का कुछ न कुछ जरुर खाते रहें | अगर खा नहीं सकते , तो पेय पदार्थ जैसे ताजा फलो का जूस, दूध , छाछ अवश्य लें | इससे dehyration नहीं होगा | सादे पानी की जगह बीच बीच मे नीबू पानी या नालियल पानी भी पी सकते हैं | इससे शरीर को भरपूर एनर्जी मिलती है | व्रत के दौरान अपने आहार मे फाइबर युक्त फल व सब्जियों को शामिल करें | अक्सर व्रत रखने वाले भक्त पूरे दिन हो भूखे रहते हैं, पर रात मे जैसे ही व्रत खोलने का समय आता है , वे खाने पर टूट पड़ते हैं | घी मे तली कुट्टू की पकौडियां , पूरियां आदि का सेवन खूब करने लगते हैं | जिससे शारीर मे फैट बदने लगता हैं | गैस और कब्ज़ की शिकायत भी होने लगती है | अगर आप व्रत के दौरान अपना वजन नहीं बढाना चाहते है, तो दिन मे आलू या आलू के चिप्स खाने के बजाय ताजे फल सब्जियों की सलाद खाएं | दूध से बनी खाद सामग्री, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे की रोटी और घीया की सब्जी अपने भोजन मे शामिल कर सकते हैं | इसका नियमित सेवन शारीर मे पोषक तत्वों की कमी को पूरा करेगा | सलाद मे खीरा, टमाटर, मूली आदि ले सकते हैं| दही का प्रोटीन गुणकारी होता है| इससे ६० कैलोरी उर्जा मिलती है | इसलिए व्रत मे थोडा सा दही खाने से भी पेट भरा लगता है | दही खाने से प्यास भी अधिक नहीं लगती | शाम को व्रत खोते समय एकदम से तला भुना खाने की जगह पहले कुछ फल या दही की लस्सी पिए | इससे आपका हाजमा भी अच्छा रहेगा | खाने मे सेंधा नमक का इस्तमाल जरूर करें, नहीं तो नमक की कमी के कारण आप परेशानी मे पड़ सकते हैं | जूस या नारियल पानी और पानी प्रयाप्त मात्रा मे पियें | उपवास के नाम पर लोग साबूदाना , आलू, सिंघाड़े और कुट्टू के आटे का प्रोयोग करते हैं | ये सारी चीज़े गरिष्ट होती हैं | ऐसे मे इनको यदि घी के साथ तैयार करते हैं, तो ये और भी गरिष्ट हो जाता है | पानी मात्रा मे जादा पीना चाहिए ताकि शारीर मे उत्पन्न होने वाले टोक्सिन , पेशाब एवं पसीने के रूप में हमारे शारीर से बाहर निकल सकें | कुट्टू के आटे की पूरियां बनाने की जगह कुट्टू के आटे की रोटी सेकें | सावा के चावल की खिचड़ी दही के साथ खा सकते हैं |


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

पालक

पालक मानव के लिए बेहद उपयोगी है। पालक को आमतौर पर केवल हिमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए गुणकारी सब्जी माना जाता है। बहुत कम लोग जानते हैं कि पालक में इसके अलावा और भी कई गुण है जिनसे सामान्य लोग अनजान है। तो आइए हम आपको पालक के कुछ ऐसे ही अद्भूत गुणों से अवगत करवाते हैं उसके पश्चात आप जान सकेंगे कि आप पालक क्यों खायें ? पालक में पाये जाने वाले विभिन्न तत्व- 100 ग्राम पालक में 26 किलो कैलोरी उर्जा ,प्रोटीन 2 % ,कार्बोहाइड्रेट 2.9 %, नमी 92 % वसा 0.7 %, रेशा 0.6 % ,खनिज लवन 0.7 % और रेशा 0.6 % होता हैं। पालक में विभिन्न खनिज लवण जैसे कैल्सियम, मैग्नीशियम ,लौह, तथा विटामिन ए, बी, सी आदि प्रचुर मात्रा में पाया जाते हैं। इसके अतिरिक्त यह रेशेयुक्त, जस्तायुक्त होता है। इन्हीं गुणों के कारण इसे जीवन रक्षक भोजन भी कहा जाता हैं। पालक में पाये जाने वाले गुण- पालक खाने से हिमोग्लोबिन बढ़ता है। खून की कमी से पीड़ित व्यक्तियों को पालक खाने से काफी फायदा पहुंचता है। गर्भवती स्त्रियों में फोलिक अम्ल की कमी को दूर करने के लिए पालक का सेवन लाभदायक होता है। पालक में पाया जाने वाला कैल्शियम बढ़ते बच्चों, बूढ़े व्यक्तियों और गर्भवती स्त्रियों व स्तनपान कराने वाली स्त्रियों के लिए वह बहुत फायदेमंद है। इसके नियमित सेवन से याददाश्त भी मजबूत होती है। शरीर बनाएं मजबूत- पालक में मौजूद फ्लेवोनोइड्स एंटीआक्सीडेंट का काम करता हैं जो रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करने के अलावा हृदय संबंधी बीमारियों से लड़ने में भी मददगार होता है। सलाद में इसके सेवन से पाचनतंत्र मजबूत होता है। इसमें पाया जाने वाला बीटा कैरोटिन और विटामिन सी क्षय होने से बचाता है। ये शरीर के जोड़ों में होने वाली बीमारी जैसे आर्थराइटिस, ओस्टियोपोरोसिस की भी संभावना को घटाता है। आंखों के लिये लाभकारी- पालक आंखो के लिए काफी अच्छी होती है। यह त्वचा को रूखे होने से बचाता है। बाल गिरने से रोकने के लिए रोज पालक खाना चाहिए। पालक के पेस्ट को चेहरे पर लगाने से चेहरे से झाइयां दूर हो जाती है। पालक कब न खायें? पालक वायुकारक होती है अतः वर्षा ऋतु में इसका सेवन न करें


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

दाल -

मुंग की छिलके वाली दाल कफ और पित्त को शांत करती है. यह थोड़ी एस्त्रिन्जेंट होती है. इसमें मधुर रस होता है. यह थोड़ा सा वात बढ़ा सकती है , जिसके लिए हम कुछ मसाले जैसे हींग , जीरा आदि डालते है. इसके फलस्वरूप यह दाल त्रिदोषहर कही जाती है. यह पचने में हलकी होने से अच्छी तरह पच जाती है और आम यानी टोक्सिंस का निर्माण नहीं होता. यह डायरिया , इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम आदि स्थितियों में भी दी जा सकती है. यह ऑपरेशन के बाद भी दी जा सकती है. नियमित उपयोग से यह धीरे धीरे शरीर के सभी अवरोध हटा देती है.

सामग्री -

मुंग की छिलके वाली दाल उबाल लें.

इच्छानुसार सब्जियां भी इसके साथ उबाल लें. जैसे गाजर , लौकी .

हींग, धनिया पावडर , हल्दी ,नमक , बारीक कटा अदरक ,हरी मिर्च , जीरा , थोड़ी राई , हरी धनिया.

उबली हुई दाल और सब्जी में गरमा गर्म देशी (हींग -जीरे का ) तडका लगाएं और थोड़ा देशी गाय का घी डाले और चपाती के साथ खाएं

 

 

 

Photo: त्रिदोषहर दाल - मुंग की छिलके वाली दाल कफ और पित्त को शांत करती है. यह थोड़ी एस्त्रिन्जेंट होती है. इसमें मधुर रस होता है. यह थोड़ा सा वात बढ़ा सकती है , जिसके लिए हम कुछ मसाले जैसे हींग , जीरा आदि डालते है. इसके फलस्वरूप यह दाल त्रिदोषहर कही जाती है. 


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

चुकंदर एक ऐसी सब्जी है जिसे बहुत से लोग नापसंद करते हैं. इसके रस को पीने से न केवल शरीर में रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है बल्कि कई अन्य स्वास्थ्य लाभ भी होते हैं. यदि आप इस सब्जी से नफरत करते हैं तो जरा एक बार इसके फायदों के बारे में जरूर पढ़ लें. शायद कम लोग ही जानते हैं कि चुकंदर में लौह तत्व की मात्रा अधिक नहीं होती है, किंतु इससे प्राप्त होने वाला लौह तत्व उच्च गुणवत्ता का होता है, जो रक्त निर्माण के लिए विशेष महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि चुकंदर का सेवन शरीर से अनेक हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने में बेहद लाभदायी है। ऐसा समझा जाता है कि चुकंदर का गहरा लाल रंग इसमें लौह तत्व की प्रचुरता के कारण है, बल्कि सच यह है कि चुकंदर का गहरा लाल रंग इसमें पाए जाने वाले एक रंगकण (बीटा सायनिन) के कारण होता है। एंटी ऑक्सीडेंट गुणों के कारण ये रंगकण स्वास्थ्य के लिए अच्छे माने जाते हैं। एनर्जी बढ़ाये : यदि आपको आलस महसूस हो रही हो या फिर थकान लगे तो चुकंदर का जूस पी लीजिये. इसमें कार्बोहाइड्रेट होता है जो शरीर यह पानी फोड़े, जलन और मुहांसों के लिए काफी उपयोगी होता है. खसरा और बुखार में भी त्वचा को साफ करने में इसका उपयोग किया जा सकता है. पौष्टिकता से भरपूर : यह प्राकृतिक शर्करा का स्रोत होता है. इसमें कैल्शियम, मिनरल, मैग्नीशियम, आयरन, सोडियम, पोटेशियम, फॉस्फोरस, क्लोरीन, आयोडीन, और अन्य महत्वपूर्ण विटामिन पाये जाते हैं. इसलिए घर पर इसकी सब्जी बना कर अपने बच्चों को जरूर से खिलाएं.हृदय के लिए : चुकंदर का रस हाइपरटेंशन और हृदय संबंधी समस्याओं को दूर रखता है. खासकर के चुंकदर के रस का सेवन करने से व्यक्ति में रक्त संचार काफी बढ़ जाता है. रक्त की धमनियों में जमी हुई चर्बी को भी इसमें मौजूद बेटेन नामक तत्व जमने से रोकता है. स्वास्थ्यवर्धक पेय : जो लोग जिम में जी तोड़ कर वर्कआउट करते हैं उनके लिये चुकंदर का जूस बहुत फायदेमंद है. इसको पीने से शरीर में एनर्जी बढ़ती है और थकान दूर होती है. साथ ही अगर हाई बीपी हो गया हो तो इसे पीने से केवल 1 घंटे में शरीर नार्मल हो जाता है.


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

सेंधा नमक खाए और स्वस्थ रहिए :-

 

सेंधा नमक कितना फायदेमंद है जानिए –

 

प्राकृतिक नमक हमारे शरीर के लिये बहुत जरूरी है। इसके बावजूद हम सब घटिया किस्म का आयोडिन मिला हुआ समुद्री नमक खाते है। यह शायद आश्चर्यजनक लगे , पर यह एक हकीकत है ।

 नमक विशेषज्ञ का कहना है कि भारत मे अधिकांश लोग समुद्र से बना नमक खाते है जो की शरीर के लिए हानिकारक और जहर के समान है । समुद्री नमक तो अपने आप मे बहुत खतरनाक है लेकिन उसमे आयोडिन नमक मिलाकर उसे और जहरीला बना दिया जाता है , आयोडिन की शरीर मे मे अध...

 

 

Photo: सेंधा नमक खाए और स्वस्थ रहिए :- सेंधा नमक कितना फायदेमंद है जानिए – प्राकृतिक नमक हमारे शरीर के लिये बहुत जरूरी है। इसके बावजूद हम सब घटिया किस्म का आयोडिन मिला हुआ समुद्री नमक खाते है। यह शायद आश्चर्यजनक लगे , पर यह एक हकीकत है । नमक विशेषज्ञ का कहना है कि भारत मे अधिकांश लोग समुद्र से बना नमक खाते है जो की शरीर के लिए हानिकारक और जहर के समान है । समुद्री नमक तो अपने आप मे बहुत खतरनाक है लेकिन उसमे आयोडिन नमक मिलाकर उसे और जहरीला बना दिया जाता है , आयोडिन की शरीर मे मे अधिक मात्र जाने से नपुंसकता जैसा गंभीर रोग हो जाना मामूली बात है। उत्तम प्रकार का नमक सेंधा नमक है, जो पहाडी नमक है । आयुर्वेद की बहुत सी दवाईयों मे सेंधा नमक का उपयोग होता है।आम तौर से उपयोग मे लाये जाने वाले समुद्री नमक से उच्च रक्तचाप ,डाइबिटीज़,लकवा आदि गंभीर बीमारियो का भय रहता है । इसके विपरीत सेंधा नमक के उपयोग से रक्तचाप पर नियन्त्रण रहता है । इसकी शुद्धता के कारण ही इसका उपयोग व्रत के भोजन मे होता है । ऐतिहासिक रूप से पूरे उत्तर भारतीय उपमहाद्वीप में खनिज पत्थर के नमक को 'सेंधा नमक' या 'सैन्धव नमक' कहा जाता है जिसका मतलब है 'सिंध या सिन्धु के इलाक़े से आया हुआ'। अक्सर यह नमक इसी खान से आया करता था। सेंधे नमक को 'लाहौरी नमक' भी कहा जाता है क्योंकि यह व्यापारिक रूप से अक्सर लाहौर से होता हुआ पूरे उत्तर भारत में बेचा जाता था। भारत मे 1930 से पहले कोई भी समुद्री नमक नहीं खाता था विदेशी कंपनीया भारत मे नमक के व्यापार मे आज़ादी के पहले से उतरी हुई है ,उनके कहने पर ही भारत के अँग्रेजी प्रशासन द्वारा भारत की भोली भली जनता को आयोडिन मिलाकर समुद्री नमक खिलाया जा रहा है सिर्फ आयोडीन के चक्कर में ज्यादा नमक खाना समझदारी नहीं है, क्योंकि आयोडीन हमें आलू, अरवी के साथ-साथ हरी सब्जियों से भी मिल जाता है। यह सफ़ेद और लाल रंग मे पाया जाता है । सफ़ेद रंग वाला नमक उत्तम होता है। यह ह्रदय के लिये उत्तम, दीपन और पाचन मे मददरूप, त्रिदोष शामक, शीतवीर्य अर्थात ठंडी तासीर वाला, पचने मे हल्का है । इससे पाचक रस बढ़्ते हैं। रक्त विकार आदि के रोग जिसमे नमक खाने को मना हो उसमे भी इसका उपयोग किया जा सकता है। यह पित्त नाशक और आंखों के लिये हितकारी है । दस्त, कृमिजन्य रोगो और रह्युमेटिज्म मे काफ़ी उपयोगी होता है ।


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

पीलिया -

रक्त में लाल कणों की निश्चित आयु होती है | यदि किसी कारण इनकी आयु कम हो जाए और ये जल्दी ही अधिक मात्रा में नष्ट होने लगें तो पीलिया होने लगता है | यदि जिगर का कार्य भी पूरी तरह न हो तो पीलिया हो जाता है | हमारे रक्त में बिलीरुबिन नामक पीले रंग का पदार्थ होता है | यह पदार्थ लाल कणों के नष्ट होने पर निकलता है इसलिए शरीर में पीलापन आने लगता है | त्वचा का पीलापन ही पीलिया कहलाता है | रोग बढ़ने पर सारा शरीर हल्दी की तरह पीला दिखाई देता है | इस रोग में जिगर, पित्ताशय , तिल्ली और आमाशय आदि खराब होने की संभावना रहती है | अत्यंत तीक्ष्ण पदार्थों का सेवन, अधिक खटाई , गर्म तथा चटपटे और पित्त को बढ़ने वाले पदार्थों का अधिक सेवन,शराब अधिक पीने आदि कारणों से वात , पित्त और कफ कुपित होकर पीलिया को जन्म देते हैं| कुछ प्रयोग निम्न प्रकार हैं -----
1- ५० ग्राम मूली के पत्ते का रस निचोड़कर १० ग्राम मिश्री मिला लें, और बासी मुहँ पियें | 
2- पीलिया के रोगी को जौं ,गेंहू तथा चने की रोटी ,खिचड़ी ,हरी सब्ज़ियाँ,मूंग की दाल तथा नमक मिला हुआ मट्ठा आदि देना चाहिए | 
3- तरल पदार्थों का सेवन अधिक करना चाहिए | 
4- रोगी को भोजन बिना हल्दी का देना चाहिए तथा मैदे से बनी वस्तुएं ,खटाई ,उड़द ,सेम ,सरसों युक्त गरिष्ठ भोजन नहीं देना चाहिए |
5- कच्चे पपीते का खूब सेवन करें | पका हुआ पपीता भी पीलिया में बहुत लाभदायक होता है |
6- उबली हुई बिना मसाले व मिर्च की सब्ज़ी का सेवन करें |
7- मकोय के ४ चम्मच रस को हल्का गुनगुना करके सात दिन तक सेवन करें ,लाभ होगा |
8- पीलिया के रोगी को पूर्णतः विश्राम करना चाहिए तथा नमक का सेवन भी कम करना चाहिए |
9- अनार के रस के सेवन से रुक हुआ मल निकल जाता है और पीलिया में फायदा होता है |
10- आंवला रस पीने से भी पीलिया दूर होता है |


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

सर्दी खांसी जुकाम का इलाज़ • एक अच्छी दवाई खांसी जुखाम एलर्जी सर्दी आदि के लिए जिसे आप घर पर बना सकते है इसके लिए आपको चाहिए तुलसी के पत्ते, तना और बीज तीनो का कुल वजन 50 ग्राम इसके लिए आप तुलसी के ऊपर से तोड ले इसमें बीज तना और तुलसी के पत्ते तीनो आ जाएंगे इनको एक बरतन में डाल कर 500 मिलि पानी डाल ले और इसमें 100 ग्राम अदरक और 20 ग्राम काली मिर्च दोनो को पीस कर डाले और अच्छे से उबाल कर काढे और जब पानी 100 ग्राम रह जाए तो इसे छान कर किसी कांच की बोतल में डाल कर रखे इसमे थोडा सा शहद मिला कर आप इसके दो चम्मच ले सकते है दिन में 3 बार • जुखाम के लिए 2 चम्मच अजवायन को तवे पर हल्का भूने और फ़िर उसे एक रूमाल या कपडे में बांध ले और पोटली बना ले......उस पोटली को नाक से सूंघे और सो जाए • खांसी के लिए रोज दिन में 3 बार हल्के गर्म पानी में आधा चम्मच सैंधा नमक डाल कर गरारे(gargles) करे सुबह उठ कर दोपहर को और फ़िर रात को सोने से पहले..............एक चम्मच शहद में थोडी सी पीसी हुई काली मिर्च का पाऊडर डाल कर मिलाए और उसे चाटे...........अगर खासी ज्यादा आ रही हो तो 2 साबुत कालीमिर्च के दाने और थोडी सी मिश्री मुंह में रख कर चूसे आराम मिलेगा • अगर दही खाते है तो उसे बंद करदे और रात को सोते समय दूध न पिए • तुलसी, काली मिर्च और अदरक की चाय खांसी में सबसे बढि़या रहती हैं। • हींग, त्रिफला, मुलहठी और मिश्री को नीबू के रस में मिलाकर लेने से खांसी कम करने में मदद मिलती है। • पीपली, काली मिर्च, सौंठ और मुलहठी का चूर्ण बनाकर चौथाई चम्मच शहद के साथ लेना अच्छा रहता है।

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  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

सरदर्द के लिए अचूक "प्राकृतिक चिकित्सा "मात्र पांच मिनट में सरदर्द "गायब" नाक के दो हिस्से हैं दायाँ स्वर और बायां स्वर जिससे हम सांस लेते और छोड़ते हैं ,पर यह बिलकुल अलग - अलग असर डालते हैं और आप फर्क महसूस कर सकते हैं | दाहिना नासिका छिद्र "सूर्य" और बायां नासिका छिद्र "चन्द्र" के लक्षण को दर्शाता है या प्रतिनिधित्व करता है | सरदर्द के दौरान, दाहिने नासिका छिद्र को बंद करें और बाएं से सांस लें | और बस ! पांच मिनट में आपका सरदर्द "गायब" है ना आसान ?? और यकीन मानिए यह उतना ही प्रभावकारी भी है..

अगर आप थकान महसूस कर रहे हैं तो बस इसका उल्टा करें... यानि बायीं नासिका छिद्र को बंद करें और दायें से सांस लें ,और बस ! थोड़ी ही देर में "तरोताजा" महसूस करें |

 दाहिना नासिका छिद्र "गर्म प्रकृति" रखता है और बायां "ठंडी प्रकृति" अधिकांश महिलाएं बाएं और पुरुष दाहिने नासिका छिद्र से सांस लेते हैं और तदनरूप क्रमशः ठन्डे और गर्म प्रकृति के होते हैं सूर्य और चन्द्रमा की तरह |

 प्रातः काल में उठते समय अगर आप बायीं नासिका छिद्र से सांस लेने में बेहतर महसूस कर रहे हैं तो आपको थकान जैसा महसूस होगा ,तो बस बायीं नासिका छिद्र को बंद करें, दायीं से सांस लेने का प्रयास करें और तरोताजा हो जाएँ |

अगर आप प्रायः सरदर्द से परेशान रहते हैं तो इसे आजमायें ,दाहिने को बंद कर बायीं नासिका छिद्र से सांस लें बस इसे नियमित रूप से एक महिना करें और स्वास्थ्य लाभ लें |

तो बस इन्हें आजमाइए और बिना दवाओं के स्वस्थ महसूस करें |


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

आड़ू --
आड़ू को संस्कृत में आरुक कहते हैं यह लगभग ८ मीटर ऊँचा,विशाल या छोटा वृक्ष होता है जिसकी शाखाएं अरोमिल होती हैं | इसके पत्ते आम के पत्तों जैसे गहरे हरेरंग के होते हैं जो पक कर गिरने से पहले लाल रंग के हो जाते हैं | फल गोलाकार,५-७ सेंटीमीटर व्यास के,गूदेदार ,पीले रंग के,रक्ताभ,आभायुक्त तथा अत्यंत कठोर गुठली युक्त होते हैं | इनका पुष्पकाल फ़रवरी-मार्च में तथा फल काल अप्रैल से जून में होता है | इसकी गिरी में से एक प्रकार का तेल निकला जाता है जो कड़वे बादाम तेल की तरह होता है ।आड़ू के फल में शर्करा,साइट्रिक अम्ल,एस्कॉर्बिक अम्ल,प्रूसिक अम्ल,ओलिक अम्ल,लिनोलिक अम्ल,प्रोटीन,खनिज,विटामिन A ,B तथा C आदि प्राप्त होते हैं | आज हम आपको आड़ू के औषधीय गुणों से अवगत कराएंगे-

१- कर्णशूल- आड़ू बीज तेल को १-२ बूँद कान में डालने से कान की वेदना का शमन होता है |

२-विबन्ध - प्रतिदिन सोने से पूर्व छिलका सहित एक आड़ू फल का सेवन करने से कब्ज में लाभ होता है |

३- आंत्र कृमि - १०-२० मिलीलीटर आड़ू स्वरस में १२५ मिलीग्राम हींग मिलाकर पिलाने से आँतों के कीड़ों का शमन होता है

४-आमाशय शूल - १०-२० मिलीलीटर आड़ू फल स्वरस में ५०० मिलीग्राम अजवाइन चूर्ण मिलाकर पिलाने से पेट दर्द में लाभ होता है |

५- व्रण - आड़ू के पत्तों को पीसकर लगाने से घाव,रोएँ की सूजन,खुजली तथा बवासीर में लाभ होता है |

६- चर्म रोग - आड़ू बीज तेल की शरीर पर मालिश करने से चर्मरोगों में लाभ होता है|


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अरहर
अरहर की खेती लगभग ३,५०० साल पहले से की जाती है | यह भारत में बहुत प्रयोग की जाती है , यहाँ पर इस दाल को शाकाहारी वर्ग के लिए मुख्य प्रोटीन स्रोत माना जाता है | अरहर की दाल में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन के साथ-साथ amino acids ,methionine ,lysine or tryptophan भी पाए जाते हैं |
दाल के रूप में उपयोग में ली जानेवाली सभी दलहनों में अरहर का प्रमुख स्थान है | यह गर्म तथा शुष्क होती है इसलिए इसे देसी घी में छौंककर खाना चाहिए | अरहर की दाल में पर्याप्त मात्रा में घी मिलाकर खाने से वह वायुकारक नहीं रहती | यह दाल त्रिदोषनाशक (वात ,पित्त और कफ़ ) है , अतः यह सभी के लिए अनुकूल है |
आइये जानते हैं अरहर के कुछ औषधीय गुण ------------
१-अरहर के पत्तों और दूब घास का रास निकालकर छान लें , इसे सूंघने से आधे सर का दर्द दूर होता है |
२-अरहर के पत्तों को जलकर राख बना लें , इस राख को दही में मिलाकर लगाने से खुजली समाप्त होती है |
३-अरहर की दाल खाने से पेट की गैस की शिकायत दूर होती है |
४-रात को अरहर की दाल पानी में भिगो दें , सुबह इस पानी को गर्म करके गरारे करने से गले की सूजन दूर होती है |
५-अरहर के कोमल पत्ते पीसकर घावों पर लगाने से घाव जल्दी भरते है |
६-यदि शरीर के किसी अंग पर सूजन है तो चार चम्मच अरहर की दाल को पीसकर बांधने से उस अंग की सूजन खत्म हो जाती है |
७-अरहर की दाल पाचक है तथा इसका सेवन बवासीर , बुखार, व गुल्म रोगों में लाभकारी है |


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आम

आम को शास्त्रों में अमृत फल माना गया है | आम को फलों का राजा भी कहा जाता है | आइये आज हम इसके कुछ सरल और उपयोगी प्रयोग जानते हैं :--

१- यदि बच्चों को मिट्टी खाने की आदत हो तो उसे छुड़ाने के लिए आम की गुठली की गिरी का चूर्ण पानी में मिलाकर दिन में दो -तीन बार पिलायें , इस प्रयोग से पेट के कीड़े भी मर जाते हैं |

२-सूखी खांसी - एक पका हुआ अच्छा सा आम लें , उसे आग में भून लें | जब यह ठंडा हो जाए तो इसे धीरे -धीरे चूसें , इससे सूखी खांसी में लाभ होता है |

३- मधुमेह - आम के पत्तों को छाया में सुखाकर चूर्ण बना लें , इसे 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह - शाम पानी से 20-25 दिन लगातार सेवन करने से मधुमेह में लाभ होता है |

४- कब्ज़ - पके आम खाकर ऊपर से गर्म दूध पीने से शौच खुलकर आती है , जिससे पेट साफ़ हो जाता है और कब्ज़ से छुटकारा मिल जाता है |

५- कान दर्द -आम के पत्तों का रस निकालें , इसे हल्का सा गर्म करके कुछ बूँद कान में डालें , कान दर्द में लाभ होता है |

६-पायरिया - आम की गुठली की गिरी निकल लें , सुखाकर इसका बारीक़ चूर्ण बना लें | इस चूर्ण को मंजन की तरह करने से पायरिया एवं दांतों के सभी रोगों में लाभ होता है |

७- लू तथा गर्मी -कच्चे आम का पन्ना बना कर पीने से लू तथा गर्मी लगने से होने वाली बेचैनी ठीक होती है |

आम खाने के बाद पाचन सम्बन्धी दिक्कत होने पर तीन - चार जामुन खा लें ,लाभ होगा | जामुन के स्थान पर चुटकी भर पिसी सौंठ में इतना ही सेंधा नमक मिलाकर लिया जा है |
आम खाने के बाद गर्म दूध का सेवन करना चाहिए , आम के ऊपर पानी का सेवन कदापि ना करें |


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

गेहूं -

गेहूं से हम सब परिचित हैं | यही वह अनाज है जिसका उपयोग भोजन बनाने में किया जाता है तथा सारे खाने वाले पदार्थों में गेहूं का महत्वपूर्ण स्थान है| सभी प्रकार के अनाजों की अपेक्षा गेहूं में पौष्टिक तत्त्व अधिक होते हैं इसलिए गेहूं अनाजों में राजा कहलाता है | हमारे देश में गेहूं का उत्पादन सबसे ज्यादा होता है | गेहूं में चर्बी का अंश कम होता है अत: गेहूं के आटे की रोटी के साथ उचित मात्रा में घी या तेल का सेवन करना चाहिए,इससे शरीर में ताकत की वृद्धि होती है| घी के साथ गेहूं का आहार सेवन करने से पेट में गैस बनना तथा कब्ज़ दूर होती है | गेहूं से बनी मैदा पचने में भरी होती है | अत: कमजोर पाचनशक्ति वालों को गेहूं के मैदे की रोटी या पूड़ी नहीं खानी चाहिए |
आज हम आपको गेहूं के कुछ औषधीय गुणों से अवगत कराएंगे -

१- गेहूं की रोटी एक तरफ से सेक लें तथा एक तरफ कच्ची रहने दें | फिर रोटी के कच्चे भाग पर तिल का तेल लगाकर सूजन वाले भाग पर बाँध दें | इससे सूजन तथा दर्द दूर हो जाएगा |

२- गेहूं को गर्म तवे पर खूब अच्छी तरह से सेक लें और जब वो बिलकुल राख की तरह हो जाए तो इसे पीसकर सरसों के तेल में मिलकर पीड़ित स्थान पर लगाएं | इससे वर्षों के पुराने चर्म रोग जैसे खर्रा ,दाद आदि ठीक हो जाते हैं |

३- गेहूं की राख,घी और गुड़ तीनो को बराबर मात्रा में मिला लें । इसका एक - एक चम्मच सुबह- शाम खाने से चोट का दर्द ठीक हो जाता है |

४- सौंफ को पानी में पीसकर छान लें तथा इस पानी में गेहूं का आटा गूंथकर रोटी बना लें | इस रोटी को खाने से दस्त और पेचिश ठीक हो जाते हैं |

५ - गेहूं का अंकुरण हो जाने पर जो पौधा उगता है ,उसे ज्वारा कहते हैं | इस ज्वारे का रस पित्तजनित रोगों को ठीक करने में लाभकारी है | कैंसर ,भगन्दर ,बवासीर ,मधुमेह ,पीलिया ,ज्वर ,दमा ,खांसी आदि पुराने असाध्य रोग भी गेहूं के पौधे के रस से ठीक हो सकते हैं |
ज्वारे का रस बनाने की विधि -
सात मिटटी के गमलें लें | उसमे से रोज़ एक गमले में आधी मुट्ठी उत्तम क्वालिटी के गेहूं के दाने बो दें और छाया में रखकर उसमे थोड़ा -थोड़ा पानी प्रतिदिन डालते रहें | इस प्रकार सात दिन तक सात गमलों में गेहूं बोयें | जिस मिट्टी में ये गेहूं बोयें , उसमे खाद अधिक नहीं होना चाहिए | तीन - चार दिन बाद पौधे उग आएंगे तथा ८- १० दिन में पौधे ७-८ इंच के हो जायेंगे | तब आप उसमें से पहली दिन बोये हुए सारे पौधे जड़ सहित उखाड़कर जड़ को काटकर फेंक दें और बचे हुए भाग को साफ़ धोकर उन्हें पीसकर व छानकर रस तैयार कर लें | यह ताजा रस सुबह -शाम रोगी को दें | रस पिलाने के दो घंटे बाद तक रोगी को कुछ खिलाना पिलाना नहीं चाहिए | जब पहले गमले के ज्वारे उखाड़े तो उसमें गेंहू के नए दाने बो दें |


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

गेहूं -

गेहूं से हम सब परिचित हैं | यही वह अनाज है जिसका उपयोग भोजन बनाने में किया जाता है तथा सारे खाने वाले पदार्थों में गेहूं का महत्वपूर्ण स्थान है| सभी प्रकार के अनाजों की अपेक्षा गेहूं में पौष्टिक तत्त्व अधिक होते हैं इसलिए गेहूं अनाजों में राजा कहलाता है | हमारे देश में गेहूं का उत्पादन सबसे ज्यादा होता है | गेहूं में चर्बी का अंश कम होता है अत: गेहूं के आटे की रोटी के साथ उचित मात्रा में घी या तेल का सेवन करना चाहिए,इससे शरीर में ताकत की वृद्धि होती है| घी के साथ गेहूं का आहार सेवन करने से पेट में गैस बनना तथा कब्ज़ दूर होती है | गेहूं से बनी मैदा पचने में भरी होती है | अत: कमजोर पाचनशक्ति वालों को गेहूं के मैदे की रोटी या पूड़ी नहीं खानी चाहिए |
आज हम आपको गेहूं के कुछ औषधीय गुणों से अवगत कराएंगे -

१- गेहूं की रोटी एक तरफ से सेक लें तथा एक तरफ कच्ची रहने दें | फिर रोटी के कच्चे भाग पर तिल का तेल लगाकर सूजन वाले भाग पर बाँध दें | इससे सूजन तथा दर्द दूर हो जाएगा |

२- गेहूं को गर्म तवे पर खूब अच्छी तरह से सेक लें और जब वो बिलकुल राख की तरह हो जाए तो इसे पीसकर सरसों के तेल में मिलकर पीड़ित स्थान पर लगाएं | इससे वर्षों के पुराने चर्म रोग जैसे खर्रा ,दाद आदि ठीक हो जाते हैं |

३- गेहूं की राख,घी और गुड़ तीनो को बराबर मात्रा में मिला लें । इसका एक - एक चम्मच सुबह- शाम खाने से चोट का दर्द ठीक हो जाता है |

४- सौंफ को पानी में पीसकर छान लें तथा इस पानी में गेहूं का आटा गूंथकर रोटी बना लें | इस रोटी को खाने से दस्त और पेचिश ठीक हो जाते हैं |

५ - गेहूं का अंकुरण हो जाने पर जो पौधा उगता है ,उसे ज्वारा कहते हैं | इस ज्वारे का रस पित्तजनित रोगों को ठीक करने में लाभकारी है | कैंसर ,भगन्दर ,बवासीर ,मधुमेह ,पीलिया ,ज्वर ,दमा ,खांसी आदि पुराने असाध्य रोग भी गेहूं के पौधे के रस से ठीक हो सकते हैं |
ज्वारे का रस बनाने की विधि -
सात मिटटी के गमलें लें | उसमे से रोज़ एक गमले में आधी मुट्ठी उत्तम क्वालिटी के गेहूं के दाने बो दें और छाया में रखकर उसमे थोड़ा -थोड़ा पानी प्रतिदिन डालते रहें | इस प्रकार सात दिन तक सात गमलों में गेहूं बोयें | जिस मिट्टी में ये गेहूं बोयें , उसमे खाद अधिक नहीं होना चाहिए | तीन - चार दिन बाद पौधे उग आएंगे तथा ८- १० दिन में पौधे ७-८ इंच के हो जायेंगे | तब आप उसमें से पहली दिन बोये हुए सारे पौधे जड़ सहित उखाड़कर जड़ को काटकर फेंक दें और बचे हुए भाग को साफ़ धोकर उन्हें पीसकर व छानकर रस तैयार कर लें | यह ताजा रस सुबह -शाम रोगी को दें | रस पिलाने के दो घंटे बाद तक रोगी को कुछ खिलाना पिलाना नहीं चाहिए | जब पहले गमले के ज्वारे उखाड़े तो उसमें गेंहू के नए दाने बो दें |


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

आलूबुखारा -
यह मूलतः यूरोप तथा पश्चिमी एशिया में प्राप्त होता है | भारत में विशेषतः पश्चिमी शीतोष्ण हिमालय के जम्मू एवं कश्मीर,हिमाचल प्रदेश,उत्तराखंड तथा दक्षिण भारत में नीलगिरि के पहाड़ी क्षेत्रों में १५००-२१०० मीटर की ऊंचाई पर उत्त्पन्न होता है | इसके फल गोलाकार तथा चमकदार होते हैं | इसके कच्चे फल खट्टे तथा पके फल खट्टे-मीठे होते हैं,फलों के भीतर पीला गूदा तथा एक बड़ा बीज होता है | इसके वृक्ष से एक प्रकार का पीले रंग का गोंद निकलता है,जो बबूल के गोंद के सामान दिखाई देता है | इसका पुष्पकाल तथा फलकाल फ़रवरी से जुलाई तक होता है | 
इसके फल में प्रोटीन,कार्बोहायड्रेट,वसा,कैल्शियम,मैग्नीशियम,लौह,पोटैशियम , विटामिन C तथा आर्गेनिक अम्ल भी पाया जाता है | बीज में तेल,प्रोटीन,कार्बोहायड्रेट,खनिज एवं एमीग्लैडीन पाया जाता है | आलूबुखारे के औषधीय उपयोग -

१- नकसीर 
आलूबुखारे के पत्तों का रस निकालकर १-२ बूँद नाक में डालने से नकसीर में लाभ होता है |

२- पित्तविकार-
भोजन से पूर्व आलूबुखारे के मीठे फल का सेवन करने से यह पित्त विकारों का शमन करता है |

३- उदरकृमि 
आलूबुखारे के पत्तों को पीसकर पेट पर लेप करने से पेट के कीड़े निकल जाते हैं |

४- तृष्णा -
आलूबुखारे का सेवन करने से प्यास व अरुचि का शमन होता है |

५-अजीर्ण -
इसके बीजों को बादाम की तरह शुष्क फल (dry fruits ) के रूप में खाने से अजीर्ण में लाभ होता है |

६- स्मृतिवर्धनार्थ-
आलूबुखारे के बीज की गिरी का सेवन करने से धीरे-धीरे स्मरणशक्ति बढ़ती है |


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

आँख आना [ Conjunctivitis ]
Conjunctivitis एक आम वायरल इन्फ़ेक्शन है जो कभी-कभी बैक्टीरिया से भी होता है , इसे आम भाषा में आँख आना कहते हैं | 
आँख का लाल होना , दर्द होना और आँख से पानी आना इसके मुख्य लक्षण हैं | आँख आने पर आँखों में कुछ अटका हुआ सा प्रतीत होता है | इस रोग में आँख खोलने से भी दर्द होता है और रोग के बढ़ने पर गाढ़ा -गाढ़ा पदार्थ भी निकलता है इसलिए रात में पलकें चिपक जाती हैं, जोकि पीड़ादायक है |
यह एक संक्रामक रोग है , यह रोगी के तौलिये या रुमाल के इस्तेमाल से भी फैलता है | आज हम आपको इसके कुछ घरेलू उपचारों से अवगत कराते हैं :--
1- मुलहठी को दो घंटे तक पानी में भिगोकर रखें। उसके बाद उस पानी में रुई डुबोकर पलकों पर रखें , ऐसा करने से आँखों की जलन व दर्द में आराम मिलता है | 
2 -आधे गिलास पानी में दो चम्मच त्रिफ़ला चूर्ण दो घंटे भिगोकर रखें | अब इसे छान लें ,इस पानी से दिन में 3 -4 बार छींटें मारकर आँखें धोने से लाभ होता है | 
3 -नीम के पानी से आँख धोने के बाद आँखों में गुलाबजल डालें लाभ होगा |
4 -हरी दूब (घास ) का रस निकालें अब इस रस में रुई भिगोकर पलकों पर रखें ,आँखों में ठंडक मिलेगी | 
5 -हरड़ को रात भर पानी में भिगोकर रखें | सुबह उस पानी को छानकर उससे आँख धोएं , आँखों की लाली और जलन दूर होगी | 
6 -दूध पर जमी मलाई उत्तर लें, अब इसे दोनों पलकों पर रख कर ऊपर से रुई रखकर पट्टी बांध दें | यह प्रयोग रात को सोते समय करें ,लाभ होगा | 
7- प्रातःकाल उठते ही अपना बासी थूक भी संक्रमित आँखों पर लगा सकते हैं |


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

उड़द -
उड़द का उपयोग दाल के रूप में प्रायः समस्त भारतवर्ष में किया जाता है । इसकी दाल व बाजरे की रोटी मेहनती लोगों का प्रिय भोजन है| उड़द काली व हरी कई प्रकार की होती है | सब प्रकार की उड़दों में काली उड़द उत्तम मानी गयी है। वैद्यक ग्रंथो में अनेक पौष्टिक प्रयोगों में उड़द की प्रशंसा की गयी है | यह दाल वायुकारक होती है | इसके इस दोष को दूर करने के लिए इसमें हींग पर्याप्त मात्रा में डालना चाहिए| दूध देने वाली गाय या भैंस को उड़द खिलाने से ये दूध अधिक मात्रा में देती हैं | इसके पत्तों और डंडी का चूरा भी पशुओं को खिलाया जाता है | 
उड़द एक पौष्टिक दाल है | यह पित्त और कफ को बढ़ाता है | उड़द को अपनी पाचन शक्ति को ध्यान में रखते हुए उपयोग करना चाहिए | विभिन्न रोगों में उड़द का उपयोग -

१- उड़द की दाल को पानी में भिगो लें | जब यह पूरी तरह फूल जाए तब इसको पीसकर सिर पर लेप की तरह लगाने से सिर का दर्द दूर हो जाता है |

२- साबुत उड़द जले हुए कोयले पर डालें और इसका धुआं सूंघें | इससे हिचकी रोग ठीक हो जाता है |

३- उड़द को पीसकर घाव के ऊपर बाँधने से पस निकल जाती है तथा घाव ठीक हो जाता है |

४- उड़द के आटे में थोड़ी सौंठ,थोड़ा नमक,और थोड़ी हींग मिलाकर उसकी रोटी बनाकर एक तरफ से सेंक लें और उसको उतारकर कच्चे भाग की तरफ तिल का तेल लगाकर वेदनायुक्त स्थान पर बाँधने से वेदना का शमन होता है |

५- रात को ५० ग्राम उड़द की दाल भिगो दें | सुबह इसे पीसकर आधा गिलास दूध में स्वादानुसार मिश्री मिलाकर पियें | यह हृदय को शक्ति देता है |


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

लीची- 
लीची समस्त भारत में मुख्यतयः उत्तरी भारत,बिहार,आसाम,पश्चिम बंगाल,उत्तराखंड,आंध्र प्रदेश एवं नीलगिरि क्षेत्रों में इसको घरों व बगीचों में लगाया जाता है | इसके फल गोल,कच्ची अवस्था में हरे रंग के,पकने पर मखमली लाल रंग के होते हैं | फल के अंदर का गूदा सफ़ेद रंग का व मीठा होता है | फल के अंदर एक भूरे रंग का बड़ा सा बीज होता है | इसका पुष्पकाल एवं फलकाल फ़रवरी से जून तक होता है | 
इसके फल में शर्करा, मैलिक अम्ल,साइट्रिक अम्ल,टार्टरिक अम्ल,विटामिन A ,B ,C तथा खनिज पदार्थ पाये जाते हैं | गर्मियों में जब शरीर में पानी व खनिज लवणों की कमी हो जाती है तब लीची का रस बहुत फायदेमंद रहता है |लीची के औषधीय उपयोग -

१- लीची के फल का सेवन करने से आँतों की बिमारी तथा पेट दर्द में लाभ होता है | 

२- लीची का सेवन करने से कमजोरी दूर होती है तथा शरीर पुष्ट होता है |

३- लीची खाने से पित्त की अधिकता कम होती है तथा कब्ज भी ख़त्म होती है |

५- गर्मी के मौसम में आधा कप लीची का रस प्रतिदिन पीने से हृदय को बल मिलता है | 

६- बवासीर के रोगियों के लिए लीची का सेवन बहुत लाभकारी है | 

७- लीची जल्दी पच जाती है| यह पाचन क्रिया को मजबूत बनाने वाली तथा लीवर के रोगों में लाभकारी है |


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

मूंग -
मूंग से हम सब बहुत अच्छी तरह परिचित हैं | मूंग की दाल द्विदल धान्य है और समस्त दलहनों में अपने विशेष गुणों के कारण अच्छी मानी जाती है | मूंग काले,हरे,पीले,सफ़ेद और लाल अनेक तरह की होती है | रोगियों के लिए मूंग बहुत श्रेष्ठ बताई जाती है | मूंग की दाल से पापड़,बड़ियां व पौष्टिक लड्डू भी बनाये जाते हैं | मूंग की दाल खाने में शीतल व पचने में हलकी होती है | 
विभिन्न रोगों में मूंग का उपयोग -

१- चावल और मूंग की खिचड़ी खाने से कब्ज दूर होता है | खिचड़ी में घी डालकर खाने से कब्ज दूर होकर दस्त साफ़ आता है | 

२- मूंग को सेंककर पीस लें | इसमें पानी डालकर अच्छी तरह से मिलाकर लेप की तरह शरीर पर मालिश करें | इससे ज्यादा पसीना आना बंद हो जाता है | 

३- मूंग की छिलके वाली दाल को दो घंटे के लिए पानी में भिगो दें| इसके बाद इसे पीसकर गाढ़ा लेप दाद और खुजली युक्त स्थान पर लगाएं,लाभ होगा | 

४- टाइफाइड के रोगी को मूंग की दाल बनाकर देने से लाभ होता है,लेकिन दाल के साथ घी और मसालों का प्रयोग बिलकुल न करें | 

५- मूंग को छिलके सहित खाना चाहिए | बुखार होने पर मूंग की दाल में सूखे आंवले को डालकर पकाएं | इसे रोज़ दिन में दो बार खाने से बुखार ठीक होता है और दस्त भी साफ़ होता है |


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

अशोक -
यह भारतीय वनौषधियों में एक दिव्य रत्न है | भारतवर्ष में इसकी कीर्ति का गान बहुत प्राचीनकाल से हो रहा है | प्राचीनकाल में शोक को दूर करने और प्रसन्नता के लिए अशोक वाटिकाओं एवं उद्यानों का प्रयोग होता था और इसी आश्रय से इसके नाम शोकनाश ,विशोक,अपशोक आदि रखे गए हैं| सनातनी वैदिक लोग तो इस पेड़ को पवित्र एवं आदरणीय मानते ही हैं ,किन्तु बौद्ध भी इसे विशेष आदर की दॄष्टि से देखते हैं क्यूंकि कहा जाता है की भगवानबुद्ध का जन्म अशोक वृक्ष के नीचे हुआ था | अशोक के वृक्ष भारतवर्ष में सर्वत्र बाग़ बगीचों में तथा सड़कों के किनारे सुंदरता के लिए लगाए जाते हैं | भारत के हिमालयी क्षेत्रों तथा पश्चिमी प्रायद्वीप में ७५० मीटर की ऊंचाई पर मुख्यतः पूर्वी बंगाल, बिहार,उत्तराखंड,कर्नाटक एवं महाराष्ट्र में साधारणतया नहरों के किनारे व सदाहरित वनों में पाया जाता है| मुख्यतया अशोक की दो प्रजातियां होती हैं ,जिनका प्रयोग चिकित्सा के लिए किया जाता है | 
आज हम आपको अशोक के कुछ औषधीय गुणों से अवगत कराएंगे -

१- श्वास - ६५ मिलीग्राम अशोक बीज चूर्ण को पान के बीड़े में रखकर खिलने से श्वास रोग में लाभ होता है | 

२- रक्तातिसार- अशोक के तीन-चार ग्राम फूलों को जल में पीस कर पिलाने से रक्तातिसार (खूनी दस्त ) में लाभ होता है | 

३- रक्तार्श ( बवासीर )- अशोक की छाल और इसके फूलों को बराबर की मात्रा में ले कर दस ग्राम मात्रा को रात्रि में एक गिलास पानी में भिगोकर रख दें , सुबह पानी छान कर पी लें इसी प्रकार सुबह का भिगोया हुआ शाम को पी लें ,इससे खूनी बवासीर में शीघ्र लाभ मिलता है |
४- अशोक के १-२ ग्राम बीज को पानी में पीस कर दो चम्मच की मात्रा में पीस कर पीने से पथरी के दर्द में आराम मिलता है | 

५-प्रदर - अशोक छाल चूर्ण और मिश्री को संभाग खरल कर , तीन ग्राम की मात्रा में लेकर गो-दुग्ध प्रातः -सायं सेवन करने से श्वेत -प्रदर में लाभ होता है | 
अशोक के २-३ ग्राम फूलों को जल में पीस कर पिलाने से रक्तप्रदर में लाभ होता है 


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करेला के गुणों से सब परिचित हैं |
मधुमेह के रोगी विशेषतः इसके रस और सब्जी का सेवन करते हैं | समस्त भारत में इसकी खेती की जाती है | इसके पुष्प चमकीले पीले रंग के होते हैं | इसके फल ५-२५ सेमी लम्बे,५ सेमी व्यास के,हरे रंग के,बीच में मोटे,सिरों पर नुकीले,कच्ची अवस्था में हरे तथा पक्वावस्था में पीले वर्ण के होते हैं | इसके बीज ८-१३ मिमी लम्बे,चपटे तथा दोनों पृष्ठों पर खुरदुरे होते हैं जो पकने पर लाल हो जाते हैं | इसका पुष्पकाल एवं फलकाल जून से अक्टूबर तक होता है | आज हम आपको करेले के कुछ औषधीय प्रयोगों से अवगत कराएंगे -

१- करेले के ताजे फलों अथवा पत्तों को कूटकर रस निकालकर गुनगुना करके १-२ बूँद कान में डालने से कान-दर्द लाभ होता है | 

२- करेले के रस में सुहागा की खील मिलाकर लगाने से मुँह के छाले मिटते हैं | 

३-सूखे करेले को सिरके में पीसकर गर्म करके लेप करने से कंठ की सूजन मिटती है ।

४- १०-१२ मिली करेला पत्र स्वरस पिलाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं | 

५- करेला के फलों को छाया शुष्क कर महीन चूर्ण बनाकर रखें | ३-६ ग्राम की मात्रा में जल या शहद के साथ सेवन करना चाहिए | मधुमेह में यह उत्तम कार्य करता है | यह अग्नाशय को उत्तेजित कर इन्सुलिन के स्राव को बढ़ाता है | 

६- १०-१५ मिली करेला फल स्वरस या पत्र स्वरस में राई और नमक बुरक कर पिलाने से गठिया में लाभ होता है | 

 

७- करेला पत्र स्वरस को दाद पर लगाने से लाभ होता है | इसे पैरों के तलवों पर लेप करने से दाह का शमन होता है| 

८- करेले के १०-१५ मिली रस में जीरे का चूर्ण मिलाकर दिन में तीन बार पिलाने से शीत-ज्वर में लाभ होता है |


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इमली- 
इमली से हम सब परिचित हैं | इमली के वृक्ष काफी ऊँचे होते हैं तथा सघन छायादार होने के कारण सडकों के किनारे भी इसके वृक्ष लगाए जाते हैं | इमली का वृक्ष उष्णकटिबंधीय अफ्रीका तथा मेडागास्कर का मूल निवासी है | वहां से यह भारत में आया और अब पूरे भारतवर्ष में प्राप्त होता है | यहाँ से ईरान तथा सऊदी अरब में पहुंचा जहाँ इसे तमार-ए-हिन्द (भारत का खजूर ) कहते हैं |इसका पुष्पकाल फ़रवरी से अप्रैल तथा फलकाल नवंबर से जनवरी तक होता है | इसके फल में शर्करा,टार्टरिक अम्ल,पेक्टिन,ऑक्जेलिक अम्ल तथा मौलिक अम्ल आदि तथा बीज में प्रोटीन,वसा,कार्बोहायड्रेट तथआ खनिज लवण प्राप्त होते हैं | यह कैल्शियम,लौह तत्व,विटामिन B ,C तथा फॉस्फोरस का अच्छा स्रोत है |आज हम आपको इमली के औषधीय गुणों से अवगत करा रहे हैं -

१- १० ग्राम इमली को एक गिलास पानी में भिगोकर,मसल-छानकर ,शक्कर मिलाकर पीने से सिर दर्द में लाभ होता है | 

२- इमली को पानी में डालकर ,अच्छी तरह मसल- छानकर कुल्ला करने से मुँह के छालों में लाभ होता है| 

३- १० ग्राम इमली को १ लीटर पानी में उबाल लें जब आधा रह जाए तो उसमे १० मिलीलीटर गुलाबजल मिलाकर,छानकर, कुल्ला करने से गले की सूजन ठीक होती है |

४-इमली के दस से पंद्रह ग्राम पत्तों को ४०० मिलीलीटर पानी में पकाकर ,एक चौथाई भाग शेष रहने पर छानकर पीने से आंवयुक्त दस्त में लाभ होता है | 

५- इमली की पत्तियों को पीसकर गुनगुना कर लेप लगाने से मोच में लाभ होता है | 

६-इमली के बीज को नींबू के रस में पीसकर लगाने से दाद में लाभ होता है | 

७- गर्मियों में ताजगी दायक पेय बनाने के लिए इमली को पानी में कुछ देर के लिए भिगोएँ व मसलकर इसका पानी छान लें। अब उसमें स्वादानुसार गुड़ या शक़्कर , नमक व भुना जीरा डाल लें। इसमें ताजे पुदीने की पत्तियाँ स्फूर्ति की अनुभूति बढ़ाती हैं ,अतः ताजे पुदीने की पत्तियाँ भी इस पेय में डाली जा सकती हैं | 

नोट -- चूँकि इमली खट्टी होती है अतः इसे भिगोने के लिए कांच या मिट्टी के बर्तन का उपयोग किया जाना चाहिए |


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अमरूद है एक बेहतरीन औषधि, इन रोगों में करता है दवा का काम

अमरूद एक बेहतरीन स्वादिष्ट फल है। अमरूद कई गुणों से भरपूर है। अमरूद में प्रोटीन 10.5 प्रतिशत, वसा 0. 2 कैल्शियम 1.01 प्रतिशत बी पाया जाता है। अमरूद का फलों में तीसरा स्थान है। पहले दो नम्बर पर आंवला और चेरी हैं। इन फलों का उपयोग ताजे फलों की तरह नहीं किया जाता, इसलिए अमरूद विटामिन सी पूर्ति के लिए सर्वोत्तम है।

विटामिन सी छिलके में और उसके ठीक नीचे होता है तथा भीतरी भाग में यह मात्रा घटती जाती है। फल के पकने के साथ-साथ यह मात्रा बढती जाती है। अमरूद में प्रमुख सिट्रिक अम्ल है 6 से 12 प्रतिशत भाग में बीज होते है। इसमें नारंगी, पीला सुगंधित तेल प्राप्त होता है। अमरूद स्वादिष्ट फल होने के साथ-साथ अनेक गुणों से भरा से होता है।

यदि कभी आपका गला ज्यादा ख़राब हो गया हो तो अमरुद के तीन -चार ताज़े पत्ते लें ,उन्हें साफ़ धो लें तथा उनके छोटे-छोटे टुकड़े तोड़ लें | एक गिलास पानी लेकर उसमे इन पत्तों को डाल कर उबाल लें , थोड़ा पकाने के बाद आंच बंद कर दें | थोड़ी देर इस पानी को ठंडा होने दें ,जब गरारे करने लायक ठंडा हो जाये तो इसे छानकर ,इसमें नमक मिलाकर गरारे करें , याद रखें कि इसमें ठंडा पानी नहीं मिलना है | 

अमरूद के ताजे पत्तों का रस 10 ग्राम तथा पिसी मिश्री 10 ग्राम मिलाकर 21 दिन प्रात: खाली पेट सेवन करने से भूख खुलकर लगती है और शरीर सौंदर्य में भी वृद्धि होती है।

अमरूद खाने या अमरूद के पत्तों का रस पिलाने से शराब का नशा कम हो जाता है। कच्चे अमरूद को पत्थर पर घिसकर उसका एक सप्ताह तक लेप करने से आधा सिर दर्द समाप्त हो जाता है। यह प्रयोग प्रात:काल करना चाहिए। गठिया के दर्द को सही करने के लिए अमरूद की 4-5 नई कोमल पत्तियों को पीसकर उसमें थोड़ा सा काला नमक मिलाकर रोजाना खाने से से जोड़ो के दर्द में काफी राहत मिलती है।

डायबिटीज के रोगी के लिए एक पके हुये अमरूद को आग में डालकर उसे भूनकर निकाल लें और भुने हुई अमरुद को छीलकर साफ़ करके उसे अच्छे से मैश करके उसका भरता बना लें, उसमें स्वादानुसार नमक, कालीमिर्च, जीरा मिलाकर खाएं, इससे डायबिटीज में काफी लाभ होता है। ताजे अमरूद के 100 ग्राम बीजरहित टुकड़े लेकर उसे ठंडे पानी में 4 घंटे भीगने दीजिए। इसके बाद अमरूद के टुकड़े निकालकर फेंक दें। इस पानी को मधुमेह के रोगी को पिलाने से लाभ होता है।

जब भी आप फोड़े और फुंसियों से परेशान हो तो अमरूद की 7-8 पत्तियों को लेकर थोड़े से पानी में उबालकर पीसकर पेस्ट बना लें और इस पेस्ट को फोड़े-फुंसियों पर लगाने से आराम मिल जाएगा। चार हफ्तों तक नियमित रूप से अमरूद खाने से भी पेट साफ रहता है व फुंसियों की समस्या से राहत मिलती है।


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मसूड़ों की सूजन (GINGIVITIS) -
मसूड़ों पर चोट लगने या अधिक गर्म पदार्थ व सख्त चीज़ें खाने से मसूड़ों पर दबाव पड़ता है,जिससे मसूड़ों में सूजन उत्पन्न हो जाती है | सूजन होने से मसूड़े ढीले पड़ जातें हैं जिससे दांतों का नुकसान होता है | इसका इलाज न होने पर दांत हिलकर गिरने लगते हैं | आज हम आपको मसूड़ों की सूजन के लिए कुछ सरल उपचार बताएंगे -

१- भुनी फिटकरी,सेंधा नमक,काली मिर्च तथा हरड़ का छिलका इन सबको १०-१० ग्राम की मात्रा में लें | इन्हें अच्छी तरह कूट कर छान लें | प्रतिदिन सुबह-शाम इस मंजन को मसूड़ों पर मलने से मसूड़ों का ढीलापन,सूजन व दर्द ख़त्म हो जाता है | 
२- सौंठ को पीसकर चूर्ण बना लें | इस ३ ग्राम चूर्ण को पानी के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम खाने से मसूड़ों की सूजन में लाभ होता है |

३- सुपारी को जलाकर इसका बारीक चूर्ण बना लें | इसे मसूड़ों पर मंजन की तरह मलने से मसूड़ों का ढीलापन ख़त्म हो जाता है |

४- एक ग्राम पिसा हुआ सेंधा नमक और एक ग्राम मीठे सोडे को १०० मिलीलीटर पानी में उबालें | इस हलके गर्म पानी से प्रतिदिन सुबह- शाम कुल्ला करने से मसूड़ों की सूजन ठीक हो जाती है |

५- प्याज में नमक मिलाकर खाने से एवं प्याज को पीसकर मसूड़ों पर दिन में २-३ बार मलने से मसूड़ों की सूजन ख़त्म हो जाती है और मसूड़े स्वस्थ बन जाते हैं |

६- हरड़,बहेड़ा और आंवला को १०-१० ग्राम की मात्रा में लेकर कूटकर रख लें | इसको ८०० मिलीलीटर पानी में पकाएं ,जब यह २०० मिलीलीटर बच जाए तब इसमें से ३०-६० मिलीलीटर पानी से दिन में दो से तीन बार गरारे करने से मसूड़ों की सूजन ठीक हो जाती है |


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कढ़ी पत्ता या मीठी नीम
अक्सर हम भोजन में से कढ़ी पत्ता निकाल कर अलग कर देते है | इससे हमें उसकी खुशबु तो मिलती है पर उसके गुणों का लाभ नहीं मिल पाता |कढ़ी पत्ते को धो कर छाया में सुखा कर उसका पावडर इस्तेमाल करने से बच्चे और बड़े भी भी इसे आसानी से खा लेते है ,इस पावडर को हम छाछ और निम्बू पानी में भी मिला सकते है | इसे हम मसालों में , भेल में भी डाल सकते है | इसकी छाल भी औषधि है | हमें अपने घरों में इसका पौधा लगाना चाहिए | 
- कढ़ी पत्ता पाचन के लिए अच्छा होता है ,यह डायरिया , डिसेंट्री,पाइल्स , मन्दाग्नि में लाभकारी होता है | यह मृदु रेचक होता है | 
- यह बालों के लिए बहुत उत्तम टॉनिक है , कढ़ी पत्ता बालों को सफ़ेद होने से और झड़ने से रोकता है | 
- इसके पत्तों का पेस्ट बालों में लगाने से जुओं से छुटकारा मिलता है | 
- कढ़ी पत्ता पेन्क्रीआज़ के बीटा सेल्स को एक्टिवेट कर मधुमेह को नियंत्रित करता है | 
- हरे पत्ते होने से आयरन , जिंक ,कॉपर , केल्शियम ,विटामिन ए और बी , अमीनो एसिड ,फोलिक एसिड आदि तो इसमें होता ही है | 
- इसमें एंटी ऑक्सीडेंट होते है जो बुढापे को दूर रखते है और कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने नहीं देते .
- जले और कटे स्थान पर इसके पत्ते पीस कर लगाने से लाभ होता है .
- जहरीले कीड़े काटने पर इसके फलों के रस को निम्बू के रस के साथ मिलाकर लगाने से लाभ होता है | 
- यह किडनी के लिए लाभकारी होता है | 
- यह आँखों की बीमारियों में लाभकारी होता है इसमें मौजूद एंटी ओक्सीडेंट केटरेक्ट को शुरू होने से रोकते है ,यह नेत्र ज्योति को बढाता है .
- यह कोलेस्ट्रोल कम करता है | 
- यह इन्फेक्शन से लड़ने में मदद करता है | 
- वजन कम करने के लिए रोजाना कुछ मीठी नीम की पत्तियाँ चबाये| 
प्रतिदिन भोजन में कढ़ी पत्ते को दाल , सब्ज़ी में डालकर या चटनी बनाकर प्रयोग किया जा सकता है , जिस प्रकार दक्षिण भारत में किया जाता है |


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घमौरियां या प्रिकली हीट

गर्मी के मौसम में पसीना आना स्वाभाविक है | इस पसीने को यदि साफ़ न किया जाए तो यह शरीर में ही सूख जाता है और इसकी वजह से शरीर में छोटे -छोटे दाने निकल आते हैं जिन्हें हम घमौरियां या प्रिकली हीट कहते हैं | घमौरी एक प्रकार का चर्म रोग है जो गर्मियों तथा बरसात में त्वचा पर हो जाता है | इसमें त्वचा पर छोटे -छोटे दाने निकल आते हैं ,जिनमें हर समय खुजली होती रहती है | घमौरियों से निजात पाने के लिए हम आपको कुछ सरल उपाय बताते हैं -

१- मेंहदी के पत्तों को पीसकर नहाने के पानी में मिला लें | इस पानी से नहाने से घमौरियां ठीक हो जाती हैं | 

२- देसी घी की पूरे शरीर पर मालिश करने से घमौरियां मिटती हैं | 

३- शरीर पर मुल्तानी मिटटी का लेप करने से घमौरियां मिटती हैं और इनसे होने वाली जलन और खुजली में भी राहत मिलती है | 

४- नारियल के तेल में कपूर मिला लें | इस तेल से रोज़ पूरे शरीर की मालिश करने से घमौरियां दूर हो जाती हैं | 

५- नीम की पत्तियां पानी में उबाल लें | इस पानी से स्नान करने से घमौरियां मिटती हैं | 

६- तुलसी की लकड़ी पीस लें | इसे पानी में मिलकर शरीर पर मलने से घमौरियां समाप्त हो जाती हैं |


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मलेरिया
मलेरिया एक वाहक-जनित संक्रामक रोग है जो प्रोटोज़ोआ परजीवी द्वारा फैलता है। मलेरिया सबसे प्रचलित संक्रामक रोगों में से एक है तथा भंयकर जन स्वास्थ्य समस्या है।मलेरिया के परजीवी का वाहक मादा एनोफ़िलेज़ (Anopheles) मच्छर है। इसके काटने पर मलेरिया के परजीवी लाल रक्त कोशिकाओं में प्रवेश कर के बहुगुणित होते हैं जिससे रक्तहीनता (एनीमिया) के लक्षण उभरते हैं (चक्कर आना, साँस फूलना, द्रुतनाड़ी इत्यादि) । इसके अलावा अविशिष्ट लक्षण जैसे कि बुखार, सर्दी, उबकाई, और जुखाम जैसी अनुभूति भी देखे जाते हैं। गंभीर मामलों में मरीज मूर्च्छा में जा सकता है और मृत्यु भी हो सकती है
मलेरिया का बुखार ठण्ड लगकर आता है | इस बुखार में रोगी के शरीर का तापमान १०१ -१०५ डिग्री तक बना रहता है | इसमें रोगी के जिगर और तिल्ली बढ़ जाते हैं | 
आईये जानते हैं मलेरिया बुखार के कुछ उपचार -
१- तुलसी के सेवन से प्रकार के बुखारों में लाभ होता है | १० ग्राम तुलसी के पत्ते और ७ काली मिर्च को पानी में पीस कर सुबह और शाम लेने से मलेरिया बुखार ठीक होता है | 

२- अमरुद का सेवन मलेरिया में लाभप्रद है | मलेरिया बुखार में प्रतिदिन एक अमरुद खाना चाहिए |

३- प्याज़ के आधे टुकड़े का रस निकाल लें और उसमे एक चुटकी काली मिर्च मिला लें | सुबह -शाम इसके सेवन से मलेरिया बुखार में आराम मिलता है | 

४- ५०-६० ग्राम नीम के हरे पत्ते और चार काली मिर्च एक साथ पीस लें | अब इसे १२५ मिलीलीटर पानी में उबाल लें | छानकर पीने से मलेरिया में लाभ होता है| 

५- गिलोय के काढ़े या रस में शहद मिलाकर ४०-८० मिलीलीटर की मात्रा में रोज़ सेवन करने से मलेरिया में लाभ होता है । 

६- धनिया और सौंठ के चूर्ण को बराबर मात्रा में मिलाकर रोज़ दिन में तीन बार पानी से लें | ऐसा करने से मलेरिया के बुखार में राहत मिलती है | 

७- आधे नींबू पर काली मिर्च का चूर्ण और कालानमक लगाकर धीरे -धीरे चूसने से मलेरिया बुखार दूर होता है |


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

प्याज़ कोलेस्ट्रॉल का ऑक्सीकरण करती है फलस्वरूप खून में कोलेस्ट्रॉल का स्तर घट जाता है , प्रातःकाल खाली पेट कच्चे प्याज़ का एक चम्मच रस लें , लाभ होगा | 

प्रतिदिन कच्चा प्याज़ भोजन के साथ लेने से कब्ज़ रोग ठीक हो जाता है | 

सफ़ेद प्याज़ के रस मे बारबर मात्रा में शहद मिलाकर चाटने से दमा रोग में लाभ होता है | 

प्याज़ और सिरका मिलाकर चटनी बनाकार ख़ाने से लू लगने से राहत मिलती है | 

प्याज़ में नमक डालकार खाने से जी मिचलाना ठीक हो जाता है | 

नोट -- कच्ची प्याज़ खाने के बाद मुख से आने वाली गंध को थोड़ा सा गुड़ खाकर दूर किया जा सकता है |


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

टिंडा (डिण्डिश )-
समस्त भारत में पंजाब,उत्तर प्रदेश ,राजस्थान एवं महाराष्ट्र में सब्जी के रूप में इसकी खेती की जाती है | आयुर्वेदीय प्राचीन ग्रंथों में इसका उल्लेख प्राप्त नहीं होता | इसके फलों में प्रोटीन,वासा,खनिज द्रव्य तथा कार्बोहायड्रेट पाया जाता है | आईये जानते हैं टिंडे के कुछ औषधीय गुणों के बारे में -

१- टिंडे के डण्ठल की सब्जी बनाकर खाने से कब्ज में लाभ होता है |

२- टिंडे की सब्जी बनाकर सेवन करने से मूत्रदाह तथा मूत्राशय शोथ का शमन होता है |

३- टिंडे का रस निकालकर मिश्री मिलाकर पीने से प्रदर तथा प्रमेह में लाभ होता है |

४- टिंडे को पीसकर लगाने से आमवात में लाभ होता है |

५- टिंडे के बीज तथा पत्तों को पीसकर सूजन पर लगाने से सूजन मिटती है |

६- पके हुए टिंडे के बीजों को निकालकर मेवे के रूप में सेवन करने से यह पौष्टिक तथा बलकारक होता है |


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गुलाब 
गुलाब की सुन्दरता के कारण से गुलाब को फूलों का राजा कहा जाता है | इसका मूल उत्पत्तिस्थान सीरिया है | लेकिन यह भारत में भी प्रायः सर्वत्र बग़ीचों तथा घरों में कलम बनाकर लगाया जाता है | इसके अतिरिक्त समस्त भारत में मुख्यतः उत्तर-प्रदेश , मध्य-प्रदेश तथा गुजरात में इसकी खेती की जाती है | देशी गुलाब लाल रंग का होता है , गुलाब द्वारा बने जाने वाले दो पदार्थ अधिक प्रसिद्ध हैं एक तो गुलकंद और दूसरा गुलाबजल | पुष्प के रंगों के आधार पर इसके कई प्रजातियां होती हैं | 
गुलाबी संग का गुलाब का फूल अधिक मात्रा में होता है तथा इसके अलावा गुलाब के फूल सफ़ेद और पीले रंग के भी होते हैं ,इसके फूलों का इत्र भी बनता है | गुलाब की प्रकृति ठंडी होती है | 
आयुर्वेद में गुलाब के गुणों की चर्चा अधिक की जाती है क्योँकि इसके उपयोग से कई प्रकार के रोग ठीक हो सकते हैं | 
१- यह वात -पित्त को नष्ट करता है,यह शरीर की जलन , अधिक प्यास तथा कब्ज़ को भी नष्ट करता है | 
२- गुलाब में विटामिन सी बहुत अधिक मात्रा में पाया जाता है | गर्मी के मौसम में इसके फूलों को पीसकर शरबत में मिलाकर पीना बहुत लाभकारी होता है तथा इसको पीने से ह्रदय व मस्तिष्क को शक्ति मिलती है | 

३- अतिसार (दस्त ) होने पर १० ग्राम गुलाब के फूल की पत्ती को ०५ ग्राम मिश्री मिलाकर दिन में ३ बार खाने से लाभ होता है | 

४- दो चम्मच गुलकन्द रात को सोते समय गुनगुने दूध या पानी के साथ सेवन करने से कब्ज़ पूरी तरह से नष्ट हो जाती है | गुलकन्द से पेट की गर्मी भी शांत होती है | 

५- गुलाब के फूलों की पंखुड़ियाँ चबाकर खाने से मसूड़े और दांत मज़बूत होते हैं | इसके सेवन से मुंह की बदबू दूर होकर पायरिया की बीमारी ठीक हो जाती है | 

६- गुलाब के फूलों का निकाला हुआ ताज़ा रस कानों में डालने से कान का दर्द ठीक होता है | 

७- हैज़ा होने पर आधा कप गुलाबजल में एक निम्बू निचोड़कर उसमें थोड़ी-सी मिश्री मिला लें और ३-३ घंटे के अंतर पर इसे रोगी को पिलायें , इससे हैजे में लाभ होता है | 

८- निम्बू का रस व गुलाब का रस बराबर मात्रा में लेकर मिला लें | इस रस को प्रतिदिन दाद पर लगाने से लाभ होता है |


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हरा धनिया

हरा धनिया मसाले के रूप में व भोजन को सजाने या सुंदरता बढ़ाने के साथ ही चटनी के रूप में भी खाया जाता है। हमारे बड़े-बुजूर्ग इसके औषधिय गुणों को जानते थे इसीलिए प्राचीन समय से ही धनिए का उपयोग भारतीय भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए उपयोग में लाया जाता रहा है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं हरे धनिए के कुछ ऐसे ही औषधीय गुणों के बारे में...
- इसमें एंटीसेप्टिक और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाया जाता है इसीलिए अगर चेहरे पर मुंहासे हो तो धनिए की हरी पत्तियों को पीसकर उसमें चुटकीभर हल्दी पाउडर मिलाकर लगाने से लाभ होता है। यह त्वचा की विभिन्न समस्याओं जैसे एक्जीमा, सूखापन और एलर्जी से राहत देता है।
- हरा धनिया वातनाशक होने के साथ-साथ पाचनशक्ति भी बढ़ाता है। धनिया की हरी पत्तियां पित्तनाशक होती हैं। पित्त या कफ की शिकायत होने पर दो चम्मच धनिया की हरी-पत्तियों का रस सेवन करना चाहिए।
- धनिया की पत्तियों में एंटी टय़ुमेटिक और एंटी अर्थराइटिस के गुण होते हैं। यह सूजन कम करने में बहुत मददगार होता है, इसलिए जोड़ों के दर्द में राहत देता है।
- आयरन से भरपूर होने के कारण यह एनिमिया को दूर करने में मददगार होता है। एंटी ऑक्सीडेंट, विटामिन ए, सी और कई मिनिरल्स से भरपूर धनिया कैंसर से बचाव करता है।
- हरे धनिया की चटनी बनाकर भी खाई जाती है , इसको खाने से नींद भी अच्छी आती है। डायबिटीज से पीडि़त व्यक्ति के लिए तो यह वरदान है। यह इंसुलिन बढ़ाता है और रक्त का ग्लूकोज स्तर कम करने में मदद करता है।


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

नकसीर (Epistaxis)-
नाक में से खून बहने के रोग को नकसीर कहते हैं| नकसीर के रोग में अचानक पहले सिर में दर्द होता है और चक्कर आने लगते हैं,इसके बाद नाक से खून आने लगता है | यह रोग सर्दी की अपेक्षा गर्मी में अधिक होता है | नकसीर रोग ज़्यादा समय तक धूप में रहने से हो जाता है | कुछ लोग गर्म पदार्थों का सेवन अधिक करते हैं जिसकी वजह से भी नाक से खून निकल सकता है | 
नकसीर का उपचार विभिन्न औषधियों द्वारा किया जा सकता है -

१- तुलसी के पत्तों का रस ३-४ बूँद दिन में २-३ बार नाक में डालने से नकसीर में लाभ मिलता है | 

२- आधे कप अनार के रस में दो चम्मच मिश्री मिलाकर प्रतिदिन दोपहर के समय पीने से गर्मी के मौसम में नकसीर ठीक हो जाती है | | 

३- प्रतिदिन केले के साथ मीठा दूध पीने से नकसीर में लाभ होता है | यह प्रयोग लगातार दस दिन तक अवश्य करना चाहिए | 

४- बेल के पत्तों का रस पानी में मिलाकर पीने से नकसीर में लाभ मिलता है | 

५- लगभग १५-२० ग्राम गुलकंद को प्रतिदिन सुबह-शाम दूध के साथ खाने से नकसीर का पुराने से पुराना रोग भी ठीक हो जाता है | 

६- अगर ज़्यादा तेज़ धूप में घूमने की वजह से नाक से खून बह रहा हो तो सिर पर लगातार ठंडा पानी डालने से नाक का खून बहना बंद हो जाता है | 

७- गर्मियों के मौसम में सेब के मुरब्बे में इलायची (कुटी हुई) डालकर खाने में नकसीर में बहुत लाभ होता है | 

सावधानियां - नकसीर रोग में रोगी को भोजन में गर्म तासीर वाले पदार्थ तथा मिर्च मसालों का सेवन नहीं करना चाहिए तथा रोगी को धूप में घूमने और आग के पास बैठने से भी बचना चाहिए |


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मसूर -
मसूर का प्रयोग दाल के रूप में प्रायः समस्त भारतवर्ष में किया जाता है | इससे सभी अच्छी तरह परिचित हैं | समस्त भारत में मुख्यतः शीत जलवायु वाले क्षेत्रों में, तक उष्णकटिबंधीय एवं शीतोष्णकटिबन्धीय १८०० मीटर ऊंचाई तक इसकी खेती की जाती है |
यह १५-७५ सेमी ऊँचा,सीधा,मृदु-रोमिल,शाकीय पौधा होता है | इसके पुष्प छोटे,श्वेत,बैंगनी अथवा गुलाबी वर्ण के होते हैं | इसकी फली चिकनी,कृष्ण वर्ण की,६-९ मिलीमीटर लम्बी ,आगरा भाग पर नुकीली तथा हरे रंग की होती है | प्रत्येक फली में २,गोल,चिकने,४ मिमी व्यास के,चपटे तथा हलके गुलाबी से रक्ताभ वर्ण के बीज होते हैं | इन बीजों की दाल बनाकर खायी जाती है | इसका पुष्पकाल दिसंबर से जनवरी तथा फलकाल मार्च से अप्रैल तक होता है | 
इसके बीज में कैल्शियम,फॉस्फोरस,आयरन,सोडियम,पोटैशियम,मैग्नीशियम,सल्फर,क्लोरीन,आयोडीन,एल्युमीनियम,कॉपर,जिंक,प्रोटीन,कार्बोहायड्रेट एवं विटामिन D आदि तत्व पाये जाते हैं | मसूर के औषधीय गुण -

१- मसूर की दाल को जलाकर,उसकी भस्म बना लें,इस भस्म को दांतों पर रगड़ने से दाँतो के सभी रोग दूर होते हैं |

२- मसूर के आटे में घी तथा दूध मिलाकर,सात दिन तक चेहरे पर लेप करने से झाइयां खत्म होती हैं |

३- मसूर के पत्तों का काढ़ा बनाकर गरारा करने से गले की सूजन तथा दर्द में लाभ होता है |

४- मसूर की दाल का सूप बनाकर पीने से आँतों से सम्बंधित रोगों में लाभ होता है |

५- मसूर की भस्म बनाकर,भस्म में भैंस का दूध मिलाकर प्रातः सांय घाव पर लगाने से घाव जल्दी भर जाता है |

६- मसूर दाल के सेवन से रक्त की वृद्धि होती है तथा दौर्बल्य का शमन होता है |

७- मसूर की दाल खाने से पाचनक्रिया ठीक होकर पेट के सारे रोग दूर हो जाते हैं |


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

शहतूत -
यह मूलतः चीन में पाया जाता है | यह साधारणतया जापान ,नेपाल,पाकिस्तान,बलूचिस्तान ,अफगानिस्तान ,श्रीलंका,वियतनाम तथा सिंधु के उत्तरी भागों में पाया जाता है | भारत में यह पंजाब,कश्मीर,उत्तराखंड,उत्तर प्रदेश एवं उत्तरी पश्चिमी हिमालय में पाया जाता है | इसकी दो प्रजातियां पायी जाती हैं | १- तूत (शहतूत) २-तूतड़ी | 
इसके फल लगभग २.५ सेंटीमीटर लम्बे,अंडाकार अथवा लगभग गोलाकार ,श्वेत अथवा पक्वावस्था में लगभग हरिताभ-कृष्ण अथवा गहरे बैंगनी वर्ण के होते हैं | इसका पुष्पकाल एवं फलकाल जनवरी से जून तक होता है | इसके फल में प्रोटीन,वसा,कार्बोहायड्रेट,खनिज,कैल्शियम,फॉस्फोरस,कैरोटीन ,विटामिन A ,B एवं C,पेक्टिन,सिट्रिक अम्ल एवं मैलिक अम्ल पाया जाता है |आज हम आपको शहतूत के औषधीय गुणों से अवगत कराएंगे -

१- शहतूत के पत्तों का काढ़ा बनाकर गरारे करने से गले के दर्द में आराम होता है । 

२- यदि मुँह में छाले हों तो शहतूत के पत्ते चबाने से लाभ होता है | 

३- शहतूत के फलों का सेवन करने से गले की सूजन ठीक होती है | 

४- पांच - दस मिली शहतूत फल स्वरस का सेवन करने से जलन,अजीर्ण,कब्ज,कृमि तथा अतिसार में अत्यंत लाभ होता है | 

५- एक ग्राम शहतूत छाल के चूर्ण में शहद मिलाकर चटाने से पेट के कीड़े निकल जाते हैं | 

६- शहतूत के बीजों को पीस कर लगाने से पैरों की बिवाईयों में लाभ होता है | 

७- शहतूत के पत्तों को पीसकर लेप करने से त्वचा की बीमारियों में लाभ होता है| 
८- सूखे हुए शहतूत के फलों को पीसकर आटे में मिलाकर उसकी रोटी बनाकर खाने से शरीर पुष्ट होता है |


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

मानसिक तनाव [Mental Tension ]
अधिकांश लोगों में धर्म के अतिरिक्त जीवन के सम्बन्ध में भी गलत धारणाएँ विद्यमान हैं | अतिमहत्वाकांक्षा ,बौद्धिक प्रतिस्पर्धा , अतिश्रम तथा आंतरिक प्रवृतियाँ ,ये सभी मानसिक शांति के लिए हानिकारक हैं | यही सब कारण जन्म देते हैं मानसिक तनाव को | मानसिक तनाव दूर करने के लिए मनुष्य को अपने अस्तित्व के सम्बन्ध में संतुलित दृष्टिकोण पैदा करना होगा | अतीत के प्रति पश्चाताप या भविष्य को लेकर चिंतित होने के स्थान पर मनुष्य को अपना ध्यान वर्तमान पर केंद्रित करना होगा | जीवन में किसी चीज़ की कमी के कारण मनुष्य में मानसिक तनाव उत्पन्न हो सकता है | 
मनुष्य को चिंता कम ,चिंतन अधिक करना चाहिए | प्रतिदिन प्रातःकाल योग व प्राणायाम के अभ्यास द्वारा मानसिक तनाव से पूर्ण रूप से छुटकारा पाया जा सकता है | आज हम आपको मानसिक तनाव दूर करने के कुछ उपाय बताएँगे --

१-दालचीनी को पानी के साथ पीसकर माथे पर लेप करने से सिरदर्द और तनाव दूर होता है | 

२-एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल डाल कर सोते समय पीने से मानसिक तनाव दूर होता है | 

३-मानसिक तनाव से मुक्ति हेतु भ्रामरी व उद्गीत प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए | 

४-प्रतिदिन चुकंदर का रस पीने और सलाद खाने से मानसिक कमजोरी दूर होती है और स्मरण शक्ति बढ़ती है | 

५-लगभग 250 ml गाजर का रस प्रतिदिन पीने से मानसिक तनाव दूर होता है | 

६- प्रतिदिन आंवले का मुरब्बा सेवन करने से मानसिक तनाव या उदासी दूर हो जाती है | 
 


७-  मेधावटी का सेवन भी लाभप्रद है , इसे वैद्य के परामर्श अनुसार लें |


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)
यह आम धारणा है कि बालों के झड़ना शुरु होने के बाद बाल दोबारा नहीं उगते हैं। जबकि ऐसा नहीं है। आपको यदि कोई गंभीर बीमारी है या फिर किमोथेरेपी या दवा की साइड इफेक्ट की वजह से बाल झड़ रहें हैं तो बालों का झड़ना नहीं रुक सकता और हेयर रिग्रोथ (Hair Regrowth) की संभावना कम होती है।
 
लेकिन यदि इनमें से कोई भी कारण नहीं है, आप अंदर से सेहतमंद हैं और बालों की उचित देखभाल कर रहे हैं तो हेयर रिग्रोथ निश्चित रुप से होगी। हेयर रिग्रोथ तभी संभव है जब बालों की जड़ (Scalp) और उनकी कोशिकाओं (Hair Follicle) को पोषण मिल रही हो।
 
बालों की जड़ों को पोषण में सबसे असरदार है – कुदरती उपाय। कुदरती जड़ी-बूटियों से बने तेल, पत्ते और औषधियों में ऐसे नायाब गुण होते हैं जो हेयर रिग्रोथ में काफी मदद करते हैं।
 
हालांकि मेडिकल साइंस अब इतना विकसित कर गया है कि गंजे सिर में भी स्टेम शेल थेरेपी से बाल उगाए जा रहे हैं। बालों का प्रत्यारोपण (Hair Transplant) भी किया जा रहा है, लेकिन यह उपाय काफी महंगे हैं और यह सब जगह आसानी से उपलब्ध भी नहीं है।
 
यही कारण है कि हेयर रिग्रोथ के लिए कुदरती और आयुर्वेदिक उपाय (Herbal and Ayurvedic Tips for Hair Regrowth) सबसे ज्यादा प्रचलन में है।
 
अरंडी का तेल और बायोटिन थेरेपी (Castor Oil and Biotin Therapy)
 
बालों के झड़ने की बड़ी वजह तनाव, अवसाद (Dejection) और विटामिन बी-7 (बायोटिन) की कमी होती है। इस समस्या को खत्म करने के लिए बालों की जड़ (Scalp) में अरंडी का तेल लगाएं और बायोटिन की गोलियां खाना जरुरी है। यह सबसे आसान थेरेपी है।
 
पहली बार इसे आजमाने वाले अरंडी के तेल में नारियल तेल, जैतून का तेल या फिर कोई ऐसा तेल मिला लें जो आसानी से अरंडी के तेल में मिल जाए। अरंडी का तेल थोड़ी मोटा और गाढ़ा होता है और इसे पतला बनाने के लिए अन्य तेलों को मिलाना जरुरी होता है। जब तेल तैयार हो जाए तो इससे बालों की जड़ों की मालिश करें।
 
अरंडी के तेल की मालिश के साथ-साथ विटामिन बी7 या बायोटिन (Vitamin B7 or Biotin) की गोलियां भी नियमित रुप से खाते रहेंगे तो 3 से 6 महीने के अंदर बेहतर नतीजे आएंगे। बालों का बढ़ना शुरु हो जाएगा। ध्यान रहे विटामिन बी7 की गोलियां 5 एमजी से ज्यादा एक दिन में नहीं खाएं। ओवरडोज से साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं।
 
विटामिन ई थेरेपी (Vitamin E Therapy)
 
विटामिन बी7 के अलावां विटामिन ई भी बालों की वृद्धि में काफी पोषण देती है। पुरुष और स्त्री दोनों के बालों के पोषण के लिए विटामिन ई थेरेपी जरुरी है। यह बालों के झड़ने की बीमारी को भी रोकता है। विटामिन ई की गोलियां खाने या विटामिन ई युक्त तेल बालों की जड़ में लगाने से बालों की जड़ में रक्त संचार की गति तेज होती है और बाल फिर से ग्रोथ होने लगते हैं।
 
गंजेपन को दूर करने और हेयर रिग्रोथ के लिए कुछ जरुरी दवाएं (Medicines for Hair Regrowth and Baldness)
 
पुरुषों के गंजेपन को दूर करने से लिए एलोपैथ में अब दवाएं भी बनने लगी हैं। इन दवाओं को फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन से मान्यता भी मिल चुकी है। गंजेपन के इलाज और हेयर रिग्रोथ के लिए तीन दवाएं मुख्य रुप से प्रचलन में हैं।
 
Dutasteride –  इसे पुरुषों के गंजेपन के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है। यह बालों की जड़ों की वृद्धि में काफी मदद करता है।
 
Finasteride –  यह भी पुरुषों के गंजेपन के इलाज में खाया जाता है।
 
Minoxidil – यह क्रीम के रुप में आता है और इसे सिर पर लगाई जाती है।
 
नोट: किसी भी दवा को लेने से पहले योग चिकित्सक से परामर्श आवश्यक है।
 
हेयर रिग्रोथ के कुछ घरेलू और कुदरती उपाय (Herbal and Home Remedies for Hair Regrowth)
 
एलोवेरा मास्क और नारियल तेल (Aloe Vera Mask and Coconut Oil)
 
एलोवेरा के जूस और नारियल तेल का मिश्रण हेयर रिग्रोथ में काफी असरदार होता है। दोनों को कुछ इस तरह मिलाएं कि यह पेस्ट की तरह बन जाए। फिर इस पेस्ट को हेयर मास्क की तरह लगाएं। मास्क लगाने के बाद बालों की जड़ की मसाज भी करें। काफी फायदा दिखेगा।
 
प्याज और लहसुन (Onion and Garlic)
 
प्याज और लहसुन में सल्फर की मात्रा पाई जाती है जो हेयर रिग्रोथ में काफी मदद करती है। इसके लिए कुछ ख़ास नहीं करना है, बस प्याज को काटकर जूस निकाल लेना है और इस जूस से बालों के जड़ की मालिश 15 मिनट तक करनी है।
 
दूसरी तरफ आपको कुछ लहसुन के दाने के जूस निकाल कर उसे नारियल तेल में मिला देना है। फिर उसे कुछ देर तक उबालना है। जब यह ठंढा हो जाए तो इससे बालों के जड़ की मालिश करनी है।
 
भृंगराज (Bhringaraj)
 
भृंगराज के तेल से बालों की मालिश करें। इससे बहुत जल्दी बाल आने लगेंगे।
 
जटामांसी (Jatamansi or Spikenard)
 
इस जड़ी-बूटी का इस्तेमाल आयुर्वेद में हेयर ग्रोथ के दवा के रुप में किया जाता है। इसे आप कैप्सूल की तरह खा भी सकते हैं और इसे सीधे बालों की जड़ में लगा भी सकते हैं।
 
आयुर्वेदिक हेयर वाश (Ayurvedic Hair Wash)
 
आधा किलो शिकाकाई, मेथी एक पाव, करी पत्ता, तुलसी पत्ता और रीठा 100 ग्राम लें। इस सभी को मिला कर बालों को धोने लायक शैंपू बनाएं। इससे बालों की कई परेशानी दूर होने के साथ बालों में वृद्धि भी होगी|

  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)
खजूर में पाये जाने वाले पोषक तत्वों में फाईबर, विटामिन ए, बी-कॉम्प्लेक्स, विटामिन के, ऑयरन, कॉपर, मैगनीशियम, मैगनीज़ आदि पाये जाते हैं । अब बात करते हैं खजूर से मिलने वाले स्वास्थय लाभों के बारे में।
 
1.कब्ज़ में स्थाई आराम : कब्ज़ का मुख्य कारण होता है आँत में खुश्की होना और खजूर आँतों की खुश्की को पूरी तरह से खत्म करता है । खजूर के द्वारा कब्ज़ को पूरी तरह खत्म करने के लिये रोज सुबह दो-तीन खजूर को एक कटोरी ताजे पानी में डुबोकर रख दीजिये और रात होने तक रखा रहने दीजिये । रात को सोते समय इन खजूरों को खूब चबा चबा कर खा लीजिये । यह प्रयोग 7-15 दिनों तक लगातार कीजिये ।
 
2.वजन बढ़ानें में लाभकारी : खजूर में सभी पोषक तत्व तो पाये ही जाते हैं इसके अतिरिक्त यह कैलोरी और ग्लुकोज़ का भी बहुत अच्छा स्रोत है जिस कारण से यह दुबले-पतले लोगों में वजन बढ़ाने का काम कर सकता है । वजन बढ़ाने का लाभ उठाने के लिये14 साल से अधिक उम्र के लोग रोज पूरे दिन में 10-12खजूर खूब चबा चबा कर खायें ।
 
3.ऊर्जा देता है : खजूर में शरीर को तुरंत ऊर्जा देने की प्राकृतिक शक्ति होती है क्योंकि इसमें शुगर अधिक मात्रा में पायी जाती है । यह शुगर ग्लुकोज़ और फ्रक्टोज़ दोनों ही रूप में उप्लब्ध होती है । इस कारण से जब भी शरीर को अधिक ऊर्जा की जरूरत हो तो 2-3 खजूर खाकर ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है।
 
4.नाड़ीतंत्र को मजबूत करे : शरीर का नाड़ीतंत्र सबसे ज्यादा उलझे हुये तंत्रों में माना जाता है । सम्पूर्ण शरीरेंद्रियों का मस्तिष्क के साथ सम्पर्क मुख्यतः नाड़ीतंत्र के द्वारा ही सम्भव हो पाता है । खजूर नाड़ीतंत्र का परम मित्र सिद्ध होता है । खजूर में उपलब्ध पोटाशियम नाड़ीतंत्र के लिये बहुत जरूरी होता है । साथ ही साथ यह रक्त्चाप को नियमित रखता है और हृदय को भी मजबूत करता है ।
 
5.खून की कमी दूर करे : खजूर में शरीर के लिये लाभकारी और शरीर द्वारा आसानी से स्वीकार किया जाने वाला ऑयरन तत्व पाया जाता है । अतः खून की कमी से परेशान लोगों के लिये खजूर वास्तव में किसी वरदान से कम नही है । रक्ताल्प्तता के रोगियों के लिये रोज दो बार 2-2खजूर खाना पर्याप्त होता है ।
 
इन सबके अलावा खजूर से तैयार होने वाले कुछ प्रमुख घरेलू नुस्खे निम्न लिखित हैं :
 
1.– प्रतिदिन खजूर खाने और साथ में दूध पीने से शरीर को भरपूर शक्ति मिलती है । खजूर के सेवन से वीर्य की वृद्धि होती है ।
 
2.– दो खजूर को दूध में उबालकर ख्हने से और साथ में वही दूध पीने से शरीर में शक्ति का संचार होता है ।
 
3.– हृदय रोगी यदि 4-5 खजूर रोज खायें तो यह उनकी रक्तवाहीनियों में रक्त का संचार सरल होता है जिससे रक्तसंचार के अवरोध होने से हृदय रोग की भावना नष्ट होती है।
 
4.– 2 खजूर को जल में उबाल कर, उसमें 2-3 ग्राम मेथी दाना का चूर्ण मिलाकर रोज खाने से महिलाओं का कमर का दर्द जल्दी ही ठीक हो जाता है ।
 
5.– खजूर को काली मिर्च के चूर्ण के साथ दूध में उबाल कर पीने से पुराना सूखा नजला ठीक होता है ।
 
6.– खजूर, मिश्री, मक्खन मिलाकर गरम दूध के साथ खाने से सूखी खाँसी ठीक होती है ।
 
7.– पाँच-सात खजूर रात भर पानी में भिगोकर सुबह उनकी गुठली निकालकर, गूदे को शहद के साथ खाने से लीवर और तिल्ली बढ़ने के रोग खत्म होते हैं ।
 
विशेष नोट :- खजूर बहुत ही मीठा होता है जिस कारण से यह शरीर में खून की शुगर के स्तर को एक दम से बढ़ाता है । अतः मधुमेह के रोगियों को खजूर का सेवन नही करना चाहिये। ऐसे रोगी यदि खजूर खाना ही चाहते हैं तो पहले अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें।

  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)
यूरिक एसिड ने शरीर को जकड़ रखा है तो चिंता ना करे, ये पोस्ट आपके लिए वरदान साबित होगी, जरूर पढ़े और शेयर करे
 
AdminSeptember 16, 2016 यूरिक एसिड ने शरीर को जकड़ रखा है तो चिंता ना करे, ये पोस्ट आपके लिए वरदान साबित होगी, जरूर पढ़े और शेयर करे2016-09-16T22:45:19+00:00HINDI No Comment
 
यूरिक एसिड ने शरीर को जकड़ रखा है तो चिंता ना करे, ये पोस्ट आपके लिए वरदान साबित होगी, जरूर पढ़े और शेयर करे
 
यूरिक एसिड हमारे जीवन में रोगों का घर :
यूरिक एसिड का बढ़ने की समस्या बडी तेजी से बढ़ रही है। आयु बढ़ने के साथ-साथ यूरिन एसिड गाउट आर्थराइटिस समस्या का होना तेजी से आंका गया है। जोकि लाईफ स्टाईल, खान-पान, दिनचर्या के बदलाव से भोजन पाचन प्रक्रिया के दौरान बनने वाले ग्लूकोज प्रोटीन से सीधे यूरिन एसिड में बदलने की प्रक्रिया को यूरिन एसिड कहते हैं। भोजन पाचन प्रक्रिया दौरान प्रोटीन से ऐमिनो एसिड और प्यूरीन न्यूक्लिओटाइडो से यूरिक एसिड बनता है। यूरिक एसिड का मतलब है, जो भोजन खाया जाता है, उसमें प्यूरीन पोष्टिकता संतुलन की कमी से रक्त में असंतुलन प्रक्रिया है। जिससे प्यूरीन टूटने से यूरिक एसिड बनता है। यूरिक ऐसिड एक तरह से हड्डियों जोड़ों अंगों के बीच जमने वाली एसिड़ क्रिस्टल है। जोकि चलने फिरने में चुभन जकड़न से दर्द होता है। जिसे यूरिक एसिड कहते हैं। शोध में यूरिक एसिड को शरीर में जमने वाले कार्बन हाइड्रोजन आक्सीजन नाइट्रोजन सी-5, एच-4, एन-4, ओ-3 का समायोजक माना जाता है। यूरिक एसिड समय पर नियत्रंण करना अति जरूरी है। यूरिक एसिड बढ़ने पर समय पर उपचार ना करने से जोड़ों गाठों का दर्द, गठिया रोग, किड़नी स्टोन, डायबिटीज, रक्त विकार होने की संभावनाएं ज्यादा बढ़ जाती है। रक्त में यूरिक एसिड की मात्रा को नियत्रंण करना अति जरूरी है।
 
यूरिक एसिड के लक्षण :
1.पैरो-जोड़ों में दर्द होना।
2.पैर एडियों में दर्द रहना।
3.गांठों में सूजन
4.जोड़ों में सुबह शाम तेज दर्द कम-ज्यादा होना।
 
5.एक स्थान पर देर तक बैठने पर उठने में पैरों एड़ियों में सहनीय दर्द। फिर दर्द
6.सामन्य हो जाना।
7.पैरों, जोड़ो, उगलियों, गांठों में सूजन होना।
8.शर्करा लेबल बढ़ना। इस तरह की कोई भी समस्या होने पर तुरन्त यूरिक एसिड जांच करवायें।
 
यूरिक एसिड नियत्रंण करने के आर्युवेदिक तरीके :
 
1. यूरिक एसिड बढ़ने पर हाईड्रालिक फाइबर युक्त आहार खायें। जिसमें पालक, ब्रोकली, ओट्स, दलिया, इसबगोल भूसी फायदेमंद हैं।2. आंवला रस और एलोवेरा रस मिश्रण कर सुबह शाम खाने से 10 मिनट पहले पीने से यूरिक एसिड कम करने में सक्षम है।3. टमाटर और अंगूर का जूस पीने से यूरिक एसिड तेजी से कम करने में सक्षम है।4. तीनो वक्त खाना खाने के 5 मिनट बाद 1 चम्मच अलसी के बीज का बारीक चबाकर खाने से भोजन पाचन क्रिया में यूरिक ऐसिड नहीं बनता।5. 1 चम्मच शहद और 1 चम्मच अश्वगन्धा पाउडर को 1 कप गर्म दूध के साथ घोल कर पीने से यूरिक एसिड नियत्रंण में आता है।6. यूरिक एसिड बढ़ने के दौरान जैतून तेल का इस्तेमाल खाने तड़के-खाना बनाने में करें। जैतून तेल में विटामिन-ई एवं मिनरलस मौजूद हैं। जोकि यूरिक एसिड नियत्रंण करने में सहायक हैं।7. यूरिक एसिड बढ़ने पर खाने से 15 पहले अखरोट खाने से पाचन क्रिया शर्करा को ऐमिनो एसिड नियत्रंण करती है। जोकि प्रोटीन को यूरिक एसिड़ में बदलने से रोकने में सहायक है।8. विटामिन सी युक्त चीजें खाने में सेवन करें। विटामिन सी यूरिक एसिड को मूत्र के रास्ते विसर्ज करने में सहायक है।9. रोज 2-3 चैरी खाने से यूरिक एसिड नियत्रंण में रखने में सक्षम है। चेरी गांठों में एसिड क्रिस्टल नहीं जमने देती।10. सलाद में आधा नींबू निचैड कर खायें। दिन में 1 बार 1 गिलास पानी में 1 नींबू निचैंड कर पीने से यूरिक एसिड मूत्र के माध्यम से निकलने में सक्षम है। चीनी, मीठा न मिलायें।11. तेजी से यूरिक एसिड घटाने के लिए रोज सुबह शाम 45-45 मिनट तेज पैदल चलकर पसीना बहायें। तेज पैदल चलने से एसिड क्रिस्टल जोड़ों गांठों पर जमने से रोकता है। साथ में रक्त संचार को तीब्र कर रक्त संचार सुचारू करने में सक्षम है। पैदल चलना से शरीर में होने वाले सैकड़ों से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है। तेज पैदल चलना एसिड एसिड को शीध्र नियत्रंण करने में सक्षम पाया गया है।12. बाहर का खाना पूर्ण रूप से बन्द कर दें। घर पर बना सात्विक ताजा भोजन खायें। खाने में ताजे फल, हरी सब्जियां, सलाद, फाइबर युक्त संतुलित पौष्टिक आहर लें।13. रोज योगा आसान व्यायाम करें। योग आसान व्यायाय यूरिक एसिड को घटाने में मद्दगार है। साथ में योगा-आसान-व्यायाम करने से मोटापा वजन नियत्रंण रहेगा।14. ज्यादा सूजन दर्द में आराम के लिए गर्म पानी में सूती कपड़ा भिगो कर सेकन करें।15. यूरिक एसिड समस्या शुरू होने पर तुरन्त जांच उपचार करवायें। यूरिक एसिड ज्यादा दिनों तक रहने से अन्य रोग आसानी से घर बना लेते हैं।
 
यूरिक ऐसिड बढ़ने पर खान-पान :
 
यूरिक एसिड बढ़ने पर मीट मछली सेवन तुरन्त बंद कर दें। नॉनवेज खाने से यूरिक एसिड तेजी से बढ़ता है। औषधि दवाईयां असर कम करती है।यूरिक एसिड बढ़ने पर अण्डा का सेवन पूर्ण रूप से बंद कर दें। अण्डा रिच प्रोटीन वसा से भरपूर है। जोकि यूरिक एसिड को बढ़ता है।बेकरी से बनी सही खाद्य सामग्री बंद कर दें। बेकरी फूड प्रीजरवेटिव गिला होता है। जैसेकि पेस्ट्री, केक, पैनकेक, बंन्न, क्रीम बिस्कुट इत्यादि।यूरिक एसिड बढ़ने पर तुरन्त जंकफूड, फास्ट फूड, ठंडा सोडा पेय, तली-भुनी चीजें बन्द कर दें। जंकफूड, फास्टफूड, सोडा ठंडा पेय पाचन क्रिया को और भी बिगाड़ती है। जिससे एसिड एसिड तेजी से बढता है।चावल, आलू, तीखे मिर्चीले, चटपटा, तले पकवानों का पूरी तरह से खाना बन्द कर दें। यह चीजें यूरिक एसिड बढ़ाने में सहायक हैं।बन्द डिब्बा में मौजूद हर तरह की सामग्री खाना पूरी तरह से बंद कर दें। बन्द डब्बे की खाने पीने की चीजों में भण्डारण के वक्त कैम्किल रसायन मिलाया जाता है। जैसे कि तरह तरह के प्लास्टिक पैक चिप्स, फूड इत्यादि। हजारों तरह के बन्द डिब्बों और पैकेट की खाद्य सामग्री यूरिक एसिड तेजी बढ़ाने में सहायक है।एल्कोहन का सेवन पूर्ण रूप से बन्द कर दें। बीयर, शराब यूरिक एसिड तेजी से बढ़ती है। शोध में पाया गया है कि जो लोग लगातार बीयर शराब नशीली चीजों का सेवन करते हैं, 70 प्रतिशत उनको सबसे ज्यादा यूरिक एसिड की समस्या होती है। यूरिक एसिड बढ़ने पर तुरन्त बीयर, शराब पीना बन्द कर दें। बीयर शराब स्वस्थ्य व्यक्ति को भी रोगी बना देती है। बीयर, शराब नशीली चीजें स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

सिर्फ 5 दिन में 21mm की पथरी को गला देगा ये 40 रूपये का घरेलु उपाय, जरूर पढ़े और शेयर करे
 
पित्त की थैली (Gallbladder)/किडनी की पथरी :
 
आयुर्वेद का एक ऐसा चमत्कार जिसे देखकर एलॉपथी डॉक्टर्स ने दांतों तले अंगुलियाँ चबा ली। जो डॉक्टर्स कहते थे के गाल ब्लैडर स्टोन अर्थात पित्त की थैली की पथरी निकल ही नहीं सकता, उनकी जुबान हलक से नीचे पेट में गिर गयी।सिर्फ एक नहीं अनेक मरीजों पर सफलता से आजमाया हुआ ये प्रयोग। इस प्रयोग को एक डॉक्टर तो 5000 से लेकर 10000 में करते हैं। जबकि इस प्रयोग की वास्तविक कीमत सिर्फ 30-40 रुपैये ही है। यह प्रयोग गाल ब्लैडर और किडनी दोनों प्रकार के स्टोन को निकालने में बेहद कारगर है।
 
इस प्रयोग को हमने जिन पर आजमाया वो कोई छोटी मोटी हस्ती नहीं हैं, ये हैं डॉक्टर बिंदु प्रकाश मिश्रा जी, जो के महर्षि दयानंद कॉलेज परेल मुंबई में मैथ के प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। और यूनिवर्सिटी सीनेट के सदस्य भी हैं. डॉक्टर साहब के 21 MM का स्टोन 8 साल से गाल ब्लैडर में था, और अत्यंत दर्द था। डॉक्टर ने इनको गाल ब्लैडर तुरंत निकलवाने की सलाह भी दे दी। मगर इन्होने आयुर्वेद की शरण में जाने की सोचा। और फिर क्या बस 5 दिनों में ये स्टोन कहाँ गायब हो गया, पता ही नहीं चला। 5 दिन बाद जब दोबारा चेक करवाया तो गाल ब्लैडर स्टोन की जगह बस थोड़ी बहुत रेत जैसा दिखा, जिसके बाद डॉक्टर ने उनको थोडा दवाएं लेने के लिए कहा!! तो क्या है वो प्रयोग आइये जाने –
 
गाल ब्लैडर स्टोन की चमत्कारी दवा :
 
तो क्या है ये चमत्कारी दवा। ये कुछ और नहीं ये है गुडहल के फूलों का पाउडर अर्थात इंग्लिश में कहें तो Hibiscus powder। ये पाउडर बहुत आसानी से पंसरी से मिल जाता है। अगर आप गूगल पर Hibiscus powder नाम से सर्च करेंगे तो आपको अनेक जगह ये पाउडर online मिल जायेगा। और जब आप online इसको मंगवाए तो इसको देखिएगा organic hibiscus powder क्योंकि आज कल बहुत सारी कंपनिया आर्गेनिक भी ला रहीं हैं तो वो बेस्ट रहेगा। कुल मिला कर बात ये है के इसकी उपलबध्ता बिलकुल आसान है। अब जानिये इस पाउडर को इस्तेमाल कैसे करना है।
 
गाल ब्लैडर स्टोन निकालने के लिए गुडहल के पाउडर के इस्तेमाल की विधि :
 
गुडहल का पाउडर एक चम्मच रात को सोते समय खाना खाने के कम से कम एक डेढ़ घंटा बाद गर्म पानी के साथ फांक लीजिये। ये थोडा कड़वा होता है। इसलिए मन भी कठोर कर के रखें। मगर ये इतना भी कड़वा नहीं होता के आप इसको खा ना सकें। इसको खाना बिलकुल आसान है। इसके बाद कुछ भी खाना पीना नहीं है. डॉ. मिश्रा जी के अनुसार, क्यूंकि उनके स्टोन का साइज़ बहुत बड़ा था उनको पहले दो दिन रात को ये पाउडर लेने के बाद सीने में अचानक बहुत तेज़ दर्द हुआ, उनको ऐसा लगा मानो जैसे हार्ट अटैक आ जायेगा। मगर वो दर्द था उनके स्टोन के टूटने का . जो दो दिन बाद नहीं हुआ। और 5 दिन के बाद कहीं गायब हो गया था और पीछे रह गयी थी उसकी यादें रेत बनकर, जिनका सफाई अभियान अभी चल रहा है। इसके साथ में उनको प्रोस्टेट enlargement की समस्या भी थी, वो भी सही हो गयी। इसके बाद यही प्रयोग उन्होंने एक दूधवाले और एक और आदमी पर भी किया जिनका स्टोन 8 mm और 10 mm था, उनको यही प्रयोग बिना किसी दर्द के बिलकुल सही हुआ। अर्थात अगर स्टोन का साइज़ बड़ा है तो वो दर्द कर सकता है।
 
यही प्रयोग एक बहुत ही प्रतिष्ठित डॉ कम से कम 5 से 10 हज़ार लेकर लोगों को करवाते हैं। और आपके लिए हम इसको फ्री में उपलब्ध करवाते है जन हित के लिए। आप भी इसको ज़रूर शेयर करें। जुड़े रहें आयुर्वेद हीलिंग के साथ।
 
इस प्रयोग में थोड़ी सावधानी :
 
पालक, टमाटर, चुकंदर, भिंडी का सेवन न करें। और अगर आपका स्टोन बड़ा है तो ये टूटने समय दर्द भी कर सकता है। पाठक गण अपने विवेक से इस प्रयोग को करें वो भी किसी चिकित्सक की उपस्थिति में।

  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)
यह आम धारणा है कि बालों के झड़ना शुरु होने के बाद बाल दोबारा नहीं उगते हैं। जबकि ऐसा नहीं है। आपको यदि कोई गंभीर बीमारी है या फिर किमोथेरेपी या दवा की साइड इफेक्ट की वजह से बाल झड़ रहें हैं तो बालों का झड़ना नहीं रुक सकता और हेयर रिग्रोथ (Hair Regrowth) की संभावना कम होती है।
 
लेकिन यदि इनमें से कोई भी कारण नहीं है, आप अंदर से सेहतमंद हैं और बालों की उचित देखभाल कर रहे हैं तो हेयर रिग्रोथ निश्चित रुप से होगी। हेयर रिग्रोथ तभी संभव है जब बालों की जड़ (Scalp) और उनकी कोशिकाओं (Hair Follicle) को पोषण मिल रही हो।
 
बालों की जड़ों को पोषण में सबसे असरदार है – कुदरती उपाय। कुदरती जड़ी-बूटियों से बने तेल, पत्ते और औषधियों में ऐसे नायाब गुण होते हैं जो हेयर रिग्रोथ में काफी मदद करते हैं।
 
हालांकि मेडिकल साइंस अब इतना विकसित कर गया है कि गंजे सिर में भी स्टेम शेल थेरेपी से बाल उगाए जा रहे हैं। बालों का प्रत्यारोपण (Hair Transplant) भी किया जा रहा है, लेकिन यह उपाय काफी महंगे हैं और यह सब जगह आसानी से उपलब्ध भी नहीं है।
 
यही कारण है कि हेयर रिग्रोथ के लिए कुदरती और आयुर्वेदिक उपाय (Herbal and Ayurvedic Tips for Hair Regrowth) सबसे ज्यादा प्रचलन में है।
 
अरंडी का तेल और बायोटिन थेरेपी (Castor Oil and Biotin Therapy)
 
बालों के झड़ने की बड़ी वजह तनाव, अवसाद (Dejection) और विटामिन बी-7 (बायोटिन) की कमी होती है। इस समस्या को खत्म करने के लिए बालों की जड़ (Scalp) में अरंडी का तेल लगाएं और बायोटिन की गोलियां खाना जरुरी है। यह सबसे आसान थेरेपी है।
 
पहली बार इसे आजमाने वाले अरंडी के तेल में नारियल तेल, जैतून का तेल या फिर कोई ऐसा तेल मिला लें जो आसानी से अरंडी के तेल में मिल जाए। अरंडी का तेल थोड़ी मोटा और गाढ़ा होता है और इसे पतला बनाने के लिए अन्य तेलों को मिलाना जरुरी होता है। जब तेल तैयार हो जाए तो इससे बालों की जड़ों की मालिश करें।
 
अरंडी के तेल की मालिश के साथ-साथ विटामिन बी7 या बायोटिन (Vitamin B7 or Biotin) की गोलियां भी नियमित रुप से खाते रहेंगे तो 3 से 6 महीने के अंदर बेहतर नतीजे आएंगे। बालों का बढ़ना शुरु हो जाएगा। ध्यान रहे विटामिन बी7 की गोलियां 5 एमजी से ज्यादा एक दिन में नहीं खाएं। ओवरडोज से साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं।
 
विटामिन ई थेरेपी (Vitamin E Therapy)
 
विटामिन बी7 के अलावां विटामिन ई भी बालों की वृद्धि में काफी पोषण देती है। पुरुष और स्त्री दोनों के बालों के पोषण के लिए विटामिन ई थेरेपी जरुरी है। यह बालों के झड़ने की बीमारी को भी रोकता है। विटामिन ई की गोलियां खाने या विटामिन ई युक्त तेल बालों की जड़ में लगाने से बालों की जड़ में रक्त संचार की गति तेज होती है और बाल फिर से ग्रोथ होने लगते हैं।
 
गंजेपन को दूर करने और हेयर रिग्रोथ के लिए कुछ जरुरी दवाएं (Medicines for Hair Regrowth and Baldness)
 
पुरुषों के गंजेपन को दूर करने से लिए एलोपैथ में अब दवाएं भी बनने लगी हैं। इन दवाओं को फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन से मान्यता भी मिल चुकी है। गंजेपन के इलाज और हेयर रिग्रोथ के लिए तीन दवाएं मुख्य रुप से प्रचलन में हैं।
 
Dutasteride –  इसे पुरुषों के गंजेपन के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है। यह बालों की जड़ों की वृद्धि में काफी मदद करता है।
 
Finasteride –  यह भी पुरुषों के गंजेपन के इलाज में खाया जाता है।
 
Minoxidil – यह क्रीम के रुप में आता है और इसे सिर पर लगाई जाती है।
 
नोट: किसी भी दवा को लेने से पहले योग चिकित्सक से परामर्श आवश्यक है।
 
हेयर रिग्रोथ के कुछ घरेलू और कुदरती उपाय (Herbal and Home Remedies for Hair Regrowth)
 
एलोवेरा मास्क और नारियल तेल (Aloe Vera Mask and Coconut Oil)
 
एलोवेरा के जूस और नारियल तेल का मिश्रण हेयर रिग्रोथ में काफी असरदार होता है। दोनों को कुछ इस तरह मिलाएं कि यह पेस्ट की तरह बन जाए। फिर इस पेस्ट को हेयर मास्क की तरह लगाएं। मास्क लगाने के बाद बालों की जड़ की मसाज भी करें। काफी फायदा दिखेगा।
 
प्याज और लहसुन (Onion and Garlic)
 
प्याज और लहसुन में सल्फर की मात्रा पाई जाती है जो हेयर रिग्रोथ में काफी मदद करती है। इसके लिए कुछ ख़ास नहीं करना है, बस प्याज को काटकर जूस निकाल लेना है और इस जूस से बालों के जड़ की मालिश 15 मिनट तक करनी है।
 
दूसरी तरफ आपको कुछ लहसुन के दाने के जूस निकाल कर उसे नारियल तेल में मिला देना है। फिर उसे कुछ देर तक उबालना है। जब यह ठंढा हो जाए तो इससे बालों के जड़ की मालिश करनी है।
 
भृंगराज (Bhringaraj)
 
भृंगराज के तेल से बालों की मालिश करें। इससे बहुत जल्दी बाल आने लगेंगे।
 
जटामांसी (Jatamansi or Spikenard)
 
इस जड़ी-बूटी का इस्तेमाल आयुर्वेद में हेयर ग्रोथ के दवा के रुप में किया जाता है। इसे आप कैप्सूल की तरह खा भी सकते हैं और इसे सीधे बालों की जड़ में लगा भी सकते हैं।
 
आयुर्वेदिक हेयर वाश (Ayurvedic Hair Wash)
 
आधा किलो शिकाकाई, मेथी एक पाव, करी पत्ता, तुलसी पत्ता और रीठा 100 ग्राम लें। इस सभी को मिला कर बालों को धोने लायक शैंपू बनाएं। इससे बालों की कई परेशानी दूर होने के साथ बालों में वृद्धि भी होगी|⁠⁠⁠⁠

  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)
एडी के दर्द का रामबाण इलाज – Ankle Pain
 
एडी का दर्द अति कष्टकारी होता है, अक्सर ये दर्द महिलाओ को अधिक होता है. सारा दिन खड़ा रहना या ऊंची एड़ी की सैंडल पहनना या हड्डी का बढ़ना इसके मुख्य कारण हैं. ऐसे में ये रामबाण उपचार सौ फीसदी असरकारक हो सकता है. आइये जाने.
 
आवश्यक सामग्री.
 
नौशादर  –  एक चौथाई छोटा चम्मच. (ये आपको किसी भी पंसारी से मिल जाएगी)
 
ग्वार पाठा  (एलो वेरा ) – आधा चम्मच.
 
हल्दी  – आधा चम्मच.
 
बनाने और लगाने की विधि
 
नौशादर एक पीस (एक चौथाई छोटा चम्मच) , गवार पाठा – आधा चम्मच, और आधा चम्मच हल्दी। एक बर्तन में गवार पाठा धीमी आंच पर गरम करे, उस में नौशादर और हल्दी डाले, जब गवार पाठा पानी छोड़ने लगे तब उसे एक कॉटन के टुकड़े पर रख ले और थोड़ा ठंडा करे। जितना गरम सह सके, उसे एक कपडे पर रख कर एड़ी पर पट्टी की तरह बांध लीजिये, ये प्रयोग सोते समय करे क्योंकि इसे बाँध कर चलना नहीं है। ये प्रयोग कम से कम ३० दिन तक पुरे धैर्य से करे। ये प्रयोग बिलकुल सरल और सर्वश्रेष्ठ है, एड़ी के दर्द वाले व्यक्ति को इसे ज़रूर आज़माना चाहिए. जल्दी आराम के लिए आप साथ में एलो वेरा की सब्जी या घर पर बना हुआ जूस भी पी सकते हैं.
 
विशेष.
 
ये प्रयोग सिर्फ एड़ी ही नहीं, बल्कि शारीर की किसी भी हड्डी के दर्द को सही करने की पूरी क्षमता रखता है.⁠⁠⁠⁠

  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)
 बनाये स्तनों को सुन्दर और सुडौल।
 
 
 
स्त्री की सौंदर्यता को बनाये रखने में उनके स्तन की अपनी विशेष भूमिका मानी जाती है क्योंकि स्तन मण्डल (वक्षस्थल) यदि ढीले और कमजोर होते हैं, तो उसकी शरीर सौंदर्यता कम होती है इसी प्रकार यदि स्तन आकर्षक, पुष्ट और प्राकृतिक रूप से सुडौल होते हैं तो वह नारी की सौंदर्यता को और अधिक निखार देते हैं।
 
 
असगंध और शतावरी को बारीक पीसकर चूर्ण बनाकर लगभग 2-2 ग्राम की मात्रा में शहद के खाकर ऊपर से दूध में मिश्री को मिलाकर पीने से स्तन आकर्षक हो जाते हैं।
 
कमलगट्टे की गिरी यानी बीच के भाग को पीसकर पाउडर बनाकर दही के साथ मिलाकर प्रतिदिन 1 खुराक के रूप में सेवन करने से स्तन आकार में सुडौल हो जाते हैं।
 
कमल के बीजों को पीसकर 2 चम्मच की मात्रा में थोड़ी मिश्री मिलाकर बराबर रूप से 4-6 हफ्ते तक सेवन करने से स्तन कस जाते हैं और वे कठोर बन जाएंगे।
 
जैतून के तेल की स्तनों पर धीरे-धीरे मालिश करने से करने से स्तनों की सुन्दरता बढ़ जाती है।गंभारी की 2 किलोग्राम छाल को पीसकर 16 लीटर पानी में मिलाकर चतुर्थांश काढा बना लें। गम्भारी की 250 ग्राम छाल को पानी के साथ पीसकर चटनी बना लें। गम्भारी के कल्क यानी लई और काढ़े में 1 लीटर तिल का तेल मिलाकर रख लें। इस तेल को रूई में भिगोकर स्तनों पर रखने से, ढीले और लटके हुए स्तन टाईट और सुन्दर हो जाते हैं।
 
मुनक्का (द्राक्षा) 50 ग्राम को पीसकर चूर्ण बना लें, फिर तज 3 ग्राम, तेजपात 3 ग्राम, नागरमोथा 3 ग्राम, सूखा पोदीना 3 ग्राम, पीपल 3 ग्राम, खुरासानी अजवायन 3 ग्राम, छोटी इलायची 3 ग्राम, तालीस के पत्ते 5 ग्राम, वंशलोचन 5 ग्राम, जावित्री 5 ग्राम, खेतचन्दन 5 ग्राम, कालीमिर्च 5 ग्राम, जायफल 5 ग्राम, सफेद जीरा 7 ग्राम, बिनौला की गिरी 13 ग्राम, लौंग 13 ग्राम, सूखा धनिया 13 ग्राम, पीपल की जड़ 13 ग्राम, खिरनी के बीज 45 ग्राम, बादाम की गिरी 50 ग्राम, पिस्ता 50 ग्राम, सुपारी एक किलो, शहद और चीनी 1-1 किलो और गाय का देशी घी आधा किलो आदि लें। इसके बाद 50 ग्राम पिसा हुआ मुनक्का और सुपारी चूर्ण को गाय के देशी घी में मिलाकर धीमी आग पर भूने, चीनी और शहद को छोड़कर सभी पदार्थो (द्रव्यों) को डाल दें, उसके बाद चीनी और शहद की चाशनी बनाकर मिला दें, फिर उसके बाद सभी चीजों को अच्छी तरह पकाकर उतारकर ठंडा करके सुबह-शाम पिलाने से नारी के⁠⁠⁠⁠

  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)
स्तनों का ढीलापन दूर करने का आसान सा रामबाण इलाज.
 
स्त्री के सौन्दर्य में उसके स्तन विशेष भूमिका निभाते हैं. मगर अनेक कारणों के चलते उनके स्तन ढीले पड़ जाते हैं, और ढीले स्तनों से उसका सौन्दर्य फीका पड़ जाता है. आज हम आपको इसी कड़ी में बताने जा रहें है ऐसा रामबाण घरेलु नुस्खा जिसको एक हफ्ते से तीन महीने इस्तेमाल करने से ऐसा नतीजा मिलेगा जो महंगे से महंगी क्रीम भी ना दे पायेगी.
 
तो आइये जाने ये घरेलु नुस्खा.
 
इस नुस्खे के लिए ज़रूर सामन.
 
फिटकरी – 5 ग्राम.
 
कपूर – 2 ग्राम.
 
राई – 50 ग्राम.
 
गज पीपली – 30 ग्राम.
 
सबसे पहले आप फिटकरी कपूर राई और गज पीपली को थोडा पानी मिलाकर अच्छे से खरल कर लीजिये.
 
  पानी धीरे धीरे मिलाते रहे जिस से ये अच्छे से गाढ़ा लेप बन जाए. ये लेप अभी तैयार है आपके स्तनों को टाइट करने के लिए. 
 
स्तनों पर लगाने की विधि.
 
सुबह नहाने के बाद इस लेप को वक्ष स्थल पर हलके हाथ से मसाज करते हुए लगाये. इसकी इतनी मसाज करें के ये त्वचा के अन्दर अवशोषित हो जाए.  इसके बाद ये रात को फिर सोने से पहले स्तन धो कर उन पर लगायें. ऐसा करने से एक हफ्ते से तीन महीने के अन्दर ये चमत्कारी रूप से टाइट हो जायेंगे. 

  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

रीठा और सिकाकाई को एक बार चाल ले!
1०० ग्राम मुल्तानी मिटटी ( चिकनी मिटटी काली मिटटी कुछ ले सकते है )
5० ग्राम सिकाकई
२5 ग्राम रीठा
२5 ग्राम गुलाब जल
२5 ग्राम चने का बेसन
२5 ग्राम नारियल तेल
२5 ग्राम हल्दी
आटे की तरह सारी सामग्री गुथ ले और साबुन की तरह बना ले और धुप में अच्छे से सुखा ले बस अब आप का साबुन तेयार हो गया बेफिकर इस्तेमाल करे इसका कोई साईंडीफेकट नहीं , हम जो साबुन केमिकल वाला लगते है उससे हमारे सरीर के सेल्स धीरे धीरे ख़तम हो जाते है और हम बीमारियों से घिर जाते है!
 


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)
आयुर्वेदिक दोहे ∥ ☝۞ 💐
↷↷↷↷↷↷↷∥🙏∥↶↶↶↶↶↶↶
 
१ दही मथें माखन मिले, केसर संग मिलाय,
होठों पर लेपित करें, रंग गुलाबी आय..I
 
२ बहती यदि जो नाक हो, बहुत बुरा हो हाल,
यूकेलिप्टिस तेल लें, सूंघें डाल रुमाल..I
 
३ अजवाइन को पीसिये , गाढ़ा लेप लगाय,
चर्म रोग सब दूर हो, तन कंचन बन जाय..I
 
४ अजवाइन को पीस लें , नीबू संग मिलाय,
फोड़ा-फुंसी दूर हों, सभी बला टल जाय..
 
५ अजवाइन-गुड़ खाइए, तभी बने कुछ काम,
पित्त रोग में लाभ हो, पायेंगे आराम..I
 
६ ठण्ड लगे जब आपको, सर्दी से बेहाल,
नीबू मधु के साथ में, अदरक पियें उबाल..I
 
७ अदरक का रस लीजिए. मधु लेवें समभाग,
नियमित सेवन जब करें, सर्दी जाए भाग..I
 
८ रोटी मक्के की भली, खा लें यदि भरपूर,
बेहतर लीवर आपका, टी.बी भी हो दूर..
 
९ गाजर रस संग आँवला, बीस औ चालिस ग्राम,
रक्तचाप हिरदय सही, पायें सब आराम..
 
१० शहद आंवला जूस हो, मिश्री सब दस ग्राम,
बीस ग्राम घी साथ में, यौवन स्थिर काम..
 
११ चिंतित होता क्यों भला, देख बुढ़ापा रोय,
चौलाई पालक भली, यौवन स्थिर होय..
 
१२ यलाल टमाटर लीजिए, खीरा सहित सनेह,
जूस करेला साथ हो, दूर रहे मधुमेह..
 
१३ प्रातः संध्या पीजिए, खाली पेट सनेह, 
जामुन-गुठली पीसिये, नहीं रहे मधुमेह..
 
१४ सात पत्र लें नीम के, खाली पेट चबाय,
दूर करे मधुमेह को, सब कुछ मन को भाय..
 
१५ सात फूल ले लीजिए, सुन्दर सदाबहार,
दूर करे मधुमेह को, जीवन में हो प्यार..
 
१६ तुलसीदल दस लीजिए, उठकर प्रातःकाल,
सेहत सुधरे आपकी, तन-मन मालामाल..
 
१७ थोड़ा सा गुड़ लीजिए, दूर रहें सब रोग,
अधिक कभी मत खाइए, चाहे मोहनभोग.I
 
१८ अजवाइन और हींग लें, लहसुन तेल पकाय,
मालिश जोड़ों की करें, दर्द दूर हो जाय..I
 
१९ ऐलोवेरा-आँवला, करे खून में वृद्धि, 
उदर व्याधियाँ दूर हों,जीवन में हो सिद्धि..I
 
२० दस्त अगर आने लगें, चिंतित दीखे माथ,
दालचीनि का पाउडर, लें पानी के साथ.,,,,,,i
 
२१ मुँह में बदबू हो अगर, दालचीनि मुख डाल,
बने सुगन्धित मुख, महक, दूर होय तत्काल..
 
२२ कंचन काया को कभी, पित्त अगर दे कष्ट,
घृतकुमारि संग आँवला, करे उसे भी नष्ट..
 
 
२३ बीस मिली रस आँवला, पांच ग्राम मधु संग, 
सुबह शाम में चाटिये, बढ़े ज्योति सब दंग..
 
२४ बीस मिली रस आँवला, हल्दी हो एक ग्राम,
सर्दी कफ तकलीफ में, फ़ौरन हो आराम..
 
२५ नीबू बेसन जल शहद, मिश्रित लेप लगाय,
चेहरा सुन्दर तब बने, बेहतर यही उपाय..
 
 
२६. मधु का सेवन जो करे, सुख पावेगा सोय,
कंठ सुरीला साथ में, वाणी मधुरिम होय.
 
२७. पीता थोड़ी छाछ जो, भोजन करके रोज,
नहीं जरूरत वैद्य की, चेहरे पर हो ओज..
 
२८ ठण्ड अगर लग जाय जो नहीं बने कुछ काम,
नियमित पी लें गुनगुना, पानी दे आराम..
 
२९ कफ से पीड़ित हो अगर, खाँसी बहुत सताय,
अजवाइन की भाप लें, कफ तब बाहर आय..
 
३० अजवाइन लें छाछ संग, मात्रा पाँच गिराम,
कीट पेट के नष्ट हों, जल्दी हो आराम..
 
३१ छाछ हींग सेंधा नमक, दूर करे सब रोग,
जीरा उसमें डालकर, पियें सदा यह भोग..।

  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)
🌺अम्लपित्त ,एसिडिटी,उल्टी,दस्त,पेट के कीड़े सबका एक उपाय.... !
 
* जीरा,धनिया और मिश्री तीनों को बराबर मात्रा में मलाकर पीस लें | इस चूर्ण की २-२ चम्मच सुबह-शाम सादे पानी से लेने पर अम्लपित्त या एसिडिटी ठीक हो जाती है |
 
* एसिडिटी से तुरंत राहत पाने के लिये, एक चुटकी कच्‍चा जीरा ले कर मुंह में डाल कर खाने से फायदा मिलता है।
 
* जीरा,सेंधा नमक,काली मिर्च,सौंठ और पीपल सबको समान मात्रा में लेकर पीस लें | इस चूर्ण को एक चम्मच की मात्रा में भोजन के बाद ताजे पानी से लेने पर अपच में लाभ होता 
 
है |
 
* पांच ग्राम जीरे को भूनकर तथा पीसकर दही की लस्सी में मिलाकर सेवन करने से दस्तों में लाभ होता है |
 
* १५ ग्राम जीरे को ४०० मिली पानी में उबाल लें | जब १०० ग्राम शेष रह जाये तब २०-४० मिली की मात्रा में प्रातः-सांय पिलाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं |
 
* एक चम्मच भुने हुए जीरे के बारीक़ चूर्ण में एक चम्मच शहद मिलाकर प्रतिदिन भोजन के बाद सेवन करने से उल्टी बंद हो जाती है |
 
* इसमें एंटीसेप्‍टिक तत्‍व भी पाया जाता है, जो कि सीने में जमे हुए कफ को निकाल कर बाहर करता है और सर्दी-जुखाम से राहत दिलाता है। यह गरम होता है इसलिये यह कफ को 
 
बिल्‍कुल अच्‍छी तरह से सुखा देता है।
 
* यदि आप नींद न आने की बीमारी से ग्रस्त हैं तो एक छोटा चम्मच भुना जीरा पके हुए केले के साथ मैश करके रोजाना रात के खाने के बाद खाएं.
 
* जब भी सर्दी-जुखाम हो, तो एक ग्‍लास पानी में जीरा ले कर उबाल लें और इस पानी को पिएं। कई साउथ इंडियन घरों में सादा उबला पानी न पी कर 'जीरा पानी' पिया जाता है।
 
* जीरे को बारीक़ पीस लें | इस चूर्ण का ३-३ ग्राम गर्म पानी के साथ दिन में दो बार सेवन करने से पेट के दर्द तथा बदन दर्द से छुटकारा मिलता है |
 
* जीरा आयरन का सबसे अच्‍छा स्‍त्रोत है, जिसे नियमित रूप से खाने से खून की कमी दूर होती है। साथ ही गर्भवती महिलाएं, जिन्‍हें इस समय खून और आयरन की जरुरत होती है, 
 
उनके लिये जीरा अमृत का काम करता है।
 
* जीरा खाने से लीवर मजबूत होता है और उसकी शरीर से गंदगी निकालने की क्षमता में भी सुधार आता है।
 
* ब्लड में शुगर की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए आघा छोटा चम्मच पिसा जीरा दिन में दो बार पानी के साथ पीएं। डायबिटीज रोगियों को यह काफी फायदा पहुंचाता है।
 
* कब्जियत की शिकायत होने पर जीरा, काली मिर्च, सोंठ और करी पावडर को बराबर मात्रा में लें और मिश्रण तैयार कर लें। इसमें स्वादानुसार नमक डालकर घी में मिलाएं और 
 
चावल के साथ खाएं। पेट साफ रहेगा और कब्जियत में राहत मिलेगी।

  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में ढ़ेरों लोग अपनी सेक्स पावर कम होने के कारण चिंतित रहते हैं. खानपान की गलत आदतों के कारण उनके स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है, साथ हीं सेक्स पावर में कमी आने की समस्या से भी दो-चार होना पड़ता है. कुछ चीजों का ज्यादा सेवन या जो चीजें खानी चाहिए उन्हें बिल्कुल नहीं खाना इन समस्याओं के मूल कारण होते हैं. सेक्स पावर बढ़ाने के लिए कुछ चीजों का नियमित और संतुलित सेवन करना चाहिए. तो आइये जानते हैं कि आपको किन-किन चीजों का कितना और कब सेवन करना चाहिए. साथ हीं यह भी जानते हैं कि कौन-कौन सी चीजें आपको बिल्कुल नहीं करनी चाहिए. ध्यान रखें आपको इन बातों का ध्यान दैनिक जीवन में रखना होगा.


 

सेक्स पावर बढ़ाने के उपाय :
फ़ास्ट फ़ूड, कोल्ड ड्रिंक्स, चॉकलेट्स , पिज्जा, बर्गर और चाऊमीन इत्यादि को नियमित रूप से खाने करने से सेक्स पावर में कमी आती है. अतः इनका सेवन कीजिए, लेकिन नहीं के बराबर और अगर ये चीजें आपके दैनिक जीवन का हिस्सा हैं, तो इन्हें अलविदा कह दीजिए.
लैपटॉप को जांघ में रखकर कभी लैपटॉप पर काम न करें.
किशमिश और 2 ग्राम दालचीनी को दूध में मिला कर रोज पीने से शरीर में दृढ़ता आती है.
बादाम, किशमिश और मनुक्का को फुलाकर नाश्ता में हर दिन खाने से भी सेक्स पावर बढ़ाने में फायदा होता है.
हर दिन दो खजूर खाना शुरू कर दीजिए, यह भी आपको लाभ पहुँचायेगा.
सेक्स करने के बाद 15 ग्राम गुड़ खाइए.
हरी सब्जियों, अंकुरित अनाज, फल, घी, मधु, दूध इत्यादि को अपने दैनिक भोजन का हिस्सा बना लें.
मौसम के अनुसार जो-जो फल….. जब-जब मिलें, तब-तब उन फलों को खाना शुरू करें.
अगर आप चावल खरीदकर खातें हैं, तो यह ध्यान रखें कि बिना पॉलिश किया हुआ चावल हीं आप खरीदें.
सलाद को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना लें.
तनावमुक्त रहे बिना आपकी सेक्स पावर कभी नहीं बढ़ सकती है, इसलिए खुद को बेकार की चिंताओं से दूर रखें.
चोकरयुक्त आंटे की रोटियाँ खाना शुरू कर दीजिए.
दाल का हर दिन सेवन कीजिए.
नशा बिल्कुल भी न करें, चाहे वह किसी भी चीज का नशा क्यों न हो.
तैलीय या मसालेदार भोजन हर दिन न करें.
खुद में आत्मविश्वास पैदा कीजिए कि आपकी सेक्स पावर बहुत अच्छी है, बेकार के विज्ञापनों के कारण अपनी सेक्स पावर पर 1 % भी संदेह न करें. ऐसे ज्यादातर विज्ञापन आपके आत्मविश्वास को तोड़ने का काम करते हैं.
प्याज नियमित रूप से खाने से सेक्स क्षमता बरकरार रहती है और सेक्स पावर भी बढ़ता है.
अगर आपका वजन ज्यादा है, तो इसे कम करने की जरूरत है.
लगभग लगातार 2-3 लहसुन की कलियाँ खाना भी फायदेमंद होता है.
पूरे शरीर की नियमित मालिश करने से भी सेक्स पावर बढ़ता है.
गर्म पानी से न नहाएँ.
साईकिल चलाने से भी सेक्स क्षमता बढ़ती है.
सुबह-सुबह सूरज की रोशनी में बैठना भी लाभ देता है.
सेक्स करने से पहले एक-दूसरे को पूरी तरह से उत्तेजित कर लें.
अगर पति=पत्नी के बीच प्यार नहीं होगा, तो सेक्स पावर कम न होने के बावजूद पूरी तरह उत्तेजना नहीं आएगी. इसलिए अपने बीच के रोमांस को कभी न मरने दें. प्यार होना चाहिए, छेड़छाड़ होनी चाहिए. लवर बने रहिए, किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा.
खाना समय पर खाना शुरू कर दीजिए. पर्याप्त नींद लीजिए.
लिंग को गर्म पानी के सम्पर्क में न आने दें.
सुबह जल्दी उठना शुरू कर दीजिए.
1/2 चम्मच अदरक का रस, एक चम्मच मधु और एक उबले हुए अंडे का आधा भाग मिलकार रोज रात को सोने से पहले 1 माह तक खाइए.
और यह बात भी ध्यान रखिए कि किसी का भी सेक्स पावर उतना नहीं होता है जितना पोर्न वीडियोज में दिखाया जाता है.
 


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

बहुत सारी लड़कियाँ अपने स्तनों के आकार को लेकर चिंतित रहती हैं. और उनके स्तनों का आकार छोटा होने पर, उनमें हीन भावना घर कर जाती है. तो आइए जानते हैं कुछ ऐसे तरीके जिन्हें आजमा कर आप अपने स्तनों का आकार बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के बढ़ा पाएंगी.ब्रेस्ट का आकार बढ़ाने के घरेलू टिप्स :
हर दिन व्यायाम कीजिए, इसके लिए आपको हर दिन सही तरीके से पुश अप करना होगा. अगर आप व्यायाम अच्छे से नहीं करेंगी, तो व्यायाम से आपको फायदा नहीं के बराबर पहुँचेगा. दिन में 3 बार 15-15 पुश अप्स कीजिए.
पुश अप्स करने के लिए पेट के बल जमीन पर लेट जाइए, फिर अपने शरीर का वजन हाथों और घुटनों पर रखें, इसके लिए आपको हथेली के बल पर अपने शरीर को उठाना पड़ेगा, ध्यान रहे कि आपके दोनों हाथ कंधों के नीचे रहें. कमर सीधी रखें. फिर अपनी कुहनियों को मोड़ें और सीने को फर्श के नजदीक लाएं. फिर वापस पहले वाली स्थिति में लौट जाएँ. इसी प्रक्रिया को बार-बार दोहराएँ. यही प्रक्रिया पुश अप कहलाती है.
हर दिन, रात में सोने से पहले बादाम के तेल से अपने स्तनों पर 5-10 Minute मालिश करें.
हर दिन 1 मुट्ठी अखरोट खाने के बाद 1 ग्लास दूध पिएँ.


 

2 चम्मच प्याज, 1/4 चम्मच हल्दी पाउडर और 1 चम्मच शहद लीजिए, इन्हें आपस में मिलाकर लेप बना लीजिए. इस लेप को रात में सोने से पहले अपने स्तनों पर गोल-गोल घुमाते हुए मालिश कीजिए.
समय से भोजन कीजिए और ध्यान रखें भोजन पौष्टिक होना चाहिए.
फल, हरी सब्जियों और अंकुरित अनाज को अपने भोजन में शामिल करें.
सेम, मटर और सोयाबीन को अपने हर दिन के भोजन में शामिल करें. यह आपके स्तनों के ऊतकों के विकास में मदद करेगा.
विटामिन युक्त चीजें ज्यादा खाएँ, इससे आपके स्तन का आकार बढ़ेगा. कुछ समय बाद आप अपने स्तनों के आकार में फर्क महसूस करेंगी.
खून और आयरन बढ़ाने के लिए खजूर, चुकन्दर, किशमिश पालक, पत्ता गोभी, गोभी, शलजम और शकरकंद खाएँ.
यह सुनिश्चित करें कि आपके पीरियड्स नार्मल आएँ. अनियमित पीरियड्स के कारण भी स्तनों के विकास में समस्या होती है.
हर दिन अपने स्तनों की मालिश कीजिए.
तनावमुक्त रहें.
हर दिन फास्टफूड खाने की आदत को अलविदा कहिए.
अगर आपका शरीर दुर्बल है, तो पहले इस दुर्बलता को दूर कीजिए. क्योंकि तभी आपके स्तनों का विकास हो पाएगा, जब आपके शरीर की दुर्बलता दूर होगी.
अगर आपके स्तनों का आकार धीरे-धीरे बढ़ रहा है, तो चिंतित न हों…. क्योंकि कई लोगों का शरीर दूसरों के शरीर से अलग होता है.
गर्भवती होने के बाद स्तनों का आकार बढ़ जाता है.
 


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

हल्दी और दूध दोनों हीं हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद हैं. हल्दी और गर्म दूध दोनों को मिलाकर पिया जाए, तो इसके और भी ज्यादा फायदे हैं. हल्दी और दूध दोनों में प्रतिजैविक गुण होते हैं. हर दिन हल्दी और दूध पीकर आप कई बीमारियों और संक्रमणों से बच सकते हैं. हल्दी और दूध का मिश्रण विषाक्त पदार्थों और नुकसानदायक सूक्ष्मजीवों से हमारी रक्षा करता है. तो आइए जानते हैं कि हल्दी और दूध पीने के और क्या-क्या फायदे हैं.हल्दी और दूध पीने के फायदे :
हल्दी वाला दूध बनाने की विधि- 1/4 चम्मच हल्दी चूर्ण लें. दूध के साथ हल्दी के चूर्ण को 15 मिनट तक उबालें. फिर दूध को थोड़ा ठंडा करके पियें.
हल्दी वाला दूध पीने से एक्ज़ीमा में फायदा पहुँचता है.
हल्दी वाला दूध पीने से चर्बी कम करने में मदद मिलती है. और चर्बी कम होने से वजन कम होता है.
मुलायम और चमकती त्वचा के लिये आप ठन्डे दूध में हल्दी मिलाकर नहा सकते हैं.
चमकदार त्वचा पाने के लिये हल्दी वाला दूध पियें.
अगर आपके शरीर में लाल-लाल चकते हो गए हों, तो रूइ के टुकड़े को हल्दी वाले दूध में भिंगा लें, फिर उसे चकते वाले हिस्से पर 15-20 मिनट तक लगाएँ, इससे चकते कम होंगें.
हल्दी वाला दूध पीने से पीरियड का दर्द कम होता है.
हल्दी और दूध पीने से प्रसव होने में आसानी होती है. प्रसव के बाद माँ के स्तनों में दूध पर्याप्त मात्रा में रहता है और अंडाशय के तेजी से सिकुड़ने में मदद मिलती है.
दूध में कैल्शियम पाया जाता है और हल्दी में एंटीऑक्सीडेट्स, इसलिए हल्दी और दूध पीने से हड्डियाँ मजबूत होती है.
यह शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाता है.
हल्दी और दूध पीने से आँत स्वास्थ्य रहता है और यह पेट के अंदरूनी चोटों को ठीक कर देता है. इससे पाचन बेहतर होता है तथा अल्सर, डायरिया, अपच नहीं होता है.
हल्दी वाले दूध से यकृत, विषमुक्त होता है.
हल्दी वाला दूध, खून साफ करता है.
चोट लगने पर हल्दी वाला दूध पीने से दर्द से तो आराम मिलता हीं है, साथ हीं यह चोट वाले स्थान पर खून नहीं जमने देता है.
गठिया के रोगियों के लिए हल्दी वाला दूध विशेष रूप से लाभदायक है.
गले में खराश, सर्दी या खाँसी होने पर हल्दी वाला दूध पीने से जल्द राहत मिलती है.
जिन्हें रात में अच्छी नींद न आती हो, या जिन्हें जल्दी नींद न आती हो. उन्हें हर दिन हल्दी वाला दूध जरुर पीना चाहिए.
हल्दी वाला दूध कैन्सर को रोकता है. यह कीमोथेरेपी के दुष्प्रभावों को कम करता है.
हल्दी वाले दूध से श्वांस सम्बन्धित बीमारियों फायदा पहुँचता है. इससे फेफड़े तथा साइनस में जकड़न से तुरन्त राहत मिलती है.
 


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

शिलाजीत एक गुणकारी औषधी है, जो कई परेशानियों या बीमारियों में हमारे लिए फायदेमंद है. यह हिमालय की पहाड़ियों में पाया जाता है. यह चार प्रकार का होता है, और प्रत्येक के गुण और लाभ अलग-अलग होते हैं. शिलाजीत एक ऐसी औषधी है, जो स्वस्थ्य रहने में हमारी बहुत मदद करता है. शिलाजीत का स्वाद बहुत कड़वा और कसैला होता है. और यह बहुत काला होता है. शिलाजीत का सेवन फायदेमंद है, लेकिन साथ हीं कुछ सावधानियों का भी ध्यान रखना पड़ता है. और खानपान में भी कुछ चीजों के प्रति संयम बरतना पड़ता है. तो आइए जानते है कि शिलाजीत के क्या-क्या फायदे हैं और कैसे इसका उपयोग किया जा सकता है.


 

शिलाजीत के फायदे :
यह नपुंसकता खत्म करता है, और यह स्वप्न दोष को भी दूर करता है.
यह सेक्स पॉवर बढ़ाता है और यौन इच्छा में भी वृद्धि करता है.
इसका प्रयोग अत्यंत लाभकारी तो है, लेकिन किसी डॉक्टर की सलाह लिए बिना इसका प्रयोग करना आपको नुकसान पहुँचा सकता है.
आयु और पाचन क्षमता के अनुसार हीं आपको शिलाजीत का सेवन करना चाहिए.
दूध या मधु के साथ इसका सेवन सूरज उगने से पहले करना फायदेमंद रहता है. और इसे खाने के 3-4 घंटे बाद हीं कुछ और चीज खाना चाहिये.
मानसिक मजबूती पाने के लिए घी के साथ इसका सेवन करना चाहिए. यह आपको तनावमुक्त रखेगा.
जिन लोगों को शीघ्रपतन की समस्या का सामना करना पड़ता है, उन्हें इसका कुछ दिनों तक नियमित सेवन करना चाहिए. इससे शीघ्रपतन किस समस्या खत्म हो जाती है.
जब आप शिलाजीत का सेवन कर रहे हों, इस दौरान आपको मांसाहार, सिगरेट, शराब, मसालेदार या खटाई युक्त भोजन नहीं करना चाहिए. आपको रात में ज्यादा देर तक नहीं जगना चाहिए और दिन में नहीं सोना चाहिए.
शिलाजीत के उपयोग से शरीर की सूजन भी खत्म हो जाती है.
इसके सेवन से महिलाओं के पीरियड की अनियमितता खत्म हो जाती है.
यह सुगर रोगियों के सुगर लेवल को सही बनाए रखने में उनकी बहुत मदद करता है.
यह आपकी त्वचा को जवान रखने में भी आपकी मदद करता है.
ऐसा नहीं है कि इसका सेवन केवल कोई बीमार व्यक्ति हीं कर सकता है, इसका सेवन एक सामान्य स्वस्थ्य व्यक्ति भी कर सकता है. इससे उसका शरीर मजबूत होता है और तंदुरुस्ती बढ़ती है.
यह ब्लडप्रेशर में भी फायदा पहुंचाता है.
यह सिर दर्द खत्म करने में भी कारगर होता है.
शिलाजीत का उपयोग अवश्य करें, लेकिन डॉक्टर की सलाह लिए बिना इसका उपयोग आपके लिए नुकसान दायक हो सकता है. क्योंकि इसकी मात्रा आपकी आयु आपके रोग इत्यादि के आधार पर तय होती है.
यह लेख आपको कैसा लगा हमें अपनी राय जरुर बताएँ.


 


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

बादाम देखने में तो छोटा होता है, लेकिन इसके फायदे बड़े-बड़े हैं. बादाम आप समय-समय पर खाते होंगे, लेकिन शायद आप बादाम के गुणकारी प्रभाव को नहीं जानते होंगे. तो चलिए आज हम जानते हैं कि बादाम खाने के क्या-क्या फायदे हैं, बादाम तेल के क्या-क्या फायदे हैं. बादाम हमें कौन-कौन सी बीमारियों से बचाता है और किन चोजों में यह फायदेमंद है. और इसका उपयोग कैसे करना चाहिए.बादाम के फायदे ( Badam Ke Fayde in Hindi ) :
रोज सुबह उठकर भीगे हुए बादाम खाने से, बादाम हमें कई बीमारियों से बचाता है. बादाम को सुबह दूध के साथ पीना चाहिए.
बादाम के नियमित सेवन से याददाश्त बढ़ती है.
बादाम खाने से शरीर में गर्माहट बनी रहती है, और यह सुन्दरता बरकरार रखने में भी मदद करता है.
भींगे हुए बादाम को छिलके छुड़ाकर नहीं खाना चाहिए, बल्कि इन्हें छिलकों के साथ खाना चाहिए.
बादाम दिल की बीमारियों को दूर रखने में हमारी मदद करता है.
बादाम ब्लडप्रेशर को नियंत्रित रखने में हमारी मदद करता है.
गर्भवती महिलाओं के लिए भी यह बहुत फायदेमंद है, इसके सेवन से बच्चा स्वस्थ्य पैदा होता है.
बादाम शरीर की उर्जा क्षमता बढ़ाता है, और इसे ज्यादा सक्रिय रखता है.
बादाम में प्रोटीन और आयरन पाया जाता है, जो हमारे शरीर के लिए फायदेमंद होता है.
बादाम के तेल को आँखों के नीचे के काले घेरों में 1-2 महीने लगाने से यह काले घेरे कम करता है.
बादाम कॉलेस्ट्रोल और ब्लड सूगर को नियंत्रित रखने में मदद करता है.


 

बादाम शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है. इस कारण से यह उन लोगों के लिए बहुत फायदेमंद है, जिन्हें अक्सर जुकाम या बुखार होता रहता है.
जिन लोगों को सुगर की बीमारी हो, वो हर दिन 2-3 बादाम खा सकते हैं.
जिन लोगों का पेट ठीक नहीं रहता है, वे अगर रोज 2-3 बादाम का सेवन करें, तो इससे उनका पेट ठीक रहेगा.
रुखी त्वचा वाले लोगों को बादाम तेल लगाना चाहिए.
बादाम खास तौर पर हाई ब्लडप्रेशर में काफी फायदेमंद होता है.
बादाम खाने से कब्ज और गैस की समस्या से छुटकारा मिलता है.
बादाम के नियमित सेवन वीर्य बढ़ाता है.
जिन युवतियों के स्तनों का कम विकास हुआ हो, उन्हें हर दिन बादाम के तेल से अपने स्तनों की मालिश करनी चाहिए.
जिन लोगों को सर दर्द की शिकायत हो, वे कुछ दिनों तक रोज बादाम तेल की 3-4 बूंद अपने नाक में डालें, इससे उनके सिर दर्द में कमी आएगी. ऐसा करने से उनकी मानसिक दुर्बलता भी दूर होती है.
गुनगुना गर्म करके बादाम का तेल 3-4 बूंद कान में डालने से कानों से सम्बन्धित समस्या दूर होती है.
बादाम के तेल बालों के लिए लिए तो अच्छा होता हीं है. साथ हीं बादाम तेल से बालों की मालिश मस्तिष्क के लिए भी फायदे मंद होती है.
रोज 8-10 बादाम खाने से बालों का गिरना कम होता है.
 


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

एलोवेरा ( एलोवेरा को घृतकुमारी भी कहते हैं ) एक छोटा सा कटीला पौधा होता है जिसकी पत्तियों में ढेर सारा तरल पदार्थ भरा होता है. इसमें कई प्रकार के प्रोटीन और विटामिन पाए जाते हैं, इसलिए यह हमारे शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है. एलोवेरा औषधीय गुणों से भरपूर होता है. एलोवेरा का नियमित इस्तेमाल करके आप फिट रह सकते हैं. तो आइए जानते हैं कि एलोवेरा के क्या-क्या फायदे हैं और इसका उपयोग किस-किस तरह से किया जा सकता है.


 

एलोवेरा के फायदे और उपयोग :
एलोवेरा हमारे शरीर में खून की कमी को दूर करके रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है.
एलोवेरा हमारे शरीर की अंदरूनी सफाई करता है और शरीर को रोगाणु से मुक्त रखने में मदद करता है. यह हमारे शरीर की नस, नाड़ियों आदि की सफाई करता है.
त्वचा की देखभाल और बालों की मजबूती व बालों की समस्या से निजात पाने के लिए एलोवेरा संजीवनी का काम करती है.
एलोवेरा का जूस पीने से त्वचा की नमी बरकरार रहती है. और त्वचा चमकदार दिखती है. यह त्वचा के लचीलेपन को बढ़ाकर त्वचा को खूबसूरत बनाता है.
एलोवेरा का जूस पीने से त्वचा की खराबी, मुहांसे, रूखी त्वचा, झुर्रियाँ, चेहरे के दाग-धब्बे, आँखों के काले घेरे दूर होते हैं.
एलोवेरा का उपयोग कोई भी व्यक्ति कर सकता है. इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है. एलोवेरा जूस खून को शुद्ध करता करता है और हीमोग्लोबिन की कमी को पूरा करता है. यह शरीर में ब्लड सेल्स की संख्या बढ़ाता है.
यह दिल से सम्बन्धित समस्याओं, जोड़ों के दर्द, मधुमेह, यूरिन की समस्या, शरीर में जमा विषैले पदार्थ आदि को खत्म करने में मददगार है.
इसका नियमित उपयोग करके लंबी उम्र तक स्वस्थ रहा जा सकता है.
हर दिन एक ग्लास एलोवेरा जूस पीने से वजन घट जाता है.
एलोवेरा जूस दांतों को साफ और रोगाणुमुक्त रखता है. एलोवेरा जूस को माउथ फ्रेशनर के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है. एलोवेरा के जूस को मुंह में भरने से छाले और बहने वाले खून को रोका जा सकता है.
एलोवेरा का इस्तेमाल करने से बाल झड़ने की समस्या कम हो जाती है.
आप फेसवास के रूप में भी इसका उपयोग कर सकते हैं.
एलोवेरा के लिक्विड में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर सिर में लगाने से सिर दर्द में आराम पहुँचता है.
एलोवेरा का जूस हर दिन पीने से कब्ज से राहत मिलती है.
एलोवेरा का जूस और आँवला के जूस को मिलाकर पीने से मधुमेह में लाभ पहुँचता है.
फटी एड़ियों में एलोवेरा जेल लगाने से लाभ पहुँचता है.
एलोवेरा का जूस पीने से पीलिया में भी फायदा पहुँचता है.
 


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

अनार के फायदे और उपयोग :
(1) अगर आपको याददाश्त सम्बन्धित समस्या है, तो आपको अनार नियमित खाना चाहिए.
(2) जिन लोगों को ब्लड प्रेशर की समस्या हो, उनके लिए भी यह काफी उपयोगी है.
(3) यह जोड़ों को कमजोर नहीं होने देता है, यह हड्डियों को मजबूत बनाता है.
(4) अनार खाने से चर्बी नहीं बढ़ती है.
(5) जी मचलने पर इसका जूस पीना फायदेमंद होता है.
(6) यह दस्त में भी असरदार है.
(7) अनार का जूस प्रोस्ट्रेट कैंसर से लड़ने में मदद करता है.
(8) गठिया के रोगी के लिए भी यह फायदेमंद है.
(9) अनार खून में ओक्सिजन की मात्रा बढ़ाता है.
(10) अनार शरीर में खून के थक्के नहीं बनने देता है.
(11) यह शरीर में रक्त के बहाव को सामान्य रखने में मदद करता है.
(12) अनार आपको समय से पहले बूढ़ा नहीं दिखने देता है.
(13) गर्भवती महिला को हर दिन अनार का जूस पीना चाहिए. इससे बच्चे के कम वजन जैसी बीमारी का सामना नहीं करना पड़ेगा.
(14) अनार ब्रेस्ट कैंसर और फेफड़ो के कैंसर को रोकने में भी अहम भूमिका निभाता है.
(15) गर्मियों में अनार को अपने आहार में जरुर शामिल करना चाहिए.
(16) अनार का सेवन दांतों से सम्बन्धित समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद करता है.
(17) इसका दैनिक सेवन सेक्स ड्राइव को बढ़ाने में मदद करता है.
(18) अनार त्वचा की नमी बरकरार रखने में मदद करता है.
(19) यह हमें कील मुहासों से बचाता है.
(20) इसके सेवन से त्वचा पर सूर्य की किरणों का नकारात्मक असर नहीं पड़ता है.
 


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)
1. सेक्स (sex) करने के दौरान हमारे शरीर से ऑक्सीटोसिन रिलीज होता हैं, जो अच्छी नींद के लिए बेहतर हैं।
 
2. सेक्स (sex) करने से हमें कभी भी तनाव महसूस नहीं होता हैं।
 
3. रोजाना सेक्स (sex) करने से जिंदगी लंबी होती हैं, और हर वक्त खुशी का अहसास होता हैं।
 
4. हफ्ते में 1या 2बार सेक्स करने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता हैं।
 
5. नियमित रूप से सेक्स (sex) करने वाले लोग कम बीमार होते हैं।
 
6. ज्यादा सेक्स (sex) करने से कामुकता में व्रृद्धि होती हैं।
 
7. सेक्स (sex) करने से हमारा blood pressure भी नियंत्रित रहता हैं।
 
8. सेक्स करते समय हर मिनट में 5 कैलोरी जलती हैं, जिससे हमारे शरीर की अच्छी कसरत होती हैं।
 
9. यह देखा गया हैं, कि सेक्स (sex) करने से सिरदर्द जैसी बीमारियां ठीक हो जाती हैं।
 
10. जो लोग महीने में कम से कम 15 बार ईजैक्यूलेट करते हैं, उनको प्रोस्टेट कैंसर नहीं होता हैं।
 
11. नियमित तरीके से सेक्स (sex) करने से दिल की बीमारी नहीं होती हैं, और हड्डियाँ भी मजबूत रहती हैं।
 
12. यह माना गया हैं, कि सेक्स (sex) करने से हमारे शरीर में ऐसे harmons बनते हैं, जिनसे हमारी त्वचा में निखार आता हैं।
 
13. सेक्स (sex) करने के जरिए हम अपनी आँखों का टेस्ट भी कर सकते हैं, अगर सेक्स करने के बाद आपकी आंखें ब्लर विजन फेस करे, तो आपकी आंखे कमजोर हैं।
 
14. हफ्ते में 1 या 2 बार सेक्स करने से हीमोग्लोबिन की मात्रा भी बढती हैं।
 
15. सेक्स (sex) करने से मोटापा भी घटता हैं, क्योंकि 1 घंटा सेक्स करने से हमारी 300 कैलोरी बर्न होती हैं, जो कसरत करने के समान हैं।
 
16. सुबह के समय सेक्स (sex) करने से वीर्य की गुणवत्ता 12% तक बढ़ जाती हैं।
 
17. सेक्स (sex) करने से पेट गैस की समस्या भी दूर हो जाती हैं।
 
18. रोजाना सेक्स (sex) करने से हमारी पीठ मजबूत होती हैं, जिससे कभी भी पीठदर्द नहीं होता हैं।
 
19. जो लोग हफ्ते में 1 या 2 बार सेक्स करते हैं, उनको स्ट्रोक होने के चांस भी कम रहते हैं।
 
20. रोजाना सेक्स करने से चेहरे की झुर्रियां गायब हो जाती हैं।
 
21. सेक्स करने से बुखार और जुकाम जैसे रोग से छुटकारा मिलता हैं।

  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

हींग
विभिन्न रोगों में उपचार (Treatment of various diseases)

अचार की सुरक्षा:
आचार की सुरक्षा के लिए बर्तन में पहले हींग का धुंआ दें। उसके बाद उसमें अचार भरें। इस प्रयोग से आचार खराब नहीं होता है।
पसली का दर्द:

हींग को गर्म पानी में मिलाकर पसलियों पर मालिश करें। इससे दर्द में लाभ मिलता है।
पित्ती:

हींग को घी में मिलाकर मालिश करना पित्ती में लाभकारी होता है।
जहर खा लेने पर:

हींग को पानी में घोलकर पिलाने से उल्टी होकर ज़हर का असर खत्म हो जाता है।
दांतों की बीमारी:

दांतों में दर्द होने पर दर्द वाले दातों के नीचे हींग दबाकर रखने से जल्द आराम मिलता है।
दांतों में कीड़े लगना:

हींग को थोड़ा गर्मकर कीड़े लगे दांतों के नीचे दबाकर रखें। इससे दांत व मसूढ़ों के कीड़े मर जाते हैं।
दांत दर्द:

हींग को पानी में उबालकर उस पानी से कुल्ले करने से दांतों का दर्द दूर हो जाता है।
शुद्ध हींग को चम्मच भर पानी में गर्म करके रूई भिगोकर दर्द वाले दांत के नीचे रखें। इससे दांतों का दर्द ठीक होता है।
हींग को गर्म करके दांत या जबड़े के नीचे दबाने से दांतों में लगे हुए कीड़े मर जाते हैं और दर्द में आराम मिलता है।
अपच:

हींग, छोटी हरड़, सेंधानमक, अजवाइन, बराबर मात्रा में पीस लें। एक चम्मच प्रतिदिन 3 बार गर्म पानी के साथ लें। इससे पाचन शक्ति ठीक हो जाती है।
भूख न लगना:

भोजन करने से पहले घी में भुनी हुई हींग एवं अदरक का एक टुकड़ा, मक्खन के साथ लें। इससे भूख खुलकर आने लगती है।
पागल कुत्ते के काटने पर:

पागल कुत्ते के काटने पर हींग को पानी में पीसकर काटे हुए स्थान पर लगायें। इससे पागल कुत्ते के काटने का विष समाप्त हो जाता है।
सांप के काटने पर:

हींग को एरण्ड की कोपलों के साथ पीसकर चने के बराबर गोलियां बना लें सांप के विष पर ये गोलियां हर आधा घंटे के अन्दर सेवन करने से लाभ होता है।
गाय के घी के साथ थोड़ा-सा हींग डालकर खाने से सांप का जहर उतर जाता है।
बुखार:

हींग का सेवन करने से सीलन भरी जगह में होने वाला बुखार मिटाता है।
हींग को नौसादार या गूगल के साथ देने से टायफायड बुखार में लाभ होता है।
कमर दर्द:

1 ग्राम तक सेंकी हुई हींग थोड़े से गर्म पानी में मिलाकर धीरे-धीरे पीने से कमर का दर्द, स्वरभेद, पुरानी खांसी और जुकाम आदि में लाभ होता है।
अजीर्ण:

हींग की गोली (चने के आकार की) बनाकर घी के साथ निगलने से अजीर्ण और पेट के दर्द में लाभ होता है।
पेट दर्द होने पर हींग को नाभि पर लेप लगाएं।
वातशूल:

हीग को 20 ग्राम पानी में उबालें। जब थोड़ा-सा पानी बच जाए तो तब इसको पीने से वातशूल में लाभ होता है।
पीलिया:

हींग को गूलर के सूखे फलों के साथ खाने से पीलिया में लाभ होता है।
पीलिया होने पर हींग को पानी में घिसकर आंखों पर लगायें।
पेशाब खुलकर आना:

हींग को सौंफ के रस के साथ सेवन करने से पेशाब खुलकर आता है।
चक्कर:

घी में सेंकी हुई हींग को घी के साथ खाने से गर्भावस्था के दौरान आने वाले चक्कर और दर्द खत्म हो जाते हैं।
घाव के कीड़े:

हींग और नीम के पत्ते पीसकर उसका लेप करने से व्रण (घाव) में पड़े हुए कीडे़ मर जाते हैं।
कान दर्द:

हींग को तिल के तेल में पकाकर उस तेल की बूंदें कान में डालने से तेज कान का दर्द दूर होता है।


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

सिर दर्द मे मिनटो मे असर करे ये घरेलू इलाज

1. एक्यूप्रेशर के द्वारा
सालों से लोग सिर दर्द में राहत के लिए एक्यूप्रेशर का प्रयोग करते आ रहे GCहैं. सिर दर्द होने की स्थिति में आप अपनी दोनों हथेलियों को सामने ले आइए. इसके बाद एक हाथ से दूसरे हाथ के अंगूठे और इंडेक्स फिंगर के बीच की जगह पर हल्के हाथ से मसाज कीजिए. ये प्रक्रिया दोनों हाथों में दो से चार मिनट तक दोहराइए. ऐसा करने से आपको सिर दर्द में आराम मिलेगा.

2. पानी के द्वारा
कुछ-कुछ देर पर पानी की थोड़ी-थोड़ी मात्रा पीने से भी सिर दर्द में आराम मिलता है. एकबार आपका शरीर हाइड्रेटेड हो जाएगा तो सिर का दर्द धीरे-धीरे कम होने लगेगा.

3. लौंग के द्वारा
तवे पर लौंग की कुछ कलियों को गर्म कर लीजिए. इन गर्म हो चुकी लौंग की कलियों को एक रूमाल में बांध लीजिए. कुछ-कुछ देर पर इस पोटली को सूंघते रहिए. आप पाएंगे कि सिर का दर्द कम हो गया है.

4. तुलसी की पत्त‍ियों द्वारा
आपने अक्सर लोगों को सिर दर्द होने पर चाय या कॉफी पीते देखा होगा. एकबार तुलसी की पत्त‍ियों को पानी में पकाकर उसका सेवन कीजिए. ये किसी भी चाय और काॅफी से कहीं अधिक कारगर और फायदेमंद है.

5. सेब पर नमक डालकर खाने से
अगर बहुत कोशिश के बाद भी आपको सिर दर्द जाने का नाम नहीं ले रहा है तो एक सेब काट लें और उस पर नमक डालकर खाएं. सिर दर्द में राहत पाने के लिए ये एक बहुत कारगर उपाय है.

6. काली मिर्च और पुदीने की चाय
सिर दर्द में काली मिर्च और पुदीने की चाय का सेवन करना भी बहुत फायदेमंद होता है. आप चाहें तो ब्लैक टी में पुदीने की कुछ पत्तियां मिलाकर भी ले सकते हैं.
 


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

 अपने घुटने कभी मत बदलिये
(डॉ राहुल जैन) naturopathy & acupressure) Jaipur
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50 साल के बाद धीरे धीरे शरीर के जोडो़ मे से लुब्रीकेन्टस एवं कैल्शियम बनना कम हो जाता है जिसके कारण जोड़ो का दर्द , गैप, कैल्शियम की कमी, वगैरह प्रोब्लेम्स सामने आती है, जिसके चलते आधुनिक चिकित्सा आपको जोइन्ट रिप्लेस करने की सलाह देते है ।
किंतु क्या आपको पता है जो चीज कुदरत ने हमे दी है वो आधुनिक विज्ञान नही बना सकता आप कृत्रिम जोइन्ट फिट करवा कर थोडे समय २-४ साल तक तो ठीक हो सकते है लेकिन बाद मे आपको बहुत ही तकलीफ होगी । जोइन्ट रिप्लेसमेंट का सटीक इलाज आज मैं आपको बता रहा हूँ वो आप नोट कर लीजिये, आैर हाँ ऐसे हजारो जरुरत मंद लोगों तक पहुंचाए जो रिप्लेसमेंट के लाखों रुपये खचॅ करने मे असमर्थ है ।
*बबूल* (देशी कीकर) नामके वृक्ष को आपने जरुर देखा होगा यह भारत में हर जगह बिना लगाये ही अपने आप ऊग जाता है । अगर यह बबूल नाम का वृक्ष अमेरिका या विदेशों में इतनी मात्रा मे होता तो आज वही लोग इसकी दवाई बनाकर हमसे हजारो रुपये लुटते लेकिन भारत के लोगों को जो चीज़ मुफ्त में मिलती है उसकी कोई कदर नही है।
प्रयोग इस प्रकार करना है- *बबूल* के पेड़ पर जो *फली* लगती है उसको तोड़कर लाएँ उसको सुखाकर पाउडर बनालें आैर *सुबह १ चम्मच* की मात्रा में गुनगुने पानी से खाने के बाद केवल 2-3 महीने सेवन करने से आपके घुटने का दर्द बिल्कुल ठीक हो जायेगा.आपको घुटने बदलने की जरुरत नहीं पड़ेगी

इस मैसेज को हर एक भारतीय एवं हर एक घुटने के दर्द से पीड़ित व्यक्ति तक पहुँचाए ।
 


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

नीम आपके सिस्टम को साफ रखने के साथ उसको खोलने में भी खास तौर से लाभकारी होता है। इन सबसे बढ़ कर यह शरीर में गर्मी पैदा करता है। शरीर में इस तरह की गर्मी हमारे अंदर साधना के द्वारा तीव्र और प्रचंड ऊर्जा पैदा करने में बहुत मदद करती है।रोजाना नीम की चार-पांच कोमल पत्तियां चबाकर खाने से खून साफ होता है और कई प्रकार की संक्रामक बीमारियों से बचाव होता है।
1. चेचक का इंफेक्शन होने पर नीम के पत्तों को पानी में उबालकर नहाने से लाभ होता है।
2. फोड़े-फुंसियों पर भी नीम के पत्तों का लेप लगाने से फायदा होता है।
3. नीम के पत्तों को पीसकर इसकी गोली सुबह-शाम शहद के साथ लेने से खून साफ होता है।
4. डायबिटीज के रोगी को नीम के पत्तों का रस पीने से लाभ होता है।
5. पेट में कीड़े होने पर नीम की नई व ताजा पत्तियों के रस में शहद मिलाकर चाटें।
6. दमे के मरीज को नीम के तेल की 20-25 बूंदे पान में डालकर खाने से राहत मिलती है।
7. नीम की सूखी पत्तियों का धुआं करने से घर में मौजूद बैक्टीरिया नष्ट होते हैं।
8. शरीर पर होने वाली खुजली, खाज और सोरायसिस में राहत के लिए नीम के पत्तों को उबालकर उससे नहाएं।

नीम एक आयुर्वेदिक दवाई है, जिसके कई सारे स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक फायदे हैं। नीम, हमारे शरीर, त्‍वचा और बालों के लिये बहुत फायदेमंद है। इसका कडुआ स्‍वाद बहुत से लोगो को खराब लगता है इसलिये वे इसे चाह कर भी नहीं खा पाते। इसी कारण नीम का रस पीना ज्‍यादा आसान होता है। आइये जानते हैं इस गुणकारी नीम के रस का फायदा।


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

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*आतों की सफाई*

वर्ष भर मे इस विधि सेदो ही बार आंतों की सफाई 6..महीने के अन्तराल पर ,बार बार नहीं

70 वर्ष की समयावधि में हमारी आंतें 100ष टन खाद्य सामग्री व 40000 हजार लीटर तरल का प्रोसेसिंग करने की प्रक्रिया करती है

इसका मतलब यह है कि हमारे बाडी में 6 किलो 800 ग्राम ( 15 पाउंड ) मल और जहरीला कचरा जमा है जो हमारे खून को दूषित करने के साथ शरीर को अपूरणीय क्षति करता है

आंतें साफ नहीं होने से लगातार कब्ज – पाचन की परेशानी – मधुमेह – अत्यधिक या अपर्याप्त वजन – गुर्दे और जिगर की बीमारी – श्रवण और दृष्टि समस्याओं – त्वचा – बाल और नाखून की समस्याएं व अन्य रोगों के साथ ही गठिया से ले कैंसर जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं

इसलिए आप आंतों की सफाई कर शरीर में जमा कफ – मल निकाल – आंतों से बैक्टीरिया (परजीवियों ) को नष्ट कर बहुत सी स्वास्थ्य संबंधी परेशानीयों को रोक कर रोगों से निजात पा सकते हैं !

एनीमा से आंत के मात्र 40 – 50 सेंटीमीटर के एक छोटे से हिस्से को साफ कर सकते हैं – यह महंगा – असुविधाजनक और आंतों व स्वास्थ्य के लिये नुकसानदायक भी है !

एक ऐसे प्राकृतिक तरीके से आंतों की सफाई व शरीर में जमा मल – कफ व बैक्टीरिया का निष्कासन किया जायेगा तो शरीर के अंग तेजी से वजन सामान्य बनाने – वसा जलाने व पाचन क्रिया सही करने में सहयोग प्रदान करेंगे – इससे शरीर के पाचन प्रणाली पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है !

इसके लिये हमें चाहीये रोजाना मात्र 3 सप्ताह के लिये 1 से 3 बडी चम्मच ” अलसी का आटा और गाय मां के दूध से निर्मित दही 100 से 150 ग्राम ”

यह दो घटकों का Colon सफाई मिश्रण आपके कमर पर व शरीर में जमा अपशिष्ट निकाल – शरीर का प्राकृतिक तरीके से शुद्धिकरण करेगा !

मात्र 3 सप्ताह के लिये नाशते की बजाय इस मिश्रण का ऐसे सेवन करें

पहला सप्ताह :- 1 टेबल स्पून अलसी का आटा व 100 एम.एल. दही !

दूसरा सप्ताह :- 2 टेबल स्पून अलसी का आटा व 100 एम.एल. दही !

तीसरा सप्ताह :- 3 टेबल स्पून अलसी का आटा व 150 एम.एल. दही !   और देखें …..–  कैसे दुम दबा के भाग गया आपके शरीर से मोटापा ! 


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

गिलोय एक दिव्य औषधि है, जो एक बेल के रूप में बढ़ती है और इसकी पत्तियां पान के पत्ते की तरह होती हैं। जहां गिलोय की पत्तियों में कैल्शियम, प्रोटीन, फाॅस्फोरस पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। वहीं इसके तनों में स्टार्च की भी अच्छी खासी मात्रा होती है। गिलोय से जुड़ी एक कहानी काफी प्रचलित है। कहा जाता है कि जब समुद्र मंथन हुआ तो उससे अनेक चीजेें निकल कर सामने आई थी। उसमें से अमृत बेहद मूल्यवान था, जो देवताओं को प्राप्त हुआ। परंतु दावन छल से अमृत प्राप्त करके भागने लगे। कहते हैं, भागते हुए अमृत की बूंदे जहां जहां धरती पर गिरीं। वहां वहां गिलोय पौधे के रूप में प्रकट हो गया इसलिए इसे अमृत वल्ली भी कहा जाता है। गिलोय की खास बात ये है कि अगर इसकी टहनी को ज़मीन में लगा दिया जाए, तो वो खुद ब खुद पौधे का रूप धारण कर लेता है। इसके अलावा अगर आप गिलोय की टहनी को ज़मीन पर रख दो, तब भी उसकी जड़े अपनी ज़मीन अपने आप खोज लेती हैं।
गिलोय का इस्तेमाल कई तरह की बीमारियों में किया जाता है। ये एक तरह का बेहतरीन पावर ड्रिंक भी है। जो रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का काम करता है। इसकी वजह से कई तरह की बीमारियों से सुरक्षा मिलती है.
गिलोय के इन फायदों को जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे
1. गिलोय खून की कमी दूर करने में सहायक है। इसे घी और शहद के साथ मिलाकर लेने से खून की कमी दूर होती है.
2. पीलिया के मरीजों के लिए गिलोय लेना बहुत ही फायदेमंद है. कुछ लोग इसे चूर्ण के रूप में लेते हैं तो कुछ इसकी पत्तियों को पानी में उबालकर पीते हैं। इसके अलावा गिलोय की पत्तियों को पीसकर शहद के साथ मिलाकर भी ले सकते हैं। इससे पीलिया में फायदा होता है और मरीज जल्दी स्वस्थ हो जाता है।
3. कुछ लोगों को पैरों में बहुत जलन होती है और कुछ ऐसे भी होते हैं जिनकी हथेलियां हमेशा गर्म बनी रहती हैं. ऐसे लोगों के लिए गिलोय बहुत फायदेमंद है। गिलोय की पत्तियों को पीसकर उसका पेस्ट तैयार कर लें और उसे सुबह-शाम पैरों पर और हथेलियों पर लगाएं। अगर आप चाहें तो गिलोय की पत्तयिों का काढ़ा भी पी सकते हैं, जो काफी फायदेमंद है।
4. कान में दर्द है तो गिलोय की पत्तियों का रस निकाल लें, जिसे हल्का गुनगुना कर लें और फिर एक-दो बूंद कान में डालें। इससे कान का दर्द ठीक हो जाएगा।
5. पेट से जुड़ी कई बीमारियों में गिलोय का इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है। इससे कब्ज और गैस की समस्या नहीं होती है और पाचन क्रिया भी दुरुस्त रहती है।
6. गिलोय का इस्तेमाल बुखार दूर करने के लिए भी किया जाता है। अगर बहुत दिनों से बुखार है और तापमान कम नहीं हो रहा है तो गिलोय की पत्तयिों का काढ़ा पीना फायदेमंद रहेगा। मगर डाॅक्टर सेे परामर्श कर लेना जरूरी है।
7 अगर आपका पेट खराब है तो गिलोय का रस अवश्य लें, जिससे राहत मिलेगी।
8 झुर्रियों यां फिर झांइयों की समस्या को दूर करने के लिए गिलोय को पीसकर उसका पेस्ट बना लें और चेहरे पर लगाकर कुछ देर सूखने के लिए छोड़ दें।  


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)


15 दिन लगातार करीपत्ता खा लिया तो उससे हमारे शरीर में जो होगा उसे जानकर आप दंग रह जायेंगे
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कढ़ी पत्ता में कई प्रकार के औषधीय गुण होते हैं, जो कि स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं। इसे मीठी नीम के नाम से भी जाना जाता है। इसका प्रयोग ज्यादातर दक्षिणी भारत में किया जाता था लेकिन आजकल यह हर रसोई घर में मसाले के रूप में प्रयोग किया जाता है। मीठी नीम का प्रयोग भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है।

कढ़ी पत्ता हमारे खाने के स्वाद को तो बढ़ाता ही है, साथ ही यह हमारे शरीर को कई प्रकार की बीमारियों से भी दूर रखने में मदद करता है। मीठी नीम में लोहा, कैल्शियम, फास्फोरस और कई प्रकार के विटामिन्स होते हैं जो कि शरीर को एनीमिया, हाई बीपी, मधुमेह आदि रोगों से बचाने में मदद करते हैं। इसके अलावा करी पत्ते में विटामिन B2, B6 और B9 की भरपूर मात्रा होती है जिससे हमारे बाल काले, घने और मजबूत बनते हैं।

कड़ी पत्ता बालों के लिए



कड़ी पत्ता बालों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। कड़ी पत्ते का प्रयोग हमारे बालों की जड़ो को मजबूत बनाने, काला बनाने, झड़ने से रोकने और बालों को रूसी से बचाने में भी किया जाता है। करी पत्तों से हेयर टॉनिक बनाने के लिए करी पत्तों को इतना उबाल लें कि वह पानी में घुल जाएँ व पानी का रंग हरा हो जाएँ। इस टॉनिक को 15-20 मिनट तक अपने सिर पर लगाएँ। हफ्ते भर में 2 बार इससे बालों की मसाज करने से बालो को काफी फायदा पहुचता है। इसके अलावा, आधा कप करी पत्तों को दही के साथ पीस लें व उस मिश्रण को अपने बालों पर लगाए, व कुछ मिनट के बाद धो लें।



करी पत्ते के लाभ वजन घटाने में

ऊपर आपने करी पत्ते के कई स्वास्थ्य लाभों के बारे में जाना लेकिन आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि यह हमारे वजन को भी कम करने में सहायक होता है। करी पत्ते में मौजूद फाइबर की मात्रा, हमारे शरीर में जमा अतिरिक्त वसा और विषाक्त पदार्थो को बाहर निकालने में मदद करती है। हर दिन करी पत्ता खाने से वज़न घटता है और कोलेस्ट्रोल कम होता है। इसलिए अगली बार आप प्लेट में करी पत्ता न छोड़कर चबाकर खायें और आसानी से वज़न घटायें।

कढ़ी पत्ते के फायदे बचाएं दिल की बीमारियों से

कड़ी पत्ते में हमारे शरीर के ब्लड कोलेस्ट्रॉल को कम करने का गुण होता है। जिससे हम दिल की बीमारियों से दूर रह सकते हैं। शायद आप जानते हैं कि शरीर के ऑक्सीडेटिव कोलेस्ट्रॉल, खराब कोलेस्ट्रॉल को बनाने में मदद करते हैं जिससे हार्ट अटैक का ख़तरा बढ़ जाता है। कड़ी पत्ते में एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो कि कोलेस्ट्रॉल का ऑक्सीकरण होने से रोक देते हैं जिससे शरीर में खराब कोलेस्टरॉल की मात्रा बढ़ नहीं पाती है। इस तरह से यह हमें दिल से जुड़ी परेशानियों से दूर रखने में मदद करता है।

करी पत्ते के फायदे एनीमिया से बचाएं

एनीमिया, शरीर में सिर्फ खून की कमी के कारण नहीं होता है। बल्कि जब शरीर में आयरन को सोखने और इसका सही तरह से इस्तेमाल करने की शक्ति कम हो जाती है तब भी हमें एनीमिया होने का ख़तरा बढ़ जाता है। इस रोग से निजाद पाने के लिए करी पत्ता बहुत ही फायदेमंद होता है। इसमें आयरन और फोलिक एसिड की बहुत अधिक मात्रा पाई जाती है। हमारे शरीर में फोलिक एसिड, आयरन को सोखने में मदद करता है और आयरन खून की कमी को पूरा करता है। इसलिए यदि आप एनीमिया से पीड़ित है तो एक खजूर और 3 करी पत्तों को रोजाना सुबह खाली पेट चबाकर खाएँ। इससे शरीर का आयरन स्तर बढ़ता है और एनीमिया होने का ख़तरा कम होता है।

कड़ी पत्ते के लाभ मधुमेह के लिए

कड़ी पत्ते में कई प्रकार के एंटी-डायबिटीक एजेंट होते हैं जो कि शरीर में इंसुलिन की गतिविधि को प्रभावित कर ब्लड से शुगर के स्तर को कम करने में मदद करते हैं। इसके अलावा कड़ी पत्ते में मौजूद फाइबर की मात्रा भी शुगर से ग्रस्त रोगियों के लिए फायदेमंद होती है। इसलिए रोजाना सुबह खाली पेट कड़ी पत्ते का सेवन करना शुरू करें और पाएँ डायबिटीज से निजाद।


  आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Tips)

🇫 🇴 🇽 🇳 🇺 🇹 *( मखाना )*

*आप मखाने के चार दानों का सेवन करके शुगर से हमेशा के लिए निजात पा सकते है। इसके सेवन से शरीर में इंसुलिन बनने लगता है और शुगर की मात्रा कम हो जाती है। फिर धीरे-धीरे शुगर रोग भी खत्म हो जाता है।*

*सेवन की विधि*
अगर आप जल्द से जल्द मधुमेह को खत्म करना चाहते है तो सुबह खाली पेट चार दाने मखाने खाएं। इनका सेवन कुछ दिनों तक लगातार करें। इससे मधुमेह का रोग तेजी से खत्म होगा।

*दिल के लिए फायदेमंद*
मखाना केवल शुगर के मरीज के लिए ही नहीं बल्कि हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों में भी फायदेमंद है। इनके सेवन से दिल स्वस्थ रहता है और पाचन क्रिया भी दुरूस्त रहती है।

*तनाव कम*
मखाने के सेवन से तनाव दूर होता है और अनिद्रा की समस्या भी दूर रहती है। रात को सोने से पहले दूध के साथ मखानों का सेवन करें।

*जोड़ों का दर्द दूर*
मखाने में कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है। इनका सेवन जोड़ों के दर्द, गठिया जैसे मरीजों के लिए काफी फायदेमंद साबित होता है।

*पाचन में सुधार*
मखाना एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर होता है जो सभी आयु वर्ग के लोगों को आसानी से पच जाता है। इसके अलावा फूल मखाने में एस्‍ट्रीजन गुण भी होते हैं जिससे यह दस्त से राहत देता है और भूख में सुधार करने के लिए मददगार है।

*किडनी को मजबूत*
फूल मखाने में मीठा बहुत कम होने के कारण यह स्प्लीन को डिटॉक्‍सीफाइ करता है। किडनी को मजबूत बनाने और ब्‍लड को बेहतर रखने के लिए खानों का नियमित सेवन करें।

_*तालाब, झील, दलदली क्षेत्र के शांत पानी में उगने वाला मखाना पोषक तत्वों से भरपुर एक जलीय उत्पाद है।*_

🇫 🇴 🇽 🇳 🇺 🇹 *( मखाना )* 


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पपीते के पत्तो की चाय किसी भी स्टेज के कैंसर को सिर्फ 60 से 90 दिनों में कर देगी जड़ से खत्म.
पपीते के पत्ते 3rd और 4th स्टेज के कैंसर को सिर्फ 35 से 90 दिन में सही कर सकते हैं। अभी तक हम लोगों ने सिर्फ पपीते के पत्तों को बहुत ही सीमित तरीके से उपयोग किया होगा, बहरहाल प्लेटलेट्स के कम हो जाने पर या त्वचा सम्बन्धी या कोई और छोटा मोटा प्रयोग. मगर आज जो हम आपको बताने जा रहें हैं, ये वाकई आपको चौंका देगा, आप सिर्फ 5 हफ्तों में कैंसर जैसी भयंकर रोग को जड़ से ख़त्म कर सकते हैं।
ये प्रकृति की शक्ति है और बलबीर सिंह शेखावत जी की स्टडी है जो वर्तमान में as a Govt. Pharmacist अपनी सेवाएँ सीकर जिले में दे रहें हैं। आपके लिए नित नवीन जानकारी कई प्रकार के वैज्ञानिक शोधों से पता लगा है कि पपीता के सभी भागों जैसे फल, तना, बीज, पत्तिया, जड़ सभी के अन्दर कैंसर की कोशिका को नष्ट करने और उसके वृद्धि को रोकने की क्षमता पाई जाती है। विशेषकर पपीता की पत्तियों के अन्दर कैंसर की कोशिका को नष्ट करने और उसकी वृद्धि को रोकने का गुण अत्याधिक पाया जाता है।
तो आइये जानते हैं उन्ही से। University of florida ( 2010) और International doctors and researchers from US and japan में हुए शोधो से पता चला है की पपीता के पत्तो में कैंसर कोशिका को नष्ट करने की क्षमता पाई जाती है। Nam Dang MD, Phd जो कि एक शोधकर्ता है, के अनुसार पपीता की पत्तियां डायरेक्ट कैंसर को खत्म कर सकती है, उनके अनुसार पपीता कि पत्तिया लगभग 10 प्रकार के कैंसर को खत्म कर सकती है जिनमे मुख्य है।
breast cancer, lung cancer, liver cancer, pancreatic cancer, cervix cancer, इसमें जितनी ज्यादा मात्रा पपीता के पत्तियों की बढ़ाई गयी है, उतना ही अच्छा परिणाम मिला है, अगर पपीता की पत्तिया कैंसर को खत्म नहीं कर सकती है लेकिन कैंसर की प्रोग्रेस को जरुर रोक देती है।। तो आइये जाने पपीता की पत्तिया कैंसर को कैसे खत्म करती है?
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1. पपीता कैंसर रोधी अणु Th1 cytokines की उत्पादन को ब़ढाता है जो की इम्यून system को शक्ति प्रदान करता है जिससे कैंसर कोशिका को खत्म किया जाता है।
2. पपीता की पत्तियों में papain नमक एक प्रोटीन को तोड़ने ( proteolytic) वाला एंजाइम पाया जाता है जो कैंसर कोशिका पर मौजूद प्रोटीन के आवरण को तोड़ देता है जिससे कैंसर कोशिका शरीर में बचा रहना मुश्किल हो जाता है। Papain blood में जाकर macrophages को उतेजित करता है जो immune system को उतेजित करके कैंसर कोशिका को नष्ट करना शुरू करती है, chemotheraphy/ radiotheraphy और पपीता की पत्तियों के द्वारा ट्रीटमेंट में ये फर्क है कि chemotheraphy में immune system को दबाया जाता है जबकि पपीता immune system को उतेजित करता है, chemotheraphy और radiotheraphy में नार्मल कोशिका भी प्रभावित होती है पपीता सोर्फ़ कैंसर कोशिका को नष्ट करता है। सबसे बड़ी बात के कैंसर के इलाज में पपीता का कोई side effect भी नहीं है।।
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कैंसर में पपीते के सेवन की विधि
कैंसर में सबसे बढ़िया है पपीते की चाय। दिन में 3 से 4 बार पपीते की चाय बनायें, ये आपके लिए बहुत फायदेमंद होने वाली है। अब आइये जाने लेते हैं पपीते की चाय बनाने की विधि।
1. 5 से 7 पपीता के पत्तो को पहले धूप में अच्छी तरह सुखा ले फिर उसको छोटे छोटे टुकड़ों में तोड़ लो आप 500 ml पानी में कुछ पपीता के सूखे हुए पत्ते डाल कर अच्छी तरह उबालें।
इतना उबाले के ये आधा रह जाए। इसको आप 125 ml करके दिन में दो बार पिए। और अगर ज्यादा बनाया है तो इसको आप दिन में 3 से 4 बार पियें। बाकी बचे हुए लिक्विड को फ्रीज में स्टोर का दे जरुरत पड़ने पर इस्तेमाल कर ले। और ध्यान रहे के इसको दोबारा गर्म मत करें।
2. पपीते के 7 ताज़े पत्ते लें इनको अच्छे से हाथ से मसल लें। अभी इसको 1 Liter पानी में डालकर उबालें, जब यह 250 ml। रह जाए तो इसको छान कर 125 ml. करके दो बार में अर्थात सुबह और शाम को पी लें। यही प्रयोग आप दिन में 3 से 4 बार भी कर सकते हैं।
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पपीते के पत्तों का जितना अधिक प्रयोग आप करेंगे उतना ही जल्दी आपको असर मिलेगा। और ये चाय पीने के आधे से एक घंटे तक आपको कुछ भी खाना पीना नहीं है।
कब तक करें ये प्रयोग
वैसे तो ये प्रयोग आपको 5 हफ़्तों में अपना रिजल्ट दिखा देगा, फिर भी हम आपको इसे 3 महीने तक इस्तेमाल करने का निर्देश देंगे। और ये जिन लोगों का अनुभूत किया है उन लोगों ने उन लोगों को भी सही किया है, जिनकी कैंसर में तीसरी और चौथी स्टेज थी।
 


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