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गौ दान सहयोग राशि

हिंदू मन्यताओं में गौ दान का क्या महत्व है?
 
दान के बारे में गौ दान के दो अर्थ हैं पहला गाय दान करना और दूसरा गौ यानी केशों का दान करना। दोनों ही हिंदू धर्म में मान्य हैं। गो यानी गाय को हिंदुओं का सबसे प्रिय पशु माना गया है। यज्ञ में उपयोग की जाने वाली चीजें जैसे घी, दूध, दही आदि इसी से प्राप्त होते हैं। यही कारण है कि गाय में 33 करोड़ देवी- देवताओं का वास माना गया है।ऋगवेद में गायों के बड़े समूहों के दान का उल्लेख मिलता है। यज्ञ के बाद या किसी विशेष अवसर पर दान में पुरोहितो को गाय भेंट किए जाने की भी धर्म ग्रंथों में कथाएं मिलती हैं।वैदिककालीन भारतीयों में संपन्नता गौ धन से भी आंकी जाती थी। जब राजा अपने राज्य को बढ़ाने के लिए दूसरे राजाओं पर आक्रमण करते तो लूट में गौ धन भी मुख्य रूप से शामिल होता था। महाभारत में कौरवों द्वारा राजा विराट पर आक्रमण में गौ धन ही प्रमुख रूप से हथियाया गया था। इन सभी कारणों से गौ का दान महत्वपूर्ण था जो आज भी कायम है। गौ दान धार्मिक कामों के आलावा विवाह व श्राद्ध आदि में भी किए जाने का विधान है। केशों के अर्थ में गौ दान एक संस्कार है, जिसे शतपथ ब्राह्मण में क्षौरकर्म कहा गया है। किसी बालक के युवा होने पर और विवाह के अवसर पर यह संस्कार किए जाने का विधान है।
 
गौ दान को महा दान माना जाता है।
 
धर्म ग्रंथों एवं पुराणों में गौ दान को महादान बताया गया है। गौ दान करने वाले को मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही साथ ऐसे व्यक्ति पर सभी देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है। उसके घर में हमेशा सुख-समृद्धि विराजमान रहती है।
 
गौ दान को महा दान माना जाता है।
 
धर्म ग्रंथों एवं पुराणों में गौ दान को महादान बताया गया है। गौ दान करने वाले को मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही साथ ऐसे व्यक्ति पर सभी देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है। उसके घर में हमेशा सुख-समृद्धि विराजमान रहती है।
 
 
गौ दान का भारत में प्राचीन समय से ही अत्यधिक महत्‍व रहा है। गौ दान को शास्त्रों में महादान का दर्जा दिया गया है। प्राचीन काल से ही राजाओं व अन्‍य व्‍यक्तियों के द्वारा ब्राह्मणों आदि को गौ दान किया जाता रहा है। पुराणों के अनुसार ऐसी मान्‍यता है कि पुण्य की प्राप्ति के लिए जीवन में कम से कम एक बार गौ दान  करना अत्यधिक आवश्यक है। भारतीय संस्‍कृति में गाय को माता का दर्जा दिया जाता है, क्‍योंकि यह हमारी मॉ की तरह पौष्टिक दूध के माध्‍यम से हमारा पोषण करती है और बदले में हमसे कुछ नहीं माँगती। गाय को समृद्धि, खुशहाली व उन्‍नति का प्रतीक माना जाता है।
 
ऐसा माना जाता है कि गौ दान से अनन्‍त पुण्‍य का अर्जन होता है और इससे बड़ा दान संसार में कोई भी नहीं है। इसलिए गौ दान को महादान की संज्ञा दी जाती है। यह व्‍यक्ति को पवित्र बनाता है व परम शाश्‍वत मोक्ष को पाने में सहायक होता है। यह व्‍यक्ति को अपनी इन्द्रियों को जीत कर वश में करने का उपाय माना जाता है। क्‍योंकि इन्द्रियों को वश में करके ही संसार की मोह-माया से विरक्त होकर ईश्‍वर को पाया जा सकता है। गौ दान का अर्थ है, स्वयं को ब्राह्मण या किसी योग्‍य पुरूष को समर्पित कर देना। जिनकी सहायता से हम इस नश्‍वर संसार से पार पाने का प्रयास कर सकते है।
 
गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास माना जाता है,  इसके कण-कण में भगवान बसते है। इसलिए जो भी गौ दान करता है, उस व्‍यक्ति को सृष्टि के सभी देवी-देवता प्रणाम करते है एवं उसकी हर मनोकामना को भी पूरा करते हैं।
 
गौ दान करने से व्यक्ति की हर प्रकार की शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक समस्या का समाधान संभव है। गौ दान करने से जीवन बिना किसी बाधा के हर्ष व उल्‍लास के साथ व्‍यतीत होता है। अन्‍त में यह हमें शाश्‍वत मुक्ति का अधिकारी भी बनाता है।
 
वैज्ञानिक तौर पर भी यह सिद्ध हो चुका है कि गाय का दूध मॉ के दूध के समतुल्‍य होता है। गाय से हमें दूध के अलावा कई ऐसी चीजें प्राप्‍त होती है, जो हमें समृद्धि प्रदान करती है। गाय के दूध का घी बहुत ही पवित्र व उपयोगी होता है, जो कई तरह की बीमारियों के उपचार में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है। गोमूत्र भी हमारे शरीर के लिए किसी अमृत से कम नहीं है। गाय का गोबर खेतों के लिए एक प्राकृतिक खाद का काम करता है व वातावरण को स्&...Read More

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गौ दान सहयोग राशि

हिंदू मन्यताओं में गौ दान का क्या महत्व है?
 
दान के बारे में गौ दान के दो अर्थ हैं पहला गाय दान करना और दूसरा गौ यानी केशों का दान करना। दोनों ही हिंदू धर्म में मान्य हैं। गो यानी गाय को हिंदुओं का सबसे प्रिय पशु माना गया है। यज्ञ में उपयोग की जाने वाली चीजें जैसे घी, दूध, दही आदि इसी से प्राप्त होते हैं। यही कारण है कि गाय में 33 करोड़ देवी- देवताओं का वास माना गया है।ऋगवेद में गायों के बड़े समूहों के दान का उल्लेख मिलता है। यज्ञ के बाद या किसी विशेष अवसर पर दान में पुरोहितो को गाय भेंट किए जाने की भी धर्म ग्रंथों में कथाएं मिलती हैं।वैदिककालीन भारतीयों में संपन्नता गौ धन से भी आंकी जाती थी। जब राजा अपने राज्य को बढ़ाने के लिए दूसरे राजाओं पर आक्रमण करते तो लूट में गौ धन भी मुख्य रूप से शामिल होता था। महाभारत में कौरवों द्वारा राजा विराट पर आक्रमण में गौ धन ही प्रमुख रूप से हथियाया गया था। इन सभी कारणों से गौ का दान महत्वपूर्ण था जो आज भी कायम है। गौ दान धार्मिक कामों के आलावा विवाह व श्राद्ध आदि में भी किए जाने का विधान है। केशों के अर्थ में गौ दान एक संस्कार है, जिसे शतपथ ब्राह्मण में क्षौरकर्म कहा गया है। किसी बालक के युवा होने पर और विवाह के अवसर पर यह संस्कार किए जाने का विधान है।
 
गौ दान को महा दान माना जाता है।
 
धर्म ग्रंथों एवं पुराणों में गौ दान को महादान बताया गया है। गौ दान करने वाले को मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही साथ ऐसे व्यक्ति पर सभी देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है। उसके घर में हमेशा सुख-समृद्धि विराजमान रहती है।
 
गौ दान को महा दान माना जाता है।
 
धर्म ग्रंथों एवं पुराणों में गौ दान को महादान बताया गया है। गौ दान करने वाले को मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही साथ ऐसे व्यक्ति पर सभी देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है। उसके घर में हमेशा सुख-समृद्धि विराजमान रहती है।
 
 
गौ दान का भारत में प्राचीन समय से ही अत्यधिक महत्‍व रहा है। गौ दान को शास्त्रों में महादान का दर्जा दिया गया है। प्राचीन काल से ही राजाओं व अन्‍य व्‍यक्तियों के द्वारा ब्राह्मणों आदि को गौ दान किया जाता रहा है। पुराणों के अनुसार ऐसी मान्‍यता है कि पुण्य की प्राप्ति के लिए जीवन में कम से कम एक बार गौ दान  करना अत्यधिक आवश्यक है। भारतीय संस्‍कृति में गाय को माता का दर्जा दिया जाता है, क्‍योंकि यह हमारी मॉ की तरह पौष्टिक दूध के माध्‍यम से हमारा पोषण करती है और बदले में हमसे कुछ नहीं माँगती। गाय को समृद्धि, खुशहाली व उन्‍नति का प्रतीक माना जाता है।
 
ऐसा माना जाता है कि गौ दान से अनन्‍त पुण्‍य का अर्जन होता है और इससे बड़ा दान संसार में कोई भी नहीं है। इसलिए गौ दान को महादान की संज्ञा दी जाती है। यह व्‍यक्ति को पवित्र बनाता है व परम शाश्‍वत मोक्ष को पाने में सहायक होता है। यह व्‍यक्ति को अपनी इन्द्रियों को जीत कर वश में करने का उपाय माना जाता है। क्‍योंकि इन्द्रियों को वश में करके ही संसार की मोह-माया से विरक्त होकर ईश्‍वर को पाया जा सकता है। गौ दान का अर्थ है, स्वयं को ब्राह्मण या किसी योग्‍य पुरूष को समर्पित कर देना। जिनकी सहायता से हम इस नश्‍वर संसार से पार पाने का प्रयास कर सकते है।
 
गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास माना जाता है,  इसके कण-कण में भगवान बसते है। इसलिए जो भी गौ दान करता है, उस व्‍यक्ति को सृष्टि के सभी देवी-देवता प्रणाम करते है एवं उसकी हर मनोकामना को भी पूरा करते हैं।
 
गौ दान करने से व्यक्ति की हर प्रकार की शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक समस्या का समाधान संभव है। गौ दान करने से जीवन बिना किसी बाधा के हर्ष व उल्‍लास के साथ व्‍यतीत होता है। अन्‍त में यह हमें शाश्‍वत मुक्ति का अधिकारी भी बनाता है।
 
वैज्ञानिक तौर पर भी यह सिद्ध हो चुका है कि गाय का दूध मॉ के दूध के समतुल्‍य होता है। गाय से हमें दूध के अलावा कई ऐसी चीजें प्राप्‍त होती है, जो हमें समृद्धि प्रदान करती है। गाय के दूध का घी बहुत ही पवित्र व उपयोगी होता है, जो कई तरह की बीमारियों के उपचार में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है। गोमूत्र भी हमारे शरीर के लिए किसी अमृत से कम नहीं है। गाय का गोबर खेतों के लिए एक प्राकृतिक खाद का काम करता है व वातावरण को स्‍वच्‍छ व निर्मल बनाता है।
 
इन्‍हीं सब विशेषताओं के कारण गाय को जगत माता भी कहा जाता है और गौ दान को म‍हादान या सबसे बड़ा दान माना जाता है।
 
श्राद्ध में गाय दान से महाकल्याण
 
 
हरदोई। पितृ पक्ष के सोलह दिनों में श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान आदि कर्म कर पितरों को प्रसन्न करने का प्रावधान है। धर्म शास्त्रों के अनुसार पितृ पक्ष में दान का भी बहुत महत्व है। मान्यता है कि दान से पितरों की आत्मा को संतुष्टि मिलती है और पितृदोष भी खत्म हो जाते हैं। शास्त्रों के जानकारों का कहना है कि विधि विधान से दान करने से सुख-समृद्धि के साथ-साथ मनोवांछित फल भी प्राप्त होते हैं। पितृ पक्ष में दान की वस्तुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि धार्मिक दृष्टि से गाय का दान सभी दानों में श्रेष्ठ माना जाता है, पर श्राद्ध पक्ष में गाय के दान का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस पक्ष में दान हर सुख और ऐश्वर्य देने वाला माना गया है। इसी तरह श्राद्ध पक्ष में तिल के दान का भी महत्व है। इसी तरह श्राद्ध में दान की दृष्टि से काले तिलों का दान संकट, विपदाओं से रक्षा करता है, ऐसा बताया गया है। शास्त्री उमाकांत अवस्थी का कहना है कि गाय के घी का दान एक पात्र बर्तन में रखकर दान करना परिवार के लिए शुभ और मंगलकारी माना जाता है। इसके अलावा यदि आप आर्थिक रूप से संपन्न हैं, तो श्राद्ध पक्ष में किसी कमजोर या गरीब व्यक्ति को भूमि का दान आप को संपत्ति व संतति लाभ देता है। शास्त्री का कहना है कि यदि ऐसा कर पाना भी संभव न हो तो भूमि के स्थान पर मिट्टी के कुछ ढेले दान करने के लिए थाली में रखकर किसी ब्राह्मण को दान कर सकते हैं। इसी तरह श्राद्ध में वस्त्रों के दान का भी बहुत महत्व है। इस दान में धोती और दुपट्टा सहित दो वस्त्रों को दान करने से घर में कभी भी दरिद्रता नहीं आती है। पितरों के आशीर्वाद और संतुष्टि के लिए चांदी का दान बहुत प्रभावशाली माना जाता है। अन्नदान में गेहूं और चावल का दान करना चाहिए। इनके अभाव में कोई दूसरा अनाज भी दान किया जा सकता है। यह दान संकल्प सहित करने पर मनोवांछित फल देता है। गुड़ का दान पूर्वजों के आशीर्वाद से कलह और दरिद्रता करा नाश का धन और सुख देने वाला माना गया है। इसी तरह सोने का दान कलह का नाश करता है, किंतु सोने का दान यदि संभव न हो तो सोने के दान से निर्मित यथाशक्ति धन दान भी कर सकते हैं। शास्त्री अवस्थी ने बताया कि पितरों की प्रसन्नता के लिए नमक का दान भी बहुत महत्व रखता है।

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